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उमर का कसूर यहीं है कि वो उमर खालिद है 🥹

20,164 görüntüleme • 12 gün önce •via X (Twitter)

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उमर खालिद को लेकर पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा, सरकार ने उमर खालिद को एक तरह से पब्लिक एनिमी घोषित कर दिया है और तमाम बिग मीडिया उन्हें उसी तरह पेश करता है। इसके चलते बहुत सारे मुकदमे दर्ज हो जाते हैं। जैसे गोवा में कुछ छात्रों ने मुद्दा उठाया, मुंबई में कुछ लोगों ने सिर्फ यही कहा कि उन्हें (उमर खालिद) रिहा करो। इस स्लोगन को लेकर पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज कर दिया, उन्हें जमानत भी नहीं मिली। तो जाहिर है कि लोगों के दिलो-दिमाग में खौफ पैदा हो जाता है कि उमर खालिद की बात तो सही है, उनकी रिहाई होनी चाहिए। सरकार का केस झूठा है, लेकिन हम बोलेंगे तो हमारे खिलाफ एक्शन हो जाएगा।

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नई दिल्ली: दिल्ली के प्रेस क्लब में उमर खालिद की आदिवासियों पर लिखी किताब पर आयोजित चर्चा के दौरान पत्रकार अरफा खानम ने कहा, देखिए, कितना इत्तिफाक है कि ये सरकार चाहती है कि उमर को जितना मुसलमान बनाया जाए, उतना अच्छा है। लेकिन उमर अपनी पहचान से ऊपर उठता है और हर उस व्यक्ति, हर उस शख्स के साथ इंसाफ की बात करता है, जिसके साथ नाइंसाफी हुई है। उमर चाहते तो मुसलमानों के लिए किताब लिख सकते थे, लेकिन उन्होंने आदिवासियों के लिए लिखा। मैं उम्मीद करती हूं कि जब वह जेल से बाहर आएंगे, तो मुसलमानों के लिए भी जरूर लिखेंगे। उमर का दिल हर उस इंसान के लिए धड़कता था, जिसके साथ नाइंसाफी हुई है। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे उमर को, उमर की तरह जानने का मौका मिला।

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