Загрузка видео...

Не удалось загрузить видео

На главную

इस फ़िल्म के पात्र को देखकर आपको किसकी याद आती है?

316,562 просмотров • 3 лет назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

Фото профиля राष्ट्रवादी नागेंद्र नाथ नीरज
राष्ट्रवादी नागेंद्र नाथ नीरज3 лет назад

अरविन्द केजरीवाल... अरविन्द केजरीवाल ने भी ऐसे ही आम आदमी का ढोंग रच के मुख्यमंत्री बना... 1) बच्चों की झूठी कस्मे खाई.. 2) VIP कल्चर को खत्म करने का वादा किया 3) भ्र्ष्टाचार खत्म करने को बोला CM बनने के 45cr का शीश महल बनवाया है भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़े है..

Фото профиля ocean jain
ocean jain3 лет назад

ये तो तुम्हारी सरे आम पोल खोल रहा है क्या करे अब इसका जेल भिजवा इसको भी

Фото профиля त्यागी जी
त्यागी जी3 лет назад

सत्य कभी दावा नहीं करता की में सत्य हूं , लेकिन झूठ हमेशा दावा करता है, की सिर्फ में ही सत्य हूं...। #आप की तरह

Фото профиля अमात्य राक्षस™️©️®️
अमात्य राक्षस™️©️®️3 лет назад

अराजक मुख्यमन्त्री जो देश का मालिक बनना चाहता है, एक ही व्यक्ति है, आदरणीय लोकनायक। 🙄😐😑

Фото профиля Manish Pangotra🇮🇳
Manish Pangotra🇮🇳3 лет назад

Arvind Kejriwal ki Yaad aati Hai

Фото профиля 🍯FaBA🐝 फाबा
🍯FaBA🐝 फाबा3 лет назад

मुझे तो अरविंद केजरीवाल और उसकी कुटिलता याद आई

Фото профиля Dr. Subodh Kumar Singh🇮🇳🚩
Dr. Subodh Kumar Singh🇮🇳🚩3 лет назад

केजरीवाल @ArvindKejriwal वो भी आजाद की बात कर रहा है। आज अमृतसर के एक डॉक्टर साहब से मुलाकात हुई पूछा कैसी चल रही है 'आप' की सरकार। छूटते ही सरदार जी बोले हमने कु त्तों को कुर्सी से उतारकर सु अ रों को बैठा दिया है। ये बीजेपी वाले पंजाब में किसी लायक होते तो आज ये दिन न देखना पड़ता। उन सरदार जी से मैं पहली बार मिला था और ये विचार उनके व्यक्तिगत हैं मेरा इससे कोई लेना देना नहीं है। कोई बात नहीं बजाते रहो

Фото профиля Naveen Gurjar
Naveen Gurjar3 лет назад

अनपढ़ राजा की कहानी आज सत्य हो गई और बर्बाद जनता हो गई

Фото профиля Manish ❤️🇮🇳
Manish ❤️🇮🇳3 лет назад

अरे.......... यह फिल्म तो शुभम थिएटर पर भी लगी थी 😂😂😂😂😂😂😂

Фото профиля ❝बड़े साहेब❞
❝बड़े साहेब❞3 лет назад

शुभम सिनेमा हॉल की याद आ रही है, ये फिल्म तो वहां भी लगी होगी

Похожие видео

"सौ काम छोड़कर फूले फ़िल्म ज़रूर देखिए" ये इतिहास का पन्ना है भारत देश का. बहुत पुराना नहीं. साल 1850 के आस पास का महाराष्ट्र का पुणे है. आने वाली पीढ़ियों को आज शायद ये भ्रम है कि समानता और न्याय के लिए संविधान यूँ ही मिल गया. ये एक सिनेमा का काल्पनिक दृश्य नहीं है. ये इस देश की हक़ीक़त भरा इतिहास है. ये सब जो हो रहा है, उसका आधार जाति और धर्म है. जाति और धर्म के नाम पर ही इंसानों के साथ ऐसा भेदभाव किया जाता रहा. 'फूले' फ़िल्म का ये दृश्य आपको बताएगा कि क्यों आपको ये फ़िल्म ज़रूर देखनी चाहिए. ANANTH N MAHADEVAN के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म को हर गाँव, क़स्बे, स्कूल कॉलेज विश्वविद्यालय में दिखाना चाहिए. इतिहास जानो, ताकि वर्तमान के ख़तरों को पहचानों और भविष्य को बेहतर बनाने की तैयारी करो.

Dr. Laxman Yadav

213,301 просмотров • 1 год назад