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अभी देखा। विक्रांत गुप्ता की वीडियो देखने के बाद। कारण कुछ भी हो, वैभव सूर्यवंशी को इतनी जल्दी आपा नहीं खोना चाहिये। ये गली क्रिकेट नहीं है। रबाडा पर तब बैन लगा था जब उसने स्टीव स्मिथ को टच तक नहीं किया था। यहाँ वैभव जानबूझ कर धक्के दे...

91,703 次观看 • 3 个月前 •via X (Twitter)

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ऐसा SC/ST एक्ट का दुरूपयोग नहीं सुने होंगे मेडिकल छात्र वैभव जैन की सहपाठी नेहा ने ही उन पर SC/ST एक्ट लगा केवल बात न मानने पर.. असल में नेहा ने अपनी बहन को नकल कराने के लिए बोला था जो वैभव ने मना कर दिया था.. वैभव छः साल जेल में रहे उनका परिवार नष्ट हो गया वैभव की ज़िन्दगी बर्बाद हो गई... 6 साल बाद वैभव जेल से छूटे क्यों की उनपर SC/ST एक्ट फर्जी लगा था यहां SC/ST एक्ट लगाने वाली खुद उस समाज से नहीं थी जिन्हे यह पावर मिला है.. अब सुनो इतना सब कुछ होने के बाद भी नेहा पर कोई कार्यवाही नहीं हुई अब बताओ क्या इसका दोषी नेहा के साथ बीजेपी सरकार और पुलिस प्रशासन नहीं...? Ajeet Bharti Dr. Neha Das Thor Odinson Pulkit Tyagi

General Category not Modi ka Parivar

25,130 次观看 • 6 个月前

आरक्षण और यूजीसी को सभी पक्षों के यूट्यूबर्स भूल जाएं. आमदनी के लिए अब दूसरा मुद्दा तलाश लें. इसमें कुछ था नहीं, फिर भी काफी व्यूज और रेवेन्यू इससे निचोड़ा जा चुका है. इनका सारा रस निकल चुका है. अब ये सूख गया है. आरक्षण पर कोई विवाद ही नहीं है. ईडब्ल्यूएस आरक्षण संविधान के आर्टिकल 16 में आने के बाद से अब कोई सामाजिक वर्ग आरक्षण से बाहर नहीं है. एससी-एसटी पर कोई विवाद कभी था नहीं. वो मूल संविधान से निकला है. गरीब ओबीसी को 1993 में और गरीब सवर्ण को 2019 में दे दिया गया है. दोनों पर 8 लाख की लिमिट है. ओबीसी और जनरल दोनों में क्रीमी लेयर बाहर है. नरेंद्र मोदी ऐसे भी राष्ट्रीय आम सहमति के बिना कुछ करते नहीं है. ईडब्ल्यूएस भी कांग्रेस, सपा, तृणमूल, बसपा सबकी सहमति से संविधान में आया. तो अब यही स्थिति बनी रहेगी. 2019 में सब फ्रीज हो चुका है. उसके बाद दो लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. आरक्षण पर एकमात्र एक्शन महिलाओं को एमपी-एमएलए बनाने का है. मोदी जी वो जरूर करेंगे. अभी सहमति बना रहे हैं. यूजीसी पर भी यथास्थिति ही है. इस पर कभी कोई एक्ट नहीं बना. कोई कानून न प्रस्तावित था, न है. एक्ट बनने की बात अभी तक आई नहीं है. मंत्रालय में कोई ड्राफ्ट भी नहीं है. किसी ने सोचा भी नहीं है. अफसर लोग कुछ कुछ करते रहते हैं. उन पर कोर्ट और संसदीय समिति का दबाव होता है. लेकिन अफसर कानून थोड़ी न बनाएंगे. एक्ट तो तब बनेगा जब संसद में आएगा, बहस होगी, पास होगा. इसलिए जिनको हमेशा से प्रोटेक्शन मिल रहा था, उनको ही मिलता रहेगा. यूजीसी की न एक्ट बनाने की औकात है, न उसने इसकी कोशिश की है. यूजीसी खुद ही एक एक्ट से बनी संस्था है. यूजीसी भी ज्यादा दिन नहीं रहेगा. नया ढांचा बनने वाला है. जो संशय बना था, कोर्ट के आदेश से वह दूर हो चुका है. ये दोनों विवाद मुख्य रूप से दिल्ली में चलाया जा रहा था और इससे सिर्फ यूपी प्रभावित हो रहा था. पता नहीं क्यों? दक्षिण, पश्चिम और पूर्वी भारत में किसी को पता भी नहीं है ये मुद्दा. आरक्षण पर बिहार के माननीय मुख्यमंत्री को सुना जाए.

Dilip Mandal

105,470 次观看 • 24 天前

सुनिए खुद संतोष सिंह के मुंह से की उस दिन क्या हुआ था, गोल्डन दास का वीडियो ये देखे थे जिसमें वो ब्राह्मण, राजपूतों और भगवान को गाली दे रहा था जिसके वजह से गुस्सा होकर इन्होंने अंबेडकर के भी कुछ फैक्ट रख दिए बस उनकी गलती ये थी कि इन्होंने अपने वीडियो में थोड़ी गाली दे दिए थे, गोल्डन दास सालों से सवर्णों को गाली दे रहा है, भगवान का अपमान कर रहा है लेकिन उसपर कुछ करवाई नहीं हो रही है जिसके कारण लोगों का सब्र टूटता जा रहा है और इसी कारण लोग संतोष सिंह के तरह गाली देने पर मजबूर हो जाते हैं तो फिर ये अम्बेडकरवादी पागल हो जाते हैं, लेकिन अभी भी गोल्डन दास पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, सबसे पहले गोल्डन दास जैसे दिमागी नक्सलियों को NSA के तहत जेल में डालनी चाहिए तब जाकर ये सब कम होगा।

Aryan Sanatani

17,289 次观看 • 1 个月前

स्वतंत्र भारद्वाज बड़बोला है, उसने जो पॉडकास्ट में बोला ये बिल्कुल आपत्तिजनक था, ऐसा नहीं करना चाहिए….. लेकिन किसी के बड़बोलेपन के कारण क्या उस पर झूठ SC-ST एक्ट लगा दोगे? पास्को लगा दोगे? अगर ये वीडियो सही है तो बताइए यहाँ किस नाबालिग लड़की साथ ग़लत कृत्य जो रहा है जिसके कारण पास्को लगे? यहाँ कौन साल दलित उत्पीड़न हो रहा है जिसके कारण SC-ST एक्ट लगे? यहाँ तो स्वतंत्र भारद्वाज पर ही हमला हो रहा है गुंडे कैमरे के सामने हैं….. नेताओं के जूते चाटने की पत्रकारिता करने वाले भी इस वीडियो को देख लें और सच बोलने का साहस करें। नहीं तो उनकी पत्रकारी “बूट लिंकिंग” से अधिक कुछ नहीं……

Shubham Shukla

310,267 次观看 • 29 天前

राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

Ashok Gehlot

56,850 次观看 • 3 个月前

आज राज्यों के इलेक्शन कमीशंस की वेबसाइट बंद होने पर : आज मैंने सुना कि वेबसाइट भी बंद कर दी गई है अभी हम ने निकाला कोशिश करी निकालने की हमनें अभी उसका लिया है स्क्रीनशॉट, तो चार वेबसाइट जो है राजस्थान की महाराष्ट्र की बिहार की और एमपी की ,चार वेबसाइट खुल नहीं रही हैं हो सकता है इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद में खोल दें सुनकर के अलग बात है, अभी तो नहीं खुल रही है इसका मतलब है सुधार कर रहे होंगे वो लोग कुछ भी कर रहे होंगे पर मैं फिर कहना चाहूंगा कि राहुल गांधी का बोलने का गुस्से होने का एटम बम कहने का जो नजरिया है वो कोई व्यक्तिगत नहीं है देश हित के अंदर है उनका जीवन ऐसा है उनका व्यक्तित्व ऐसा है उनके कृतित्व ऐसे हैं मैंने बहुत करीब से पहचाना उनको, दुर्भावना या घृणा नफरत किसी के प्रति नहीं है चाहे वो नरेंद्र मोदी भी क्यों नहीं हों या कोई भी हो ये उनको पहचानने में उनको वक्त लगेगा वो अलग बात है। राहुल गांधी को पहचानने में इन लोगों को वक्त लगेगा वो व्यक्तित्व ऐसा है जो दिल में प्रेम प्यार मोहब्बत भाईचारा ले के चलता है पर देश हित के अंदर, देश हित में जो बोलते हों बात कड़वी लोगों को लगती है, आगाह करते हैं नोट बंदी को ले कर, कोविड को ले के और किसी मुद्दे को लेके तो लोगों को कड़वी लगती है पर सच्चाई सामने आती है वो बाद में। उसी प्रकार से ये जो इश्यू उठाया है LoP के रूप में ये उनका धर्म भी है कर्तव्य भी है कि पब्लिक में क्या मैसेज जा रहा है और खुल कर कहा पहले मैं बोल नहीं पा रहा था क्योंकि मुझको जो है खुद को श्योरिटी नहीं थी इसलिए मैं बोलता था पर उस में वो, वो मैं उस रूप में नहीं बोल पाता था जो मैं बोलना चाहता था अब जब मैंने छह महीने लगाए हैं और छह महीने में देख लिया है कि वास्तव में ये तो वोटों की चोरी हो रही है और ये तो लोकतंत्र को खतरा है तब जाकर के मैं ये प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा हूं एटम बम का नाम दे रहा हूं क्योंकि एटम बम पूरे मुल्क का लोकतंत्र खंडन हो जाएगा कमजोर हो गया तो पूरे मुल्क को नुकसान है इसलिए एटम बम के रूप में है ये मुल्क के लिए मुल्क के भविष्य के लिए।

Ashok Gehlot

99,773 次观看 • 1 年前