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आम आदमी पटाखे नहीं जला सकते पटाखे सिर्फ ‘खास आदमी’ के स्वागत में जलेंगे

206,212 Aufrufe • vor 2 Jahren •via X (Twitter)

9 Kommentare

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vikram sharmavor 2 Jahren

आतिशी जो की हिंदू विरोधी है इसका नाम ही हिंदू विरोध पर रखा गया है ये दिवाली नहीं ईद मनाएगी

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The Sanghivor 2 Jahren

diwali mat manao, saare paise patakhe wale Arvind Kejriwal ka naya sheesh mahal banane ke liye daan mein de do

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Pankaj Sharma ( मोदी का परिवार)vor 2 Jahren

सबसे बड़ी नाटक मंडली

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Abhishek (अभि) 🇮🇳vor 2 Jahren

उनके वाले पटाखे high quality के oxygens देते हैं!

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Deepak Singh Panwarvor 2 Jahren

पटाखे कुछ भ्रष्टाचारियों के लिए बचा के रखे जाएं, और जब भी उन्हें बेल मिले तभी बजाया जाए है - जनहित में जारी 😁😂😂

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Er Radhe Sharmavor 1 Jahr

जेल से छूटने पर पटाखे जलाएंगे, लेकिन आपको आपके सबसे बड़े त्यौहार पर पटाखे नहीं जलाने देंगे! यही तो है असली सेक्युलरिज्म !

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Mantu Singhvor 2 Jahren

हम तो पटाखे जलाएंगे.... दीपावाली पर

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OMII ⛳vor 2 Jahren

Tatya Bicchu 😂

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Ashish Ranavor 2 Jahren

शराब चोर की रिहाई पर पटाखे फोड़ सकते है लेकिन दिवाली पर नही 😐

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रेड कार्पेट से रेड बत्ती तक छटपटाता लोकतंत्र. एक आम आदमी अक्सर जल्दबाज़ी में यह भूल जाता है कि वह “केवल एक मतदाता” है वही मतदाता, जो अपने एक वोट से किसी साधारण व्यक्ति को वीआईपी बना देता है। विडंबना यह है कि वीआईपी शब्द में इतना दंभ भर जाता है कि वही व्यक्ति समय-समय पर आम आदमी को उसकी औकात याद दिलाने लगता है। अब कहा जा रहा है कि एक आम आदमी को अपने घर या किसी ज़रूरी काम के लिए जल्दी है, लेकिन उसी दौरान उन्हीं के वोट से वीआईपी बने किसी नेता का काफिला गुजर रहा है। नतीजतन, आम आदमी छटपटा रहा है, झुंझला रहा है। आम आदमी को यह समझना चाहिए कि बड़े लोगों के पास ट्रैफिक में गंवाने के लिए समय नहीं होता। उन्हें तो अपना कीमती समय बचाकर आप लोगों के विकास में लगाना होता है। ऐसे में यदि आम आदमी अपने हित में कुछ देर का यह दर्द सहन नहीं कर सकता, तो इसमें गलती व्यवस्था की नहीं, बल्कि उसी आम आदमी की मानी जाएगी।

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