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Ana Sayfaya Dön

एक डॉलर की कीमत 86 रुपये 61 पैसे हो गई है। खूब मीम बन रहे हैं कि प्रधानमंत्री अब चुप हो गए हैं, तब तो खूब बोलते थे। इसका ज़िक्र होना चाहिए कि आम आदमी, मिडिल क्लास क्यों चुप है? इतनी मेहनत करने के बाद भी उसकी कमाई क्यों...

21,323 görüntüleme • 1 yıl önce •via X (Twitter)

9 Yorum

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Sachin Katariya1 yıl önce

2013 से लेकर अबतक, जूही चावला की हिम्मत क्यों नहीं हुई दोबारा ऐसा ट्वीट करने की

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Travala.com 🏨 ✈️4 yıl önce

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Sumant sarkar1 yıl önce

@newsSChaudhry ये कलयुग नहीं रेवड़ी युग चल रहा है जनता और सरकारें दोनों बेशर्म है इसके बाद आएगा भट युग सब भट्टा बैठ जायगा......स्वाहा 😭

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Rajen.KSuthar1 yıl önce

देश में उद्योगों का विरोध करेंगे, उद्योगपतियों का विरोध करेंगे, विदेशी अफवाहों से देश के निवेशकों का लाखों करोड़ स्वाहा कराने का समर्थन करेंगे, निवेश को भ्रष्टाचार कहेंगे, संवैधानिक संस्थाओं को कोसेंगे, किसानों को बरगलायेंगे और हर समय नकारात्मक माहौल बनायेंगे तो डालर ही बढ़ेगा।

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Ku.deepika dhruw1 yıl önce

बी एड सहायक शिक्षकों को न्याय चाहिए

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Ravinder Singh1 yıl önce

Hinden burg is dead and soon will be your ideology..you people were after @narendramodi when hide bug saga broke out..you people have and support anti nation stance always

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Ramesh Jain1 yıl önce

Lol tum logo ke Raghu Ram ne kya kaha ? Ab kyu nahi ja raha Hindan rive me . Tumhara Anderson to bhag gaya .

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Ambuj Atreya1 yıl önce

Why don't you share the reasons as well

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Surendra pal Singh1 yıl önce

न नौकरी देगें न रोजगार देगे व्यवसायी बना नही सकते फिर उपभोग कहाँ से बढ़ेगा???

Benzer Videolar

मैं आमतौर पर सेलिब्रिटीज़ को निशाना बनाने से परहेज़ करती हूँ क्योंकि वे आसान आलोचना का शिकार हो जाते हैं, और सवाल तो सत्ता से किया जाना चाहिए जिससे कि जवाबदेही सुनिश्चित हो लेकिन जब यह सेलिब्रिटीज़ RSS जैसी एक ऐसी संस्था की तारीफ़ों के पुल बाँधने लगते हैं जो मेरे देश में नफ़रत फैलाती, लोगों को बाँटती है, तो कुछ ज्वलंत मुद्दों पर उनकी चुप्पी पर भी ज़रूर सवाल उठते हैं • जब लोगों की लिंचिंग सिर्फ़ उनकी शक्ल या उनके खाने की वजह से होती है, तो आप चुप क्यों रहते हैं? • जब लड़कियों के साथ बलात्कार होता है और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण मिलता है, तो आप एक भी शब्द क्यों नहीं बोलते? • जब सर्वोच्च पदों पर बैठे लोग हिंसा और नफ़रत को बढ़ावा देते हैं, तो आप चुप क्यों रहते हैं? • जब किसानों को कुचला जाता है, तो आप बोलते क्यों नहीं? • जब मणिपुर हिंसा की आग में जलता है और महिलाओं के साथ बर्बरता होती है तो आप चुप क्यों हैं? • जब बिलकिस बानो केस के दोषियों को माला पहनाकर सम्मानित किया जाता है और जश्न मनाया जाता है, तो आप ख़ामोश क्यों रहते हैं? • आसमान छूती महँगाई और पेट्रोल की कीमतों पर आपके वे भद्दे मज़ाक कहाँ चले गए? • रुपए लगातार गिर रहा है और आपको कोई भी फ़िक्र क्यों नहीं है? • इस देश में गंदे पानी से होने वाली मौतों पर आप बोलते क्यों नहीं? • जानलेवा प्रदूषण से आपको परेशानी नहीं होती? • खुले गड्ढों में गिरकर युवाओं की मौत हो रही है पर आपको जरा सा भी गुस्सा कैसे नहीं आता? • असल में तो जब आपके अपने किसी साथी को बदनाम किया जाता है, तब भी आप कभी बोलने की हिम्मत क्यों नहीं करते? अगर आप ज़रूरी ज्वलंत मुद्दों पर बोल नहीं सकते - तो कम से कम उन लोगों का महिमामंडन तो मत कीजिए जो नफ़रत फैलाते हैं और उससे फ़ायदा उठाते हैं अन्याय के सामने खामोश रहना एक choice है, लेकिन नफ़रत को बढ़ावा देना choice कतई नहीं है

Supriya Shrinate

69,473 görüntüleme • 6 ay önce

दिल्ली में जब विकास हो रहा था, तब ट्रैफिक की औसतन रफ़्तार 35 से 40 किलोमीटर हुआ करती थी। आज सरकार की नाकामी के कारण ट्रैफिक की रफ़्तार कम हो गई है। रोड-इंफ्रास्ट्रक्चर खराब है और इस कारण वाहनों से प्रदूषण का स्तर ढाई गुना तक बढ़ गया है। दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट ध्वस्त हो चुका है। आज बसों से यात्रा करने वालों की संख्या कम हो गई है और वाहनों की संख्या बढ़ गई है। सवाल ये भी है कि दिल्ली में मेट्रो के नए रूट क्यों नहीं बन रहे हैं? प्रदूषण का एक और सबसे बड़ा कारण इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन भी है, जो गंदा फ्यूल इस्तेमाल कर रही हैं। दिल्ली में MCD, पुलिस और राजनेताओं की मिलीभगत के बिना अवैध फैक्ट्रियां नहीं चल सकती हैं। साल 2004-2005 में जब तत्कालीन सरकार ने कई सारी पॉल्यूटेड इंडस्ट्री हटाई थीं, तो अबकी सरकार ऐसा कदम क्यों नहीं उठा रही है? : Sandeep Dikshit जी 📍 नई दिल्ली

Congress

34,571 görüntüleme • 9 ay önce

रियांबड़ी में बजरी माफिया के आतंक पर : देखिए मैं कह चुका हूं बजरी में सरकार पर माफिया हावी हो गए हैं, बजरी बहुत महंगी मिल रही है, हमारे वक्त में भी तकलीफ थी लोगों को मैं स्वीकार करता हूं हमारे वक्त में भी थी पर हमनें पूरा रोकने की कोशिश करी, पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन को पाबंद किया, आज इतना बड़ा नेक्सस बन गया ये कि नीचे से ऊपर तक ऐसा सिस्टम बन गया बना दिया अब इन लोगों ने कि कितने लोग कुचल कर मारे जा रहे हैं, पुलिस पर हमले हो रहे हैं, कई लोगों को कुचल देते हैं लोग जो इनके गैंग में शामिल नहीं होते हैं , इतनी घटनाएं हो रही हैं उसके ऊपर रोक नहीं लग रही है इस बात का दुख है और इसलिए ये बढ़ता ही जा रहा है बढ़ता ही जा रहा है,बढ़ता ही जा रहा है, और लूट मचा रही है इन लोगों ने यह स्थिति है और मुख्यमंत्री को मैं कहना चाहूंगा आप ध्यान क्यों नहीं दे पा रहे हो ? भई घूमना अच्छी बात है, अगर दौरे करते हैं मैं उसको बुरा नहीं मानता, कितने दौरे करो, पर दौरे करने के साथ साथ में गवर्नेंस भी तो करो शासन भी तो करो भई, और जो प्रॉब्लम बर्निंग प्रोब्लम आपकी है जैसे कानून व्यवस्था की स्थिति होती है घटनाएं रेप की हो रही हैं डकैती की हो रही हैं चोरी हो रही है, रोज हो रही हैं ये प्रायोरिटी पर होना चाहिए उनकी,बजरी अपने आप में ही प्रायोरिटी पर होनी चाहिए क्योंकि बजरी जब इतना, एक मध्यम क्लास का व्यक्ति भी वो मकान छोटा मोटा बनाता है उसको बजरी इतनी महंगी मिलती है कि वो बेचारा क्या मकान बनाएगा, तो तकलीफ मध्यम परिवार के लोगों को हो रही है सबको हो रही है उस पर ध्यान मुख्यमंत्री जी को देना चाहिए। मुख्यमंत्री जी की बहुत बड़ी ऑथोरिटी होती है, है, भजनलाल जी के पास में आज इतनी बड़ी पावर है उसको यूज करने की आवश्यकता है खाली उनको और कुछ नहीं करना है, प्रमोशन हो गए आईपीएस के, वहीं बैठे हुए हैं एसपी के रूप में जो डीआईजी बन गए, पहले आईएएस की यह स्थिति थी अब जा के लिस्ट निकली है तो इनको कौन रोक रहा है ? अब तो नए डीजी बन गए हैं , नए डीजी बनने के बाद में अब क्या तकलीफ आ रही है ? हो सकता है उनको कोई सलाह लेनी होगी, रुक गया होगा मान लो अब क्या दिक्कत है उनको ? तो ये जो जिस प्रकार गवर्नेंस हो रही है न उससे नुकसान इन्हीं को हो रहा है इन्हीं को हो रहा है।

Ashok Gehlot

22,470 görüntüleme • 1 yıl önce