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अमेरिका की ट्रेड डील भारत के किसानों पर हमला है

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बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया आज कुछ ऐसा ही नरेंद्र मोदी और BJP के महामूर्ख कर रहे हैं यह लोग 18% ट्रेड डील पर जश्न मना रहे हैं - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सिर्फ़ विशुद्ध मूर्ख ख़ुश हो सकते हैं. यह डील इतनी एकतरफा और भारत के लिए ख़राब है कि इसे एक देशद्रोही ही सही ठहरा सकता है इसीलिए BJP वालों को जश्न मनाते देख कोई आश्चर्य नहीं हुआ - महामूर्खों और राष्ट्र-विरोधियो का झुंड जो ठहरे खैर इस ट्रेड डील के मुताबिक • अमेरिका भारतीय export पर 18% टैरिफ लगाएगा - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था • भारत अमेरिकी सामान पर zero मतलब शून्य टैरिफ लगाएगा - जबकि अभी तक भारत अमेरिका पर 30-100% तक टैरिफ लगाता था • भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर की ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पादों और कोयला ख़रीदेगा और अन्य चीज़ों की खरीद बढ़ाएगा • भारत रूस से सस्ता तेल नहीं खरीदेगा, इसके बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल ख़रीदेगा अब कुछ ज़रूरी सवाल उठते हैं👇 👉सीजफायर की तरह, हमारी ट्रेड डील की घोषणा ट्रम्प ने पहले क्यों की? 👉 हमारे ऊपर औसतन 3% से कम टैरिफ लगता था, अब 18% लगेगा. यह भारत की जीत कैसे है? 👉 जिन अमेरिकी चीज़ों पर भारत अभी तक 30-100% टैरिफ लगाता था उस पर ज़ीरो टैरिफ लगाना हमारी जीत कैसे है? 👉भारत ने अमेरिका के लिए अपना बाजार पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई लगती है - इससे घरेलू भारतीय उद्योग और व्यापारियों की सुरक्षा कैसे होगी? 👉ज़्यादा अमेरिकी सामान खरीदने से 'मेक इन इंडिया' और हमारी मैनुफैक्चरिंग का क्या होगा? 👉जिस तरह से इस डील के बाद अमेरिकी कृषि सचिव ने ख़ुशी जतायी है उससे बिल्कुल साफ़ है कि अमेरिकी किसानों के तो बल्ले बल्ले हैं लेकिन हमारे किसानों पर इस तरह का हमला आख़िर कैसे होने के लिए आप राज़ी हुए मोदी जी? 👉अमेरिका कौन होता है यह निर्णय करने वाला हम रूस से तेल ख़रीदेंगे या नहीं? 👉ईरान के चाबहार पोर्ट में हम रहेंगे या नहीं? 👉मोदी ने यह देशविरोधी डील इतना नतमस्तक हो कर क्यों की है?

Supriya Shrinate

70,991 просмотров • 6 месяцев назад

बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया... आज कुछ ऐसा ही नरेंद्र मोदी और BJP के लोग कर रहे हैं। यह लोग 18% ट्रेड डील पर जश्न मना रहे हैं - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सिर्फ़ विशुद्ध मूर्ख ख़ुश हो सकते हैं। यह डील इतनी एकतरफा और भारत के लिए ख़राब है कि इसे एक देशद्रोही ही सही ठहरा सकता है। इसीलिए BJP वालों को जश्न मनाते देख कोई आश्चर्य नहीं हुआ- वो राष्ट्र-विरोधियों का झुंड जो ठहरे। खैर इस ट्रेड डील के मुताबिक 👇 • अमेरिका भारतीय export पर 18% टैरिफ लगाएगा - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था • भारत अमेरिकी सामान पर zero मतलब शून्य टैरिफ लगाएगा- जबकि अभी तक भारत अमेरिका पर 30-100% तक टैरिफ लगाता था • भारत, अमेरिका से 500 अरब डॉलर की ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पादों और कोयला ख़रीदेगा और अन्य चीज़ों की खरीद बढ़ाएगा • भारत, रूस से सस्ता तेल नहीं खरीदेगा। इसके बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल ख़रीदेगा अब कुछ ज़रूरी सवाल उठते हैं 👇 👉 सीजफायर की तरह, हमारी ट्रेड डील की घोषणा ट्रम्प ने पहले क्यों की? 👉 हमारे ऊपर औसतन 3% से कम टैरिफ लगता था, अब 18% लगेगा। यह भारत की जीत कैसे है? 👉 जिन अमेरिकी चीज़ों पर भारत अभी तक 30-100% टैरिफ लगाता था, उस पर ज़ीरो टैरिफ लगाना हमारी जीत कैसे है? 👉 भारत ने अमेरिका के लिए अपना बाजार पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई लगती है - इससे घरेलू भारतीय उद्योग और व्यापारियों की सुरक्षा कैसे होगी? 👉 ज़्यादा अमेरिकी सामान खरीदने से 'मेक इन इंडिया' और हमारी मैनुफैक्चरिंग का क्या होगा? 👉 जिस तरह से इस डील के बाद अमेरिकी कृषि सचिव ने ख़ुशी जताई है, उससे बिल्कुल साफ़ है कि अमेरिकी किसानों की तो बल्ले-बल्ले है, लेकिन हमारे किसानों पर इस तरह के हमले के लिए आप राज़ी कैसे हुए मोदी जी? 👉 अमेरिका कौन होता है, यह निर्णय करने वाला कि हम रूस से तेल ख़रीदेंगे या नहीं? 👉 ईरान के चाबहार पोर्ट में हम रहेंगे या नहीं? 👉 मोदी ने यह देशविरोधी डील इतना नतमस्तक होकर क्यों की है? : AICC-सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन Supriya Shrinate जी

Congress

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