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आजतक सी-वोटर सर्वे: आज चुनाव होने पर उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी पिछली बार से भी ज्यादा बढ़त बना रही है 🫡
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27 Kommentare

Ye farzi servey hai isse dekh ke aaram se mat baith jana it's a trap 4.5 from godi media

मैं इसज दौ कौड़ी के सर्वे को खारिज करता हूं क्योंकि लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के अंदर SP+INC को 43.52% वोट मिला था और अभी आजतक चैनल 40% वोट दिखा रहा है मतलब 3.52% लोग विपक्ष से नाराज हो गये हैं क्यों? क्योंकि मौजूदा योगी सरकार में पेपर लीक, टीचर वैकेंसी न आना, मंदिर दानपेटी लूट, घटिया मिड डे मील, स्मार्ट मीटर लूट, DAP की कमी, UPI पर टैक्स की प्लानिंग चालू है मुझे ये नहीं समझ आता कि इन घटनाओं से भाजपा का वोट घटना चाहिए या इंडिया गठबंधन का? मैं आजतक जैसे चाटूकार चैनल के घटिया सर्वे को खारिज करता हूं मैं सपा+कांग्रेस का वोट शेयर मौजूदा वक्त पर 44.20% पर देख रहा हूं और सीटों के मामले में 58/80

सारा खेल PR का है ये सब भी जानते है कि अभी इस हालात में जब GenZ के मुद्दे पर भाजपा को लगातार मुह की खानी पड रही तो भला इस समय BJP के पक्ष मे सर्वे दिखाना इसके लिए कितना घातक सिद्ध होगा टोटल फालतू सर्वे है क्योंकि न तो ये अपना सोर्स डिक्लेर करते है और न ही सर्वे का रियल डेटा

Samajwadi Party Aaj Loksabha chunav ho jaaye toh 45-47 seats jeetegi 80 mese bjp 34 cross nhi kr payegi 🚲🚲🔥🔥

And i am damn sure the numbers are gonna be more than they are showing

55+ रहेगी इंडिया गठबंधन, ये झूठ बोल रही है

इन लोगों पे कब से भरोसा करने लग गए भईया 😂

Up mei aur increase ho skti 2029 mei lekin iss dalal ka yeh kehna ki bjpee 240 ke neeche nhi jaa rhi , btata hai kaise kia hai inhone survey

*उत्तर प्रदेश की राजनीति: 'हिंदू-मुस्लिम' से बड़ा है 'एंटी-यादव' ध्रुवीकरण का नैरेटिव* उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति को सतही तौर पर देखने वाले विश्लेषक अक्सर हर चुनाव को 'हिंदू-मुस्लिम' बाइनरी (ध्रुवीकरण) के चश्मे से देखते हैं। यह धारणा बनाई जाती है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत का एकमात्र आधार सांप्रदायिक ध्रुवीकरण है। लेकिन यह भारतीय राजनीति का एक अधूरा सच है। जमीनी हकीकत का बारीकी से अध्ययन करने पर साफ होता है कि हिंदी बेल्ट में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से कहीं अधिक गहरा और प्रभावी 'गैर-यादव' या 'एंटी-यादव' ध्रुवीकरण है। समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसी पार्टियों के खिलाफ जो जनाधार खड़ा होता है, उसकी जड़ें मुस्लिम विरोध से ज्यादा यादव प्रभुत्व के डर में छिपी हैं। *जमीनी धारणा: 'यादव पार्टी' की छवि और गुंडागर्दी का नैरेटिव* यदि आप उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में आम जनमानस के मन को टटोलेंगे, तो एक बात स्पष्ट तौर पर उभर कर आती है। समाजवादी पार्टी लाख दावों के बावजूद आम जनता के एक बड़े हिस्से में खुद को 'सर्वसमाज की पार्टी' के रूप में स्थापित नहीं कर पाई है। उसकी छवि आज भी मुख्य रूप से 'यादवों की पार्टी' के रूप में है। गैर-यादव पिछड़ी जातियों (जैसे कुर्मी, मौर्य, कुशवाहा, निषाद, लोध) और दलितों के बीच अक्सर यह सामूहिक अवचेतन काम करता है कि "यदि सपा सत्ता में आई, तो स्थानीय स्तर पर यादवों का वर्चस्व और दबंगई बढ़ जाएगी।" कानून-व्यवस्था को लेकर आम जनता में फैला यही डर सपा की सबसे कमजोर नस है। भाजपा ने बेहद चतुराई से इस जन-भावना (सेंटीमेंट) को समझा और इसे अपने राजनीतिक नैरेटिव का मुख्य हथियार बना लिया। *भाजपा की रणनीति: विपक्ष के रूप में सपा को चुनना* यह राजनीति का एक स्थापित सिद्धांत है कि आप अपने लिए कैसा दुश्मन चुनते हैं, इसी से आपकी जीत तय होती है। भाजपा जानबूझकर विपक्ष के मुख्य चेहरे के रूप में समाजवादी पार्टी को सामने रखती है। ऐसा करके भाजपा एक खास तरह का माहौल बनाती है कि "अगर हम नहीं, तो सपा आ रही है।" सपा के आने का यह डर अति-पिछड़ी जातियों (ओबीसी) और गैर-जाटव दलितों को असहज कर देता है। वे स्थानीय स्तर पर यादवों के राजनीतिक और सामाजिक प्रभुत्व को स्वीकार करने के बजाय भाजपा के बड़े 'हिंदू' छाते के नीचे जाना सुरक्षित समझते हैं। नतीजतन, यह डर अति-पिछड़ों और दलितों का भाजपा के पक्ष में स्वतः ध्रुवीकरण करा देता है। *भौगोलिक अपवाद: पूर्वी-मध्य बनाम पश्चिमी उत्तर प्रदेश** उत्तर प्रदेश की राजनीति को भौगोलिक रूप से समझे बिना यह विश्लेषण अधूरा रहेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को छोड़कर बाकी पूरे प्रदेश (पूर्वांचल, बुंदेलखंड और अवध) में सपा के खिलाफ होने वाला ध्रुवीकरण विशुद्ध रूप से 'एंटी-यादव' ध्रुवीकरण है, न कि मुस्लिम विरोधी। इन क्षेत्रों में यादवों की आबादी और उनका राजनीतिक प्रभाव मजबूत है, इसलिए संघर्ष सीधे तौर पर यादव बनाम गैर-यादव जातियों का होता है। इसके विपरीत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तासीर बिल्कुल अलग है। पश्चिम में समाजवादी पार्टी का पारंपरिक 'यादव' वोट बैंक न के बराबर है। वहां मुख्य मुकाबला मुस्लिम, जाट, गुर्जर और दलित समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमता है। *पश्चिम का गणित: सपा और AIMIM का घालमेल* पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी की सघनता बहुत ज्यादा है। चूंकि वहां सपा का आधार वोट 'यादव' नहीं है, इसलिए वहां भाजपा के लिए 'एंटी-यादव' कार्ड काम नहीं करता। ऐसे में वहां रणनीति बदल जाती है। पश्चिम में भाजपा के लिए सपा और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM में कोई खास अंतर नहीं रह जाता। वहां भाजपा सीधे तौर पर मुस्लिम तुष्टिकरण और सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण की जमीन तैयार करती है। भाजपा की राजनीतिक इच्छा यही रहती है कि मुसलमान पूरी तरह से सपा के साथ ही गोलबंद रहें। जब सपा का चेहरा पूरी तरह से 'मुस्लिमपरस्त' दिखने लगता है, तो बहुसंख्यक आबादी (जाट, गुर्जर और अन्य जातियां) काउंटर-पोलराइजेशन (जवाबी ध्रुवीकरण) के तहत भाजपा के पाले में आ खड़ी होती है। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद के सालों में यह पैटर्न बेहद साफ तौर पर देखा गया है। *निष्कर्ष* उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति केवल 'जय श्री राम' बनाम 'धर्मनिरपेक्षता' की लड़ाई नहीं है। यह सामाजिक वर्चस्व की स्थानीय लड़ाइयों का जोड़ है। भाजपा की चुनावी मशीनरी इस बात को बखूबी जानती है कि हिंदू-मुस्लिम नैरेटिव की एक सीमा है, लेकिन जातियों के आपसी अंतर्विरोध और 'यादव वर्चस्व का डर' एक ऐसा अचूक फॉर्मूला है जो गैर-यादव जातियों को कभी सपा की तरफ जाने नहीं देता।

जिसको सर्वे में दिखा दो वही खुश यह सर्वे होते कहां है कुछ तो आइडिया होगा क्योंकि हमें सर्वे की पता नहीं चलती कि कहां सर्वे हो रही है, हम भी UP वासी हैं

Band hona chahie TV per

Charging technique of Andhbhakt

Luffy के लुफ्फी ही रह गया ज़ब चुनाव हरगा तो evm पर चीलायेगा मोर कर्म फुट गये थे की गोदी मिडिया की बातो मे आ गये असली चमनचुतिया सपाई है

Survey ke chakkar me na pdo main mudde pr bne rho. Godi media khty ho or uske chakkar me pde bhi ho.

मोदी तेरी तनाशाही नहीं चलेगी

phir ye log kyu bolate hai ke sawidhan khatare me esaliye vote kiya gaya ..ye narative real me tha nahi win ka reason 2024 me ticket vitran aur PDA Name yahi satray hai .

लुफी भाई किस एंगल से बढ़त दिखाई दी..? India गठबंधन 43 है इस समय 41 दिखा रहा NDA 33 है 38 दिखा रहा जबकि विधानसभा में इंडिया 185 और nda 326 सीट पर बढ़त दिखा रहा

No! That is possible only with that alliance of your grandfather's. If your father goes it alone, history will repeat itself, just like in 2014 and 2019! They would secure only five out of the eighty seats! and C voter is saying so! India Not SP alone! 😂

jab UP election s thik pahle AAJTAK vale yh dikhane lgte hai tab bharosa ho jata hai mujhe MOTABHAI Loksabha ka badla "UP valo" s nikaalne k mood m hai.

Ye sab dramabazi hai! Ye kyun zaruri hai jab ki elections ko abhi 3 saal hain! Ye isliye taaki nda ko dikha sake ye ab bhi asani se jeet rahe hain! Aur kaha se ye survey kar rahe hain? Credibility kya hai??? Morons bas logon ko dhayan bahtkane ke liye ye sab

अभी चुनाव ,तो nda को 65 सीटें

Koi matlab hai in survey ka....Keval public ko misguide karne ke liye natak hota hai

43 aai thi pichli baar

Wo SP nahi india alliance hai

मतलब कॉनग्रेस को INDI गठबंधन से बाहर निकाल दोगे?

Pata nahi kon say planet k log in survey main bhaag lete hai

सर्वे पर बहुत फुल कर कुप्पा नही होना चाहिए ये सर्वे लोकसभा पर अधारित है, इस बात का ख्याल रखना चाहिए चुनाव बेहद निष्पक्ष चुनाव आयोग और बेहद ईमानदार सिस्टम के निगरानी मे होगा,मतलब हम कह रहे सावधानी हटी दुर्घटना घटी,
