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उम्र भर लिखता रहा हूं मैं उसी के लिए उसने देखा,कहा-क्या रद्दी फैलाए बैठे हो
23,094 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)
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मैं इश्क भरे अफ़साने को भुलाता कैसे लिखा था दिल की स्याही से मिटाता कैसे उसे रद्दी लगे थे तब मेरे एहसासे बयां तमाम अब उम्र के इस दौर में उसे बुलाता कैसे... #kavyakshra 🖊️

आप जैसी फूर्ति न रही अब उस उम्र में घर नहीं पहुंचा कभी

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सालों से रखी थीं चिट्ठियाँ उसके नाम, उसने देखा, कहा—"ये कागज़ कबाड़ के दाम!"

बहुत ही सुंदर लाइन है। 🙌

Nice song

यह बहुत ही गलत कहा उसने प्रेम की बेइज्जती कर दी

वाह भाई

Wah kya baat hai

आपकी रचना संग्रह में किसी का प्रेम है

अगर इश्क की कदर नहीं, तो सब बेकार है।
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तू चमार है हम ठाकुर हैं...शादी नही कर सकते... मैं IAS की तैयारी कर रही थी... फेसबुक पर दीपक बिष्ट से मुलाकात हुई... उसने मिलने के लिए पार्क में बुलाया मैं चली गई.... फिर उसने मुझे होटल में बुलाया मैं चली गई..... उसने मुझे फिजिकल होने के लिए बुलाया मैं चली गई.. वह मुझसे शादी नहीं कर रहा है यह कहकर कि मैं चमार हूं वह ठाकुर है....
Kavish aziz
1,118,575 просмотров • 1 год назад
