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इस वीडियो को देखकर खून खौल गया – इसे होली खेलना नहीं कहा जा सकता। यह पूरी तरह से जाहिलपन, छिछोरापन और एक लड़की के सम्मान का खुला चीरहरण है। यह केवल एक महिला की गरिमा का अपमान नहीं, बल्कि पूरे सभ्य समाज को शर्मसार करने वाली घटना है।...

53,959 views • 5 months ago •via X (Twitter)

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक कोचिंग संस्था की महिला पुलिस विभाग से जुड़े उदाहरण देते हुए मीणा समाज को बदनाम करने वाली टिप्पणी कर रही है। वह कह रही है कि “मोटरसाइकिल चोरी होती है तो उसमें मीणा समाज के लोगों का हाथ होता है।” 👉 किसी भी समाज या समुदाय को इस तरह अपराधी ठहराना न केवल ग़लत है बल्कि समाज में नफ़रत फैलाने वाला कार्य है। हम पूछते हैं — आप कौन होते हो किसी समाज को चोरी के “सर्टिफिकेट” बाँटने वाले? किसी समुदाय को बदनाम करने का हक़ किसी को नहीं है। — इस वीडियो में दिख रही कोचिंग संस्था और संबंधित महिला से बात की जाएगी और जल्द ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। Rajsthan Police Jaipur Police

Manoj Meena

96,690 views • 11 months ago

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक द्वारा की गई इस अमानवीय और निंदनीय हरकत के विरुद्ध मैं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज करूँगा। गले में जूते-चप्पलों की माला, शरीर पर चोट के स्पष्ट निशान और फटे हुए कपड़े—यह दृश्य किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार करने वाला है। “साहू समाज के एक व्यक्ति के साथ इस प्रकार का सार्वजनिक अपमान मैंने आज तक नहीं देखा जो की विष्णु देव के राज में हुआ है” इस व्यक्ति का नाम चित्रसेन साव (साहू) है, जिसे तमनार घटना का आरोपी बताया जा रहा है, किंतु आरोपी होना किसी भी व्यक्ति की गरिमा, सम्मान और मानवाधिकारों को कुचलने का लाइसेंस नहीं हो सकता। #TamnarViolence #Raigarh #jindal #Chhattisgarh #Adani

Kunal Shukla

343,435 views • 7 months ago

उत्तर प्रदेश के जिला गाजीपुर के मरदह क्षेत्र में संत शिरोमणि जगतगुरु सतगुरु रविदास महाराज जी के मंदिर के पास किया जा रहा दीवार निर्माण केवल एक साधारण निर्माण कार्य नहीं है। इस दीवार के माध्यम से उस पवित्र स्थल को ढकने, सीमित करने और उसकी पहचान को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जो सीधा-सीधा सामाजिक न्याय, समानता और भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। संत रविदास महाराज जी का स्थान करोड़ों लोगों की आस्था, आत्मसम्मान और अधिकारों का प्रतीक है। ऐसे में इस प्रकार की कोई भी कार्रवाई न केवल अनुचित है, बल्कि यह बहुजन समाज की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य भी है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी ,किसी भी “सुंदरीकरण” के नाम पर धार्मिक स्थलों की पहचान के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम Government of UP से मांग करते हैं कि इस मामले में जल्द, निष्पक्ष और न्यायसंगत निर्णय लिया जाए, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे और किसी भी प्रकार का तनाव न बढ़े। साथ ही, संबंधित विभाग इस निर्माण कार्य की पारदर्शी जांच कर तत्काल स्थिति स्पष्ट करे। यदि दीवार से मंदिर की दृश्यता या पहुंच प्रभावित हो रही है, तो निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के साथी मौके-ए-वारदात पर मौजूद हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सामाजिक सम्मान, आस्था और समान अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। CM Office, GoUP

Chandra Shekhar Aazad

25,246 views • 4 months ago

जहाँ एक ओर देश संविधान लागू होने की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर गौरवान्वित हो रहा है ,वहीं दूसरी ओर अमृतसर में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के पास हेरिटेज स्ट्रीट पर परम पूज्य बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने और संविधान की प्रति जलाने की घटना ने जातिवादी मानसिकता के नंगे सच को उजागर कर दिया है। यह कृत्य केवल एक प्रतीकात्मक हमला नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित प्रयास है। जो समाज के दबे-कुचले वर्गों को उनके अधिकारों और सम्मान से वंचित रखने की घृणित मानसिकता को प्रदर्शित करता है। साथ ही यह घटना इस बात का प्रमाण है कि आम आदमी पार्टी की सरकार इतनी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक जगह पर भी नागरिकों और प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रही है। जातिवादी ताकतें, जो सदियों से अपने विशेषाधिकारों को बनाएं रखने के लिए षडयंत्र करती रही हैं, इस तरह के कायरतापूर्ण प्रयासों से यह साबित करती हैं कि वे आज भी बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा स्थापित समानता और न्याय की व्यवस्था से भयभीत हैं। संविधान, जिसने भारत को जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर एकता और बंधुत्व का संदेश दिया, उस पर इस प्रकार का हमला दर्शाता है कि कुछ ताकतें अभी भी जातिगत भेदभाव को बनाए रखना चाहती हैं। बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ने और संविधान को जलाने वालों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे संविधान के मूल्यों को स्वीकारने के लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि यह मानसिकता अब भारत में टिकने वाली नहीं है। ऐसे समय में जब देश संविधान की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, यह घटना हमें याद दिलाती है कि जातिवाद केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक जिंदा चुनौती है। इस चुनौती का सामना करने के लिए समाज को संगठित होकर जातिवादी मानसिकता के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी। DGP Punjab Police को चाहिए कि दोषियों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई करे, ताकि समाज को यह संदेश मिले कि संविधान की गरिमा और बाबा साहेब के आदर्शों के खिलाफ जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के शिकंजे से बचने का अवसर नहीं मिलेगा। अब समय आ गया है जब हम बाबा साहेब के सपनों के भारत को साकार करने के लिए जातिवाद और नफरत की जड़ों को उखाड़ फेंके। संविधान की रक्षा हर नागरिक का कर्तव्य है, और इसकी गरिमा को बनाए रखना हमारा सामूहिक दायित्व। जय भीम, जय भारत, जय संविधान।

Chandra Shekhar Aazad

196,970 views • 1 year ago

मेरठ में ‘हत्या-अपहरण’ के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे सपा के वरिष्ठ सांसद को रोका जाना बेहद निंदनीय है। उप्र का भाजपा शासन-प्रशासन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। भाजपा अपराधी को बचा रही है। बुलडोज़र की कार्रवाई मूक दर्शक बन कर खड़ी है। एक माँ और घर की बहन-बेटी का महत्व और मान क्या होता है ये एक परिवारवाला ही समझ सकता है कोई सियासतदार नहीं। भाजपा भी इस हत्याकांड और बेटी के अपहरण में पूरी तरह भागीदार है। ऐसे भ्रष्ट व पक्षपाती शासन से अच्छा तो शासन का न होना है। भाजपा के समर्थक तक इससे शर्मिंदा हैं, कल को इस आग की आँच उनके घरों तक भी पहुँचेगी। अपराधी किसी की नेमप्लेट देखकर नहीं घुसते हैं। घोर निंदनीय!

Akhilesh Yadav

113,131 views • 7 months ago

मासूम बच्चे ने खोली पिता और दादा-दादी की पोल - अंजलि की हत्या का सच! 💔😨 समाज में रिश्तों की मर्यादा किस कदर गिरती जा रही है, यह वीडियो उसी का एक खौफनाक उदाहरण है। बिहार के हाजीपुर (फतेहपुर) की रहने वाली अंजलि की उसके ही ससुराल वालों ने बेरहमी से हत्या कर दी। इस वीडियो में अंजलि का छोटा सा बेटा अपनी तोतली आवाज़ में बता रहा है कि कैसे उसके 'पापा और दादा' ने रस्सी से उसकी माँ का गला दबाया और 'दादी' ने माँ का मुँह दबाए रखा ताकि वह शोर न मचा सके। अंजलि के पिता भी इस दुखद घड़ी में टूट चुके हैं और समाज की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं। यह केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि हमारे समाज के दोहरे चेहरे को भी उजागर करता है जहाँ सैंकड़ों लोग तमाशा देखने के लिए तो खड़े हैं, लेकिन किसी ने भी अंजलि के शव को कंधा देने या उस बूढ़े पिता और मासूम बच्चे की मदद करने की जहमत नहीं उठाई। हमें कब तक ऐसी घटनाओं को केवल एक तमाशा मानकर देखना एक मासूम की जुबानी, उसकी माँ की मौत की दर्दनाक कहानी। 💔 बिहार के हाजीपुर में जो अंजलि के साथ हुआ, वह किसी भी इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी है। जिस घर को उसने अपना समझा, वहीं उसे मौत मिली। सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि लोग तमाशबीन बने रहे, पर किसी ने उस बूढ़े पिता का हाथ नहीं थामा। क्या हमारा समाज इतना संवेदनहीन हो चुका है? इस वीडियो को इतना शेयर करें कि अंजलि के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा मिले और उस मासूम बच्चे को न्याय

Lakhan meena

85,391 views • 5 months ago

जनप्रतिनिधि होना सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि समाज के सामने एक आदर्श स्थापित करने की जिम्मेदारी है।" बुलंदशहर के शमशान घाट में बीजेपी नेता राहुल वाल्मीकि का कथित आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा जाना न सिर्फ नैतिक पतन को दर्शाता है, बल्कि यह जनता के विश्वास के साथ भी धोखा है। जिस स्थान को अंतिम संस्कार और शांति का प्रतीक माना जाता है, वहां इस तरह की हरकतें निंदनीय हैं। यह सिर्फ अश्लीलता नहीं, सार्वजनिक मर्यादा का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में केवल माफी मांगना काफी नहीं होता, राजनीतिक और कानूनी जवाबदेही तय होनी चाहिए। आश्चर्य की बात है कि नेता हो या आम आदमी, जब शारीरिक इच्छाएं विवेक पर हावी हो जाएं, तो स्थान और स्थिति का कोई मतलब नहीं रह जाता। प्रश्न यही है — क्या राजनीति अब चरित्र से ज़्यादा सुविधा का खेल बन चुकी है? आप जैसे नेता समाज का मार्गदर्शन करें या समाज को शर्मसार करें — फैसला जनता को करना है। नेताजी, शमशान में संस्कार होते हैं, संस्कारों का नहीं।

Nitish Kumar Yadav

122,388 views • 1 year ago

जिलाधिकारी - मध्य प्रदेश दतिया ईमानदारी की मिसाल – समाज के लिए प्रेरणा आज के दौर में जब अधिकांश लोग धन, पद और स्वार्थ को जीवन की पहली प्राथमिकता बना चुके हैं, तब भी कुछ ऐसे लोग हैं जो सच्चाई और कर्तव्यनिष्ठा को सर्वोपरि रखते हैं। यही कारण है कि मध्यप्रदेश के एक जिलाधिकारी महोदय लगातार चर्चा और सम्मान का विषय बने हुए हैं। ये अधिकारी इस विश्वास को जीवित करते हैं कि – “सच को आंच नहीं आती, यदि कर्तव्य सच्चे मन से निभाया जाए।” आज की कड़वी सच्चाई समाज में बड़ी संख्या में लोग धन के पीछे भागते हैं। धन ही जीवन का लक्ष्य मान लिया गया है। परिणाम यह हुआ कि: लोग अपने नैतिक मूल्यों और सुकून को खो देते हैं। लालच और पाप में फँसकर आत्मा पर काली पट्टी बाँध लेते हैं। दूसरों का जीवन प्रभावित करते हैं और स्वयं भी चैन से जी नहीं पाते। सच्चाई का उजला चेहरा लेकिन जब कोई अधिकारी ईमानदारी से अपने पद की गरिमा निभाता है, तत्काल न्याय करता है और निडर होकर लोगों की मदद करता है, तो वह पूरे समाज को एक संदेश देता है। उसकी सच्चाई और कर्मनिष्ठा देखकर हर किसी के दिल से दुआएँ निकलती हैं। धन से कोई अमरता नहीं मिलती। धन कुछ दिनों की यादें देता है, वह भी धुंधली। लेकिन नाम, सत्य और कर्म ही ऐसे धन हैं जिन्हें युगों-युगों तक लोग याद रखते हैं। समाज और जिम्मेदारों के लिए आईना आज ऐसे अधिकारी को देखकर समाज और हर जिम्मेदार व्यक्ति को आत्मचिंतन करना चाहिए। क्या केवल धन कमाना ही जीवन का उद्देश्य है? क्या नाम और सम्मान से बड़ा कोई खजाना है? क्या बिना ईमानदारी और कर्तव्यपालन के समाज का भला हो सकता है? इस अधिकारी ने यह सिद्ध कर दिया कि पद का असली मूल्य तब है, जब वह आमजन की पीड़ा का समाधान बने। गर्व और सलाम ऐसे ईमानदार अधिकारियों पर गर्व है। यह केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए संदेश है कि सच्चाई और कर्तव्यनिष्ठा अब भी जिंदा है। आज आवश्यकता है कि समाज और जिम्मेदार लोग जागें, ईमानदारी को जीवन का हिस्सा बनाएं और सच्चाई को सर्वोपरि रखें। सलाम है ऐसे कर्मवीरों को, जिनकी ईमानदारी और न्यायप्रियता समाज के लिए प्रकाशस्तंभ है।

Brijesh Singh yadav

46,268 views • 11 months ago

रिलबाजी एक गंभीर बीमारी बन चुकी है, अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में ये देश के लिए कैंसर से भी ज्यादा खतरनाक बीमारी साबित हो सकती है। एक रील बनाने के लिए ट्रेन के टॉयलेट का इस्तेमाल करना आखिर कहाँ तक सही है? पहले लड़की जाती है, फिर लड़का – ये लोग आखिर समाज को क्या मैसेज देना चाहते हैं? ट्रेन का टॉयलेट कोई मजाक या शूटिंग की जगह नहीं है, ये यात्रियों की जरूरत के लिए होता है। इसे रील बनाने के लिए इस्तेमाल करना बेहद घटिया हरकत है और बेशर्मी की सारी हदें पार करना है। ऐसे लोग सिर्फ व्यूज़ और लाइक्स के लिए समाज में गंदगी फैला रहे हैं और गलत सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। आज ये सब देखकर आने वाली पीढ़ी क्या सीखेगी? Ministry of Railways को ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स पर सख्त से सख्त एक्शन लेना चाहिए, ताकि कोई भी आगे से ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे। क्योंकि ये सिर्फ एक रील नहीं, बल्कि समाज के गिरते स्तर की निशानी होने के साथ साथ यात्रियों के सुरक्षा के लिए खतरा भी है। ~ साभार: NCIB Headquarters

NCIB Headquarters

27,337 views • 5 months ago

होली किसी एक रंग का नहीं बल्कि हर रंग और प्यार का त्यौहार है। ऐसे में एक निर्वाचित मुख्यमंत्री द्वारा एक पुलिस अधिकारी की सड़क छाप सोच को बढ़ावा देना बेहद निंदनीय है। होली और जुम्मे के बहाने सांप्रदायिक वैमनस्यता को बढ़ावा देने वालों को शायद पता नहीं कि बीते 25 सालों में 6 बार होली और जुम्मा एक साथ आए हैं, शांतिपूर्वक ढंग से मनाए गए हैं, मगर ऐसी कट्टर सोच पहली बार देखने को मिली है। मुग़लों से लेकर अंग्रेज़ों तक और पिछले 75 साल में हर बार होली बड़े उल्लास के साथ मनाई जाती रही है, लेकिन यह पहली बार हो रहा है कि हिंदुओं के स्वयंभू ठेकेदारों की सरकार में ही हिंदुओं का त्यौहार ख़तरे में आ गया। यह कैसे हिंदुओं के ठेकेदार हैं और यह कैसी नकारा सरकार है? क्यों हमें अपने त्यौहारों पर मस्जिदों के सामने ही नाचना है? इस वाहियात सोच का हिंदू संस्कृति में कोई स्थान नहीं है। आज सरकार के अहमक अधिकारियों द्वारा होली पर मुसलमानों को घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी जा रही है, कल यही अहमक अधिकारी ईद पर हिंदुओं को घर से बाहर न निकलने की चेतावनी देंगे! यह क्या मज़ाक़ बना रखा है देश का? इनके इन विभाजनकारी मंसूबों को इस देश की तासीर कामयाब नहीं होने देगी। क्योंकि इस देश की सभ्यता और संस्कृति के हज़ारों साल के इतिहास में कई शासक आए और गए, मगर इस देश की सभ्यता और संस्कृति बनी रही, क्योंकि इस देश की तासीर ही इतनी मज़बूत है। आप सब पूरे उत्साह से होली खेलें और किसी के साथ ज़ोर ज़बरदस्ती न होने दें - वो महिलाएँ हों, हिंदू हों, मुसलमान हों या कोई भी हो। मदन गोपाल सिंह जी की मधुर आवाज़ में होली पर बुल्लेशाह जी का यह शानदार कलाम सुनिए। आप सब को होली की बहुत बहुत मुबारकबाद।

Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ

179,451 views • 1 year ago

अखिलेश यादव द्वारा आगरा में दिया गया बयान अत्यंत निंदनीय और दुर्भावनापूर्ण है। बयान से स्पष्ट है कि वह जानबूझकर राजपूत समाज को निशाना बना रहे हैं। थानों में 'सिंह' सरनेम वाले अधिकारियों की तैनाती का मुद्दा उठाकर न केवल राजपूत समाज का अपमान किया जा रहा है बल्कि समाज को जातिगत आधार पर बांटने का भी प्रयास हो रहा है। प्रशासनिक तैनातियाँ योग्यता, सेवा भावना और शासन व्यवस्था के अनुसार होती हैं, न कि किसी जाति या सरनेम के आधार पर। जाति देखकर नियुक्ति Samajwadi Party सरकार करती है Akhilesh Yadav की सरकार में होती थी। सांसद सुमन द्वारा वीर शिरोमणि राणा सांगा जी के लिए जो अपमानजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, वह न केवल राजपूत समाज, बल्कि हर राष्ट्रभक्त का अपमान है। राणा सांगा का विरोध केवल वही कर सकता है, जिसकी मानसिकता राष्ट्रद्रोही हो। राणा सांगा न केवल राजपूत समाज, बल्कि भारतीय इतिहास के गौरव हैं, जिन्होंने अपने धर्म और मातृभूमि की रक्षा के लिए जीवन बलिदान किया। उनका अपमान इस देश की अस्मिता का अपमान है, जिसे कोई भी राष्ट्रभक्त बर्दाश्त नहीं करेगा। और जहां तक बात योगी जी की है। Yogi Adityanath जी एक सिद्धपीठ के महंत हैं और सनातन धर्म परंपरा के अनुसार संत हैं। उनका क्षत्रिय कुल में जन्म लेना मात्र एक संयोग है। वे पूरे समाज के लिए समर्पित हैं। उन पर या किसी भी क्षत्रिय समाज पर इस प्रकार के निराधार और भड़काऊ आरोप लगाकर सस्ती राजनीति करने का प्रयास है। राजपूत समाज अपमान को कभी स्वीकार नहीं करेगा। यह समाज अपने वीर पूर्वजों के स्वाभिमान की रक्षा करना जानता है और संवैधानिक व लोकतांत्रिक तरीके से हर अपमान का जवाब देना भी जानता है। 2024 में सपा की काठ की हांडी चूल्हे से उतर चुकी है और अब राजपूत समाज और समूचा राष्ट्रभक्त समाज सपाई असलियत पहचान चुका है। राणा सांगा का अपमान करने वाले और राजपूत समाज को टारगेट करने वाले अब बख्शे नहीं जाएंगे। यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की भी है। इसका जवाब संविधान के दायरे में दिया जाएगा और दिया जाना चाहिए। #RanaSanga

Pankaj Singh

34,422 views • 1 year ago