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आरक्षण के मुद्दे पर छात्रा ने बड़ी अहम बाते बोली हैं... आप कितना सहमत हैं?
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8 Kommentare

चंद्रमणि भाई माफ करना तुम जैसे लोग यह जीवन में कुछ कर नहीं पाते जिन्होंने पढ़ाई नहीं कि सिर्फ मक्कारी की वह अपनी नाकामी को आरक्षण से छुपाना चाहते हो बस बाकी उत्तर में दे दूंगा fact में रख दूंगा बताना कहां कब रखना है

व्यक्तिगत होने की कोई जरूरत नहीं है और जो खुद की पहचान से अपनी प्रोफाइल तक नहीं बना सकते उन्हे तो बिलकुल भी नहीं। मैं अपनी नाकामी की नहीं बल्कि उनकी नाकामी की बात कर रहा हूं, जिनके लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। आप भी जानते हैं जातिगत आरक्षण के नाम पर कौन मौज काट रहा है...

सामान्य वर्ग 60% आरक्षण का रहे हैं उसके बाद झूठ फैला रहे हैं शर्म आनी चाहिए

Aawo chalte Hain chamaron ki galiwon mein..... un musharo ki galiwon me ..........tab sab samjh me aa jaayega ki kyun aarakshan hai un dalito ke liye...

उन को आरक्षण का लाभ मिल कहां रहा? यही तो पीड़ा है। जातिगत आरक्षण का लाभ वही उठा रहे है जो सबल हो चुके हैं...

सुदामा कोटा जो ले रखा है उसका क्या मैडम जी। आबादी तो सिर्फ 3% ही है। जिस दिन तुमलोग गटर में उतरने लगोगे और मंदिरों को सार्वजनिक कर दोगे उसी दिन ये दलित अपना आरक्षण त्याग देगा। क्या ये तुमलोगों को पता है कि दलितों को मकान किराए पे नहीं मिलता है।

अहम बाते नहीं, अहम में बातेँ बोली है

यह रोज-रोज आरक्षण का पाठ पढ़ते रहते हैं जबकि सामान्य वर्ग को भी 10% आरक्षण है लेकिन यह जातिवाद पर क्यों नहीं बोलते। जाति को खत्म करने पर क्यों नहीं बोलते अगर जाति और जातिवाद को खत्म कर दें तो आरक्षण स्वत ही खत्म हो जाएगा।
