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उम्मीदों की रोशनी तुमसे ही ❤️

16,231 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

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नवीन सनातनी **1 год назад

पप्पू का हैदराबाद में बेजुबानो पर प्रेम नंही जागा सारे बेजुबानो को बेघर कर दिया जंगल काट कर सैकड़ों हिरण जला कर मार दिए,, पप्पू जैसा पागल देश का प्रधानमंत्री कभी नहीं बन सकता

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Solar Heavy1 год назад

take the journey

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डॉ गुड्डू श्रीवास्तव1 год назад

कांग्रेस के डूबोने का श्रेय भी इसी को जाता है l बार बार इसको नेता बनाने के चक्कर में अच्छे कांग्रेसी भी पर्दे के पीछे चले गए।

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Richa Chahar1 год назад

वीर तुम बढ़े चलो,

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Ajay Kumar Tiwari1 год назад

Yea pariwarik youraj ko ,congressi janta ka ,Neta na maanai ,ghasita hai ,Haqiqat kuch aur hota hai ,Yuraaj ,Kursee Kai liyea kuch aur suru kartai hai ,karo kosis ,Milaiga Thenga ???

Фото профиля सीमा सिंह 🇮🇳🇮🇳(मोदी जी का परिवार )🙋‍♀️
सीमा सिंह 🇮🇳🇮🇳(मोदी जी का परिवार )🙋‍♀️1 год назад

लेकिन रोशनी को तो पुलिस पकड ली थी अब कौन सी रोशनी 😝😝😝

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Battle of Yavin1 год назад

Soros ka aankhon ka tara, Soros ki umeedon ki kiran

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Gagan Bindal🇮🇳1 год назад

कांग्रेस ने उस से उम्मीद लगा ली तभी तो अब तक विपक्ष में बैठी है

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Debashish Bose1 год назад

उम्मीदों की रौशनी 💡 सिमटते हुए दिख रही है ⁉️ एक शेर याद आ रहा है; आरज़ू थी जिनसे बनायेंगे मज़हार मेरी, आरज़ू थी जिनसे बनायेंगे मज़हार मेरी, आज वोह ही शख़्स मेरे कब्र के पत्थर चुरा के ले गए ‼️

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Mukhtar Ahmed Shaikh1 год назад

रोशनी तो है मगर राहुल को कभी भी बेगुनाह के कत्ल linching पर बोलते नहीं देखा

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हेडलाइट की रोशनी में अंतिम संस्कार आपने स्ट्रीट लाइट की रोशनी में बच्चों को पढ़ते देखा होगा और ऑपरेशन थिएटर्स में मोमबत्ती और टाॅर्च की रोशनी में ऑपरेशन होते देखे होंगे। भरतपुर में कार की हेडलाइट की रोशनी में अंतिम संस्कार किया जा रहा है। दरअसल, सोमवार को मोरी चार बाग निवासी 70 वर्षीय अशोक का निधन हो गया। शाम करीब 7 बजे परिजन अंतिम संस्कार के लिए बी-नारायण गेट स्थित श्मशान पहुंचे। वहां पहुंचते ही परिजनों को गहरा झटका लगा। पूरे श्मशान परिसर में घना अंधेरा पसरा हुआ था। न रोशनी की कोई व्यवस्था थी और न ही कोई कर्मचारी मौजूद था। अंधेरे के बीच परिजनों और रिश्तेदारों ने मोबाइल फोन की रोशनी में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कीं, लेकिन यह रोशनी नाकाफी साबित हुई। मजबूरी में वाहनों की हेडलाइट जलाकर रोशनी की गई। कारों की रोशनी में किसी तरह अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं। ये हाल तब हैं जब राजस्थान पत्रिका के अभियान के बाद नगर निगम आयुक्त ने हाल ही में श्मशान का निरीक्षण भी किया था और व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश भी दिए थे। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।

Arvind Chotia

15,387 просмотров • 7 месяцев назад