正在加载视频...

视频加载失败

❤️ अपने तो अपने होते हैं... ❤️ रिश्तों की भीड़ में सबसे खास होता है अपना परिवार। सहोदर भाई का साथ, बचपन की यादें और अपनापन — इसकी कोई बराबरी नहीं कर सकता। वक्त बदल सकता है, हालात बदल सकते हैं, लेकिन सच्चे रिश्तों की डोर हमेशा दिल से...

33,253 次观看 • 2 个月前 •via X (Twitter)

0 条评论

暂无评论

原始帖子的评论将显示在这里

相关视频

नेतृत्व का फर्क साफ है उनको आज भी जी-हजूरी करनी पड़ रही है, क्योंकि मानेसर की करोड़ों की किस्तें अभी लौटानी बाकी हैं। चित्तौड़गढ़ में लोग अपने आका की सलामी बजाने गए थे, जबकि राजधानी की सड़कों पर लोग अपने नेता के लिए खुद चलकर आए थे। यही तो असली अंतर है – भक्ति और नेतृत्व में, मजबूरी और अपनापन में। कुछ लोग राजनीति में सिफारिश की सीढ़ियों पर चढ़कर आए, तो कुछ सत्ता की गोद में पलकर बड़े हुए लेकिन डोटासरा संघर्ष की भट्टी से निकले हैं,कितने सांचों में ढलकर आए हैं,ख्वाबों की तरह पलकर, मेहनत और पसीने से सँवरकर आए हैं। उनकी राजनीति सिर्फ कुर्सी तक सीमित नहीं, बल्कि खेत-खलिहान, चौपाल और गलियों की धड़कनों से जुड़ी है। हर शब्द में युवा की ताकत है, हर बयान में किसान का दर्द है, और हर लड़ाई में आम आदमी की आवाज़ है। वे वो नेता हैं, जिनके लिए लोग मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनेपन और विश्वास में खड़े होते हैं। उनकी रैलियों में भीड़ नहीं ,बल्कि रिश्ते, भरोसा और अपनापन उमड़ता है। और यही फर्क है – एक चेहरा बने रहने में और सच में जन हितैषी बन जाने में ...। डोटासरा जी जनता की आवाज़ और संघर्ष की पहचान है। Govind Singh Dotasra Rahul Gandhi Rajasthan PCC Congress

Prem choudhary (कोलिया)

23,733 次观看 • 11 个月前

स्त्री ने कभी यह घोषणा ही नहीं की कि मेरे पास भी आत्मा है । वह चुपचाप पुरूष के पीछे चल पड़ती है । युधिष्ठिर जैसा अद्भुत आदमी द्रौपदी को जुए में दाँव पर लगा देता है ! फिर भी कोई यह नहीं कहता कि हम कभी युधिष्ठिर को धर्मराज नहीं कहेंगे । नहीं, कोई यह नहीं कहता ! बल्कि कोई कहेगा तो हम कहेंगे कि अधार्मिक आदमी है । नास्तिक आदमी है, इसक़ी बात मत सुनो ! स्‍त्री को जुए पर, दाँव पर लगाया जा सकता है, क्योंकि भारत में स्‍त्री सम्पदा है, सम्पत्ति है । हम हमेशा से कहते रहें हैं, स्‍त्री सम्पत्ति है और इसीलिए तो पति को स्वामी कहते हैं । स्वामी का मतलब आप समझते हैं, क्या होता है ? अगर हिन्दुस्तान की स्‍त्री में थोड़ी भी अक्ल होती तो एक—एक शब्द से उसे ‘#स्वामी’ निकाल बाहर कर देना चाहिए । कोई पुरुष कोई स्‍त्री का स्वामी नहीं हो सकता । स्वामी का क्या मतलब होता है ? स्‍त्री दस्तखत कर देती है अपनी चिट्ठी में ‘ #आपकी_दासी ’ और पति देव बहुत प्रसन्न हो कर पढ़ते हैं । बड़े आनन्दित होते हैं कि बड़ी प्रेम की बात लिखी है । लेकिन इसका पता है कि स्वामी और दास में कभी प्रेम नहीं हो सकता । प्रेम की सम्भावना समान तल पर हो सकती है । स्वामी और दास में क्या प्रेम हो सकता है ? इसलिए हिन्दुस्तान में प्रेम की सम्भावना ही समाप्त हो गयी । हिन्दुस्तान में स्‍त्री—पुरुष साथ रह रहे हैं और साथ रहने को प्रेम समझ रहे हैं ! वह प्रेम नहीं है । हिन्दुस्तान में प्रेम का सरासर धोखा है । साथ रहना भर प्रेम नहीं है । किसी तरह कलह कर के 24 घण्टे गुजार देना, प्रेम नहीं है । ज़िन्दगी गुजार देनी प्रेम नहीं है । प्रेम की पुलक और है । प्रेम की प्रार्थना और है । प्रेम की सुगन्ध और है । प्रेम का सँगीत और है । लेकिन वह कहीं भी नहीं ! असल में गुलाम और दास में, मालिक में और स्वामी में, कोई प्रेम नहीं हो सकता । लेकिन हमारे खयाल में नहीं है यह बात कि पूरब की स्‍त्री नेहु विशेष कर भारत की स्‍त्री ने अपनी आत्मा का अधिकार ही स्वीकार नहीं किया है । आत्मा की आवाज भी नहीं दी है । उसने हिम्मत भी नहीं जुटायी कि वह कह सके कि ‘#मैं_भी_हूँ !

तृप्त ...🖤

210,828 次观看 • 2 年前