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इन्हीं मूर्खों वि वजह से चाइना तरक्की नहीं कर पा रहा है।😅
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Комментарии: 35

सनातन जीवन जीने की कला है ...... प्रकृति पर आधारित धर्म है आज हवा,पानी,भोजन सब में जहर खेतो में यूरिया से लेकर Global Warming तक विश्व में जितनी भी समस्या है उसके पीछे आज का पढ़ा लिखा व्यक्ति है

तुम लोग जिस बुद्ध को मानते हो वो बुद्ध भी किसी वृक्ष केनिचि ही ज्ञान प्राप्त किया था पता है वह वृक्ष कौन सा था

पुलिस वाले सुरक्षा में लगे हैं। उनको भी इस शुभ कार्य में भागीदार होना चाहिए।

पाखंड चरम पर है

ऐसे ही मूर्ख लोग तो मोदी जी को पंसद आते हैं

पर्यावरण बचाना मूर्खता नहीं होता _ तूने भी अपना सरनेम चुराया होगा

Chutiyon ki kami nahi hai humare mulk me humare muslim me bhi hai aise jahil

तुमको इतनी नफरत है तो पेड़ की छांव और ऑक्सीजन मत लेना..तेरी औकात धरती पर कितनी है पता चल जायेगा😉

अभी तुम उसी लायक़ बनी रहो ! आस्था पर प्रश्न करना मूर्खता है ! तरुण खटीक मर्डर करने वालों के खिलाफ आवाज उठाने की हैसियत है क्या ? तरूण एक हिन्दू था. तुम्हारा रावण कहाँ गया बहन ? कागज के शेर नहीं बनो, आवाज़ उठाओ तो देश क़ो लगेगा कि तुम एक सामवेदनशील बहन हो !

इन पर बोलेगा तो तेरा सर तन से जुदा हो सकता है भड़वे।

कुछ लोग चार किताब पड़ लेते वह आपने आप को पड़ालिख समझने लगते है इसे कहते है ,"आध जल गगरी छल कट जाए "

चली जा चीन करले तरक्की क्यों पड़ी हो यहां

कभी भी अपने माँ-बाप के पैर नहीं दबाए होंगे इन पाखंदीयों ने!🤬

सही बात है चीन की तरक्की तुम जाहिलो की वजह से है

कोई नहीं पीपल है ऑक्सीजन देता है पाखंडी बाबाओं के दबा रहे होते हैं वह गलत है, 😜😂

विज्ञानिक भीमटे कब सुधरेंगे m@c

Boti nochne wale is sensitivity ko nhi samajh sakte.

भारत लालची लोगों से भरा हुआ है, और यदि पीपल जैसे वृक्षों की भी निर्माण कार्यों या औद्योगिक गतिविधियों के लिए कटाई आम बात बन गई, तो तापमान और प्रदूषण दोनों में भारी बढ़ोतरी हो जाएगी। इसे रोकना बेहद आवश्यक है। साथ ही यहाँ अक्सर देखा गया है कि जब तक किसी चीज़ से लोगों की आस्था नहीं जुड़ती, वे उसकी रक्षा के लिए आवाज़ भी नहीं उठाते। इसलिए पर्यावरण की पूजा करना भी एक उचित तरीका है। यहाँ तो लोग केवल पूजा ही कर रहे हैं जबकि राजस्थान के खेजड़ली गांव में 363 लोगों ने कटते हुए पेड़ों से चिपककर उन्हें बचाने के प्रयास में अपनी जान तक दे दी थी। अगर आज भी वैसा ही सशक्त भाव और संकल्प होगा, तो पर्यावरण सुरक्षित रहेगा; वरना आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।

नए इंडिया का "चिपको आंदोलन।"😆

ये मूर्ख सिर्फ अपने ही देश में पाए जाते हैं 😂😂

@RamKish45086735 वृक्ष, नदी और जन्मभूमि को पूजना तो पवित्र और शुभ कार्य है, इससे किसी को क्या आपत्ति होनी चाहिए? “हमारा धर्म और हमारी संस्कृति”, हमारे संस्कार का अभिन्न अंग है और रहेगा। माता पिता साक्षात ईश्वर हैं, और यह भी मात्र हमारे ही धर्म का अभिन्न अंग है।

पेड़ पौधा (प्राकृतिक) इंशान के लिए जीवन हैं इसलिए प्राकृतिक का कदर करना व्यक्ति का प्रथम धर्म हैं लेकिन जिस तरह ये लोग कर रहे हैं बल्कि ये मूर्खता हैं इन्हे चाहिए पेड़ के चारो ओर साफ सफाई करके, बैठका बनाना चाहिए ताकि चार लोग आकर बैठ सके, और हवा का सुकून आनंद ले सके,,

और तु आल इंडिया टॉप कर गयी है बाप ने पेट काट के emi पे स्मार्ट फोन दिलाया रहेगा और बिटिया यहाँ x उसी। मोबाइल से बक चौड़ी कर रही है

inhi murkho ne pedo ko bacha kar dharti ko bacha rakha hai warna tum jaise kide aaj bina hawaa ke mar rahe hote...jaise delhi me mar rahe ho...

@sazad140595 RT ये देश विश्व गुरु बनने जा रहा है

गोबर पड़ा दिमाग में, अंधविश्वास कहा से जाए, दूध बहाए मूत पिए, बुद्धि कहा से आए

आरक्षणवादी तो बहुत तरक्की कर रहे है मुफ्त में बहुत कुछ मिल जो रहा है कहीं से बुद्धि भी ले लिया करो ! या जलते ही रहोगे !

तू तो कलेक्टर बन गई होगी अब तक लंबे-डकर के फजल से

और पुलिस वाले भी सिक्योरिटी दे रहे हैं क्या ही हो सकता है 😂

पीपल के पेड़ से प्रेम करने वालों को मूर्ख कहना आसान है। लेकिन सांस की कीमत वही समझता है जो अस्पताल में कुछ घंटों की ऑक्सीजन के लिए हजारों रुपये चुकाता है। प्रकृति का सम्मान अंधविश्वास नहीं, जीवन की समझ है, यह बात तंज कसने वालों को शायद देर से समझ आती है। 🌳🌿

Desh ko barbad krne me ye log koi kasar nhi chhode h

इनकी वजह से आज धरती पर पेड़ पौधे है . . और इस धरती की सभी सजीव वस्तुएं पूजनीय हैं क्यों की यहीं मानवता का सहारा हैं , कुछ पढ़े लिखें अनपढ़ों को समझ नहीं आयेगा

@PGUPTA61718684

🤣🤣🤣

Wo pipal ka ped hai...sabse jyada sudh hawa dene wale ped..... isiliye pujate hai pipale our bargad ko.....baki tu apna dekh
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