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Ana Sayfaya Dön

आमने-सामने…चमत्कार और पत्रकार सब कैमरे पर दर्ज है।

385,176 görüntüleme • 3 yıl önce •via X (Twitter)

9 Yorum

Abhinav Pandey profil fotoğrafı
Abhinav Pandey3 yıl önce

पूरा इंटरव्यू यहाँ देखें

Cartoonist Rakesh Ranjan profil fotoğrafı
Cartoonist Rakesh Ranjan3 yıl önce

i want link, mujhe drama dekhna hai 🤣🤣🤣

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Vicky पासवान3 yıl önce

भाई लोग एक गुजारिश है इंटरव्यू लेने वाला ब्राह्मण , इंटरव्यू देने वाला ब्राह्मण, सदियों से ऐसे ही बेवाकुफ बनाया गया है ,तो एक विनम्र निवेदन है अपना समय बर्बाद ना करे ...कोई दूसरा काम करे इंटरव्यू देख के कुछ नही होने वाला...

chhotu profil fotoğrafı
chhotu3 yıl önce

लल्लनटॉप को बाकी न्यूज़ चैनलों से अलग करने वाली बात खत्म होती जा रही है।प्रोमो में दिखाया जैसे बाबा ने गुस्से में लास्ट में माइक निकाल कर इंटरव्यू बंद कर दिया जबकि फुल इंटरव्यू में ऐसा कुछ नही दिखा।अभिनव भैया आपसे बेटर एक्सपैक्ट किये थे।

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Saurabh Sharma3 yıl önce

अमृतकाल !! ☠☠☠☠

Vaibhav Singh profil fotoğrafı
Vaibhav Singh3 yıl önce

बहुत जबर इंटरव्यू है दद्दा, शास्त्री जी ने भी दो बार धर लौ आपको. 🤣🤣

Krriesh राजपुरोहित profil fotoğrafı
Krriesh राजपुरोहित3 yıl önce

धीरेंद्र शास्त्री जी ने तो आकर साक्षात्कार दे दिया लेकिन तुम्हारी मर्दानगी और पत्रकारिता उस दिन साबित होगी जिस दिन मस्जिद के मौलवी और चर्च के पादरी के सामने ऐसे प्रश्न लेकर बैठोगे, तुम्हारी अभिव्यक्ति की आज़ादी और बेबाक़ीपन वहाँ दम तोड़ देती है। @Abhinav_Pan

Varun - वरूण 🇮🇳 profil fotoğrafı
Varun - वरूण 🇮🇳3 yıl önce

दोनों पत्रकारों को तथाकथित चमत्कारी बाबा ने अपनी वाकपटुता में लपेट लिया. @TheLallantop के पत्रकार बौना नजर आ रहे हैं. मिमियाते हुए सवाल नहीं पुछा जा सकता. पत्रकार ही डरे सहमे हुए लग रहे हैं.

गौरव profil fotoğrafı
गौरव3 yıl önce

पूरा इंटरव्यू देखा। बागेश्वर धाम और धीरेंद्र शास्त्री मात्र एक सामन्य कथा वाचक हैं। इंटरव्यू वो कई जगह खुद के जवाबो में फसे कभी वो कहते जिस पर कृपा होती हैं वो गद्दी पर बैठ लेकिन थोड़ी देर में वह खुद को साम्न्य इंसान कहते हैं बाबा ने स्वालो के तर्क हीन जवाब थोपे।

Benzer Videolar

“जो सच बोलेंगे, मारे जाएँगे…” राजेश जोशी की इस कविता को शायद उत्तर प्रदेश में अब यूँ पढ़ना पड़े— “जो सच बोलेंगे, FIR के शिकार हो जाएँगे!” ‘ज़मीनी खबर’ के पत्रकार Amit Yadav (Journalist) पर हुई FIR इसी डरावनी प्रवृत्ति की एक और मिसाल है। सवाल यह है कि आख़िर उनका गुनाह क्या है? सरकारी स्कूलों की ख़स्ताहाल स्थिति कैमरे पर दिखा देना? बच्चों की शिक्षा और बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठा देना? या फिर क़लम, किताब और सच की बात करना? अगर स्कूलों की तस्वीर अच्छी है, तो कैमरे से डर कैसा? और अगर तस्वीर ख़राब है, तो उसे दिखाने वाले पत्रकार पर FIR क्यों? लोकतंत्र में पत्रकार का काम सरकार की वाहवाही करना नहीं, सत्ता से सवाल करना है। सच दिखाने वाले कैमरे और सवाल पूछने वाली क़लम पर मुक़दमे दर्ज होने लगें, तो यह केवल एक पत्रकार को डराने की कोशिश नहीं होती—यह हर उस आवाज़ के लिए संदेश होता है जो सत्ता से असहज सवाल पूछने की हिम्मत करती है। स्कूलों की बदहाली छिपाने से शिक्षा नहीं सुधरेगी। FIR से सवाल ख़त्म नहीं होंगे।

Dr. Laxman Yadav

20,643 görüntüleme • 8 gün önce