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इसे कहते हैं अनपढ ग्वार बस इन जैसों की वजह से ही देश बर्बाद हो रहा है अनपढ़ पृथ्वी पर बोझ है यह रहे या ना रहे,देश सुरक्षित हाथो में रहना चाहिए हमे हमारे जल जंगल जमीन की आवश्यकता है अरावली कोई मामूली पहाड नहीं है हमारे भारत की...

21,207 次观看 • 8 个月前 •via X (Twitter)

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दिल्ली देश की राजधानी है। यहाँ हर राज्य से लोग आते हैं। यहाँ हर प्रदेश के नंबर की गाड़ियां चलती हैं। किसी भी राज्य के नंबर की गाड़ियां देश के किसी भी हिस्से में जा सकती हैं, इस पर कोई रोक टोक नहीं है। बीजेपी का ये बयान सुनिए। ये बेहद खतरनाक, चिंताजनक और पंजाबियों के लिए अपमानजनक है। ये पंजाब के नंबर की गाड़ियों को चिन्हित करके कह रहे हैं कि दिल्ली में पंजाब की गाड़ियां क्यों घूम रही हैं? वो ऐसे कह रहे हैं जैसे पंजाबी देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। ये मेरे और देश के हर पंजाबी के लिए बेहद अपमानजनक है। आज हर पंजाबी बेहद पीड़ा और अपमान महसूस कर रहा है। अपनी गंदी राजनीति के लिए इस तरह पंजाबियों की देशभक्ति पे सवाल उठाना ठीक नहीं है। अमित शाह जी, आप ना देश के बॉर्डर को सुरक्षित रख पा रहे हो और ना ही दिल्ली को। इतने हज़ारों बांग्लादेशी और रोहिंग्या पूरे देश में आ रहे है, आपको उनसे दिक्कत नहीं है? लेकिन पंजाब से दिल्ली आनेवाले पंजाबियों को आप देश के लिए खतरा बोल रहे हो। आपको पंजाबियों से माफ़ी माँगनी चाहिए

Bhagwant Mann

252,030 次观看 • 1 年前

"AC में बैठाओ नहीं तो मर जाएगा... " कुछ घंटे के प्रोटेस्ट में ये हाल हो गया था कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके का... इंस्टाग्राम पर फॉलो बटन दबवाना और जमीन पर आंदोलन करने में जमीन आसमान का फर्क होता है.. इसमें कोई दो राय नहीं कि CBSE, NEET कांड के बाद लोगों में नाराजगी है.. लेकिन लोग नरेंद्र मोदी को कुर्सी से हटा देना चाहते हों या देश को नेपाल... बांग्लादेश बना देना चाहते हों.. ऐसा कोई सेंटिमेंट नहीं है... देश पिछले कई सालों में कहां से कहां पहुंचा है जिसको ना देखना हो वो ना देखे लेकिन देश की बड़ी जनसंख्या को वो दिख रहा है... सरकार को भी धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमीन पर दिख रहे जेन्विन नाराजगी को एड्रेस करना चाहिए.. बाकी देश का युवा देश को आगे ले जाने के लिए लगातार काम कर रहा है.. उसे कॉकरोच बनने का कोई शौक नहीं है.. ये जंतर मंतर पर कुछ सौ की भीड़ ने आज साबित कर दिया है।

Sushant Sinha

331,739 次观看 • 2 个月前

"देखिए! ये क्या हो रहा है देश में? एक तरफ़ बांग्लादेश में हमारे हिंदू भाइयों-बहनों पर अत्याचार हो रहे हैं, मंदिर तोड़े जा रहे हैं, महिलाओं के साथ ज़ुल्म हो रहा है... और दूसरी तरफ़ यहीं भारत में एक बहन रिद्धिमा शर्मा खुलकर बोल रही है, तो FIR? तो विवाद? अरे ये तो ग़लत है ना! रिद्धिमा ने क्या कहा? उसने कहा कि अगर वे हमारे एक-दो को छेड़ते हैं, तो हम चुप नहीं बैठेंगे! ये तो प्रतिरोध की बात है, ये तो अपनी बहनों की इज़्ज़त बचाने की बात है! मीडिया वाले इसे तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं, जैसे ये घृणा फैला रही हो... अरे भई, घृणा तो वो फैला रहे हैं जो बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार कर रहे हैं! SanataniRiddhi एक सनातनी बहन है, वो अपनी भावनाओं में बोल गई, लेकिन उसका इरादा साफ़ है हिंदू समाज को जागृत करना, अपनी बहनों की सुरक्षा की बात करना! क्या हम औरतों की इज़्ज़त के लिए आवाज़ नहीं उठा सकते? क्या अब बोलना भी अपराध हो गया? कांग्रेस वाले चिल्ला रहे हैं, लेकिन असली मुद्दा देखिए बांग्लादेश में क्या हो रहा है, उस पर कोई बोलता क्यों नहीं? मैं कहती हूँ – #ISupportRiddhima ! क्योंकि ये बहन डरने वाली नहीं है, ये सच बोल रही है! और जो मीडिया इसे घृणा फैलाना बता रहा है, वो पहले बांग्लादेश के हिंदुओं की सुन ले! ये आवाज़ दबने नहीं देंगे! जय श्री राम!"

कल्पना श्रीवास्तव 🇮🇳

23,632 次观看 • 7 个月前

यह सिर्फ़ एक पैकेट काजू का मामला नहीं है बल्कि यह पैकेज्ड फूड सिस्टम की सड़ी हुई सच्चाई है। DMart जैसे बड़े रिटेलर और Pro V जैसे ब्रांडेड प्रोडक्ट में कीड़े मिलना कोई दुर्घटना नहीं, यह क्वालिटी कंट्रोल की खुली नाकामी है। जब महंगे दाम लेकर बेचे जा रहे ड्राय फ्रूट्स में कीड़े निकलें तो यह साफ है कि स्टोरेज , सप्लाई चेन , पैकिंग और इन-हाउस चेक सब फेल हैं। ब्रांड नाम सिर्फ़ भरोसा बेचने के लिए है , जमीन पर निगरानी शून्य है। सबसे बड़ा सवाल FSSAI कर क्या रहा है? • क्या पैकिंग से पहले कोई वास्तविक इंस्पेक्शन होता है? • क्या गोदामों की नियमित जांच होती है या सिर्फ़ कागज़ों में? • क्या कंज़्यूमर शिकायतों पर सैंपल टेस्ट होते हैं या मामला दबा दिया जाता है? • एक्सपायरी से पहले ही खराब हो चुके प्रोडक्ट्स बाज़ार में कैसे पहुँच रहे हैं? • बड़े ब्रांड होने पर क्या कार्रवाई से छूट मिल जाती है?

खुरपेंची स्वास्थ्य

147,130 次观看 • 7 个月前

देश में प्राइवेट यूनिवर्सिटी में आरक्षण लागू नहीं है। जब समाज के हर वर्ग के छात्र मिलकर एक साथ कंट्रीब्यूट नहीं करेंगे तो ना research grow कर सकती है ,ना देश। गलगोटिया हो या एमिटी, हर प्राइवेट यूनिवर्सिटी का हाल कमोबेश यही है! आश्चर्यजनक तो ये है की चोरी पकड़े जाने के बाद अभी भी “Excellence” की बात कर रहे हैं! वर्तमान में ज़रूरत है पब्लिक फंडेड यूनिवर्सिटी को बढ़ावा देने की और Research and development को बजट का बड़ा हिस्सा देने की ताकि देश तेज़ी से आगे बढ़े, पर जब सरकार ही साइंटिफिक टेम्परामेंट के विरुद्ध काम करती है तो उम्मीद करना बेईमानी लगता है! समस्या की जड़ पर बात करना होगा, तभी सुधार की संभावना है।

Priyanka Bharti

38,298 次观看 • 6 个月前