Loading video...

Video Failed to Load

Go Home

इसाइयों की मानसिकता एवं सोच को ध्यान में रखने योग्य है

26,258 views • 2 years ago •via X (Twitter)

0 Comments

No comments available

Comments from the original post will appear here

Related Videos

ग्रामीण अंचल के किसान से दिख रहे इन वक्ता ने BJP की पूरी कलई खोल दी और बताया कि “संविधान और ‘हम भारत के लोग’ की आत्मा का ख़ात्मा कैसे हो, RSS का विचार इस पर बिलकुल स्पष्ट था.” RSS के एम. एस . गोलवलकर (उनके गुरुजी) की किताब ‘We, or Our Nationhood Defined’ की सोच को समझें तो बात कुछ यूँ निकलती है कि एक बार सत्ता मज़बूती से हाथ में आ जाए, तो उसे बनाए रखने के लिए समाज को एक ही ढाँचे में ढालो, अलग राय और असहमति को कमज़ोर करो और कड़ा अनुशासन रखो. सीधी भाषा में, RSS की राजनीति एक ऐसी सोच है, जिसमें किसी विविधता और अलग-अलग आवाज़ों के लिए जगह ही नहीं है. एक ही सोच और एक ही तरह की व्यवस्था को बनाए रखने पर ज़ोर, जहाँ हर व्यक्ति की अलग राय, उसकी गरिमा और उसके संघर्ष को जरूरी नहीं माना गया (जो देश के संविधान का मूल आधार है) और सत्ता को एक दिशा में स्थिर रखने की बात कही गई है.

Wg Cdr Anuma Acharya (Retd)

15,675 views • 4 months ago