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आज मध्य प्रदेश जा रहा हूं। और जब से ये खबर देखी है कि वहां बच्चों को मिड-डे मील अख़बार पर परोसा जा रहा है, दिल टूट सा गया है। ये वही मासूम बच्चे हैं जिनके सपनों पर देश का भविष्य टिका है, और उन्हें इज़्ज़त की थाली तक...

1,294,445 views • 9 months ago •via X (Twitter)

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NEET छात्रों से मुलाक़ात में एक बात बिल्कुल साफ़ हो गई - भारत का युवा नरेंद्र मोदी पर भरोसा नहीं करता। उन्होंने मुझे बताया - पेपर WhatsApp और Telegram पर खुलेआम बिक रहे हैं। किस कीमत पर बिक रहे हैं, कौन ख़रीद रहा है, माफ़िया कैसे काम कर रहे हैं - यह सब इन बच्चों को पता है। उनका एक ही सवाल था - जो हमें पता है, वो सरकार और संस्थाओं को क्यों नहीं? सच यह है ये बच्चे सरकार से बेहतर जानते हैं कि इस सड़ी हुई व्यवस्था को कैसे ठीक किया जा सकता है। और दूसरी ओर कितनी शर्मनाक बात है कि जिस सेना का काम दुश्मनों से देश की रक्षा करना है, आज उसे मोदी सरकार के अपने भ्रष्टाचार से बच्चों के पेपर बचाने भेजा जा रहा है। टुकड़ों के सुधार से अब काम नहीं चलेगा। छात्रों, शिक्षकों और Experts के साथ मिलकर पूरी परीक्षा व्यवस्था नए सिरे से बनानी होगी। हम और बच्चे नहीं खो सकते। और एक भी पीढ़ी का भविष्य इस भ्रष्ट तंत्र के हवाले नहीं कर सकते।

Rahul Gandhi

308,726 views • 3 months ago

मेघालय में हिंदुओं की दुर्दशा की कहानी जो आज तक किसी को पता ही नहीं है! ये वीडियो देखकर मैं तो शॉक्ड हूं कि देश की सीमा से सटा एक और राज्य जहां हिंदुओं को धर्म बदलने या पलायन करने पर मजबूर किया जा रहा है और इस बार ये सब करने वाले ईसाई कट्टरपंथी है! भारत की सीमाओं से सटे राज्यों में बड़े पैमाने पर किसी विशेष एजेंडे के तहत भारत की बहुसंख्यक आबादी (हिंदुओं) को धर्म बदलने पर मजबूर किया जा रहा है! कुछ तो बड़ा षड्यंत्र रचा गया है... जिसे हमें समझना होगा... कश्मीर, पंजाब, गोवा, केरल, बंगाल, मेघालय ये सब के सब भारत की सीमा से सटे राज्य है! जहां मुस्लिम/ईसाई मिशनरी हिंदुओ/सिखो का जबरन धर्मांतरण करवा रहे हैं! 🧐 एकमात्र हिंदू राष्ट्र को मिशनरी दीमकों द्वारा खोखला किया जा रहा है! केंद्र सरकार को जल्द से जल्द इस विषय पर कड़ा एक्शन लेना चाहिए! (इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि ये मोदी सरकार तक पहुंच सके)

Modified Hindu 🇮🇳 | राष्ट्र प्रथम

68,938 views • 2 years ago

आजकल छोटे-छोटे स्कूल के बच्चे Vape और E-Cigarettes को “safe” समझकर अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। सरकार ने Vapes की बिक्री पर ban लगाकर सराहनीय कदम उठाया था, लेकिन आज भी कुछ suppliers social media के ज़रिये और कुछ दुकानदार छिपाकर ये products बच्चों तक पहुँचा रहे हैं। यह कोई cool harmless trend नहीं है। ये बच्चों को nicotine की लत की तरफ धकेल रहा है और उनकी health, focus और future के साथ खिलवाड़ कर रहा है। सभी राज्यों को इस ban को सख़्ती से लागू करना चाहिए। Schools, parents, police और local administration को मिलकर ऐसे networks पर तुरंत action लेना होगा। मैंने संसद में यह मुद्दा उठाया, क्योंकि बच्चों की सेहत और भविष्य के साथ कोई compromise नहीं हो सकता।

Swati Maliwal

14,713 views • 18 days ago

पहले NEET पेपर लीक और अब CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा का मामला। देश का जो सबसे संवेदनशील किशोर वर्ग है -15 से 21-22 साल के बच्चे -जिन पर भविष्य संवारने का सबसे ज्यादा दबाव होता है और जीवन का अनुभव भी कम होता है, वही सिस्टम की अक्षमता और आपराधिक लापरवाही की सबसे बड़ी कीमत चुका रहा है। इस पूरे समय में जिस तरह से सार्थक सिद्धांत, वेदांत और ऐसे कई बच्चे सामने आए हैं, और जिस सूझबूझ व स्मार्ट तरीके से उन्होंने प्रतिक्रिया दी है, उसके लिए उन्हें आशीर्वाद और बधाई। बस दुख इस बात का है कि इन और ऐसे लाखों बच्चों का बहुमूल्य समय और ऊर्जा ऐसी चीजों में लग रही है, जिनसे उन्हें कभी जूझना ही नहीं चाहिए था।

Ankit Kumar Avasthi

51,190 views • 3 months ago

सरकार जिनकी प्रतिनिधि है, उन्हीं पर लाठियाँ बरसा रही है । सरगुजा ज़िले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम परसोडिकला का आज का दृश्य लोकतंत्र को शर्मिंदा करने वाला है - जहां गुजरात की एक निजी कंपनी से सरकारी खदान में उत्खनन कराया जा रहा है, और विरोध कर रहे स्थानीय ग्रामीणों पर पुलिस का लाठीचार्ज और आंसू गैस बरसाई गई। यही है वह 'गुजरात मॉडल', जिसे देश वाराणसी और अयोध्या में भी देख रहा है - जहां स्थानीय लोगों के रोजगार और संसाधनों पर बाहर की कंपनियों और लोगों का कब्ज़ा कराया जा रहा है, और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी कर दी गई है। सरकार का काम जनता की रक्षा करना है - उन्हीं पर लाठियाँ चलाना नहीं। छत्तीसगढ़ के लोगों के हक़, ज़मीन और भविष्य का इस तरह दमन नहीं किया जा सकता।

T S Singhdeo

13,993 views • 9 months ago

सरकार के पास इतनी शक्ति होती है कि जब सरकार ठान लेती है, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। 6 महीने में रेत पर इस तरह एक शहर बसाना भी इसी शक्ति का उदाहरण है, जो दर्शाता है कि अगर सरकार चाहती है, तो किसी भी बड़ी चुनौती का समाधान किया जा सकता है। लेकिन जब बात आती है देश के गरीब, किसान, मजदूर, पिछड़े, दलित, आदिवासी और महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की, तो सवाल उठता है कि यदि इन आयोजनों को इतने बड़े पैमाने पर अंजाम दिया जा सकता है, तो शिक्षा, चिकित्सा, महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और बच्चों के भविष्य के लिए क्यों नहीं इस तरह की इच्छाशक्ति दिखाई जा रही है। झांसी में आग लगने से नवजात बच्चों की मौत और ऑक्सीजन की कमी से बच्चों का दम तोड़ना—ये घटनाएँ साफ दिखाती हैं कि जनता की जान और उनके बुनियादी अधिकार हमारी प्राथमिकताओं में कहीं पीछे रह गए हैं। क्या हमारी प्राथमिकताएँ गलत हैं? क्या सामाजिक उत्थान की दिशा में गंभीरता की कमी है? क्या व्यापक जनकल्याण में सरकार से हमारे द्वारा सवाल करना गलत है? यदि समाज के वंचित तबकों के उत्थान के लिए भी उसी दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति से काम किया जाए, तो एक स्थायी बदलाव संभव है। जय भीम, जय भारत, जय संविधान।

Chandra Shekhar Aazad

324,838 views • 1 year ago

इस दौर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आज के parents सबसे ज़्यादा भ्रम में है। वह यह तय नहीं कर पा रहा कि बच्चे उसके अधूरे सपनों को पूरा करने का साधन हैं, या अपने स्वतंत्र सपनों और सोच के साथ एक अलग व्यक्तित्व। अक्सर अनजाने में माता-पिता अपने अधूरे सपनों का बोझ बच्चों पर डाल देते हैं और इसे उनका भविष्य संवारना समझ लेते हैं। जबकि पालन-पोषण का अर्थ बच्चों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उन्हें समझना, उन पर भरोसा करना और उन्हें अपना रास्ता चुनने की हिम्मत देना है। असली परवरिश सुविधाओं की संख्या से नहीं आँकी जाती, बल्कि उस आत्मविश्वास से आँकी जाती है जो हम बच्चों के भीतर पैदा करते हैं ताकि वे अपनी पहचान खुद बना सकें। एक बार ठहरकर सोचने की ज़रूरत है कि क्या हम बच्चों को सिर्फ़ संसाधन दे रहे हैं, या उन्हें उड़ान भरने की ताक़त भी दे रहे हैं?

Manish Sisodia

12,916 views • 8 months ago