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उत्तरप्रदेश के बाद बिहार में भी #Normalization प्रक्रिया के खिलाफ अभ्यर्थियों का आंदोलन। #Normalization एक Technical Scam है जो दिखता नहीं बस होता हैI #no_normalization_in_bpsc बीजेपी समर्थित सरकारे normalization लागू करने के पीछे क्यों पडी है। 🤔 पुलिस ने पटना में BPSC अभ्यर्थियों पर जमकर लाठी चार्ज कर दिया.... show more
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Khan sir jeva teacher gujrat ma ketla je ground par student sathe hoy. Nai ke potani Navi book ke cource lonch karvama busy

ગુજરાત માં એકેય શિક્ષક કે શૈક્ષણિક સંસ્થા કોચિંગ સંસ્થા સામે આવી ને બોલતા નથી માઇકાંગલાવ ને ખાલી પૈસા કમાવા માં રસ છે એક દી તો સામે આવી ને વિદ્યાર્થી સાથે બેસો @WebSankulOffice @GYANACADEMY555 @yuvaupnishad @praajasv @ICERAJKOT

सर हो तो ऐसे यार दिल से धन्य वाद है खान सर का ( साले हमारे गुजरात मे एक भी acedemy वाले युवा को साथ नहीं देते है बस और गुजरात के विधार्थी भी मूर्ख है जो नोकरी मिल जाते तब उसका आभार प्रकट करता है😢😢😢

તો એના પરથી એવું નક્કી થયું કે cce pre વખતે આપણે આ રસ્તે જવાનું હતું... પણ અફસોસ છે

🔥

पटना: खान सर को बिहार पुलिस ने किया गिरफ्तार खान सर गर्दनीबाग में अभ्यर्थियों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे खान सर.. देश की वह हस्ती हैं जिसने अपनी शिक्षा के बल पर , वह मुकाम हासिल किया है जो शायद ही वर्तमान में कोई कर पाया है।। लानत है ऐसी सरकार पर..😌😌

UP BIHAR bad have Gujarat ma normalization dur karava mate hakal Karo yurajbhai.

Gujarat ❎😂#CCE #cce

पटना: खान सर को बिहार पुलिस ने किया गिरफ्तार खान सर गर्दनीबाग में अभ्यर्थियों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे

ગુજરાત સરકારની ખોટી રીતે લેવાયેલી પરીક્ષા ( ફોરેસ્ટ ગાર્ડ/ગૌણ સેવા પસંદગી મંડળ ગ્રુપ A ગ્રુપ B ) તમને કેવું લાગે છે?
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सम्भोग का प्राथमिक अनुभव शरीर से ज्यादा गहरा नहीं होता। लेकिन शरीर के अनुभव पर ही जो रुक जाते हैं, वे सेक्स के पूरे अनुभव को उपलब्ध नहीं होते। उन्हें, मैंने जो गहराइयों की बातें कही हैं, उसका उन्हें कोई भी पता नहीं चल सकता। और अधिक लोग शरीर के तल पर ही रुक गए हैं। इस संबंध में यह भी जान लेना जरूरी है कि जिन देशों में भी प्रेम के बिना विवाह होता है, उस देश में सेक्स शरीर के तल पर ही रुक जाता है, उससे गहरा नहीं जा सकता। विवाह दो शरीरों का हो सकता है, विवाह दो आत्माओं का नहीं। दो आत्माओं का प्रेम हो सकता है। तो अगर प्रेम से विवाह निकलता हो, तब तो विवाह एक गहरा अर्थ ले लेता है। और अगर विवाह दो पंडितों के और दो ज्योतिषियों के हिसाब-किताब से निकलता हो, और जाति के विचार से निकलता हो, और धन के विचार से निकलता हो, तो वैसा विवाह कभी भी शरीर से ज्यादा गहरा नहीं जा सकता। लेकिन ऐसे विवाह का एक फायदा है। शरीर मन की बजाय ज्यादा स्थिर चीज है। इसलिए शरीर जिन समाजों में विवाह का आधार है, उन समाजों में विवाह सुस्थिर होगा, जीवन भर चल जाएगा। शरीर अस्थिर चीज नहीं है। शरीर बहुत स्थिर चीज है। उसमें परिवर्तन बहुत धीरे-धीरे आता है और पता भी नहीं चलता। शरीर जड़ता का तल है। इसलिए जिन समाजों ने यह समझा कि विवाह को स्थिर बनाना जरूरी है- एक ही विवाह पर्याप्त हो, बदलाहट की जरूरत न पड़े, उनको प्रेम अलग कर देना पड़ा। क्योंकि प्रेम होता है मन से और मन चंचल है। जो समाज प्रेम के आधार पर विवाह को निर्मित करेंगे, उन समाजों में तलाक अनिवार्य होगा। उन समाजों में विवाह परिवर्तित होगा; विवाह स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकती। क्योंकि प्रेम तरल है। मन चंचल है। शरीर स्थिर और जड़ है। आपके घर में एक पत्थर पड़ा हुआ है। सुबह पत्थर पड़ा था, सांझ भी पत्थर वहीं पड़ा रहेगा। सुबह एक फूल खिला था, सांझ तक मुर्झा जाएगा और गिर जाएगा। फूल जिंदा है, जन्मेगा, जीएगा, मरेगा। पत्थर मुर्दा है, वैसे का वैसा सुबह था, वैसा ही शाम पड़ा रहेगा। पत्थर बहुत स्थिर है। विवाह पत्थर की तरह है। शरीर के तल पर जो विवाह है, वह स्थिरता लाता है, समाज के हित में है। लेकिन एक-एक व्यक्ति के अहित में है। क्योंकि वह स्थिरता शरीर के तल पर लाई गई है और प्रेम से बचा गया है। इसलिए शरीर के तल से ज्यादा पति और पत्नी का संभोग और सेक्स नहीं पहुंच पाता गहरे में। एक यांत्रिक, एक मैकेनिकल रूटीन हो जाती है। एक यंत्र की भांति जीवन हो जाता है सेक्स का। उस अनुभव को रिपीट करते रहते हैं और जड़ होते चले जाते हैं। लेकिन उससे ज्यादा गहराई कभी भी नहीं मिलती। जहां प्रेम के बिना विवाह होता है उस विवाह में और वेश्या के पास जाने में बुनियादी भेद नहीं है, थोड़ा सा भेद है। बुनियादी नहीं है वह। वेश्या को आप एक दिन के लिए खरीदते हैं और पत्नी को आप पूरे जीवन के लिए खरीदते हैं। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। जहां प्रेम नहीं है, वहां खरीदना ही है, चाहे एक दिन के लिए खरीदो, चाहे पूरी जिंदगी के लिए खरीदो। हालांकि साथ रहने से रोज-रोज एक तरह का संबंध पैदा हो जाता है एसोसिएशन से। लोग उसी को प्रेम समझ लेते हैं। वह प्रेम नहीं है। प्रेम और ही बात है। शरीर के तल पर विवाह है इसलिए शरीर के तल से गहरा संबंध कभी भी नहीं उत्पन्न हो पाता। यह एक तल है। दूसरा तल है सेक्स का--मन का तल, साइकोलाजिकल । वात्स्यायन से लेकर पंडित कोक तक जिन लोगों ने भी इस तरह के शास्त्र लिखे हैं सेक्स के बाबत, वे शरीर के तल से गहरे नहीं जाते। दूसरा तल है मानसिक। जो लोग प्रेम करते हैं और फिर विवाह में बंधते हैं, उनका सेक्स शरीर के तल से थोड़ा गहरा जाता है। वह मन तक जाता है। उसकी गहराई साइकोलाजिकल है। लेकिन वह भी रोज-रोज पुनरुक्त होने से थोड़े दिनों में शरीर के तल पर आ जाता है और यांत्रिक हो जाता है। पश्चिम ने जो व्यवस्था विकसित की है दो सौ वर्षों में प्रेम- विवाह की, वह मानसिक तल तक सेक्स को ले जाती है। और इसीलिए पश्चिम में समाज अस्तव्यस्त हो गया है; क्योंकि मन का कोई भरोसा नहीं है। वह आज कहता है कुछ, कल कुछ कहने लगता है। सुबह कुछ कहता है, सांझ कुछ कहने लगता है। घड़ी भर पहले कुछ कहता है, घड़ी भर बाद कुछ कहने लगता है। शायद आपने सुना होगा कि बायरन ने जब शादी की, तो कहते हैं कि तब तक वह कोई साठ-सत्तर स्त्रियों से संबंधित रह चुका था। एक स्त्री ने उसे मजबूर ही कर दिया विवाह के लिए। तो उसने विवाह किया। और जब वह चर्च से उतर रहा था विवाह करके अपनी पत्नी का हाथ हाथ में लेकर घंटियां बज रही हैं चर्च की; मोमबत्तियां अभी जो जलाई गई हैं, जल रही हैं; अभी जो मित्र स्वागत करने आए थे, वे विदा हो रहे हैं; और वह अपनी पत्नी का हाथ पकड़ कर 1/2
तृप्त ...🖤
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