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इससे अच्छी तरह बिस्किट तो जानवरों को खिलाए जाते हैं।

87,641 次观看 • 4 个月前 •via X (Twitter)

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दो रोज़ पहले मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने सलीम और आकिब को जानवरों की तरह पीटते हुए जुलूस निकाला था। पुलिस उन्हें जानवरों की तरह पीटते हुए उनसे कहलवा रही थी, गाय हमारी माता है, पुलिस हमारी बाप है। अब हिंदूवादी संगठनों के लोगों ने इन पुलिसकर्मियों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया है। आपने मॉब लिंचिंग के वीडियो देखे होंगे, लिंचिंग करने वाले जॉम्बी किसी युवक को जानवरों की तरह पीटते हुए उससे ‘अपने’ धर्म का नारा लगवाते हैं। फिर एक झुंड आकर लिंचिंग के आरोपितों का ‘वीरों’ की तरह स्वागत करता है। उज्जैन पुलिस ने क्या ऐसा ही कृत्य नहीं किया है? जिस तरह लिंचिंग करने वाले नारे लगवाते हैं, पुलिस ने भी तो वैसा ही किया है? जिस तरह जॉम्बी गैंग लिंचिंग करने वालों को महिमामंडित करता है, उज्जैन में पुलिस को ऐसे ही तो महिमामंडित किया गया है। क्या IPS Association को इसका संज्ञान नहीं लेना चाहिए? नागरिकों के साथ जानवरों जैसा बर्ताव तो ऐसे किया मानो वो दोयम दर्जे के नागरिक हों? इन वीडियो में इंस्पेक्टर डीएल दसोरिया है।यही इंस्पेक्टर पहली वीडियो में युवकों को पीटते हुए ख़ुद को बाप और गाय को माँ कहलवा था। दूसरी वीडियो में खुद के गले मे बजरंग दल,VHP के गुंडे से फूलों की माला डलवा सम्मानित करा रहा है, और तीसरी वीडियो में इंस्पेक्टर ख़ुद बता रहा है कि हमें सूचना मिली थी वो गौकशी को अंजाम देने वाले हैं। यानि घटना को अंजाम नहीं दिया गया था, सिर्फ शक के आधार पर पुलिस ने यह क्रूरता की है? DGP MP साहब क्या Madhya Pradesh Police हिंदूवादी संगठनों के मातहत काम कर रही है? क्या इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रावाई नहीँ करनी चाहिए? क्या इन्हें सस्पेंड नहीं किया जाना चाहिए? नागरिकों को यूं अपनानित करने का अधिकार तो किसी को भी नहीं है।

Wasim Akram Tyagi

23,290 次观看 • 1 年前