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आरक्षण जायेगा या सरकार जायेगी। एक को जाना ही होगा।

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एक बात तो साफ़ है। ये सरकार स्वर्ण विरोधी है। सुप्रीम कोर्ट में PIL लगी। सवाल सीधा था — “अगर SC/ST परिवार से कोई पहले ही उच्च सरकारी पद पर रह चुका है, तो क्या उसके बच्चों को भी आरक्षण मिलना चाहिए?” केंद्र सरकार का जवाब साफ है: — SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं होगा। OBC का सर्टिफिकेट हर 2-3 साल में नया बनवाना पड़ता है, क्योंकि क्रीमी लेयर चेक होती है। लेकिन SC-ST में? एक बार सर्टिफिकेट मिला, तो पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का हक। अमीर हो या गरीब, IAS हो या मंत्री, कोई फर्क नहीं। जो लोग सबसे ज्यादा लाभ ले चुके हैं, उन्हीं के परिवारों को हमेशा के लिए आरक्षण का लाइसेंस मिल गया है। सामाजिक न्याय का नाम लेकर एलिट कैप्चर को कानूनी संरक्षण।

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हम महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने के लिए लंबे समय से प्रयास करते रहे हैं। साथ ही, हमने 2023 को महिला आरक्षण बिल को समर्थन देते हुए उसे पारित भी करवाया था। लेकिन अब मोदी सरकार ने महिला आरक्षण की आड़ में, एक और संशोधन पेश किया, जिसमें उन्होंने परिसीमन का प्रावधान जोड़ दिया। इस तरह सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक को एक साथ मिला दिया। परिसीमन से जुड़ा विधेयक लाकर, मोदी सरकार सत्ता हासिल करना चाहती है। सरकार से हमारा कहना था कि अगर महिला आरक्षण देना ही है तो 543 लोकसभा सांसदों के दायरे में ही कर दीजिए। फिर जनगणना और परिसीमन होने के बाद, सरकार इसे अगले चुनाव में बढ़ा दे, लेकिन वे ऐसा नहीं करना चाहते। दरअसल, मोदी सरकार की मंशा संविधान के ढांचे को बदल कर, executive power अपने हाथ में लेने की है। : कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता श्री Mallikarjun Kharge

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