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आप तो खुद ही चाहते हैं जिसको भाषा, विषय का ज्ञान न हो वही हमारा नेता हो।

59,835 views • 2 years ago •via X (Twitter)

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भाजपा के अंदर आपस में ‘विचारों का विलय’ नहीं हो रहा है और दावे दुनिया भर के। आप तो लखनऊ की कुर्सी पर ध्यान दें, जिसे दिल्लीवाले विलय ही नहीं, विलीन भी करनेवाले हैं। एक मुख्यमंत्री होने के नाते वैसे भी ये विषय आपके अधिकार क्षेत्र का नहीं है। ऐसा लगता है कि ये सुझाव देने के लिए आपको दिल्लीवालों ने मिलने का समय नहीं दिया तभी आप माइक पर बोलने को मजबूर हैं, नहीं तो ये बात तो आप भी समझते ही हैं कि जब आपस में खटास हो तो एक-दूसरे के अधिकार-क्षेत्र में अतिक्रमण और भी खलता है। ध्यान रखिएगा कहीं ऐसा न हो कि इस अतिक्रमण के ख़िलाफ़ कोई तोड़क कार्रवाई हो जाए, बुलडोज़र तो दिल्लीवालों के पास भी है।

Akhilesh Yadav

152,406 views • 2 years ago

जिनको भी अपने-अपने नेताओं से शिकायत हो वे पहले यह पौने दो मिनट का वीडियो देख लें और फिर खुद के भीतर झांकें। मेरा दावा है, कोई भी नेता आपको दोषी नजर नहीं आएगा। अपनी दुर्गति के लिए आप खुद जिम्मेदार हैं। नेताओं से आपकी कोई अपेक्षा नहीं है। आप जिनको वोट देते हैं उनसे आप कुछ भी नहीं चाहते हैं। आपकी हार्दिक इच्छा होती है कि हमारी जाति का नेता किसी भी तरह जीत जाए बस। या हमारी ने जाति का वह नेता जिसको हम पसंद करते हैं, कारण सिर्फ सामने वाले से जलन है, इसलिए जीत जाए। तो फिर शिकायत करेंगे किससे? आप शिकायत करने का अधिकार तो उसी दिन खो चुके हैं जिस दिन गलत कारणों से अपने वोट दिया है या गलत लोगों के लिए अपनी ऊर्जा को नष्ट किया है। बातें चुभेंगी जरूर लेकिन सच तो चुभता ही है।

Arvind Chotia

53,767 views • 9 months ago