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आख़िरी साँस तक लड़ूँगा मैं - गिरेगा अवैध अतिक्रमण चुपचाप रहने वालों क्या मुँह दिखाओगे परमात्मा को जब पूज्य मातृभूमि पर अत्याचारी अतिक्रमणकारी क़ब्ज़ा कर रहे थे तब तुम कह व्यस्त थे? क्या मुँह दिखाओगे आने वाली पीढ़ियों को - क्या कहोगे हम डर गये थे युद्ध पूज्य मातृभूमि...

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ओवैसी की बातों से यूसुफ़ पठान क्यों न डरे?? कश्मीर के MP Aga Syed Ruhullah Mehdi रूहुल्लाह मेहंदी ने पोस्ट की है- "पिछले शीतकालीन संसद सत्र के दौरान पूरा विपक्ष SIR और अन्य मुद्दों को लेकर सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहा था। हमेशा की तरह, TMC के सांसद भी वेल में उतरकर अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर निडरता से विरोध कर रहे थे। मैं भी वहाँ मौजूद था। मैंने देखा कि एक प्रमुख मुस्लिम सांसद (जो TMC से नहीं थे) यूसुफ़ पठान पर चिल्ला रहे थे और उन्हें विरोध प्रदर्शन से हट जाने के लिए कह रहे थे। यूसुफ़ वास्तव में पीछे हट गए और अपनी सीट पर वापस आकर बैठ गए। मैंने उनके चेहरे पर अचानक बदलाव देखा। वे लगभग काँप रहे थे। जब वह सांसद वहाँ से चले गए, तो मैं यूसुफ़ के पास गया और पूछा, "क्या हुआ? आप इतने डरे हुए क्यों लग रहे हैं?" यूसुफ़ ने बताया कि उस व्यक्ति ने उनसे कहा था: "तुम्हें BJP के खिलाफ विरोध नहीं करना चाहिए। तुम्हें क्या हो गया है? BJP के खिलाफ क्यों प्रदर्शन कर रहे हो? खुद को दुश्मन क्यों बना रहे हो? वे गुजरात में तुम्हारा घर बुलडोज़ कर देंगे।" इसी दौरान महुआ मोइत्रा वहाँ आईं और उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या हुआ है। मैंने उन्हें बताया कि यूसुफ़ डर गए हैं क्योंकि किसी ने उन्हें धमकी दी है कि BJP गुजरात में उनका घर बुलडोज़ कर देगी। यह सुनकर महुआ मोइत्रा बेहद नाराज़ हो गईं। उन्होंने यूसुफ़ से कहा: "उस व्यक्ति की बात मत सुनो। हम तुम्हारे साथ हैं। हम एक हैं। कोई तुम्हें या तुम्हारे परिवार को छूने की भी हिम्मत नहीं करेगा।" आज जब हालात बदल गए हैं, तो महुआ मोइत्रा और TMC के लिए अफ़सोस होता है। जिस व्यक्ति के साथ वे उस समय मजबूती से खड़े थे, जिसकी हिम्मत बढ़ा रहे थे, उसी ने और उसके जैसे लोगों ने बाद में उनकी पीठ में छुरा घोंपने का काम किया।" मेहदी की इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ मोइत्रा ने लिखा है- "जी हाँ, सर। वह Asaduddin Owaisi ही थे जो Yusuf Pathan को चेतावनी दे रहे थे, याद रखिए। कितनी विडंबना है कि मैं ऐसे व्यक्ति के लिए लड़ता रहा जो निष्ठाहीन निकला, जिसमें न साहस था और न ही रीढ़ की हड्डी। वह राजनीति में आने के बजाय क्रिकेट की कमेंट्री ही करता तो बेहतर होता। कितना डरा हुआ और कायर व्यक्ति निकला! मेहंदी-मोइत्रा की क्रिया-प्रतिक्रिया का अलग से विश्लेषण करने की ज़रूरत नहीं है। सवाल यह है कि यूसुफ़ पठान क्यों न डरे? क्या यूसुफ़ ने आज़म खान का हाल नहीं देखा? क्या इरफ़ान सोलंकी नहीं देखा? नवाब मलिक का हाल नहीं देखा? अभी बंगाल के जहांगीर खान का हाल नहीं देख रहा है कि कैसे एक पूर्व विधायक को कमर में रस्सी बाँधकर परेड कराई जा रही है, कान पकड़कर माफ़ी मंगवाई जा रही है... ख़ुद यूसुफ़ पठान के मामले में, उनके घर के पास सटी थोड़ी-सी सरकारी ज़मीन, जिसे उन्होंने बगीचे के रूप में विकसित किया है, उस पर वडोदरा नगर निगम बुलडोज़र चलाना चाहती है और हाईकोर्ट तक यूसुफ़ पठान को ही नसीहत दे चुका है। तो फिर, अगर असदुद्दीन ओवैसी ने यूसुफ़ पठान को डराया है और यूसुफ़ डर गया है, तो फिर उसने क्या गलत किया है?? आज़म खान और इरफ़ान सोलंकी को Akhilesh Yadav - अखिलेश यादव-योगी की दोस्ती बचा न सकी। Nawab Malik -नवाब मलिक को शरद पवार बचा न सके, जबकि पवार साहब ने बुरे दिनों में अमित शाह को बचाया था! जहांगीर खान के लिए कोई TMC वाला आगे न आया, तो यूसुफ़ पठान के लिए Mahua Moitra - মহুয়া মৈত্র क्या कर लेतीं?? सच्चाई यही है कि इस देश में मुसलमान, मुसलमान हैं और उन्हें अलिखित तौर पर बहुसंख्यकों वाले अधिकार और सहूलियतें बिल्कुल भी हासिल नहीं हैं। ऐसे में, असदुद्दीन ओवैसी ने कथित तौर पर डराया भी था और यूसुफ़ पठान डर गए, तो इसमें क्या गलत किया??

Mr_cool77777

40,400 Aufrufe • vor 2 Monaten

कल रात मैं डॉक्टर के पास से लौट रही थी रात का करीब 9 बज रहा था सामने मुझसे रोड पर एक गाड़ी खड़ी दिखती है… जिसके किनारे एक लड़की खड़ी है और लोगों को आते जाते देख रही थी मुझे लगा कि इसको मदद की जरूरत है ज़रूर गाड़ी ख़राब हुई होगी… लेकिन मैं ग़लत थी जब मैं अपनी गाड़ी से उतरकर उसके क़रीब पहुँची तो देखा वो लड़की उगलियों में सिगरेट फँसाकर धुआँ निकाल रही थी…और उसकी गाड़ी में 3 लड़के और बैठे हुए थे… एक लड़का आगे वाली सीट पर बैठा उसका इंतज़ार कर रहा था और दो लड़के पीछे बैठे इंतज़ार कर रहे थे… उसको क्या इतना stress था जिसकी वजह से वह गाड़ी को बीच रास्ते रोककर अपना स्ट्रेस कम कर रही थी या पारिवारिक माहौल इतना ख़राब हो चुका है खैर अब आप ही बताये क्या दशा हो सकती है…
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कल रात मैं डॉक्टर के पास से लौट रही थी रात का करीब 9 बज रहा था सामने मुझसे रोड पर एक गाड़ी खड़ी दिखती है… जिसके किनारे एक लड़की खड़ी है और लोगों को आते जाते देख रही थी मुझे लगा कि इसको मदद की जरूरत है ज़रूर गाड़ी ख़राब हुई होगी… लेकिन मैं ग़लत थी जब मैं अपनी गाड़ी से उतरकर उसके क़रीब पहुँची तो देखा वो लड़की उगलियों में सिगरेट फँसाकर धुआँ निकाल रही थी…और उसकी गाड़ी में 3 लड़के और बैठे हुए थे… एक लड़का आगे वाली सीट पर बैठा उसका इंतज़ार कर रहा था और दो लड़के पीछे बैठे इंतज़ार कर रहे थे… उसको क्या इतना stress था जिसकी वजह से वह गाड़ी को बीच रास्ते रोककर अपना स्ट्रेस कम कर रही थी या पारिवारिक माहौल इतना ख़राब हो चुका है खैर अब आप ही बताये क्या दशा हो सकती है…

Indu

169,389 Aufrufe • vor 7 Tagen

ये हरियाणा के मेवाती मुसलमान हैं , विभाजन के समय यह सब पाकिस्तान जाने को तैयार बैठे थे , बैलगाड़ियां तैयार कर ली गईं थी। लेकिन तब तक अपने राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी को यह बात पता चली। वे मेवात पहुंचे और मेवाती मुसलमानों से भारत को न छोड़ने का आग्रह किया , उनसे कहा कि वे भारत की रीढ़ की हड्डी हैं, उन्हें भारत छोड़ कर नहीं जाना चाहिए। जिन जे हा दी यों से देश को मुक्ति मिलने वाली थी वे गांधी के आश्वासन पर यहीं रुक गए। और अब देश की रीढ़ तोड़ने का ऐलान कर रहे हैं। महात्मा तो ऊपर अपने ब्रह्मचर्य के प्रयोग में व्यस्त होंगे पर देश को जो कोढ़ देकर गए उससे अब मवाद रिसना आरम्भ हो चुका है। जिन्हें अधिक जानकारी चाहिए वे मेवात और नूंह गूगल पर सर्च कर लें। एक पूरा पाकिस्तान से भी खतरनाक पाकिस्तान दिल्ली से कुछेक किलोमीटर दूर बन चुका है। रामलीला कार धमाका तो गुड़िया गुड्डू का खेल है , सोच कर देखिए जब यह ज़ोंबी भीड़ दिल्ली कूच करेगी तो क्या हाल होगा।

ocean jain

238,850 Aufrufe • vor 10 Monaten

पीएन हक्सर लंबे समय तक इंदिरा गांधी के निजी सचिव थे उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि जब इमरजेंसी पर उन्होंने इंदिरा गांधी से सवाल पूछा तब इंदिरा गांधी ने बेशर्मी से हंसते हुए कहा था हक्सर साहब मेरे खानदान की सोच है कि राज ना कर सको तो अराजक बनो और गांधी खानदान आज भी अपने इसी सोच पर कायम है 10 साल से यह सत्ता के खून के प्यासे दोगले अराजक बन चुके हैं यह सत्ता के खून का प्यासा खुद कह रहा है हां मैंने बीजेपी के दलित सांसद प्रताप सारंगी को धक्का दिया तो क्या हो गया उनका सर फट गया तो क्या हो गया कहीं ऐसा ना हो की जनता भी अराजक बन जाए फिर आगे क्या होगा सबको पता ही है

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

103,923 Aufrufe • vor 1 Jahr

भीड़ में कहीं खो जाती है इंसानियत: ट्रेन की फर्श पर बैठी माँ-बेटी ने दिखाया कड़वा सच। एक दिल को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया, जहाँ एक माँ अपनी नन्ही बच्ची के साथ ट्रेन के फर्श पर बैठने को विवश दिख रही थी। उनके चेहरे पर साफ़ दिख रही थकान, लाचारी और मजबूरी किसी के भी दिल को पिघला सकती है। चारों तरफ लोग आराम से अपनी सीटों पर बैठे थे, लेकिन किसी में इतनी भी इंसानियत नहीं थी कि इस माँ-बेटी को बैठने के लिए थोड़ी सी जगह दे दे। यह दृश्य केवल एक घटना नहीं है, बल्कि हमारे समाज की बढ़ती संवेदनहीनता का दर्पण है। जब भीड़ बढ़ती है, तो इंसानियत अक्सर पीछे छूट जाती है। क्या हम इतने व्यस्त और असंवेदनशील हो चुके हैं कि किसी जरूरतमंद की मदद भी नहीं कर पाते? ये तस्वीर हम सबसे एक सवाल पूछ रही है — क्या हम सच में एक संवेदनशील समाज में जी रहे हैं, या बस अपने-अपने आराम में खो चुके हैं?

Adv. Divya Jakhar

16,886 Aufrufe • vor 4 Monaten

मेरा पहला क्रश मेरे ही स्कूल के एक शिक्षक थे जब मैं 14 साल की थी.. मेरा पहला किस मैजिकल नहीं था मेरा मुँह फ्रिज हो गया था मैं हिल नहीं पा रही थी लड़के ने कहा थोड़ा मुंह हिलाओ.. 16 साल की उम्र में उनका अफेयर चंडीगढ़ के रहने वाले एक 28 साल के पंजाबी युवक से हुआ..पंजाबी युवक ने ये कह कर छोड़ दिया कि तुम बच्ची हो मैं रोती रही कहा मुझे एक चांस दो मैं बड़ी हो जाऊंगी.. मेरा दिल टूट गया.. फिर आदित्य पंचोली से अफेयर हुआ उसके बाद राज द मिस्ट्री में अध्ययन सुमन से अफेयर हुआ.. फिर ऋतिक रोशन के साथ मैडम का नाम जुड़ा आज कल चिराग़ पासवान के साथ भी घूमती हुई दिखाई देती हैं...लिस्ट है खत्म ही नहीं होती मोहतरमा की..! लेकिन जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट करने वाले संस्कारी नहीं है GENZ गटर है।। हद हो गई दूसरों पर कीचड़ उछालने वालों को खुद के गिरेबां में भी झाँकना चाहिए..!

Jeetu Besla

301,638 Aufrufe • vor 1 Monat

जब सवर्ण प्रोटेस्ट करता है तो प्रशासन दांत निपोरते हुए उनके साथ हाहाहा करते हैं, पर जब दलित न्याय मांगता है तो यही पुलिसवाले उन्हें गाली देते हैं, थप्पड़ मारते हैं। जाति और सत्ता का फर्क है बाबू। वर्ना अविनाश पांडेय की क्या औकात कि वह दलितों को बहन की गाली दे देता। मैं इसीलिए कहता हूँ कि दलित समुदाय के लोग अपने घर में आग लगाकर पड़ोसी के महल में बैठकर खुश होने वाली सोच का दंश झेल रहे हैं। अगर समाज ने आज बसपा को कमजोर न किया होता, तो क्या एक IPS अफसर की इतनी औकात होती कि वह "पूरी रोड गंदी कर दी सालों ने, इनके पिता जी की रोड नहीं है" जैसी गालियां देता? क्या वह आंदोलन में खड़े युवाओं को थप्पड़ मारता और बंदी वाहन में घुसकर समाज के युवाओं पर अपना जातीय रौब दिखाता? चूंकि वह मुख्यमंत्री योगी और गृहमंत्री अमित शाह का खास अफसर है, जाति से ब्राह्मण है, इसलिए सरकार उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। ​दलितों को हिंदू कहकर हिंदू एकता का नारा देने वाले लोगों का दोहरा चरित्र देखिए। आज वे खुलकर गालीबाज SSP अविनाश पांडेय के समर्थन में हैशटैग चला रहे हैं। इससे साफ सिद्ध होता है कि सवर्णों की हिंदू एकता का मतलब सिर्फ सवर्ण हितों को सुनिश्चित करना है। वरना जो द्विज हिंदू कल तक बिहार के कुख्यात अपराधी भरत तिवारी के लिए विलाप कर रहे थे, आज वे अविनाश पांडेय की गालीबाजी और गुंडागर्दी का समर्थन क्यों कर रहे हैं? सवर्ण प्रभुत्व ही इनकी हिंदू एकता का सार है; भाजपा सरकार और उसके अफसर इसी हित को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।

Suraj Kumar Bauddh

113,205 Aufrufe • vor 2 Monaten

चीन यात्रा पर आए दक्षिणी कोरिया के राष्ट्रपति को शी जिनपिंग कुछ मोबाइल फोन दिखा रहे थे फिर दो श्यओमी के मोबाइल फोन की तरफ इशारा करके बोल कि यह दोनों आप और आपकी पत्नी के लिए हमारे तरफ से उपहार है दक्षिणी कोरिया के राष्ट्रपति जो शायद भूल गए थे कि वह वहां पर ऑटोमेटिक ट्रांसलेटर लगा है जो भी वह बोलेंगे तुरंत चाइनीस भाषा में ट्रांसलेट कर देगा तो उन्होंने भाषा मे अपने सिक्योरिटी स्टाफ को कहा कि देखना भाई पहले अच्छी तरह से जांच कर लेना इसमें कोई वायरस वगैरा तो नहीं है फिर ऑटोमेटिक ट्रांसलेटर में जब यह बात चाइनीस भाषा में ट्रांसलेट किया तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ठहाके मारकर हंसने लगे मैं तो यह सोच रहा हूं कि अगर जिमपिन की जगह अपना नॉर्थ कोरिया का किंग जॉन होता तो यह सुनकर क्या करता

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

130,986 Aufrufe • vor 10 Monaten

मुझे याद है छात्र जीवन में मेरा एक मित्र दीपक दुबे UPSC का इंटरव्यू देने जा रहा था। घर आया। सामने लॉन में बैठे बतिया रहे थे। तभी सामने लगी सेम की छोटी लतर को दिखा कर पूछा, यह क्या है? गौर से देखने के बाद बोला, यह #पुदीना है। दीपक ने चार बार IAS का इन्टरव्यू दिया। पर नहीं हुआ। हालांकि दीपक हाल ही NTPC के GM पद से रिटायर हुए। कमी दीपक की नहीं। प्रयागराज के सेंट जोसफ से पढ़ा, वहां से सीधे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी आ गया। भारत के बहुत बड़े जीवन से कभी साक्षात्कार का अवसर ही नहीं मिला। यह वीडियो किसी सरस्वती शिशु मंदिर की है। इन्हीं के वॉल से मिली। मंदिर के बच्चो को धान की रोपनी करा रहे थे, वामपंथी गिरोह ने वीडियो वायरल कर दी। आरोप लगाया, शिक्षा के नाम पर #बाल_मजदूरी कराई जा रही है। मंदिर चूंकि #संघ से जुड़ा है तो मौका अच्छा था। राजनीतिक औजार मिल गया। मेरे भी कुछ सवाल है.. ● बच्चो के चेहरों की मुस्कान बता रही है, क्लासरूम की घुटती हवा से निकल, साझा होकर इस काम में क्या आनन्द अनुभव कर रहे हैं? ● ये चंद कूढ़मगज, गोलबंद शिक्षित कब तक बचपन का दम घोंटते रहेंगे? ● शिक्षा के मायनों और उद्देश्य पर नागरिक समाज "व्यापक विमर्श" क्यों शुरू नहीं कर रहा है? ● जंतर-मंतर, फिर झारखंड तक, भारत का युवा केवल #याचना करेगा? जारी "सत्ता संघर्ष" में राजनीतिक दलों की #खुराक बनता रहेगा? ● आखिर कब यह शिक्षित समाज अवसरों और व्यक्तित्व को व्यापक करने पर विमर्श शुरू करेगा? मार्गदर्शन, सक्रिय सहयोग नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं, कम से कम सड़क का #स्पीड_ब्रेकर तो मत बनिए। बहुत हुआ तो समर्थन में #रूमानी_कविता करेंगे। दद्दा! हमने यह किया था। वह किया थे। अरे भाई! आपकी रुमानियत यदि #नीति_हस्तक्षेप में सक्षम नहीं तो क्या करूंगा आपके #कालजयी_संस्मरण सुन कर? या आने वाली पीढ़ी क्या करेगी? Narendra Modi Rahul Gandhi

सुमन्त

22,793 Aufrufe • vor 1 Monat

खसरा नंबर 136, #Devli में जूनियर इंजीनियर #Sachin_Chaudhary के कार्यकाल के दौरान एक साथ 8 बड़े #अवैध_निर्माण खड़े कर दिए गए। #MCD ने इन्हें सिर्फ कागजों में बुक करके खुली छूट दे दी। ​अब भ्रष्ट #Builder_Mafia इन अवैध इमारतों में भोले-भाले लोगों को 70 से 80 लाख रुपए प्रति फ्लैट के हिसाब से बेच रहे हैं। इन खरीदारों को यह तक नहीं पता कि ये इमारतें MCD द्वारा बुक हैं। ​क्या इस भारी #भ्रष्टाचार के लिए JE सचिन चौधरी की उच्च स्तरीय #Vigilance जांच नहीं होनी चाहिए? आखिर #MCDCommissioner ऐसे दागी अधिकारियों को क्यों बचा रहे हैं, यह एक बहुत बड़ा सवाल है। ​ये सभी 8 अवैध निर्माण बिना कोई नक्शा पास कराए, सारे नियम-कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाकर बनाए गए हैं। जूनियर इंजीनियर से लेकर MCD के बड़े अधिकारियों ने करोड़ों रुपए की मलाई खाई है। ​दिखावे के लिए इन ढांचों को सिर्फ बुक किया गया है। कार्यवाही के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकी गई है और बिल्डरों को खुलेआम लूटने का लाइसेंस दे दिया गया है। ​क्या जिनकी जान पहचान BJP Delhi के नेताओं से है, उन्हें हर अवैध काम करने की छूट मिल जाती है? या फिर इस #Illegal_Construction की अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा नीचे से लेकर ऊपर तक बांटा जाता है? ​इसी भ्रष्ट सिस्टम के कारण आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। क्या प्रशासन की आंखें तब खुलेंगी, जब ये कमजोर निर्माण भरभरा कर गिर जाएंगे और मासूमों की जान जाएगी? ​#Delhi की जनता देख रही है कि हमारी माननीय मुख्यमंत्री Rekha Gupta जी इस मामले पर क्या संज्ञान लेती हैं। क्या इन भ्रष्ट अधिकारियों की जांच होगी और इन अवैध इमारतों को ध्वस्त किया जाएगा? ​या फिर इस पूरे मामले को अनदेखा करके, #Delhi_Citizens को चंद रुपयों के लालच में मौत के मुंह में धकेल दिया जाएगा? जनता को तुरंत जवाब और सख्त कार्यवाही का बेसब्री से इंतजार है। ​इस #Corruption से न केवल दिल्ली का विकास खतरे में पड़ रहा है, बल्कि नागरिकों की गाढ़ी कमाई भी लूटी जा रही है। ऐसे अपराधियों को किसी भी कीमत पर बिल्कुल बख्शा नहीं जाना चाहिए। ​हम मांग करते हैं कि इस प्रकरण की एक पारदर्शी और स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए। Municipal Corporation of Delhi को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसा कोई भी अवैध काम न हो। PMO India गृहमंत्री कार्यालय, HMO India LG Delhi CMO Delhi Delhi Development Authority

Prerna Ek Disha Foundation

23,988 Aufrufe • vor 4 Tagen

महाकुंभ में मौनी अमावस्या की वो काली रात... 28 जनवरी, रात 1.58 बजे थे। मैं महाकुंभ के अंदर कैंप में सो रहा था। दैनिक भास्कर के वरिष्ठ साथी आशीष राय (Ashish rai) ने शोर मचाया कि महाकुंभ में भगदड़ मच गई है, सब उठो। अगले एक से डेढ़ मिनट के भीतर पूरा कैंप खाली था। मैं, साथी विकास श्रीवास्तव (@Vikashsri17 ) और लता मिश्रा (Lata Mishra) दौड़ते हुए अगले 10 मिनट में मेले के सबसे बड़े सेंट्रल हॉस्पिटल में पहुंचे। तब तक एंबुलेंस आने का सिलसिला शुरू हो चुका था। पुलिसकर्मियों के चेहरों की उड़ी हवाइयां, हर मिनट बजते एंबुलेंस के सायरन, भागते हुए अस्पताल कर्मचारी ये बयां कर रहे थे कि कुछ तो बड़ा हुआ है। मेरे हाथ में माइक था। अस्पताल कर्मचारियों ने मीडिया के घुसने पर पाबंदी लगा दी। मैंने माइक बैग के अंदर रखा। पहचान छिपाकर हॉस्पिटल में घुस गया। अंदर का नजारा खौफनाक था। पीछे हॉस्पिटल का तरफ एग्जिट गेट था। उस गेट के पास कमरे में लाशों का ढेर था। मेरी गिनती के अनुसार 18 लाशें थीं। मोबाइल से सिर्फ दो वीडियो बनाए, चार–पांच फोटो खींचे। (दैनिक भास्कर ऐसा पहला मीडिया संस्थान है, जिसने भगदड़ में मौत होने की खबर फोटो प्रूफ के साथ ब्रेक की) इतने में हॉस्पिटल के एक कर्मचारी ने मुझे देख लिया। अपराधियों की तरह मेरा हाथ पकड़ा। बोला– तुम्हें पुलिस को देता हूं। वो मुझे पकड़कर कुंभ मेला की OSD के पास ले गया, जो एक महिला IAS ऑफिसर हैं। OSD ने मुझसे फोटो–वीडियो डिलीट करने को कहा। मैंने कहा कि अब कोई फायदा नहीं है, क्योंकि मैं ये सब ऑफिस को भेज चुका हूं। ये सुनकर उन्होंने मुझे हॉस्पिटल से बाहर कर दिया। मैं रात 2 बजे से लेकर सुबह साढ़े 5 बजे तक इसी हॉस्पिटल के गेट पर खड़ा रहा। इन साढ़े 3 घंटे में करीब 100 एंबुलेंस के चक्कर लगे होंगे। कोई मृत था तो कोई घायल। मोबाइल बैटरी डाउन हो चुकी थी। थोड़ी देर के लिए हम तीनों साथी वापस अपने कैंप पर आए। सुबह 10 बजे दूसरी सूचना आई कि संगम पार झूंसी इलाके (अखाड़ों की तरफ) भी रात में भगदड़ मची है। कई किलोमीटर पैदल चलकर हम वहां पहुंचे तो नजारा भयावाह था। हजारों लोगों के कपड़े, जूते-चप्पल, बैग सड़क पर पड़े थे। ढेर इतना कि दो ट्रक सामान भर जाए। बल्लियां टूटी पड़ी थीं। पुलिस बूथ पलटा पड़ा था। कार के शीशे टूटे हुए थे। आसपास के दुकानदारों से बात की तो पता चला कि रात 2 से 3 बजे के बीच यहां भगदड़ मची और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। इस इलाके में सब सेंट्रल हॉस्पिटल है। तुरंत हम वहां पहुंचे तो नजारा देखकर दंग रह गए। हॉस्पिटल में 20 से ज्यादा एंबुलेंस खड़ी थीं। इनके आने-जाने का सिलसिला जारी था। यहां भी मीडिया के अंदर घुसने पर पाबंदी थी। एक एंबुलेंस ड्राइवर ने बताया- लाशें अंदर पड़ी हैं। करीब 50 से ज्यादा लोग हॉस्पिटल पर अपनों को ढूंढने पहुंचे थे। कई प्रत्यक्षदर्शी श्रद्धालु मिले, जिन्होंने रात की भगदड़ का वृतांत रोते-रोते सुनाया। उस रात हमारे दूसरे साथी राजेश साहू (Rajesh Sahu) संगम नोज की तरफ मोर्चा संभाले हुए थे और वहां से पल-पल का कवरेज दे रहे थे। पहली बार महाकुंभ कवर कर रहा हूं। मौनी अमावस्या की रात से लेकर अगली सुबह तक क्या-क्या देखा, वो सारी बात शब्दों में पिरोना संभव नहीं है। लेकिन यही कहूंगा अफसरों का ओवर कॉन्फिडेंस, VIP की लगातार विजिट, रास्तों और पैंटून पुलों को पुलिस द्वारा मनचाहे तरीके से बंद करना या खोलना, 144 साल की ब्रांडिंग...इन्हीं सब की वजह से उस रात अव्यवस्थाएं पैदा हुईं।

Sachin Gupta

111,659 Aufrufe • vor 1 Jahr

क्या भूत सच में होते हैं...? इस सवाल का जवाब आपको इस घटना से जरूर मिल जाएगा 👇 पारुल अपने कमरे में पढ़ाई कर रही थी पढ़ते पढ़ते उसे जब नींद के झोंके आने लगे तो उसने चाय बनाने का निश्चय किया... जब उसने घड़ी देखी 3 बज रहे थे उसे एक बार के लिए किचेन में अकेली जाने में...थोड़ा डर लगा लेकिन आज उसी मौर्य वंश का चैप्टर पूरा निपटाना ही था.... उसने हिम्मत करके चाय बनाने का फैसला किया और चाय बनाने के लिए गैस चूल्हे पर चढ़ा दी.. लेकिन जब आधे घंटे तक भी चाय में उबाल नहीं आया तो उसे थोड़ा डर लगा कि कहीं किसी आत्मा का चक्कर तो नहीं है... उसके बाद उसने चाय पीने के idea को साइड करते हुए वापस अपने कमरे में जाने का सोचा.... और ज्योंहि गैस बंद करने के लिए हाथ आगे बढ़ाया वो shocked हो गई..😲 दोस्तों वो लड़की गैस जलाना भूल गई थी...😁

Kashish

14,443 Aufrufe • vor 26 Tagen

एक पेपर प्लेट फैक्ट्री में कुछ मजदूर रखे गए! बारह हजार रुपये महीना, दिन में तीन बार चाय और खाने का वादा किया गया लेकिन मिला क्या..? चोकर की रोटी, कोड़े, कैद और भाग न पाएं, इसलिए मालिक ने रॉटवाइलर कुत्ते तैनात किए थे! यह मजदूर नहीं, बल्कि बंधुआ मजदूर हैं यह कोई फिल्म या धारावाहिक की कहानी नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के एक पेपर फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों की सच्चाई है! हाल ही में वहां से 12 बंधुआ मजदूरों को छुड़वाया गया है उन्हीं में से एक मजदूर की आपबीती सुनिए कैसे उसकी आवाज कांप रही है..? वीडियो कमेट में शेयर कर रही हु रोते हुए कह रहा है कि उसे दिन में सिर्फ़ एक बार खाना मिलता था, जिसमें नमक के साथ चोकर की रोटी दी जाती थी उसका आरोप है कि मालिक ने बेल्ट से पीटकर उसके कान तक क!ट दिए थे मज़दूरों की निगरानी के लिए कुत्ते रखे गए थे, ताकि कोई भाग न सके जब मालिक किसी शादी समारोह में शामिल होने के लिए शहर से बाहर गया, तब किसी तरह यह मज़दूर वहां से भाग निकलने में सफल हुआ! इस फैक्ट्री के मालिक का नाम अंकित बालियान बताया जा रहा है 21वीं सदी के भारत में यदि इंसानों के साथ यह व्यवहार हो रहा है, तो यह सिर्फ अपराध नहीं है मानवता पर कलंक है! शर्मनाक अपराधी को कठोर दंड मिलना चाहिए..लेकिन आपको क्या लगता है दंड मिलेगा इन मजदूरों को इंसाफ मिलेगा ..?

Rebellious 2.0🕊️

24,774 Aufrufe • vor 2 Monaten

ये एक छोटी सी वीडियो है लेकिन कहानी बड़ी है, कल जब मैं नूह के एक चौराहे पर रुका तो वीडियो में पथराव करते दिख रहे लड़के मेरे पास आये और मुझसे मेरा नाम पूछा,मैंने अपना नाम सिर्फ़ ज़ाकिर त्यागी बताया तो इन्होंने मुझे हिंदू समझा और मुस्लिमों पर टिप्पणी करते हुए अपने फ़ोन में वो सब वीडियो दिखाई जिसमे यह तोड़फोड़, आगजनी, पथराव करते हुए दिख रहे थे,मैंने कहा कि क्या आप मुझे वीडियो दे सकते है इन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वीडियो में सभी लोग हमारे अपने है फंस जायेंगे,चलो दूसरी वीडियो दे देता हूँ लेकिन ये किसी को भी मत भेजना क्योंकि हम पथराव करते हुए दिख रहे है! CMO Haryana इस वीडियो सफ़ेद शर्ट काली पैंट में जो लड़का दिखाई दे रहा है उसका नाम यस है,और उसके फ़ोन में जो वीडियो है वह बहुत सारे खुलासे करने वाली है,लेकिन क्या आप चाहेंगे कि हां हिंसा से जुड़े हुए हर व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाए? यदि आप करना चाहते है तो इसका फ़ोन लीजिए और चेक कीजिए!

Zakir Ali Tyagi

253,614 Aufrufe • vor 3 Jahren

नर्मदा किनारे बड़ा दृश्य था, मंत्री जी पसीना बहा रहे थे, फावड़ा चला रहे थे, जैसे सदियों की गंदगी अकेले ही साफ कर देंगे। उनके पीछे जेसीबी मशीन खड़ी थी शांत, सक्षम और थोड़ी संकोची क्योंकि असली काम करने वालों को अक्सर फोटो में जगह कम मिलती है। जेसीबी मशीन सोच रही होगी “मुझे बुलाया क्यों गया? अगर सफाई करनी है तो मैं आधे घंटे में कर दूं, अगर फोटो खिंचवानी है तो मैं क्या करूं?” लेकिन मशीनों को यह समझ नहीं आता कि असली काम कई बार मिट्टी हटाना नहीं, छवि बनाना होता है। मंत्री जी का पसीना सच्चा हो सकता है, नीयत भी अच्छी हो सकती है, पर सवाल यह है कि जब जेसीबी मशीन मौजूद है, तो फावड़े की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब शायद काम में नहीं, कैमरे में छिपा है। यह वही देश है जहां काम करने से ज्यादा जरूरी है, काम करते हुए दिखना। और नर्मदा किनारे आज यही सबसे साफ दिख रहा था।

Anurag Dwary

12,563 Aufrufe • vor 5 Monaten

आजकल लोगों में ना डर बचा है, ना शर्म... मौका मिलते ही कहीं भी शुरू हो जाते हैं... दरअसल आज रक्षाबंधन पर मैं अपनी बुआ को साड़ी दिलाने के एक प्रसिद्ध साड़ी की दुकान पर लेकर गया हुआ था... उस दुकान के अंदर औरतों की काफी ज्यादा भीड़ लगी हुई थी, इसलिए शोर शराबे से बचने के लिए मैं दुकान से बाहर निकलकर अपनी गाड़ी में आकर बैठ गया... लेकिन तभी मेरी निगाह वहां खड़ी एक गाड़ी पर जाती है, जिसके अंदर एक जवान लड़की और एक लड़का आपस में लिपटे हुए अपनी कामवासना को शांत करने में लगी हुए थे... तभी वहां एक आदमी आकर उन्हें इस तरह की गलत हरकत करने के लिए टोकता है... देखते ही देखते वहां भीड़ इकठ्ठा हो जाती है, भरे बाजार अश्लील हरकतें करने के लिए उन दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया जाता हैं... अब पुलिस उन दोनों के साथ क्या करेगी मुझे नहीं पता, लेकिन इतना जरूर जानता हूं कि खुलेआम इस तरह की अश्लीलता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी बहुत जरूरी है...
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आजकल लोगों में ना डर बचा है, ना शर्म... मौका मिलते ही कहीं भी शुरू हो जाते हैं... दरअसल आज रक्षाबंधन पर मैं अपनी बुआ को साड़ी दिलाने के एक प्रसिद्ध साड़ी की दुकान पर लेकर गया हुआ था... उस दुकान के अंदर औरतों की काफी ज्यादा भीड़ लगी हुई थी, इसलिए शोर शराबे से बचने के लिए मैं दुकान से बाहर निकलकर अपनी गाड़ी में आकर बैठ गया... लेकिन तभी मेरी निगाह वहां खड़ी एक गाड़ी पर जाती है, जिसके अंदर एक जवान लड़की और एक लड़का आपस में लिपटे हुए अपनी कामवासना को शांत करने में लगी हुए थे... तभी वहां एक आदमी आकर उन्हें इस तरह की गलत हरकत करने के लिए टोकता है... देखते ही देखते वहां भीड़ इकठ्ठा हो जाती है, भरे बाजार अश्लील हरकतें करने के लिए उन दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया जाता हैं... अब पुलिस उन दोनों के साथ क्या करेगी मुझे नहीं पता, लेकिन इतना जरूर जानता हूं कि खुलेआम इस तरह की अश्लीलता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी बहुत जरूरी है...

Amit Tomar

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