正在加载视频...

视频加载失败

उत्तरप्रदेश के बाद बिहार में भी #Normalization प्रक्रिया के खिलाफ अभ्यर्थियों का आंदोलन। #Normalization एक Technical Scam है जो दिखता नहीं बस होता हैI #no_normalization_in_bpsc बीजेपी समर्थित सरकारे normalization लागू करने के पीछे क्यों पडी है। 🤔 पुलिस ने पटना में BPSC अभ्यर्थियों पर जमकर लाठी चार्ज कर दिया....

24,993 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)

10 条评论

Reeta Shethiya 的头像
Reeta Shethiya1 年前

Khan sir jeva teacher gujrat ma ketla je ground par student sathe hoy. Nai ke potani Navi book ke cource lonch karvama busy

dharamesh gohel 的头像
dharamesh gohel1 年前

ગુજરાત માં એકેય શિક્ષક કે શૈક્ષણિક સંસ્થા કોચિંગ સંસ્થા સામે આવી ને બોલતા નથી માઇકાંગલાવ ને ખાલી પૈસા કમાવા માં રસ છે એક દી તો સામે આવી ને વિદ્યાર્થી સાથે બેસો @WebSankulOffice @GYANACADEMY555 @yuvaupnishad @praajasv @ICERAJKOT

✍️😊..મારા વિચારો..☺✍️ 的头像
✍️😊..મારા વિચારો..☺✍️1 年前

सर हो तो ऐसे यार दिल से धन्य वाद है खान सर का ( साले हमारे गुजरात मे एक भी acedemy वाले युवा को साथ नहीं देते है बस और गुजरात के विधार्थी भी मूर्ख है जो नोकरी मिल जाते तब उसका आभार प्रकट करता है😢😢😢

Mehul_Jadwani 的头像
Mehul_Jadwani1 年前

તો એના પરથી એવું નક્કી થયું કે cce pre વખતે આપણે આ રસ્તે જવાનું હતું... પણ અફસોસ છે

ΣR V̷i̷r̷a̷n̷î ̷J̷ìg̷n̷e̷s̷h̷෴🐼🇮🇳 的头像
ΣR V̷i̷r̷a̷n̷î ̷J̷ìg̷n̷e̷s̷h̷෴🐼🇮🇳1 年前

🔥

Ajit Vasava 的头像
Ajit Vasava1 年前

पटना: खान सर को बिहार पुलिस ने किया गिरफ्तार खान सर गर्दनीबाग में अभ्यर्थियों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे खान सर.. देश की वह हस्ती हैं जिसने अपनी शिक्षा के बल पर , वह मुकाम हासिल किया है जो शायद ही वर्तमान में कोई कर पाया है।। लानत है ऐसी सरकार पर..😌😌

Ajit Vasava 的头像
Ajit Vasava1 年前

UP BIHAR bad have Gujarat ma normalization dur karava mate hakal Karo yurajbhai.

RC 的头像
RC1 年前

Gujarat ❎😂#CCE #cce

Ajit Vasava 的头像
Ajit Vasava1 年前

पटना: खान सर को बिहार पुलिस ने किया गिरफ्तार खान सर गर्दनीबाग में अभ्यर्थियों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे

ROOI 的头像
ROOI1 年前

ગુજરાત સરકારની ખોટી રીતે લેવાયેલી પરીક્ષા ( ફોરેસ્ટ ગાર્ડ/ગૌણ સેવા પસંદગી મંડળ ગ્રુપ A ગ્રુપ B ) તમને કેવું લાગે છે?

相关视频

Thanks युवा बिहारी चिराग पासवान for supporting BPSC STUDENTS! आपसे निवेदन है कि आप मुख्यमंत्री जी को छात्रों के समस्याओं से अवगत कराइए, सिर्फ अवगत ही नहीं, अभ्यर्थियों का मांग मनवाईए। शाम तक आयोग द्वारा नोटिस जारी किया जाना चाहिए परीक्षा को लेकर, सैंकड़ों छात्र घायल हो गए है, कई का तो अभी तक हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। फॉर्म रिओपन होना चाहिए और परीक्षा तिथि आगे बढ़ना चाहिए। BPSC के इतिहास के सबसे बड़े बहाली में आप सर्वर डाउन होने के कारण हजारों अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने से नहीं रोक सकते। #BPSC #bpsc70th #BPSC_70th #Bihar #ReOpen_70thBPSC_Form #70th_BPSC_EXAMDATE_EXTENSION Tejashwi Yadav Rashtriya Janata Dal Janata Dal (United) Nitish Kumar CMO Bihar बिहार राजद Bihar Congress BJP Bihar News18 Bihar

study for civil services

17,092 次观看 • 1 年前

कुछ कोचिंग संचालक और कुछ नेताओं ने #BPSC अभ्यर्थियों के पूरे लड़ाई और संघर्ष को मिट्टी में मिला दिया कहें तो पूरा डायरेक्शन ही बदल दिया और सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने लिए पब्लिसिटी का रोटी सेका इन BPSC अभ्यर्थियों को अपनी राजनीति भट्टी में डालकर ,जो छात्र सच में अभ्यर्थियों का लड़ाई लड़ रहे थे वो आज कहीं है ही नहीं पूरे प्रदर्शन में या मीडिया के कैमरों पर पेपर के पेजों पर …छात्रों का जो Re Exam का माँग था वो ग़ायब हो चुका अब उसके जगह “कंबल” वैनिटी वैन,पुलिस ने थप्पड़ चलायाये सब पर चर्चा हो रहा है..! पुलिस की लाठी चार्ज़ में ऐसे कितने ग़रीब अभ्यर्थियों से मिला था जिनके पास सिर्फ़ एक चश्मा था वो भगदड़ और लाठी चार्ज में टूट गया था और उनको देखने में दिक़्क़त हो रही थी, कइयों का मोबाइल टूटा तो कइयों का पर्स खो गया और सब अधिकांश गाँव से आने वाले ग़रीब छात्र थे जो पता नहीं अब कहाँ है …. लेकिन हाँ उनके जगह …. बाक़ी आप तो जानबे करते हैं #Bihar BPSC #PatnaPolice

Mukesh singh

128,051 次观看 • 1 年前

ये है विवेक एक BPSC STUDENT , आंदोलन के समय इनको गंभीर चोट आई है, पूरा पैर फ्रैक्चर हो गया है, और भी कई जगह चोटें आईं है इनको, उसी दिन से ये अस्पताल में भर्ती है, अपना इलाज करवा रहे है, सबलोग मिल के बाकी मदद तो कर दिया इनका लेकिन ये परीक्षा देने में एकदम असमर्थ है, 2 साल से मेहनत किए है। और ऐसा कई लोग है जो अभी तक स्वस्थ नहीं हो पाए है। नीतीश कुमार जी, आपसे हाथ जोड़कर निवेदन कर रहे है 🙏 ऐसे ऐसे अभ्यर्थियों के लिए न्याय कीजिए, इनके माता जी भी आपसे विनती कर रहे है, प्लीज सुन लीजिए। ये लोग आपका अहसान जिंदगी में कभी नहीं भूलेंगे। BPSC के इतिहास के सबसे बड़े बहाली में सबको बैठने का मौका दीजिए, साल भर का मेहनत बर्बाद नहीं कीजिए अभ्यर्थियों का, प्लीज 🙏 #Reopen70thBpscform #ReOpen_70thBPSC_Form #BPSC #bpscexam #bihar #BiharNews #BPSCStudents

study for civil services

18,319 次观看 • 1 年前

हुजूर UP वाली इस BPSC मैडम जो बिहार के गया जिले में कार्यरत है। इस BPSC मैडम के गणित ज्ञान को देखिए और जवाब दीजिए क्या इस तरह के शिक्षकों से बिहार के नौनिहालों का ज्ञान समृद्ध होगा? क्या हमारे बच्चों को मूर्ख बनाने के लिए ही इस मूर्ख लोगों का चयन डोमिसाइल हटाकर BPSC TRE द्वारा किया गया है? क्या इन चयनित शिक्षकों के तुच्छ ज्ञान से अपने राज्य की BPSC जैसे आयोग की गरिमा को धूमिल नहीं हो रही है? ऐसे BPSC शिक्षक शिक्षिकाओं को अविलंब सेवामुक्त किया जाना चाहिए ताकि हमारे बिहार के बच्चे पर अज्ञानी BPSC शिक्षकों का प्रभाव न पड़े। बिहार में योग्य अभ्यर्थियों दर दर की ठोकरें खा रहे हैं और इसके जैसा मूर्ख भी शिक्षक बन गया है। Nitish Kumar Samrat Choudhary Vijay Kumar Sinha Ministry of Education Education Department, Bihar #bihar

Sahitya Aajkal

16,977 次观看 • 1 年前

जब छात्र नॉर्मलाइजेशन का विरोध कर रहे थे। - तब तेजस्वी खड़े थे। जब छात्रों को Normalisation के ख़िलाफ़ हुए प्रोटेस्ट में BPSC के बाहर पीटा गया। - तब तेजस्वी खड़े थे। बापू परिक्षा केंद्र के बाहर जब DM ने अभ्यर्थी को थप्पड़ मारा। - तेजस्वी खड़े थे। जब पहले दिन छात्रों ने Re Exam के लिए गर्दनीबाग़ में धरना देना शुरू किया। ~ तेजस्वी खड़े थे। 28 नवंबर को बिहार के विधानसभा में नॉर्मलाइजेशन के ख़िलाफ़ बोलने वाली पार्टी राजद थी। सदन के बाहर #no_normalization_in_bpsc का पोस्टर लेकर खड़ी होने वाली महिला राबड़ी देवी जी थी। सरकार को समीक्षा कर के #BPSCReExamForAll कराने के लिए मुख्यमंत्री को दो-दो बार चिट्ठी लिखने वाले नेता तेजस्वी जी थे। 25 दिसंबर को, परीक्षा के 12 दिनों बाद भी जब BPSC के बाहर लाठी चली। तेजस्वी ही साथ खड़े थे कोई और नहीं था। दूर-दूर तक कोई नहीं था। सच्चाई ये है कि हम लोग आंदोलन हाईजैक करना नहीं जानते। हम आंदोलन की छाती कुचल कर सियासत नहीं करते। हमारे पास करोड़ों का प्रचार तंत्र नहीं है। मीडिया नहीं है। गांधी मैदान में 5 लाख की भीड़ जुटा देंगे। एक-एक विधायक हर जिले से 10-10 हज़ार लोग लेकर गांधी मैदान पहुँच जाएंगे। लालू जी या तेजस्वी जी की एक कॉल पर पूरे बिहार का चक्का जाम हो जाए, लेकिन इससे छात्रों को क्या मिलेगा? ब्लैक लिस्टिंग, मुकदमा, लाठी, वाटर कैनन। इससे Re Exam नहीं मिलेगा। किसान आंदोलन के पहले दिन यदि राहुल गांधी कांग्रेस का झंडा लेकर दिल्ली बॉर्डर पर बैठ गए होते तो उनकी छवि भले जननेता वाली हो जाती, किसान बिल वापिस नहीं होते। आंदोलन में राजनैतिक हस्तक्षेप उसके मूल स्वरूप की हत्या करता है। BPSC के लाखों अभ्यर्थी अलग-अलग विचारधारा के हैं। सबकी अपनी राय है। अपने नेता हैं। हमें वहाँ थोपा-थोपी नहीं चाहिए। हम क्रेडिटख़ोर नहीं है। बस।

Priyanshu Kushwaha

33,522 次观看 • 1 年前

*BPSC परीक्षा के विरुद्ध फैलाए जा रहे भ्रम पर कुछ जानने योग्य तथ्य। ◆आज बिहार लोकसेवा आयोग के सामने छात्रों पर लाठीचार्ज की जो अप्रिय घटना सामने आई है । - उसके पीछे भ्रम फैला कर राजनीतिक लाभ लेने की शर्मनाक कोशिश काम कर रही थी । - इसकी वजह से हमारे पढ़ने-लिखने वाले युवाओं को भी परेशानी उठानी पड़ी । - आज जो प्रदर्शन BPSC कार्यालय के सामने हो रहा था...उसका आधार ही भ्रामक था - जिस #नॉर्मलाइजेशन की आड़ में छात्रों को भड़काने का प्रयास किया जा रहा था - उसका प्रस्ताव 70 वीं BPSC की परीक्षा में था ही नहीं - दिनांक 23 सितंबर 2024 को जो विज्ञापन आयोग की ओर से निकाला गया था...उसमें कहीं भी #नॉर्मलाइजेशन की चर्चा नहीं है । - दूसरी मांग जो भ्रमित करने वाले लोग उठा रहे थे...कि फिर से कुछ दिनों के लिए आवेदन के लिए पोर्टल को खोला जाए - तो हम सभी को यह जानना चाहिए कि विज्ञापन के साथ 28 सितंबर से 18 अक्टूबर 2024 तक आवेदन करने का अवसर दिया गया था - जिसे छात्रों की सुविधा के लिए बढ़ाकर 4 नवम्बर तक किया गया - अब जबकि आयोग आगामी 13 दिसंबर को परीक्षा आयोजित करने जा रही है । - ऐसे में आवेदन के लिए पोर्टल फिर से खोलना और नए आवेदन करने वाले छात्रों के लिए परीक्षा की व्यवस्था कराना कठिन हो जाएगा । - जो लोग BPSC की परीक्षा में बैठने की शैक्षणिक योग्यता हासिल नहीं कर पाए - वो आज अपने राजनीतिक फायदे के लिए भ्रम फैलाकर युवाओं को भड़काने में जुटे हैं । - अपने एजेंट के रूप में सोशल मीडिया पर सस्ती लोकप्रियता बटोरने वाले लोगों को छात्रों का रहनुमा बनाकर आगे भेज रहे हैं । - उनका यह बर्ताव दुर्भाग्यपूर्ण तो है ही बिहार के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए भी अहितकर है । - इस प्रकार का भ्रम और अशांति का वातावरण बनाकर ये लोग मेहनत करने वाले युवाओं के भविष्य को प्रभावित करने में लगे हैं । - एक सप्ताह बाद 13 दिसंबर को परीक्षा होनी है जिसमें राज्य ही नहीं देश के अलग अलग हिस्सों से छात्र आएंगे । - उनकी मेहनत को ये लोग प्रभावित कर रहे हैं ।

Vijay Kumar Sinha

63,471 次观看 • 1 年前

फिर से दोहरा रहे हैं कि नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं फिर वो उत्तर प्रदेश हो या बिहार या फिर पूरा देश। जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकारें हैं वहाँ एक सा ही पैटर्न है। कभी डबल शिफ़्ट, डबल डे, तो कभी नॉर्मलाइजेशन के नाम पर, कभी सर्वर में गड़बड़ी करवाकर, कभी पेपर लीक कराकर, कभी कॉपी बदलवाकर, कभी आरक्षण मारकर, कभी रिज़ल्ट रोककर या कभी रिज़ल्ट को कोर्ट में घसीटकर भाजपावाले नौकरी पाने के हर तरीक़े को फँसा देते हैं। भाजपा की मंशा नौकरी देने की होती ही नहीं है, वो हर काम ठेके पर देना चाहती है, जिससे ठेकेदारों से वसूली की जा सके। युवाओं के हक़ की नौकरियाँ भाजपा के भ्रष्टाचार का शिकार हो गयी हैं। सरकारी नौकरियों को धीरे-धीरे खत्म करने के पीछे एक छिपा हुआ एजेंडा आरक्षण मारना भी है क्योंकि ठेकेदारी में आरक्षण लागू नहीं होता है। भाजपा जाएगी तो नौकरी आएगी। युवा कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा! #BPSC #no_normalization_in_bpsc #JAWAB_DO_BPSC #One_Shift_One_Paper #bpsc70th #Patna #Bihar #BiharNews #ReOpen_70thBPSC_Form

Akhilesh Yadav

412,368 次观看 • 1 年前

NEET का पेपर फिर लीक हो गया है, परीक्षा रद्द हो गई इस बार 22 लाख छात्रों ने NEET का इम्तिहान दिया था। बच्चे दिन रात मेहनत करके पढ़े, माँ-बाप ने कोचिंग करायी, इम्तिहान देने गए - खर्चा वहन किया। नतीजा- पेपर लीक, परीक्षा रद्द शायद फर्ज़ी डिग्री वालों से शिक्षा के संबंध में गंभीरता की आशा ही बेमानी है। धर्मेंद्र प्रधान जी को अपने पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है। उनके बच्चे तो मज़े से विदेश में पढ़ रहें हैं, इसीलिए देश के बच्चों का भविष्य चौपट होता देख भी इन लोगों का दिल नहीं पसीजता। एक इम्तिहान तो बिना पेपर लीक हुए करा नहीं सकते - विश्वगुरु बनने का फर्ज़ीवाड़ा करते हैं। लेकिन सवाल इस बात का है कि पेपर लीक माफिया के हौसले इतने बुलंद कैसे हैं? उनको क़ानून और सरकार का डर क्यों नहीं? क्योंकि यही BJP वाले उनका संरक्षण करते हैं। बच्चों का भविष्य दांव पर है तो रहे - इससे मोदी जी को कोई मतलब नहीं है - वह रोड शो में व्यस्त हैं। : AICC-सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन Supriya Shrinate जी

Congress

22,431 次观看 • 3 个月前

NEET का पेपर फिर लीक हो गया है, परीक्षा रद्द हो गई इस बार 22 लाख छात्रों ने NEET का इम्तिहान दिया था यह बच्चे दिन रात मेहनत करके पढ़े, माँ-बाप ने कोचिंग करायी, इम्तिहान देने गए - खर्चा वहन किया नतीजा? पेपर लीक, परीक्षा रद्द शायद फ़र्ज़ी डिग्री वालों से शिक्षा के संबंध में गंभीरता की आशा ही बेमानी है धर्मेंद्र प्रधान जी को अपने पद पर बने रहने का कोई हक़ नहीं है उनके बच्चे तो मज़े से विदेश में पढ़ रहें हैं, इसीलिए देश के बच्चों का भविष्य चौपट होता देख भी इन लोगों का दिल नहीं पसीजता एक इम्तिहान तो बिना पेपर लीक हुए करा नहीं सकते - विश्वगुरु बनने का फर्ज़ीवाड़ा करते हैं लेकिन सवाल इस बात का है कि पेपर लीक माफ़िया के हौसले इतने बुलंद कैसे हैं? उनको क़ानून और सरकार का डर क्यों नहीं? क्योंकि यही BJP वाले उनका संरक्षण करते हैं बच्चों का भविष्य दांव पर है तो रहे - इससे मोदी जी को कोई मतलब नहीं है - वह रोडशो में व्यस्त हैं

Supriya Shrinate

50,300 次观看 • 3 个月前

सम्भोग का प्राथमिक अनुभव शरीर से ज्यादा गहरा नहीं होता। लेकिन शरीर के अनुभव पर ही जो रुक जाते हैं, वे सेक्स के पूरे अनुभव को उपलब्ध नहीं होते। उन्हें, मैंने जो गहराइयों की बातें कही हैं, उसका उन्हें कोई भी पता नहीं चल सकता। और अधिक लोग शरीर के तल पर ही रुक गए हैं। इस संबंध में यह भी जान लेना जरूरी है कि जिन देशों में भी प्रेम के बिना विवाह होता है, उस देश में सेक्स शरीर के तल पर ही रुक जाता है, उससे गहरा नहीं जा सकता। विवाह दो शरीरों का हो सकता है, विवाह दो आत्माओं का नहीं। दो आत्माओं का प्रेम हो सकता है। तो अगर प्रेम से विवाह निकलता हो, तब तो विवाह एक गहरा अर्थ ले लेता है। और अगर विवाह दो पंडितों के और दो ज्योतिषियों के हिसाब-किताब से निकलता हो, और जाति के विचार से निकलता हो, और धन के विचार से निकलता हो, तो वैसा विवाह कभी भी शरीर से ज्यादा गहरा नहीं जा सकता। लेकिन ऐसे विवाह का एक फायदा है। शरीर मन की बजाय ज्यादा स्थिर चीज है। इसलिए शरीर जिन समाजों में विवाह का आधार है, उन समाजों में विवाह सुस्थिर होगा, जीवन भर चल जाएगा। शरीर अस्थिर चीज नहीं है। शरीर बहुत स्थिर चीज है। उसमें परिवर्तन बहुत धीरे-धीरे आता है और पता भी नहीं चलता। शरीर जड़ता का तल है। इसलिए जिन समाजों ने यह समझा कि विवाह को स्थिर बनाना जरूरी है- एक ही विवाह पर्याप्त हो, बदलाहट की जरूरत न पड़े, उनको प्रेम अलग कर देना पड़ा। क्योंकि प्रेम होता है मन से और मन चंचल है। जो समाज प्रेम के आधार पर विवाह को निर्मित करेंगे, उन समाजों में तलाक अनिवार्य होगा। उन समाजों में विवाह परिवर्तित होगा; विवाह स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकती। क्योंकि प्रेम तरल है। मन चंचल है। शरीर स्थिर और जड़ है। आपके घर में एक पत्थर पड़ा हुआ है। सुबह पत्थर पड़ा था, सांझ भी पत्थर वहीं पड़ा रहेगा। सुबह एक फूल खिला था, सांझ तक मुर्झा जाएगा और गिर जाएगा। फूल जिंदा है, जन्मेगा, जीएगा, मरेगा। पत्थर मुर्दा है, वैसे का वैसा सुबह था, वैसा ही शाम पड़ा रहेगा। पत्थर बहुत स्थिर है। विवाह पत्थर की तरह है। शरीर के तल पर जो विवाह है, वह स्थिरता लाता है, समाज के हित में है। लेकिन एक-एक व्यक्ति के अहित में है। क्योंकि वह स्थिरता शरीर के तल पर लाई गई है और प्रेम से बचा गया है। इसलिए शरीर के तल से ज्यादा पति और पत्नी का संभोग और सेक्स नहीं पहुंच पाता गहरे में। एक यांत्रिक, एक मैकेनिकल रूटीन हो जाती है। एक यंत्र की भांति जीवन हो जाता है सेक्स का। उस अनुभव को रिपीट करते रहते हैं और जड़ होते चले जाते हैं। लेकिन उससे ज्यादा गहराई कभी भी नहीं मिलती। जहां प्रेम के बिना विवाह होता है उस विवाह में और वेश्या के पास जाने में बुनियादी भेद नहीं है, थोड़ा सा भेद है। बुनियादी नहीं है वह। वेश्या को आप एक दिन के लिए खरीदते हैं और पत्नी को आप पूरे जीवन के लिए खरीदते हैं। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। जहां प्रेम नहीं है, वहां खरीदना ही है, चाहे एक दिन के लिए खरीदो, चाहे पूरी जिंदगी के लिए खरीदो। हालांकि साथ रहने से रोज-रोज एक तरह का संबंध पैदा हो जाता है एसोसिएशन से। लोग उसी को प्रेम समझ लेते हैं। वह प्रेम नहीं है। प्रेम और ही बात है। शरीर के तल पर विवाह है इसलिए शरीर के तल से गहरा संबंध कभी भी नहीं उत्पन्न हो पाता। यह एक तल है। दूसरा तल है सेक्स का--मन का तल, साइकोलाजिकल । वात्स्यायन से लेकर पंडित कोक तक जिन लोगों ने भी इस तरह के शास्त्र लिखे हैं सेक्स के बाबत, वे शरीर के तल से गहरे नहीं जाते। दूसरा तल है मानसिक। जो लोग प्रेम करते हैं और फिर विवाह में बंधते हैं, उनका सेक्स शरीर के तल से थोड़ा गहरा जाता है। वह मन तक जाता है। उसकी गहराई साइकोलाजिकल है। लेकिन वह भी रोज-रोज पुनरुक्त होने से थोड़े दिनों में शरीर के तल पर आ जाता है और यांत्रिक हो जाता है। पश्चिम ने जो व्यवस्था विकसित की है दो सौ वर्षों में प्रेम- विवाह की, वह मानसिक तल तक सेक्स को ले जाती है। और इसीलिए पश्चिम में समाज अस्तव्यस्त हो गया है; क्योंकि मन का कोई भरोसा नहीं है। वह आज कहता है कुछ, कल कुछ कहने लगता है। सुबह कुछ कहता है, सांझ कुछ कहने लगता है। घड़ी भर पहले कुछ कहता है, घड़ी भर बाद कुछ कहने लगता है। शायद आपने सुना होगा कि बायरन ने जब शादी की, तो कहते हैं कि तब तक वह कोई साठ-सत्तर स्त्रियों से संबंधित रह चुका था। एक स्त्री ने उसे मजबूर ही कर दिया विवाह के लिए। तो उसने विवाह किया। और जब वह चर्च से उतर रहा था विवाह करके अपनी पत्नी का हाथ हाथ में लेकर घंटियां बज रही हैं चर्च की; मोमबत्तियां अभी जो जलाई गई हैं, जल रही हैं; अभी जो मित्र स्वागत करने आए थे, वे विदा हो रहे हैं; और वह अपनी पत्नी का हाथ पकड़ कर 1/2
0:34

Sensitive content

सम्भोग का प्राथमिक अनुभव शरीर से ज्यादा गहरा नहीं होता। लेकिन शरीर के अनुभव पर ही जो रुक जाते हैं, वे सेक्स के पूरे अनुभव को उपलब्ध नहीं होते। उन्हें, मैंने जो गहराइयों की बातें कही हैं, उसका उन्हें कोई भी पता नहीं चल सकता। और अधिक लोग शरीर के तल पर ही रुक गए हैं। इस संबंध में यह भी जान लेना जरूरी है कि जिन देशों में भी प्रेम के बिना विवाह होता है, उस देश में सेक्स शरीर के तल पर ही रुक जाता है, उससे गहरा नहीं जा सकता। विवाह दो शरीरों का हो सकता है, विवाह दो आत्माओं का नहीं। दो आत्माओं का प्रेम हो सकता है। तो अगर प्रेम से विवाह निकलता हो, तब तो विवाह एक गहरा अर्थ ले लेता है। और अगर विवाह दो पंडितों के और दो ज्योतिषियों के हिसाब-किताब से निकलता हो, और जाति के विचार से निकलता हो, और धन के विचार से निकलता हो, तो वैसा विवाह कभी भी शरीर से ज्यादा गहरा नहीं जा सकता। लेकिन ऐसे विवाह का एक फायदा है। शरीर मन की बजाय ज्यादा स्थिर चीज है। इसलिए शरीर जिन समाजों में विवाह का आधार है, उन समाजों में विवाह सुस्थिर होगा, जीवन भर चल जाएगा। शरीर अस्थिर चीज नहीं है। शरीर बहुत स्थिर चीज है। उसमें परिवर्तन बहुत धीरे-धीरे आता है और पता भी नहीं चलता। शरीर जड़ता का तल है। इसलिए जिन समाजों ने यह समझा कि विवाह को स्थिर बनाना जरूरी है- एक ही विवाह पर्याप्त हो, बदलाहट की जरूरत न पड़े, उनको प्रेम अलग कर देना पड़ा। क्योंकि प्रेम होता है मन से और मन चंचल है। जो समाज प्रेम के आधार पर विवाह को निर्मित करेंगे, उन समाजों में तलाक अनिवार्य होगा। उन समाजों में विवाह परिवर्तित होगा; विवाह स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकती। क्योंकि प्रेम तरल है। मन चंचल है। शरीर स्थिर और जड़ है। आपके घर में एक पत्थर पड़ा हुआ है। सुबह पत्थर पड़ा था, सांझ भी पत्थर वहीं पड़ा रहेगा। सुबह एक फूल खिला था, सांझ तक मुर्झा जाएगा और गिर जाएगा। फूल जिंदा है, जन्मेगा, जीएगा, मरेगा। पत्थर मुर्दा है, वैसे का वैसा सुबह था, वैसा ही शाम पड़ा रहेगा। पत्थर बहुत स्थिर है। विवाह पत्थर की तरह है। शरीर के तल पर जो विवाह है, वह स्थिरता लाता है, समाज के हित में है। लेकिन एक-एक व्यक्ति के अहित में है। क्योंकि वह स्थिरता शरीर के तल पर लाई गई है और प्रेम से बचा गया है। इसलिए शरीर के तल से ज्यादा पति और पत्नी का संभोग और सेक्स नहीं पहुंच पाता गहरे में। एक यांत्रिक, एक मैकेनिकल रूटीन हो जाती है। एक यंत्र की भांति जीवन हो जाता है सेक्स का। उस अनुभव को रिपीट करते रहते हैं और जड़ होते चले जाते हैं। लेकिन उससे ज्यादा गहराई कभी भी नहीं मिलती। जहां प्रेम के बिना विवाह होता है उस विवाह में और वेश्या के पास जाने में बुनियादी भेद नहीं है, थोड़ा सा भेद है। बुनियादी नहीं है वह। वेश्या को आप एक दिन के लिए खरीदते हैं और पत्नी को आप पूरे जीवन के लिए खरीदते हैं। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। जहां प्रेम नहीं है, वहां खरीदना ही है, चाहे एक दिन के लिए खरीदो, चाहे पूरी जिंदगी के लिए खरीदो। हालांकि साथ रहने से रोज-रोज एक तरह का संबंध पैदा हो जाता है एसोसिएशन से। लोग उसी को प्रेम समझ लेते हैं। वह प्रेम नहीं है। प्रेम और ही बात है। शरीर के तल पर विवाह है इसलिए शरीर के तल से गहरा संबंध कभी भी नहीं उत्पन्न हो पाता। यह एक तल है। दूसरा तल है सेक्स का--मन का तल, साइकोलाजिकल । वात्स्यायन से लेकर पंडित कोक तक जिन लोगों ने भी इस तरह के शास्त्र लिखे हैं सेक्स के बाबत, वे शरीर के तल से गहरे नहीं जाते। दूसरा तल है मानसिक। जो लोग प्रेम करते हैं और फिर विवाह में बंधते हैं, उनका सेक्स शरीर के तल से थोड़ा गहरा जाता है। वह मन तक जाता है। उसकी गहराई साइकोलाजिकल है। लेकिन वह भी रोज-रोज पुनरुक्त होने से थोड़े दिनों में शरीर के तल पर आ जाता है और यांत्रिक हो जाता है। पश्चिम ने जो व्यवस्था विकसित की है दो सौ वर्षों में प्रेम- विवाह की, वह मानसिक तल तक सेक्स को ले जाती है। और इसीलिए पश्चिम में समाज अस्तव्यस्त हो गया है; क्योंकि मन का कोई भरोसा नहीं है। वह आज कहता है कुछ, कल कुछ कहने लगता है। सुबह कुछ कहता है, सांझ कुछ कहने लगता है। घड़ी भर पहले कुछ कहता है, घड़ी भर बाद कुछ कहने लगता है। शायद आपने सुना होगा कि बायरन ने जब शादी की, तो कहते हैं कि तब तक वह कोई साठ-सत्तर स्त्रियों से संबंधित रह चुका था। एक स्त्री ने उसे मजबूर ही कर दिया विवाह के लिए। तो उसने विवाह किया। और जब वह चर्च से उतर रहा था विवाह करके अपनी पत्नी का हाथ हाथ में लेकर घंटियां बज रही हैं चर्च की; मोमबत्तियां अभी जो जलाई गई हैं, जल रही हैं; अभी जो मित्र स्वागत करने आए थे, वे विदा हो रहे हैं; और वह अपनी पत्नी का हाथ पकड़ कर 1/2

तृप्त ...🖤

197,819 次观看 • 1 年前

नॉर्मलाइजेशन की बजाय यह प्रक्रिया मुझे सही लगी। अब बहुत सारे अभ्यर्थी ऐसे हैं जो बोलते हैं कि देश में एक साथ चुनाव हो सकते हैं तो 1 दिन परीक्षा क्यों नहीं, बिल्कुल युवाओं की बात सही है यदि पूरी ईमानदारी के साथ पूरे सिस्टम का उपयोग करते हुए पारदर्शिता के साथ एग्जाम होता है तब तो बात बने वरना वहां भी अन्याय है अब कैसे वह भी जान लीजिए 20 लाख युवाओं की एक साथ परीक्षा करवाई जाती है अखबार में खबर आती है कि परीक्षा शांतिपुर्ण ईमानदारी के साथ खत्म हुई, लेकिन किसी भी तैयारी करने वाले युवा से यह बात छिपी हुई नहीं है कि राजस्थान में एक साथ 20 लाख लोगों की परीक्षा लेने हेतु उच्च स्तरीय संसाधन नहीं है, मैं आपको बात बताता हूं पिछली रीट की, उसमें बहुत सारे अभ्यर्थी थे एक लेवल का एक दिन में एग्जाम लिया जाता है छोटी-छोटी स्कूलों को भी सेंटर दिया जाता है क्योंकि इतने लोगों के एक साथ एग्जाम लेने के लिए चुनिंदा स्कूलों में सेंटर नहीं दिया जा सकता और छोटी स्कूलों में पर्याप्त संसाधन ही नहीं है और परीक्षार्थी के आपस में कंधे टच हो रहे हैं तो ऐसी परीक्षा का क्या फायदा जिसमें दो व्यक्तियों के बीच एक फिट का गैप भी नहीं हो ऐसे मौके पर ईमानदार अभ्यर्थी ठगा जाता है, सबसे उचित उपाय एक साथ परीक्षा है, लेकिन ऐसे मौके पर बहुत छोटी-छोटी स्कूलों को सेंटर मिल जाता है वहां पर स्थानीय अभ्यर्थी और स्कूल संचालक मिलकर उस पेपर की पारदर्शिता को भी कई बार भंग कर देते हैं इसलिए मैंने एक यह सुझाव आप लोगों के सामने रखा क्योंकि इसमें सही नहीं है तो गलत भी कहीं नजर नहीं आ रहा, भाई आप किसी भी स्लॉट में एग्जाम दीजिए आपको बराबर पोस्ट मिल रही है बराबर मौका मिल रहा है नॉर्मलाइजेशन का झंझट ही नहीं है ऐसा पहले राजस्थान पुलिस की जिला मेरिट में होता था, थर्ड ग्रेड टीचर की भर्ती में होता था, किसी को कोई समस्या भी नहीं होती थी, अब आगे देखिए सबकी अलग-अलग राय है सरकार और परीक्षा करवाने वाली एजेंसी है वह क्या सॉल्यूशन निकलती है वो तो उन पर है लेकिन कुल मिलाकर मेरा यह कहना है यह नॉर्मलाइजेशन जो अभी चल रहा है वह सही नहीं है 🙌🙌 #नाॅर्मलाईजेशन_एक_अभिशाप

Bhera ram

54,579 次观看 • 1 年前

पहले हमारे पास आवाज़ नहीं था तो हमलोग कुछ बोल नहीं पाते थे पर अब लालू जी के समय का झूठे बदनामी पर शांत नहीं रहेंगे। अब प्रकाश झा के फिल्मों से झूठ परोसने का समय गया। NCRB के डाटा के मुताबिक बिहार 1990 से 2005 तक नीचे से सातवे नंबर पर होता था अपराधिक घटनाओं में। सवर्ण मीडिया ने उसको ऐसे दिखाया जैसे भारत के बाकि सारे राज्य अपराध मुक्त हो गए हों। अब 1990 से 2005 के 15 सालों में क्या क्या हुआ वो बताते हैं। 📌 पहले 20 महीने में 5 यूनिवर्सिटियों को खोला गया जो कि एक रिकॉर्ड है। 📌उसी 15 सालों में जितने प्राइमरी स्कूलों को खोला गया वह एक नेशनल रिकॉर्ड है। 📌बिहार का लिटरेसी रेट 1990 में 34.67% था। यह 15 साल में बढ़ कर 55.42% हो गया। ये 2006 के सर्व शिक्षा अभियान (जो कि राजद के आदरणीय रघुवंश बाबू के दिमाग का आइडिया था) से पहले हुआ। 📌सच्चाई ये है कि 1970 से 1990 तक बिहार में NEGATIVE growth हुआ था लिटरेसी रेट में। 📌पूरे भारत में मनरेगा RJD के द्वारा शुरू किया गया था। 📌1992 में MANDATORY PERIOD LEAVES दिया गया बिहार में। उसके बाद सीधे 2020 में केरल में ये दिया गया। आज भी USA जैसे देशों में इस पर बहस ही हो रही है। 📌BPSC से शिक्षक बहाली 1994 में हुआ। 📌चरवाहा विद्यालय जैसा क्रांतिकारी कदम लाया गया जिसका सवर्ण लॉबी ने सिर्फ मज़ाक बनाया था। 📌सबसे जरूरी बात, कर्पूरी ठाकुर के बाद पिछड़ों और अति पिछड़ों के आरक्षण में वृद्धि 1990 और साल 2000 में हुआ। 📌वोट बैंक वाली बात बिल्कुल बकवास साबित हुआ है सब से बिहार जाति जनगणना के आंकड़े सामने आए हैं। 📌MY(मुस्लिम + यादव) वोट बैंक कि थ्योरी एकदम बकवास थी क्योंकि सच्चाई ये है कि जनता दल और राजद को 25% से 45% तक वोट बिहार कि जनता ने समय समय पर दिया है और पूरा MY मिला भी ले तो 32% का आंकड़ा आता है। इससे साबित होता है बिहार में हर वर्ग और हर जाति का वोट लालू जी को मिला है। 📌1990 से 1995 तक पूरा देश हिंदू मुस्लिम दंगो से जल रहा था बिहार को छोड़कर। हां, बहुत सारी गलतियां हुई हैं पर उस समय के बाकी सरकारों को भी उसी पैमाने पर चेक करिए। "एक असहयोगी अडंगा डालने वाली INEFFICIENT ब्यूरोक्रेसी जिसने मुख्यमंत्री कार्यालय के ज्यादातर ऑर्डर को मानने में जबरदस्ती देरी किया या फिर माना ही नहीं, उस समय का दौर बिहार में एक मूक क्रांति का दौर रहा है" ये मेरे शब्द नहीं हैं। ये फ्रांस के महान सोशल साइंटिस्ट क्रिस्टॉप जफरेलोट के शब्द हैं जिन्होंने बिहार में काम किया है इस पर। तो किसी को सपना आया कि बिहार अनसेफ है तो उससे बिहार अनसेफ नहीं हो जाता। जिन लोगों ने बिहार को बदनाम करने कि कोशिश कि है वो देश के गद्दार हैं।

Priyanka Deshmukh

189,216 次观看 • 2 年前

सु्ल्तानपुर जिले के अरुण कुमार प्रजापति जूनियर हाई स्कूल में टीचर हैं। 2022 में जिले से 29 बच्चों का सिलेक्शन राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में सिलेक्शन हुआ। इसमें 8 अरुण सर के स्कूल के थे। इस परीक्षा को पास करने वाले सरकारी स्कूल के बच्चों को 9वीं से लेकर 12वीं तक सलाना 12 हजार रुपए की स्कॉलरशिप मिलती है। बच्चे खुश हुए। इस खुशी को देखकर अरुण सर को लगा कि क्यों न और बच्चों को ऐसी छात्रवृत्ति दिलवाकर खुश किया जाए। अरुण सर ने कोचिंग खोल ली। एकदम फ्री। खुद के पैसे से किताब-कॉपी अरेंज किया। देखते ही देखते बच्चों की भरमार हो गई। ये वो बच्चे थे जो जीवन में कुछ करना चाहते थे लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते कुछ कर नहीं पा रहे थे। 8-10 किलोमीटर दूर से आने लगे। अरुण सर ने पढ़ाना शुरू किया। एक के बाद एक सिलेक्शन, अलग-अलग स्कॉलरशिप प्रोग्राम में सैकड़ों बच्चों का सिलेक्शन हो गया। अरुण सर से हमने पूछा कहां से मैनेज करते हैं सर? अरुण सर बोले, एक लाख सैलरी है। घर में तीन बच्चे हैं। बड़ा वाला ताइवान में है, छोटा वाला लखनऊ में यूपीएससी की तैयारी कर रहा। बिटिया भी 12वीं करके भाई के पास पढ़ने जाना चाहती है। इन्हीं में खर्चा है, बाकी तो सब बचता है, उसी से सब हो जाता है। आज यह करके खुश हूं। शायद मुझसे ज्यादा कोई खुश नहीं होगा। अरुण सर की यह बातें सुनकर हम तो धन्य हो गए। बच्चो से बात की। किसी के पिता नहीं तो किसी के यहां पैसा नहीं। सब सरकारी स्कूल के बच्चे। कभी कहीं कोचिंग नहीं कर पाए। यहां एक अवसर मिला और आज चमक रहे। दैनिक भास्कर पर आप पूरी स्टोरी देख व पढ़ सकते हैंः

Rajesh Sahu

19,260 次观看 • 9 个月前

सेवा में, श्रीमान अध्यक्ष/सचिव महोदय, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (Uttar Pradesh Police Recruitment & Promotion Board), तुलसी गंगा कॉम्प्लेक्स, विधानसभा मार्ग, लखनऊ, उत्तर प्रदेश - 226001 विषय: UPSI भर्ती परीक्षा के परिणाम एवं नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के संबंध में अभ्यर्थियों की चिंताओं को संज्ञान में लेने हेतु। महोदय, सविनय निवेदन है कि सोशल मीडिया और विभिन्न संचार माध्यमों से उत्तर प्रदेश सब-इंस्पेक्टर (UPSI) भर्ती परीक्षा के परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों में असमंजस और चिंता की स्थिति बनी हुई है। इसी क्रम में, विख्यात कोचिंग संस्थान RWA (रोज़गार विद अंकित) के संचालक श्री अंकित भाटी सर के दो वीडियो और संदेश सामने आए है, जिसे समस्त अभ्यर्थियों के अनुरोध पर आपके सादर संज्ञान में लाया जा रहा है। वीडियो में अंकित भाटी सर ने भर्ती बोर्ड से बेहद शालीनता और संवेदनशीलता के साथ अभ्यर्थियों के हित में निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करने का आग्रह किया है: मुख्य चिंताएं और विसंगतियां: एक ही शिफ्ट में अंकों का बड़ा अंतर: अंकित सर द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, 14 मार्च की प्रथम पाली (First Shift) में OBC कैटेगरी के अभ्यर्थी दीपांशु का 130 प्रश्नों पर DV/PST (दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण) के लिए चयन हो गया है। इसके विपरीत, उसी समान शिफ्ट और समान कैटेगरी के एक अन्य अभ्यर्थी तिलकराम का 134 प्रश्नों पर भी चयन नहीं हुआ है। अंकित भाटी सर के अनुसार, इस तरह के उदाहरण लगभग प्रत्येक शिफ्ट में देखने को मिल रहे हैं। नॉर्मलाइजेशन पर सवाल: यदि यह अंतर नॉर्मलाइजेशन (प्रसामान्यीकरण) प्रक्रिया के कारण आया है, तो अभ्यर्थियों के मन में यह सवाल है कि एक ही शिफ्ट के दो अलग-अलग अभ्यर्थियों के अंकों में नॉर्मलाइजेशन के बाद इतना बड़ा उलटफेर (कम या ज्यादा होने का अंतर) कैसे संभव है? मानसिक तनाव: इस विसंगति और स्पष्टता के अभाव के कारण परीक्षा देने वाले हजारों योग्य अभ्यर्थी इस समय अत्यधिक मानसिक तनाव और असमंजस में हैं। अभ्यर्थियों की ओर से भर्ती बोर्ड से विनम्र प्रार्थना: भर्ती बोर्ड की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता हमेशा से सराहनीय रही है। अतः इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने तथा लाखों युवाओं के संशय को दूर करने के लिए अंकित भाटी सर और समस्त अभ्यर्थियों की ओर से निम्नलिखित मांगें की जा रही हैं: स्कोरकार्ड (Scorecard) जारी किया जाए: भर्ती बोर्ड सभी अभ्यर्थियों के रॉ मार्क्स (Raw Marks) और नॉर्मलाइज्ड मार्क्स (Normalized Marks) के साथ आधिकारिक स्कोरकार्ड जारी करे। कट-ऑफ और नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का स्पष्टीकरण: चयन प्रक्रिया में अपनाए गए नॉर्मलाइजेशन के सटीक तरीके और शिफ्ट-वाइज कट-ऑफ को सार्वजनिक रूप से थोड़ा और स्पष्ट किया जाए, ताकि एक ही शिफ्ट में आ रहे इस अंतर का सच सामने आ सके। "स्कोरकार्ड जारी होने से न केवल अभ्यर्थियों को अपनी वास्तविक स्थिति का पता चलेगा, बल्कि भर्ती बोर्ड की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर युवाओं का भरोसा और अधिक मजबूत होगा।" महोदय, युवाओं के भविष्य, उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत और उनके माता-पिता की उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए, कृपया इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक और गंभीरता से विचार करने की कृपा करें। आशा है कि श्री अंकित भाटी सर के वीडियो संदेशों को संज्ञान में लेकर भर्ती बोर्ड जल्द ही इस संबंध में कोई सकारात्मक कदम उठाएगा या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर युवाओं को संतुष्ट करेगा। धन्यवाद। भवदीय, समस्त पीड़ित एवं न्यायप्रिय अभ्यर्थी, (UPSI) भर्ती परीक्षा। दिनांक: [16/05/2026] संलग्नक: श्री अंकित भाटी सर के यूट्यूब वीडियो No 1 का लिंक ~ यूट्यूब वीडियो No 2 का लिंक ~ इंस्टाग्राम वीडियो No 1 लिंक ~ Ankit Bhati Rojgar with Ankit

𝗥𝗔𝗚𝗛𝗔𝗩 𝗧𝗛𝗔𝗞𝗨𝗥

15,596 次观看 • 3 个月前

आज 11 पार्टियों का डेलीगेशन चुनाव आयोग से मिलकर आया है। इस डेलीगेशन में लगभग 20 लोग शामिल थे और हमने करीब 3 घंटे की विस्तृत चर्चा की। हमें कुछ नियम बताए गए और कहा गया कि हर पार्टी से सिर्फ 2 लोग ही अंदर जाएंगे- जिसकी वजह से कई नेता मीटिंग में नहीं जा पाए, जिसके बारे में हमने अपनी शिकायत दर्ज कराई है। हमने इस चर्चा में कई बिंदु बताए हैं: 1. 2003 से आज तक करीब 22 साल में बिहार में कम से कम 5 चुनाव हो चुके हैं, तो क्या वे सारे चुनाव गलत थे? 2. अगर आपको SIR यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' करना था तो इसकी घोषणा जून के अंत में क्यों की गई, इसका निर्णय कैसे और क्यों लिया गया? अगर मान भी लिया जाए कि SIR की जरूरत है तो इसे बिहार चुनाव के बाद इत्मीनान से किया जा सकता था। जब 2003 में यह प्रक्रिया अपनाई गई थी, तो उसके एक साल बाद राष्ट्रीय चुनाव था और दो साल बाद असेंबली का चुनाव था, इस बार केवल एक महीने का ही समय है। 3. पिछले एक दशक से हर काम के लिए आधार कार्ड मांगा जाता रहा है, लेकिन अब कहा जा रहा है कि आपको वोटर नहीं माना जाएगा- अगर आपके पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं होगा। एक कैटेगरी में उन लोगों के माता-पिता के जन्म का भी दस्तावेज होना चाहिए, जिनका जन्म समय 1987-2012 के बीच हुआ होगा। ऐसे में प्रदेश में लाखों-करोड़ गरीब लोग होंगे, जिन्हें इन कागजात को जुटाने के लिए महीनों की भागदौड़ करनी होगी। ऐसे में कई लोगों का नाम ही लिस्ट में शामिल नहीं होगा, जो कि साफतौर पर लेवल प्लेइंग फील्ड का हनन है। लेवल प्लेइंग फील्ड चुनाव का आधार है और चुनाव, गणतंत्र का आधार है। 4. चुनाव आयोग ने ये निर्णय कब और कैसे लिया, क्योंकि जनवरी तक ऐसा कोई नियम नहीं था। आपने इसकी घोषणा नहीं की, बल्कि एक SSR प्रकाशित किया। आपने जनवरी 2025 में SIR की कोई घोषणा नहीं की, SIR का कहीं नाम तक नहीं लिया। ऐसे में अचानक जून के अंत में ये निर्णय कैसे लिया गया? 5. हमने इस विषय में सुप्रीम कोर्ट के कई सारे फैसलों का उदाहरण दिया और अपनी बात रखी। हमने उन्हें बताया कि अदालत का मानना है कि इलेक्टोरल रोल से किसी को वंचित रखना गंभीर प्रताड़ना है। : Empowered Action Group of Leaders and Experts (EAGLE) के सदस्य श्री Abhishek Singhvi 📍 दिल्ली

Congress

74,953 次观看 • 1 年前

69000 शिक्षक भर्ती : सुप्रीम कोर्ट में नहीं हुई सुनवाई, पीड़ित अभ्यर्थी निराश..!! नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश 69000 शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला मामले में मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। जबकि सुनवाई के लिए केस सप्लिमेंर्टी लिस्ट में 40 वे नंबर लगा था। आरक्षित वर्ग की ओर से कोर्ट में उपस्थिति अधिवक्ताओं ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को केस के संबंध में अवगत कराया, तो उन्होंने अगली किसी डेट पर मामले को सुने जाने को कहा है। वहीं मंगलवार को सुनवाई नहीं होने से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी हताश और निराश है। बात दें की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में लखनऊ हाईकोर्ट के डबल बेंच के आदेश पर 9 सितंबर को सुनवाई के बाद रोक लगा दी थी और 23 सितंबर को सुनवाई के लिए आदेश दिया था। लेकिन सुनावाई नहीं हो सकी थी। मामले में अगली तारीख 15 अक्टूबर तय की गई थी। इससे पहले 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाई कोर्ट डबल बेंच ने एक फैसला दिया था। जिसे अनारक्षित वर्ग के कुछ अभ्यर्थीयों के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया है। जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने और सरकार ने इस फैसले को सही माना हैं। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी सरकार से इसका पालन किए जाने के लिए आग्रह भी किया। लेकिन सरकार इस पर आगे नहीं बढ़ पाई और अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। आरक्षित वर्ग की ओर से आंदोलन व कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि वर्ष 2018 में यह भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। जब इसका परिणाम आया तो इसमें व्यापक स्तर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया और उन्हें नौकरी देने से वंचित कर दिया गया। एक लंबे आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद बीते 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाई कोर्ट के डबल बेंच ने हम आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया है और नियमों का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया है। लेकिन सरकार इस प्रकरण में हीला हवाली करती रही। अब ममला सुप्रीम कोर्ट में आया है हमें पूरी उम्मीद है कि हमें यहां भी न्याय मिलेगा।

Pratik Patel

41,399 次观看 • 1 年前

मोहन भागवत जी के लिए एक शेर है कि- 'इकबाल बड़ा मनमोहक है, मन बातों से मोह लेता है। गुफ्तार का गाज़ी बन तो गया, किरदार का गाज़ी बन न सका।' ये सब गुफ्तार के गाज़ी हैं। ये लोग बातचीत में ही सिर्फ बतोले फोड़ा करते हैं। अगर बातचीत में ये लोग बतोले नहीं फोड़ते हैं, तो आज की डेट में अमित शाह जी से माफी क्यों नहीं मंगवा देते? क्यों भगोड़े हो रहे हैं अमित शाह जी संसद के? क्यों भगोड़े हो रहे हैं नरेंद्र मोदी जी संसद के? अरे अभिनंदन का काम किया है तो संसद में अभिनंदन करा दो। पेलेट गन चलवाना अभिनंदन का काम है? लाठी चलवाना अभिनंदन का काम है? पुलिस के साथ सादी वर्दी में पता नहीं कौन आतंकवादी थे, गुंडे थे, संघ के कार्यकर्ता थे, या बजरंग दल के कार्यकर्ता थे, जिन्होंने छात्रों को लाठी-लाठी मार करके गिरा दिया? जिन्होंने महिलाओं के, बच्चियों के कपड़े फाड़ दिए, जिन्होंने छोटी-छोटी बच्चियों के पीछे लाठी... क्या-क्या मतलब मैं कह नहीं पा रहा हूं क्या दुस्साहस किया उन लोगों ने। आंदोलन संवाद का माध्यम है, ये मोहन भागवत जी कह रहे हैं। लेकिन आंदोलन का अपमान कौन कर रहा है? आंदोलन का अपमान कर रही है भारतीय जनता पार्टी। बकायदा वीडियो कॉल पर बात की है। उनकी मांगों को समर्थन दिया है। और हेमंत सोरेन जी ने चार कैबिनेट मिनिस्टर की सदस्यीय समिति बना दी है। 11 सदस्यीय समिति छात्रों की बन गई है। हमने छात्रों से पूछा है कि बताइए, आपके धरना स्थल पर आकर के बात करनी है, कि आप कहां आएंगे, या आप न्यूट्रल जगह पर आएंगे? छात्रों ने कहा है कि हमें एक दिन का समय दीजिए। हम एक दिन के समय में आपको बताते हैं। बॉल छात्रों के कोर्ट में है। तो सारी की सारी बातें छात्रों के साथ संवाद चल रहा है। आप, आप बताइए कि जब यहां पर धरना, आमरण अनशन शुरू हुआ था, आमरण अनशन से पहले से लेकर के और 20 दिन तक, क्या एक भी बार भी छात्रों के साथ नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने संवाद किया क्या? जब आमरण अनशन के 20 दिन हो गए तब भी संवाद किया क्या? ये असंवेदनशील सरकार है। कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता Surendra Rajput ‏ जी

M G

21,915 次观看 • 9 天前

न बंटेंगे, न हटेंगे!✊🏼 इलाहाबाद में यूपी लोक सेवा आयोग के बाहर आधी रात को भी उत्सव जैसा माहौल है। भले ही सीएम योगी झारखंड और महाराष्ट्र में बंटेंगे कटेंगे का नारा लगा रहे हों, इधर युवाओं ने ठान लिया है कि अपने मांग के लिए वो न बंटेंगे और न हटेंगे। बस शांतिपूर्ण ढंग से डटे रहेंगे। आयोग के सचिव साहब कुछ देर पहले डीएम और पुलिस आयुक्त के साथ अभ्यर्थियों से बात करने बाहर आए थे। लेकिन उन्होंने परीक्षा की सुचिता संबंधित चिंताओं को दूर करने की बजाए वही रटा रटाया जवाब दे दिया है। ऐसा लगा जैसे कि ऊपर से आया कोई बना बनाया बयान पढ़ दिया हो साहब ने जिसका सार था कि हम नहीं सुनेंगे तुम्हारी बात। #UP_PCS और #RO_ARO की परीक्षाएं एक शिफ्ट में करने के अलावा कोई समझौता नहीं होना चाहिए। बड़ी बड़ी बातें करने वाली सरकार से निवेदन है कि इस छोटी सी मांग के लिए अभ्यर्थियों को अब और परेशान न किया जाए। अचरज की बात है कि जो लोग एक शिफ्ट एक परीक्षा करवाने में खुद को इतना असमर्थ बता रहे हैं, वही लोग देश के सारे विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ करवाने का जुमला कैसे फेंकते हैं? #UPPSC_No_Normalization

Anupam | अनुपम

11,533 次观看 • 1 年前

इस लड़की का दर्द कोई सुनेगा क्या? इसका दर्द कोई समझेगा भी क्या? दो सरकारें दोषी हैं इस दर्द की अगर अशोक गहलोत सरकार ने सब इंस्पेक्टर भर्ती में गड़बड़ी सामने आने के तुरंत बाद भर्ती को रद्द कर दिया होता तो यह नौबत नहीं आती। अगर उन्होंने भर्ती में गड़बड़ी सामने आने के एक साल बाद भी भर्ती को रद्द कर दिया होता तो भी यह नौबत नहीं आती और अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष के अंतिम दिनों में भी रद्द कर दिया होता तब भी इतना दर्द नहीं होता। अशोक गहलोत इस भर्ती को रद्द नहीं करने का फैसला क्यों नहीं कर पाए वे ही जानते हैं लेकिन आज यह भर्ती सैकड़ो परिवारों के लिए नासूर बन गई है। उनकी स्थिति को समझना बहुत मुश्किल तो है लेकिन नामुमकिन नहीं है। भजनलाल शर्मा सरकार ने सत्ता में आते ही अगर सबसे पहला काम सब इंस्पेक्टर भर्ती को रद्द करने का किया था तो अभी तक यह भर्ती फिर से हो जाती। उन्होंने इस भर्ती को रद्द करने का फैसला लटकाकर रखा और करीब 2 साल निकलने दिए। क्यों? वे इस कदर अनिर्णय की स्थिति में किसके दबाव में रहे, वे ही बता सकते हैं लेकिन इस लड़की और इसके जैसे सैकड़ों अभ्यर्थियों को वे किस तरह ढाढ़स बंधा सकते हैं, इसका खुलासा उन्हें करना चाहिए। अब दर्द समझिए। असल में दोनों सरकारों ने मिलकर इन युवाओं के स्वर्णिम वर्ष भर्ती रद्द नहीं करके छीन लिए हैं। तैयारी करने की जो ऊर्जा चार-पांच साल पहले थी वह आज नहीं रहेगी। नौकरी में आने के बाद आदमी वैसे भी एक तरह से सेटल हो जाता है। ऐसे में इनसे यह अपेक्षा करना कि ये उसी ऊर्जा और उत्साह के साथ फिर से परीक्षा देकर कहीं भर्ती हो जाएंगे, बेमानी होगा। यह लड़की जिस तरह से सरकार पुलिस और न्यायपालिका को कोस रही है, वह एक प्रकार से अंतरात्मा की चीख जैसी है। सरकारों को किसी भी मामले में ऐसे अनिर्णय की स्थिति में नहीं रहना चाहिए। इस तरह आप सैकड़ो हजारों लोगों की जिंदगी और उनके सपनों के साथ खिलवाड़ कर रहे होते हैं।

Arvind Chotia

51,664 次观看 • 11 个月前