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आज से 30 वर्ष पूर्व केंद्र सरकार की खुफिया रिपोर्ट के अनुसार बिहार का दस खूंखार अपराधीयों की सूची: १) अनंत सिंह २) सूरजभान सिंह ३) मुन्ना शुक्ला ४) भूटकुन शुक्ल ५) शहाबुद्दीन ६) अनिल शर्मा ७) सुरेन्द्र बंगाली ८) सुनील पांडे ९) टिक्कर सिंह १०) रामलखन सिंह

57,406 просмотров • 8 дней назад •via X (Twitter)

Комментарии: 22

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ATUL ANAND8 дней назад

खूंखार होंगे पर घिनौने नहीं, इनके ऊपर pocso नहीं लगा था, जो rajbhallabh और अरुण पर लगा हैं

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Butchers of Ganges8 дней назад

10 में से 8 भूमिहार 😔

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Raushan kr singh8 дней назад

Peak bhumihar bahubali era 8/10 means lanka mai ravan bihar mai bhavan ke hath lagai re..

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Rancho Kumar7 дней назад

8/10 keval Bhumihar hi hai.... humesha se aur aaj ki kuch obc castes khudko rangdaar aur baahubali kehti h 🤡

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Puja Sharma7 дней назад

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव शंकर बाघेल अशोक महतो भंगड़ यादव तस्लीमुद्दीन Sadhu yadav ये सब मौसा थे तुमलोगो के ?

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Dwar_Banga...8 дней назад

और ये सूची बता कौन रहा था जो उन खूंखार अपराधी के बराबर का ही अपराधी है।

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NITISH BHARDWAJ7 дней назад

Thanks for the compliment 🙌🏻

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रण बांकुरा7 дней назад

Pappu pandey ko kyo chhod diya

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सिद्धार्थ सिंह7 дней назад

👀👀👇👇🤐🤐

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Monu Kumar7 дней назад

ये सब नही होते तो तुम्हारे मौसा मुख्यमंत्री नहीं बनते 2005 में।

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FireDoDo7 дней назад

@grok who is this guy in the video?

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Abhi Bharati7 дней назад

और जो बोल रहा है वो तो मौलाना है न

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Singh Ji7 дней назад

Jo v ho wo rapist aur chinar nhi the..pyajama ka nara tight rhta hai humesa..koi v aire gire yha tak ki lizard chod nhi tha wo

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Vikash Kumar7 дней назад

ये गुंडे सब सवर्ण समुदाय वाले अधिक है। जो सवर्ण है वही गुंडा है

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pranav7 дней назад

What a proud moment 🧬

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Abhi7 дней назад

These brhamans have destroyed Bihar and Lalu tried to stop these criminals and terrorists

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Prince kumar7 дней назад

आज के माननीय नेता बना हुआ है।

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OmKar Bhagat7 дней назад

@pappuyadavjapl

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Abhi7 дней назад

All brhaman criminals and mafia.

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virat7 дней назад

दुख है कि ऐसे लोगों को न्यायालय और पुलिस कुछ नहीं कर पाई और साथ ही भगवान भी

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Aishwaray7 дней назад

@grok verify this list

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D€V D 11137 дней назад

Aadha to kaal le gaya bacha Aandhi Bhookamp me chal jayega 🤣🤣🤣

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"प्रबुद्धजनों की उपस्थिति और उनका विमर्श, नव विकास का संकल्प तथा सशक्त भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है!" आज आशियाना आवास पर सरोजनीनगर परिवार के प्रबुद्ध नागरिकों का आत्मीय स्वागत और अभिनन्दन करते हुए हृदय में प्रसन्नता, आत्मा में आनंद और भविष्य के प्रति विश्वास की अनुभूति हो रही है! सरोजनीनगर को एक आदर्श, प्रगतिशील, समृद्ध, सशक्त और विकसित विधानसभा क्षेत्र के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में आप सभी सुझाव अत्यंत मूल्यवान, प्रेरणादायक और दिशादर्शी हैं! इस दौरान अनिल सिंह गहलोत जी, पूर्व विधायक गौरीगंज चंद्र प्रकाश मिश्रा 'मटियारी' जी, ब्लॉक प्रमुख सुनील रावत जी, वरिष्ठ नेता राजेश सिंह चौहान जी, गंगा राम भारती जी, राजेंद्र प्रसाद यादव जी, पार्षद प्रतिनिधि लवकुश रावत जी, चेयरमैन प्रतिनिधि बंथरा रंजीत रावत जी, करुणा सारस्वत जी, अनूप शर्मा जी, राजेंद्र बाजपेई जी, अनिल सिंह जी, शेर अली ख़ान जी, पार्षद प्रतिनिधि कमलेश सिंह जी, मंडल अध्यक्ष के के श्रीवास्तव जी, पार्षद कौशलेंद्र द्विवेदी जी, अंजली बाजपेई जी, शिव कुमार सिंह चच्चू जी, सामेंद्र सिंह जी, अध्यक्ष लेटे हुए हनुमान जी मंदिर लखनऊ डॉक्टर विवेक तागड़ी जी, शिव बक्श सिंह जी, सुभाष पासी जी, राजन मिश्रा जी, राजीव बाजपेई जी, राजेश चावला जी, दल बहादुर सिंह जी, शिव शंकर विश्वकर्मा जी, साधना गुप्ता जी, पूजा सिंह जी, अनीता तिवारी अन्नू जी, राम नरेश रावत जी, गणेश जोशी जी, उमेश तिवारी जी, रेनू सिंह जी, मधु चौरसिया जी, रीना त्रिपाठी जी एवं अन्य गणमान्यों से स्नेहिल भेंट हुई।

Rajeshwar Singh

21,212 просмотров • 1 год назад

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुज़फ्फरपुर रैली से पहले छह पत्रकारों को नज़रबंद करने के आदेश जारी किए गए। तीन पत्रकारों को हिरासत में लिया गया, जबकि तीन अन्य गिरफ्तारी से पहले ही भूमिगत हो गए। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मुज़फ्फरपुर ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर ने पत्रकारों को बताया कि खुफिया ब्यूरो (आईबी) की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी मिल के मज़दूर प्रधानमंत्री की रैली के दौरान विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, और पत्रकार इस घटना को कवर करने वाले थे — जो, उनके अनुसार, “वातावरण बिगाड़” सकता था। इसलिए उन्हें नज़रबंद करने के आदेश दिए गए। पत्रकारों पर सरकार विरोधी रिपोर्टें चलाने का आरोप लगाया गया, जिसके चलते उनकी हिरासत का आदेश जारी किया गया। उन्हें दो रात पहले रात 1 बजे नज़रबंद किया गया और अगले दिन रात 1 बजे रिहा किया गया। नज़रबंद किए गए पत्रकार: निज़ाम समी़र (दैनिक भास्कर, साधना न्यूज़) राजन सिंह राजपूत (चंपारण फर्स्ट पोर्टल) धर्मचंद्र यादव (जीई न्यूज़ पोर्टल) गिरफ्तारी से पहले भूमिगत हुए पत्रकार: इर्फान रिज़वी (हमार बिहार टीवी, नेशनल) असनयन ख़ान (द रिपोर्ट टीवी) मुन्ना शाह (मुज़फ्फरपुर फर्स्ट न्यूज़)

Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ

71,971 просмотров • 11 месяцев назад

1 जुलाई, 2026 को पंजाब की भगवंत सिंह मान सरकार ने केंद्र सरकार की VB-G RAM G योजना को लागू करने का निर्णय किया है। आज से पंजाब में VB-G RAM G योजना लागू हो गई है। आप लोगों को भलीभांति याद होगा, पिछली बार अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर 30 दिसंबर 2025 को पंजाब की विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर भगवंत सिंह मान की सरकार ने VB-G RAM G योजना का विरोध किया था और इस योजना को गरीब, किसान, दलित और मजदूर विरोधी करार दिया था। आखिर इन 6 महीनों में ऐसा क्या बदल गया कि जिस योजना को गरीब, किसान, दलित और मजदूर विरोधी बताया जा रहा था, आज उसी योजना को पंजाब सरकार अंगीकार करने पर मजबूर हुई है? - श्री Prem Shukla -प्रेम शुक्ल पूरा देखें:

BJP

49,484 просмотров • 3 месяцев назад

Dear Kiren Rijiju अगर आप 'गजनी' के संजय सिंघानिया नहीं बन गए हैं तो आपको याद होगा कि... १) एक बार भरे मंच से माननीय मोदी जी ने एक हाथ की उंगलियां मोड़ कर छेद जैसा बनाया और उस पर दूसरे हाथ की हथेली ठोकते रहे। ये कैसा किस बात का 'शालीन' इशारा था क्या आप बता सकते हैं? इसका वीडियो आप ख़ुद ढूंढ लीजिए। २) माननीय ने संसद में विपक्ष के नेता की खिल्ली उड़ाने को दोनों हाथों की उंगलियां नचा नचा कर जो प्रहसन किया था वो क्या था? (वीडियो संलग्न है ) २) माननीय ने अपने श्रीमुख से सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा, पार्टी की विधवा कहा था। ३) माननीय ने अपनी पवित्र जिह्वा से किसी दिवंगत महिला को पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था। ४) माननीय ने संसद में एक महिला सांसद को शूर्पणखा कहा था। क्या ये किसी महिला का सम्मान बढ़ाने वाला शब्द था? ५) माननीय ने संसद के भीतर विपक्ष के नेता को बाल बुद्धि कहा, बाहर खड़े होकर कहा कि मैं किसी 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा। क्या आज़ाद भारत के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेता पर ऐसे स्तरहीन व्यंग्य बाण चलाए हैं? ६) माननीय ने डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चों का मज़ाक बनाते हुए नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा था और उस समय उनकी मां तक पर कटाक्ष किया था। ये किस स्तर की राजनीति थी? ७) माननीय ने डॉ मनोहन सिंह को मौन मोहन कहा, देहाती औरत कहा था। क्या ये किसी पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान नहीं था? ८) संसद में खड़े होकर माननीय ने मनमोहन सिंह के लिए कहा था कि वे बाथरूम में रैन कोट पहन कर नहाने हैं। ये किस नैतिकता के उच्चतम स्तर की भाषा थी? ९) एक महिला मुख्यमंत्री को भरी सभा में सड़कछाप शोहदों की तरह दीदी ओ दीदी कह कर बुलाना किस भाषाई संस्कार की नुमाइश थी? आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को एक अख़बार की हैडलाइन में 'कमेंटमारा ब्यॉय' लिखा गया। मतलब सड़क पर लड़कियों पर कमेंट करने वाले लफंगा। (देखें द टेलीग्राफ) १०) अंतर्राष्ट्रीय दौरों पर माननीय के क्रियाकलाप की सूची बनाने का काम आप खुद कर लीजिए। विदूषकों जैसे करतबों की इतनी लंबी फेहरिस्त है कि आप गिनते गिनते थक जायेंगे।

Dr.Rakesh Pathak डॉ. राकेश पाठक راکیش

58,193 просмотров • 13 дней назад

Exclusive- 'योगी' की ज़मीन भी ले उड़े! ‘टॉप सीक्रेट’ पर अयोध्या से एक और बड़ी ख़बर। राम मंदिर के बाद महेश योगी के महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट की ज़मीन से धोखाधड़ी। बीजेपी नेता और अयोध्या के पूर्व मेयर ऋषिकेश उपाध्याय का नाम एक बार फिर सामने आया। अयोध्या की सीजेएम कोर्ट ने पिछली 30 जुलाई को दिए एफआईआर के आदेश। सीजेएम कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करके 24 घंटे में न्यायालय को सूचित करने के लिए कहा। इससे पहले साल 2021 में राम मंदिर की ज़मीनों के फ्रॉड में भी आ चुका है बीजेपी नेता और अयोध्या के पूर्व मेयर ऋषिकेश उपाध्याय का नाम। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने तब दस्तावेज़ों के साथ किया था खुलासा। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जांच के लिए बनाई थी राधेश्याम मिश्रा कमेटी। मगर राधेश्याम मिश्रा रिटायर भी हो गए और उस कमेटी की रिपोर्ट आज तक नहीं आई। इस बीच अयोध्या में लगातार जारी हैं बेशकीमती ज़मीनों के साथ धोखाधड़ी के मामले। पूरी ख़बर TOP SECRET

abhishek upadhyay

25,132 просмотров • 2 месяцев назад

सब के सब फंस गए:– भाजपा, कांग्रेस, RLP, BAP एक बार फिर ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा दिए गए “होमवर्क” को कांग्रेस पार्टी पूरा करने में जुट गई है। पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने 30 मार्च के स्थान पर भविष्य में राजस्थान दिवस को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन मनाने की घोषणा की थी। जब राजस्थान की स्थापना की जा रही थी, तब राजप्रमुख सवाई मान सिंह द्वितीय ने आग्रह किया था कि “राजस्थान शक्ति और शौर्य की धरा है, अतः इसका स्थापना दिवस शक्ति के महापर्व नवरात्र के प्रथम दिवस पर ही होना चाहिए।” इस विचार को सरदार पटेल ने स्वीकार किया और राजस्थान की स्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत् 2006 को की गई। आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का अवसर है। शक्ति की इस भूमि राजस्थान का कण-कण शक्ति उपासना में लीन है, किन्तु प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने आज राजस्थान दिवस पर बधाई देना उचित नहीं समझा। हम जिस प्रदेश में रहते हैं, वहाँ विवाह, त्योहार, उत्सव तथा अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम भारतीय पंचांग के अनुसार ही निर्धारित किए जाते हैं। अधिकांश नेता भी चुनावी हलफनामा दाखिल करने से पूर्व ज्योतिष के अनुसार तिथि, समय, काल, ग्रह और नक्षत्र की जानकारी अवश्य लेते हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि कांग्रेस पुनः सत्ता में आती है, तो क्या वह राजस्थान दिवस को तिथि के स्थान पर फिर से 30 मार्च की निश्चित तारीख पर ले जाएगी? तिथि परिवर्तन के साथ उत्सव के प्रति उत्साह में यह कमी आखिर क्यों दिखाई देने लगी है? केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि हनुमान बेनीवाल और राजकुमार रोत जैसे नेताओं ने भी राजस्थान दिवस पर बधाई नहीं दी। यही नहीं, प्रदेश भाजपा भी अपने केंद्रीय नेतृत्व तक सही जानकारी पहुँचाने में असफल रही प्रतीत होती है। अभी तक प्रधानमंत्री, गृह मंत्री तथा भाजपा शासित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ओर से भी बधाई संदेश सामने नहीं आए हैं। खैर, प्रदेश इन दिनों मानो उत्साह और आनंद से दूर, नीरो की तरह बंशी बजाने में व्यस्त दिखाई देता है।

Dinesh Bohra

46,308 просмотров • 6 месяцев назад

📍अपन को LoP देवता जैसा चाहिए, मुखिया तो 'विदूषक' भी चलेगा..! अपन ने सुना है कि इंदौर में राहुल के मंच पर एक कॉमेडियन की चंद सेकंड की मौजूदगी से धरती हिल रही है। नैतिकता के ध्वजवाहकों ने कलप कलप कर महा जलप्लावन कर दिया है। तो अपन भी राहुल को लानत भेजते हैं। जी बिल्कुल ऐसी मिमिक्री और वो भी देश के मुखिया की नहीं होना चाहिए। उस कॉमेडियन ने किसी की मां का नाम लेकर भी कुछ हास परिहास किया। ये भी नहीं होना चाहिए। वैसे कॉमेडियन ने मुखिया जी की मां की बारे में कुछ नहीं कहा। ('मां के लिए कुर्सी लाओ' माननीय की आमसभा के उस स्क्रिप्टेड ड्रामा पर तंज था जिसमें माननीय एक ऐसी महिला के लिए कुर्सी लाने को कह रहे थे जिसके गले में VIP पास का पट्टा तक लटका था।) फिर भी कितना शुभ संकेत है कि हमारा समाज नैतिकता के ऐसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है जहां उसे विपक्ष के नेता के मंच से बित्ते भर की घटियाई मंज़ूर नहीं। अपन भी चाहते हैं कि विपक्ष का नेता चौबीस कैरेट सोने जैसा हो, कोहिनूर जैसा हो, देवता समान हो, भले ही देश का मुखिया कीचड़युक्त कोयला हो। अपन भी चाहते हैं कि विपक्ष के नेता के मंच से सुई की नोंक के बराबर घटियापन न हो भले ही ख़ुद देश का मुखिया छिछोरियाई की मिसाल कायम करता रहे। इस नैतिकता के तकाजे पर आप सबको एक हज़ार सलाम। (देश के मुखिया की कथनी करनी पर इस आगे सुबूतों के साथ सब बताएंगे।) अब कुछ सवाल.. १) क्या इंदौर में राहुल गांधी ने अपने मुंह से एक भी शब्द ऐसा बोला जो अनुचित हो? २) क्या राहुल गांधी ने अपने पूरे सार्वजनिक, राजनैतिक जीवन में कभी कोई एक भी शब्द स्त्री विरोधी कहा है? अगर कहा हो तो प्लीज बताएगा। ३) क्या राहुल से पहले किसी नेता ने किसी प्रधानमंत्री की खिल्ली नहीं उड़ाई? क्या ख़ुद माननीय ने कभी किसी पूर्व प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक शब्द नहीं कहे? ▪️ आइए अब माननीय जी के स्वयं के करतब और बोल वचन याद कर लीजिए। अगर आप 'गजनी' के संजय सिंघानिया नहीं बन गए हैं तो आपको याद होगा कि... १) एक बार भरे मंच से माननीय ने एक हाथ की उंगलियां मोड़ कर छेद जैसा बनाया और उस पर दूसरे हाथ की हथेली ठोकते रहे। ये कैसा किस बात का 'शालीन' इशारा था क्या आप बता सकते हैं? इसका वीडियो आप ख़ुद ढूंढ लीजिए। २) माननीय ने संसद में विपक्ष के नेता की खिल्ली उड़ाने को दोनों हाथों की उंगलियां नचा नचा कर जो प्रहसन किया था वो क्या था? (वीडियो संलग्न है ) २) माननीय ने अपने श्रीमुख से सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा, पार्टी की विधवा कहा था। ३) माननीय ने अपनी पवित्र जिह्वा से किसी दिवंगत महिला को पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था। ४) माननीय ने संसद में एक महिला सांसद को शूर्पणखा कहा था। क्या ये किसी महिला का सम्मान बढ़ाने वाला शब्द था? ५) माननीय ने संसद के भीतर विपक्ष के नेता को बाल बुद्धि कहा, बाहर खड़े होकर कहा कि मैं किसी 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा। क्या आज़ाद भारत के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेता पर ऐसे स्तरहीन व्यंग्य बाण चलाए हैं? ६) माननीय ने डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चों का मज़ाक बनाते हुए नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा था और उस समय उनकी मां तक पर कटाक्ष किया था। ये किस स्तर की राजनीति थी? ७) माननीय ने डॉ मनोहन सिंह को मौन मोहन कहा, देहाती औरत कहा था। क्या ये किसी पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान नहीं था? ८) संसद में खड़े होकर माननीय ने मनमोहन सिंह के लिए कहा था कि वे बाथरूम में रैन कोट पहन कर नहाने हैं। ये किस नैतिकता के उच्चतम स्तर की भाषा थी? ९) एक महिला मुख्यमंत्री को भरी सभा में सड़कछाप शोहदों की तरह दीदी ओ दीदी कह कर बुलाना किस भाषाई संस्कार की नुमाइश थी? आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को एक अख़बार की हैडलाइन में 'कमेंटमारा ब्यॉय' लिखा गया। मतलब सड़क पर लड़कियों पर कमेंट करने वाले लफंगा। (देखें द टेलीग्राफ) १०) अंतर्राष्ट्रीय दौरों पर माननीय के क्रियाकलाप की सूची बनाने का काम आप खुद कर लीजिए। विदूषकों जैसे करतबों की इतनी लंबी फेहरिस्त है कि आप गिनते गिनते थक जायेंगे। लेकिन इन अनगिनत स्तरहीन हरकतों और बोल वचन को हमारा नैतिकतावादी समाज अमृत समझ कर पी जाता है। कल से अब तक जितने लोग राहुल के मंच पर मिमिक्री से मचल रहे हैं उनमें से किसी ने भी माननीय के विदूषकों जैसे व्यवहार पर कभी एक शब्द नहीं लिखा। काहे...?

Dr.Rakesh Pathak डॉ. राकेश पाठक راکیش

58,058 просмотров • 13 дней назад

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी आज बिहार में है। प्रदेश में 𝟐𝟎 वर्षों से उनकी 𝐍𝐃𝐀 सरकार और केंद्र में 𝟏𝟏 वर्षों से है। बिहारवासी उनसे झूठ और जुमला नहीं बल्कि कुछ वाज़िब सवाल पूछना चाहते है। 𝟏. प्रधानमंत्री जी कहते थे कि 𝟐𝟎𝟐𝟐 तक किसानों की आय दुगुनी करेंगे लेकिन अब 𝟐𝟎𝟐𝟓 आ गया किसानों की आय दुगुनी करना तो दूर कमरतोड़ महंगाई और बेरोज़गारी के कारण उनकी आय कम ज़रूर हो गयी है। इसका दोषी कौन? 𝟐. बिहार के किसानों की समस्याएँ, चुनौतियां और संकट अन्य राज्यों की तुलना में अलग है। बिहार में खेतिहर मज़दूर और बटाईदार अधिक है। उनके लिए डबल इंजन सरकार ने क्या विशेष किया? 𝟑. बिहार के किसानों की आय देश में सबसे कम क्यों है? 𝟒. बिहार में साक्षरता दर देश में सबसे कम क्यों है? 𝟓. प्रति व्यक्ति निवेश सबसे कम बिहार में क्यों है? 𝟔. केंद्र की पीएम श्री मेगा टेक्सटाइल पार्क योजना के तहत बिहार को टेक्सटाइल पार्क क्यों नहीं दिया? 𝟕. प्रदेश में 𝐍𝐃𝐀 के 𝟐𝟎 वर्षों के शासन के बाद भी गरीबी और बेरोजगारी में बिहार अव्वल क्यों है? 𝟖. बिहार के विशेष राज्य के दर्जे और विशेष पैकेज का क्या हुआ? 𝟗. 𝟐𝟎𝟏𝟒 में मोतिहारी की चीनी मिल शुरू करवा उसकी चीनी से चाय पीने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री जी बताएँ कि मोतिहारी की चीनी मिल की चाय कब पियेंगे? 𝟏𝟎. प्रधानमंत्री जी बताएँ कि वो मधुबनी, सारण, गोपालगंज, नवादा, मुज़फ़्फ़रपुर की बंद पड़ी चीनी मिलों को कब शुरू करायेंगे? 𝟏𝟏. प्रधानमंत्री जी बताएँ कि वो कटिहार में जूट मिल कब शुरू करेंगे? 𝟏𝟐. प्रधानमंत्री जी बताएँ वो बेरोज़गारों को रेलवे और आर्मी में नौकरियां कब देना शुरू करेंगे? 𝟏𝟑. प्रधानमंत्री जी बताएँ कि वो महागठबंधन की बिहार सरकार से पारित 𝟔𝟓% आरक्षण को संविधान की 𝟗वीं अनुसूची में शामिल क्यों नहीं कर रहे? 𝟏𝟒. प्रधानमंत्री जी बताएँ कि वो देश में जातिगत जनगणना क्यों नहीं करा रहे? 𝟏𝟓. देश में सबसे अधिक पलायन बिहार से होता है। आपने बिहार से पलायन रोकने के लिए क्या किया? सर्वविदित है कि चुनावी वर्ष में आगामी कुछ महीनों तक आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी को बिहार और बिहारियों की गजब चिंता सताएगी। इस वर्ष उन्हें गंगा मैया, छठी मैया, जानकी मैया, माता सीता, ब्रह्म बाबा, महादेव, सूर्य देव, महात्मा बुद्ध, गुरु गोविंद सिंह, जननायक कर्पूरी ठाकुर, लिट्ठी-चोखा, ठेकुआ, मखाना, आम, लिची, सिल्क उद्योग, कथित विशेष पैकेज इत्यादि सब की जुबानी याद आएगी। ऐसी याद की भाव-विभोर भी हो सकते है। 𝟏𝟏 वर्ष से आप प्रधानमंत्री है, प्रदेश में 𝟐𝟎 वर्षों से आपकी सरकार है लेकिन बिहार को कुछ भी विशेष नहीं मिला है और ना ही मिलने की उम्मीद है। बिहारवासी अब झूठ, जुमले और प्रचार नहीं चाहते। #RJD #TejashwiYadav #Bihar

Tejashwi Yadav

86,117 просмотров • 1 год назад

मित्रों, धनबाद में कोयले का काला साम्राज्य कोई नई बात नहीं है, लेकिन मौजूदा सरकार में इसका चरित्र पूरी तरह बदल गया है। पहले माफिया चोरी करता था और पुलिस को कमीशन देता था। आज स्थिति यह है कि पुलिस और प्रशासन ने माफिया को हटाकर खुद माफिया का चोला पहन लिया है। अब साझेदारी नहीं, बल्कि पुलिस अधिकारी सीधे तौर पर कोयला खदानें चला रहे हैं। आज हम उस सिंडिकेट का पर्दाफाश कर रहे हैं जो धनबाद में कोड-वर्ड्स (Code Words) के जरिए चल रहा है। असली अपराधी पकड़े न जाएं, इसलिए गुर्गों को कोड नेम दिए गए हैं। मैं आपको सिलसिलेवार बताता हूँ कि कौन सी साइट, किस कोड नेम से, किस अधिकारी के संरक्षण में चल रही है। सबसे पहले 'भौरा साइट', जिसे 'अरविंद' और 'करण' नाम के कोड वर्ड वाले दो लोग चला रहे हैं। ये दोनों सीधे तौर पर धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार के आदमी हैं। दूसरी है 'कुजामा साइट'। यहाँ तीन कोड वर्ड काम कर रहे हैं—'आकाश', 'मनीष' और 'अजय'। इसमें 'आकाश' एसएसपी धनबाद का आदमी है, 'अजय' कुंभनाथ सिंह का आदमी है और 'मनीष' मुकेश सिंह का आदमी है। तीसरी 'पंचेत साइट', जिसे 'अंजनी' नाम के कोड वर्ड से चलाया जा रहा है। यह व्यक्ति पंकज मिश्रा का आदमी है। चौथी 'निरसा साइट', जिसे संजय सिंह चला रहा है। यह उसका असली नाम है और यह भी धनबाद एसएसपी का खास आदमी है। पाँचवी 'गोपालीचक' और 'बायसबारा साइट', जिसे कौशल पांडे चला रहा है। यह भी एसएसपी धनबाद का ही आदमी है। हद तो तब हो गई है जब 'बरोरा', 'तेदुलमारी', 'जमुनिया' और 'रामकनाली' जैसी बड़ी साइट्स को कोई गुर्गा नहीं, बल्कि बाघमारा के डीएसपी पुरुषोत्तम सिंह खुद चला रहे हैं। एक डीएसपी सीधे तौर पर कोयला खनन करवा रहा है। धनबाद में इस वक्त अवैध व्यापार के तीन केंद्र बन चुके हैं—बाघमारा, निरसा और झरिया। इनके अंतर्गत 25 थाने और 40 अवैध साइट्स चल रही हैं। यहाँ से हर दिन 150 से 200 ट्रक, यानी करीब 10,000 टन अवैध कोयला बंगाल और लोकल मंडियों में खपाया जा रहा है। यह पूरा खेल एक व्यवस्थित पदानुक्रम (Hierarchy) में चल रहा है। 'हाउस' (House) यानी सत्ता का शीर्ष केंद्र 'महाराजा' की भूमिका में है। एसएसपी महोदय 'प्रधान सेनापति' हैं और डीसी साहब 'महामंत्री' हैं। इन सभी का प्रॉफिट शेयर फिक्स है। धनबाद एसएसपी ने वसूली का एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम बना रखा है। जिले के थानेदार, डीएसपी, सीओ से लेकर माइनिंग ऑफिसर तक—सबका हिस्सा तय है। इस वसूली सिंडिकेट के राइट हैंड़ हैं बाघमारा डीएसपी पुरुषोत्तम सिंह और लेफ्ट हैंड़ हैं इंस्पेक्टर अजीत भारती। ये दोनों मिलकर मलाईदार थानों की बोली लगाते हैं और जो सबसे ज्यादा बोली लगाता है, उसे ही थानेदारी मिलती है। डीएसपी पुरुषोत्तम सिंह, जो पूर्व में मुख्यमंत्री की सुरक्षा में रहे हैं, अपनी उस पहुंच का धौंस जमाकर वसूली करते हैं। इनका खौफ इतना है कि सभी माइनिंग साइट्स में इन्होंने 50% की पार्टनरशिप जबरन ले रखी है। इसमें पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की भूमिका 'संरक्षक' की रही है। जब वे सीआईडी (CID) और डीजीपी (DGP) दोनों प्रभार में थे, तो दोनों पदों की अलग-अलग फीस वसूलते थे। यह पैसा बाघमारा डीएसपी उन तक पहुंचाते थे। गंभीर बात यह है कि उनके हटने के बाद आज भी 'डीजीपी' के नाम पर वसूली जारी है। अब यह पैसा किस डीजीपी को जा रहा है, यह एक बड़ी जांच का विषय है। अंत में, इस लूट की कीमत आम मजदूरों को जान देकर चुकानी पड़ रही है। एसएसपी साहब ने 'हाउस' में कुछ ज्यादा ही बड़ा कमिटमेंट कर दिया है, जिसे पूरा करने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बरसात में कई मजदूरों की खदान में दबकर मौत हुई, लेकिन प्रशासन ने पैसे और पावर के दम पर उनका मुँह बंद करा दिया और खबरें बाहर नहीं आने दीं। PMO India गृहमंत्री कार्यालय, HMO India ED Central Bureau of Investigation (India) Income Tax India ANI Press Trust of India IANS

Babulal Marandi

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👉 आज सरकार ने जनगणना की अधिसूचना जारी की है. यह कोई अजूबा काम नहीं किया है. यह हर 10 साल पर किया जाता है. यह काम तो इस बार बहुत देरी से किया जा रहा है, संविधान के 7वें Schedule के अनुसार जनगणना कराना केंद्र सरकार का काम है 🔺लेकिन इसमें जाति जनगणना का कोई ज़िक्र नहीं है 🔺जबकि 30 अप्रैल को सरकार ने कहा था कि जाति जनगणना होगी 👉 इस सरकार की कथनी और करनी में बहुत अंतर है. यह लोग विश्वास के लायक नहीं हैं 👉 एक बात यह भी सच है कि BJP और RSS वस्तुतः तो जाति जनगणना के ख़िलाफ़ ही हैं 👉 यह दलित, पिछड़े, आदिवासियों को सामाजिक न्याय मिलने से हमेशा से ही असहज रहे हैं ▪️1949 में यह संविधान की प्रतियां और बाबा साहेब की तस्वीरें जलाते थे ▪️इनके बड़े नेता सावरकर, गोलवलकर, श्याम प्रसाद मुखर्जी संविधान और बाबा साहेब को लगातार भला बुरा कहते थे ▪️RSS ने प्रस्ताव पारित करके जातिगत जनगणना का विरोध किया था. RSS शुरु से ही पिछडों एवं दलितों के खिलाफ रही है. 100 साल मे RSS का एक भी अध्यक्ष दलित या पिछड़े वर्ग से नहीं हुआ ▪️7 अगस्त 1990 को विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार से भाजपा ने मण्डल कमीशन की रिपोर्ट स्वीकार करने पर समर्थन वापस लिया ▪️1994 से 2000 के बीच तत्कालीन संघ प्रमुख राजेंद्र सिंह ने लगातार आरक्षण को हटाने की माँग की ▪️2010 में जब कांग्रेस ने सदन में जातिगत जनगणना का प्रस्ताव रखा तब BJP के मुरली मनोहर जोशी ने उसका पुरज़ोर विरोध किया था ▪️सितंबर 2015 में RSS के मुखपत्रों ‘पाञ्चजन्य’ और ‘ऑर्गेनाइज़र’ को दिए एक इंटरव्यू में ख़ुद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की ‘समीक्षा’ किए जाने की माँग के साथ ही आरक्षण का विरोध किया था ▪️2017 में RSS के तत्कालीन प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने आरक्षण को जारी रखने का विरोध किया था ▪️जुलाई 2021 में सांसद रक्षा खंडसे के सदन में पूछे प्रश्न पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार का जातिगत जनगणना का कोई इरादा नहीं है ▪️सितंबर 2021 में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा था वह जातिगत जनगणना नहीं करायेंगे - वो इसके ख़िलाफ़ हैं ▪️अप्रैल 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था जातिगत जनगणना की माँग करने वाले अर्बन नक्सल हैं ▪️वो पहले ही जाति को नकार कर सिर्फ़ 4 ही जातियों की बात कर रहे थे ▪️पूरे चुनाव में उनके तमाम बड़े नेता संविधान बदलने का दंभ भर रहे थे ▪️ख़ुद योगी आदित्यनाथ जैसे लोग आरक्षण के ख़िलाफ़ बोल रहे थे 👉 लेकिन राहुल गांधी जातिगत जनगणना की अपनी माँग पर टिके रहे, और अंततोगत्वा उन्होंने इस सरकार को नाक रगड़ कर जातिगत जनगणना के लिए मजबूर कर दिया 🔺पर आज की अधिसूचना में जाति जनगणना ना आना संशय पैदा करता है 🔺लेकिन एक बात याद रखिएगा, अब कोई खेल नहीं चलेगा, अब पलटी मारने नहीं दी जाएगी 👉 आप कितनी भी कोशिश कर लीजिए, राहुल गांधी आपसे जातिगत जनगणना करा के ही मानेंगे

Supriya Shrinate

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👉 आज सरकार ने जनगणना की अधिसूचना जारी की है। यह कोई अजूबा काम नहीं किया है। यह हर 10 साल पर किया जाता है यह काम तो इस बार बहुत देरी से किया जा रहा है, संविधान के 7वें Schedule के अनुसार जनगणना कराना केंद्र सरकार का काम है। 🔺लेकिन इसमें जाति जनगणना का कोई ज़िक्र नहीं है 🔺जबकि 30 अप्रैल को सरकार ने कहा था कि जाति जनगणना होगी 👉 इस सरकार की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। यह लोग विश्वास के लायक नहीं हैं 👉 एक बात यह भी सच है कि BJP और RSS वस्तुतः तो जाति जनगणना के ख़िलाफ़ ही हैं 👉 यह दलित, पिछड़े, आदिवासियों को सामाजिक न्याय मिलने से हमेशा से ही असहज रहे हैं ▪️1949 में यह संविधान की प्रतियां और बाबा साहेब की तस्वीरें जलाते थे ▪️इनके बड़े नेता सावरकर, गोलवलकर, श्याम प्रसाद मुखर्जी संविधान और बाबा साहेब को लगातार भला बुरा कहते थे ▪️RSS ने प्रस्ताव पारित करके जातिगत जनगणना का विरोध किया था. RSS शुरु से ही पिछडों एवं दलितों के खिलाफ रही है. 100 साल मे RSS का एक भी अध्यक्ष दलित या पिछड़े वर्ग से नहीं हुआ ▪️7 अगस्त 1990 को विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार से भाजपा ने मण्डल कमीशन की रिपोर्ट स्वीकार करने पर समर्थन वापस लिया ▪️1994 से 2000 के बीच तत्कालीन संघ प्रमुख राजेंद्र सिंह ने लगातार आरक्षण को हटाने की माँग की ▪️2010 में जब कांग्रेस ने सदन में जातिगत जनगणना का प्रस्ताव रखा तब BJP के मुरली मनोहर जोशी ने उसका पुरज़ोर विरोध किया था ▪️सितंबर 2015 में RSS के मुखपत्रों ‘पाञ्चजन्य’ और ‘ऑर्गेनाइज़र’ को दिए एक इंटरव्यू में ख़ुद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की ‘समीक्षा’ किए जाने की माँग के साथ ही आरक्षण का विरोध किया था ▪️2017 में RSS के तत्कालीन प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने आरक्षण को जारी रखने का विरोध किया था ▪️जुलाई 2021 में सांसद रक्षा खंडसे के सदन में पूछे प्रश्न पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार का जातिगत जनगणना का कोई इरादा नहीं है ▪️सितंबर 2021 में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा था वह जातिगत जनगणना नहीं करायेंगे - वो इसके ख़िलाफ़ हैं ▪️अप्रैल 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जातिगत जनगणना की मांग करने वाले अर्बन नक्सल हैं ▪️वो पहले ही जाति को नकार कर सिर्फ़ 4 ही जातियों की बात कर रहे थे ▪️पूरे चुनाव में उनके तमाम बड़े नेता संविधान बदलने का दंभ भर रहे थे ▪️ख़ुद योगी आदित्यनाथ जैसे लोग आरक्षण के ख़िलाफ़ बोल रहे थे 👉 लेकिन राहुल गांधी जातिगत जनगणना की अपनी मांग पर टिके रहे, और अंततोगत्वा उन्होंने इस सरकार को नाक रगड़ कर जातिगत जनगणना के लिए मजबूर कर दिया 🔺पर आज की अधिसूचना में जाति जनगणना ना आना संशय पैदा करता है 🔺लेकिन एक बात याद रखिएगा, अब कोई खेल नहीं चलेगा, अब पलटी मारने नहीं दी जाएगी 👉 आप कितनी भी कोशिश कर लीजिए, राहुल गांधी आपसे जातिगत जनगणना करा के ही मानेंगे : Supriya Shrinate जी

Congress

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चर्चा के बहाने रोहिड़ी के दिन भी बहुरेंगे… अरविन्द चोटिया @ रोहिड़ी इससे पहले कभी चर्चा में नहीं आया। जब से शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने रोहिड़ी म्यूजिक फेस्टिवल तेवड़ा है, तभी से रोहिड़ी लोगों की जुबान पर आया है। असल में यह एक गांव है और इसके पास है विस्तृत मरुस्थल। जोरदार सुनहरे धोरे, जिनका ओर-छोर दिखाई नहीं देता। राजस्थान में जैसलमेर के सम का मरुस्थल सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है और जैसलमेर के पर्यटन व्यवसायियों ने उसी मरुस्थलीय क्षेत्र का जोरदार दोहन किया है। करोड़ों रुपए कमाए हैं और करोड़ों रुपए हर साल कमा रहे हैं। दैनिक भास्कर में काम करते हुए करीब दो वर्ष पूर्व मैं जब राजस्थान के अनदेखे और कम देखे गए पहलुओं की तलाश में घूम रहा था तब मैंने बाड़मेर से शिव होते हुए जैसलमेर जाने का प्लान किया हुआ था। बहुत सीधा रास्ता था। 31 दिसंबर, 2022 का दिन था। शिव से जैसलमेर पूरा 100 किलोमीटर पड़ रहा था और चमचमाता हाईवे था। डेढ़ घंटे से ज्यादा समय लगने की संभावना ही नहीं थी। मैं 31 की शाम सम के धोरों पर पहुंचना चाहता था। शिव में मुझे रविंद्र सिंह भाटी मिले। तब वे विधायक नहीं थे। मेरी यात्रा का उद्देश्य पूछने पर उन्होंने सुझाव दिया कि दादा, आपको गडरा रोड होते हुए जैसलमेर जाना चाहिए ताकि आप वहां रोहिड़ी का डेजर्ट भी देख सको। मुझे रोहिड़ी के डेजर्ट के बारे में तब कुछ भी जानकारी नहीं थी जबकि सम के धोरे जाने-पहचाने थे और यह भी पता था कि वे आज गुलजार होंगे, फिर भी मैंने रविंद्र की बात मानते हुए गडरा रोड का रुख किया। सड़क उतनी अच्छी नहीं थी, सफर थकाऊ था लेकिन भारतमाला सड़क पर जैसे ही रोहिड़ी का डेजर्ट देखा, सारी थकान दूर हो गई और एक नई स्फूर्ति आ गई। यह एक अनछुआ मरुस्थल था। इक्के-दुक्के आदमी के अलावा कोई नहीं था। दूर-दूर तक रेत की लहरें ही लहरें। जैसे रेत का समुद्र। (उसी दिन का बनाया हुआ वीडियो इस पोस्ट में संलग्न कर रहा हूं।) रेत के इस समुद्र के दोहन की अपार संभावनाएं तो थी ही और हैं ही। कभी अवसर मिले तो यह स्थान देखने जरूर जाइए। रोहिड़ी म्यूजिक फेस्टिवल के बहाने यहां पर्यटन की उन्हीं संभावनाओं को पंख लग सकते थे। किसी भी नए डेस्टिनेशन की तलाश और पहचान इसी तरह बनती है। कोई जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के लिए यही कर सकता है कि वह रोजगार-व्यापार के नए रास्ते खोले, नई राह दिखाए। हालांकि बाड़मेर जिला प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि का हवाला देते हुए आयोजन की पहले से दी हुई अनुमति को रद्द कर दिया है। कहा जा रहा है कि यह अनुमति राजनीतिक द्वेष और दुर्भावनावश रद्द की गई है लेकिन सरकार को सुझाव है कि ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देना चाहिए। जैसलमेर का तनोट राय माता तो एन बॉर्डर पर ही है और इन दिनों वहां हजारों पर्यटक रोजाना आते हैं। सुरक्षा की व्यवस्था हमारे रक्षकों ने बनाई हुई है। वाघा बॉर्डर पर प्रतिदिन ही हजारों पर्यटक आते हैं और वहां भी सुरक्षा की जबर्दस्त व्यवस्था कायम की हुई है। कायदे से तो राजस्थान के पर्यटन विभाग और केंद्र के पर्यटन मंत्रालय को इस आयोजन में भागीदारी करते हुए इसे नेक्स्ट लेवल पर ले जाने की कोशिश करनी चाहिए थी। सौभाग्य से राजस्थान की पर्यटन मंत्री दीया कुमारी पर्यटन व्यवसाय की जानकार हैं और सौभाग्य से ही केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत राजस्थान से ही हैं और पश्चिमी राजस्थान से भी हैं। संभवत: यह एक अवसर को चूकने जैसा है। सरकारों को आगे विचार करना चाहिए कि वह रोहिड़ी जैसे संभावनाशील स्थान को पर्यटन मानचित्र पर कैसे ला सकती है और इसके जरिए बाड़मेर के इस उपेक्षित क्षेत्र के लोगों के जीवन में क्या बदलाव जा सकती है। फिलहाल, रोहिड़ी चर्चा में आ गया है। आने वाले समय में इस पर चर्चा होती रहेगी और यहां के गरीब लोगों को रोजगार भी मिलेंगे ही। Ravindra Singh Bhati Diya Kumari Gajendra Singh Shekhawat Bhajanlal Sharma #रोहिडी_म्यूजिक_फेस्टिवल #रोहिड़ी_म्यूजिक_फेस्टिवल #रोहिड़ी #Rajasthan

Arvind Chotia

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हडपसर विधानसभेचे उमेदवार श्री. साईनाथ बाबर यांच्या प्रचारार्थ हडपसर येथे आज जाहीर सभा घेतली, त्या सभेतील महत्वाचे मुद्दे १) २००९ ला हडपसर मतदारसंघ तयार झाला. इथली गावं महापालिकेत आली. आज कित्येक लोकं म्हणतात की आमची गावं होती ती बरी होती, विनाकारण महापालिकेत आलो. या संपूर्ण भागाचा विचका ट्रॅफिकने झाला आहे. आज महाराष्ट्रात मी असे अनेक भाग बघतो, त्याची अवस्था अशी आहे की मरण येत नाही म्हणून जिवंत आहोत. रोजच्या जगण्यातील स्वस्थता गेली आहे, लहान मुलांना बाहेर पाठवताना माता-भगिनींना धाकधूक होते. आणि या मूळ प्रश्नांकडे लक्ष जाऊ नये म्हणून तुम्हाला नको त्या प्रश्नांमध्ये गुंतवलं जातं. २) महाराष्ट्राच्या राजकारणाचा जातींनी झालेला विचका मोठा आहे. जातीपातीत तुम्ही गुंतून पडावं आणि तुमचं मतदान काढून घ्यायचं असं सुरु आहे. ३) मराठवाड्यातील दुर्दैवी घटना सांगतो. एका गावातील घरात निधन झालं, घरात तीन माणसं, मृत व्यक्तीला खांदा द्यायला माणूस नव्हता, नातेवाईक यायला सहा तास लागले, म्हणून अंत्यसंस्कार थांबले. दुसऱ्या जातीची माणसं बहुसंख्य माणसं शांतपणे बघत राहिली पण कोणी पुढे आलं नाही. याहून दुर्दवी घटना काय असू शकते ? हे सगळं विष पेरलं गेलं ते शरद पवारांच्या राष्ट्रवादी काँग्रेसच्या स्थापनेनंतर. ४) आज महाराष्ट्रात अशी अवस्था आहे की महापुरुषांना आपण जातीत विभागलं आहे. महाराष्ट्रात जातीबद्दलचं प्रेम होतं, पण दुसऱ्या जातीबद्दल द्वेष कधीच नव्हता. आपल्याकडे आत्ता काय पसरतंय याचा विचार केलाय का ? इथल्या मोहल्ल्यांमध्ये सिमी, आयसिसचे अतिरेकी सापडलेत. बरं जे सापडले ते सापडले पण जे नाही सापडले ते काय करतील ? ५) शहरांचा सत्यानाश झाला आहे, इथे रोजगार मिळत नाहीयेत, इथे महिला सुरक्षित नाहीयेत, लोकांना घरं परवडत नाहीयेत, हॉस्पिटलमध्ये बेड मिळत नाहीयेत आणि तरीही या सगळ्याची चिंता करायची सोडून सत्ताधारी आणि विरोधक तुम्हाला जातीत गुंतवतात... ६) इथे छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या पुतळ्याची अहवलेंना केली गेली, त्यावेळेला फक्त आमचा साईनाथ रस्त्यावर उतरला होता. त्यावेळेला आमदार आणि इतर पक्षांचे नेते कुठे होते ? अशा माणसांच्या हातात सत्ता देणार का तुमच्यासाठी धावून येणारा साईनाथ सत्तेत हवा ? विचार करा साईनाथ आमदार झाले तर तुमच्यासाठी रात्रीअपरात्री धावून येतील. ७) तुम्ही कुठल्याही पुण्यातील असो की मुंबईतील किंवा ठाण्यातील किंवा अगदी कुठल्याही शहरातील जुन्या माणसाला विचारून बघा की तुम्हाला तुमचं जुनं शहर हवं का नवं तर लोकं उत्तर देतात जुनं शहर. पण दुबईत विचारून बघा तिथल्या लोकांना, कुठलं शहर आवडतं तर म्हणतील आत्ताची दुबई आवडते, का तर तिथल्या माणसांची गरज लक्षात ठेवून दुबई घडवली आहे. ८) ५ वर्षात मी तुम्हाला सगळं बदलून दाखवेन असं सांगणार नाही, पण या ५ वर्षात असं काम करून दाखवेन की ज्याने तुम्हाला पुढची ५ वर्ष आम्हाला सत्तेत परत आणावं असं वाटेल, इतकं सुंदर आणि मनापासून काम करून दाखवेन, ९) महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना हा राज्यातील नाहीतर देशातील एकमेव पक्ष आहे ज्याने राज्याचा विकास आराखडा मांडला. मला खुर्चीचा सोस नाही. मी शिवछ्त्रपतींच्या राज्यात जन्माला आलो आहे, त्या राज्याचं गतवैभव मला परत आणायचं आहे. १०) आज माझी मुलाखत घ्यायला येणारे पत्रकार मला फक्त यांनी असं म्हणलं त्यांनी तसं म्हणलं यावरच प्रश्न विचारतात. पण कोणी महाराष्ट्राच्या विकासाबद्दल बोलत नाही. माझी तुम्हाला विनंती आहे की तुम्ही विसरू नका हे महाराष्ट्र राजय आहे, कोणतं लेचापेचं राज्य नाही. या राज्याला इतिहासाला भूगोल पण आहे आणि इतिहास पण आहे. अशा राज्याच्या विकासाबद्दल तळमळीने बोलणाऱ्या माझ्या पक्षाला, माझ्या उमेदवारांना निवडून द्या. मला महाराष्ट्र बदलायचा आहे, यासाठी मला तुमची साथ हवी आहे. माझी तुम्हाला हात जोडून विनंती आहे की या राज्यात तमाशा करणाऱ्यांना एकदा धडा शिकवा, आणि तुम्ही जर धडा नाही शिकवलात तर या सगळ्यांची खात्री पटेल की तुम्ही काहीही केलंत तरी सगळं चालून जातं. ११) मला आणि माझ्या उमेदवारांना एकदा संधी देऊन बघा. माझा साईनाथ तर आहेच पण जिथे जिथे उमेदवार उभे असतील त्या प्रत्येकाला मतदान करा. मी सगळ्या मतदारसंघात पोहचूच शकत नाही, त्यामुळे मी इथून प्रत्येकाला आवाहन करतो की माझ्या सगळ्या उमेदवारांना प्रचंड मतांनी विजयी करा.

Raj Thackeray

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बेलापूर विधानसभेचे उमेदवार श्री. गजानन काळे आणि ऐरोली मतदारसंघाचे उमेदवार श्री. निलेश बाणखेले यांच्या प्रचारार्थ बेलापूर येथे जाहीर सभा घेतली. त्या सभेतील महत्वाचे मुद्दे १) या भागाला नवी मुंबई म्हणतात कारण त्यावेळच्या राज्यकर्त्यांचा विचार व्यापक होता. मुंबई आणि त्याला लागून नवी मुंबई उभी करावी हा विचार वसंतराव नाईकांच्या डोक्यात आला. कारण त्यांच्या लक्षात आलं की १९५० ते १९७० या २० वर्षात मुंबईची लोकसंख्या दुपटीने वाढली. आणि आता यापुढे मुंबई माणसं घेऊ शकणार नाही म्हणून नवी मुंबईला आकार देण्यात आला. पुढे मुंबईत बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स उभं राहिलं. हे सगळं उभं करताना शहर कसं उभं करायचं याचा विचार केला गेलाच नाही. ब्रिटिशांनी मुंबई उभी करताना खूप विचार केला. आपल्याकडे शहराचा विकास आराखडा बनवला जातो पण इथे शहर नियोजन आराखडा बनवला जात नाही. २) ब्रिटिशांनी मुंबई उभारताना अनेक मैदानं उभी केली. पण त्यानंतर जी शहरं उभी राहिली त्यात कुठे मैदानं दिसत नाहीत. आज नवी मुंबईत खाजगी क्रीडासंकुल आहे पण सरकारी क्रीडासंकुल का नाही ? नवी मुंबईत फक्त एक नाट्यगृह का आहे ? हेच मुंबईत बघा तर किती नाट्यगृहं आहेत. नवी मुंबईत शिवाजी पार्कसारखं किंवा आझाद मैदानासारखं मैदान आहे? नाहीये... ३) ब्रिटिशांनी अनेक हॉस्पिटल्स एकत्र करणारा एक भाग बनवला. थोडक्यात लोकसंख्येला काय काय लागेल याचा केवढा विचार ब्रिटिशांनी केला ? पण नवी मुंबईत समजा एखाद्या कुटुंबाला कुठे जायचं असेल तर कुठे जायचं ? मॉलमध्ये ? थोडक्यात काय शहराच्या कुठल्याच गरजांचा विचार केला जात नाही. ४) गेली ६०-७० वर्ष निवडणुका होत आहे, पण तेच प्रश्न, तीच आश्वासनं हेच सुरु आहे आणि जगणं तसंच सुरु आहे. याला काय अर्थ आहे ? आपल्याकडे प्रगती म्हणजे विविध उपकरणं येणं, गाड्या येणं इतकं नसतं. मला विकासाचा विचार इतका तोकड्या पद्धतीने करता येत नाही. महाराष्ट्राचा विकास आराखडा मांडणारा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना हा एकमेव पक्ष होता. बरं तो जाहीरनामा होता, तर प्रत्येक प्रश्नावरच उत्तर आम्ही त्यात दिलं. ५) आज नवी मुंबईत एकाच घरातील २,२ जणं वेगवेगळ्या पक्षातून उभे आहेत, दिवसभर वेगवेगळ्या पक्षातून फिरतात रात्री घरी पुन्हा एकत्र येतात. काय चाललं आहे नवी मुंबईत ? ६) नाशिकमध्ये ५ वर्ष आमची सत्ता होती, त्या ५ वर्षाच्या काळात आम्ही मुकणे धरणांतून थेट पाईपलाईन टाकून नाशिकमध्ये पाणी आणलं, आणि नाशिक शहराचा ५० वर्षांचा प्रश्न सोडवला. असा विचार इतर कोणी करतं का हो तुमच्यासाठी ? ७) रतन टाटा गेल्यावर संपूर्ण भारत हळहळला. एक सज्जन आणि सरळ उद्योगपती गेला म्हणून लोकं दुखी झाले. का दुःखी झाले ? कारण लोकांना सरळ, सज्जन माणसं आवडतात जर सरळ, सज्जन माणसं लोकांना आवडतात, तर मग लोकांना सरळ विचार करणारे राजकारणी का नाही आवडत ? तिथेच नेमकी वेडावाकडा विचार करणारी आणि कृती करणारी माणसं का निवडता तुम्ही ? ८) महाराष्ट्रात दुकानांवर मराठी मध्ये पाट्या लागत नव्हत्या, मी साधंसोपं पत्र लिहिलं आणि त्यात त्यांना लिहिलं की तुम्ही ठरवाव की दुकानाची पाटी महाग आहे का दुकान महाग आहे ? आणि पुढे त्या पत्रात लिहीलं की जर तुम्ही पाट्या नाही केलात तर माझे महाराष्ट् सैनिक तुम्हाला भेटीला येतील. आणि पाट्या झाल्या. आम्ही सत्तेत नसताना कामं करून दाखवत असू तर सत्तेत आल्यावर किती कामं करू याचा विचार करा. ९) माझी सगळ्यांना हात जोडून विनंती आहे की महाराष्ट्रातील माझ्या उमेदवारांना प्रचंड मतांनी विजयी करा. #विधानसभा_२०२४

Raj Thackeray

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