Video yükleniyor...

Video Yüklenemedi

Ana Sayfaya Dön

एक भाई ने मुझे यह वीडियो भेजी - देखकर दुख हुआ l शिक्षा सरकार की प्राथमिकता है ही नहीं !! सब खाली खोखली बातें हैं बस ! सरकार को, मुख्यमंत्री को, शिक्षा मंत्री को कुछ नहीं लेना, बच्चों की पढ़ाई, स्कूल की बिल्डिंग या शौचालय के हालात से !...

14,637 görüntüleme • 12 gün önce •via X (Twitter)

0 Yorum

Yorum bulunmuyor

Orijinal gönderinin yorumları burada görünecek

Benzer Videolar

झालावाड़ के पीपलोदी सरकारी स्कूल में बिल्डिंग गिरने से 5 बच्चों की मौत और 30 से ज़्यादा बच्चों के घायल होने की खबर बहुत ही दुखद और दर्दनाक है। यह सिर्फ़ एक हादसा नहीं, बल्कि राजस्थान की बीजेपी सरकार की बड़ी लापरवाही का नतीजा है। वसुंधरा राजे और सांसद दुष्यंत सिंह सालों से झालावाड़ से जुड़े हैं, लेकिन स्कूलों की हालत सुधारने के लिए कुछ नहीं किया। भजनलाल शर्मा और पूरी सरकार ने शिक्षा को कभी प्राथमिकता नहीं दी। स्कूल की बिल्डिंग जर्जर थी, लेकिन कोई मरम्मत नहीं हुई। क्या गरीब बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं है? सरकार और नेताओं की इस अनदेखी ने मासूमों की जान ले ली। यह लापरवाही नहीं, बल्कि अपराध है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

Hansraj Meena

51,314 görüntüleme • 1 yıl önce

अब आप समझ लीजिए शिक्षा का सिस्टम क्यों नहीं सुधरता है? ये अनिल स्वरूप साहब हैं। भारत सरकार के कोयला और शिक्षा सचिव रह चुके हैं। यह खुद बता रहे हैं कि जब यह कोयला सचिव थे तब प्रधानमंत्री से हर महीने एक बार जरूर मिलते थे। जरूर कोयले से जुड़ी बातें ही होती होगी। कोयला भी देश के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन जब ये शिक्षा सचिव थे तो प्रधानमंत्री से सिर्फ एक बार मिले। और वह भी शिक्षा से जुड़े काम के लिए नहीं बल्कि हेल्थ इंश्योरेंस समझाने के लिए मिलना हुआ। हालांकि ये कितने समय शिक्षा सचिव रहे, यह नहीं बताया है। फिर ये बता रहे हैं कि शिक्षा का बजट कैसे हर साल कम होता गया। अब आप ही बताइए कि जब कोई सब्जेक्ट सरकार की प्राथमिकता में ही नहीं होगा तो उसमें सुधार होगा कैसे? जिस विषय पर बात ही नहीं होगी, उसमें सुधार की उम्मीद आप कर कैसे सकते हैं? यह बहुत अच्छा हुआ कि शिक्षा में सुधार को लेकर एक बड़ा अनशन और बड़ा आंदोलन हुआ। शिक्षा व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता में आई। प्रधानमंत्री खुद प्रतिदिन इस पर वीडियो बनाकर देश को अपडेट दे रहे हैं। जरूर अब देश के शिक्षा सचिव प्रधानमंत्री से फ्रिक्वेंटली मिलेंगे और शिक्षा सुधार पर बातें होंगी।

Arvind Chotia

64,780 görüntüleme • 1 ay önce

जब एक छोटी-सी बच्ची कैमरे के सामने खड़े होकर कहती है - "हम पढ़ना चाहते हैं, लेकिन हमारे गाँव में स्कूल नहीं है" - तो यह सिर्फ़ एक बच्चे की आवाज़ नहीं, बल्कि देश के लाखों ग्रामीण बच्चों की पीड़ा है। किसी को 10 किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते स्कूल जाना पड़ता है, किसी के गाँव में स्कूल ही नहीं है, कहीं बिजली नहीं है, कहीं शिक्षक नहीं हैं। फिर भी मंचों से "विश्वगुरु" और "विकसित भारत" के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। अगर बच्चों को शिक्षा पाने के लिए सुरक्षा, सड़क, स्कूल और बुनियादी सुविधाओं की भीख माँगनी पड़े, तो यह किसी भी लोकतंत्र के लिए गंभीर सवाल है। सरकार को नारों से नहीं, स्कूलों से जवाब देना होगा। क्योंकि देश का भविष्य भाषणों से नहीं, कक्षाओं से बनता है। हर बच्चे को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना कोई कृपा नहीं, उसका संवैधानिक अधिकार है।

Dr. Laxman Yadav

23,790 görüntüleme • 1 ay önce

#जो लोग मुसलमान के बच्चों को आतंकवादी बताते हैं कि वह मदरसे में पढ़ेंगे तो आतंकवाद बनेंगे मदरसे में आतंकवाद की शिक्षा देते हैं तो अब मैं उन लोगों से यह जानना चाहती हूं कि यह किस बात की शिक्षा मिली है तुम्हारे बच्चों को यह आतंकवाद की शिक्षा नहीं है क्या यह आतंकवादी नहीं बन रहे क्या क्या मंदिरों में भी आतंकवादी की शिक्षा देने लग गए हैं क्या मैं शासन और प्रशासन और प्रशासन से यह पूछना चाहती हूं कि यह सब कुछ क्या हो रहा है अगर यही कोई मुसलमान वीडियो बनाकर डाल देता तो अब तक बहुत एक्शन हो जाते और यही हिंदुओं ने डाली है तो अभी तक इस पर कुछ एक्शन या कार्रवाई भी नहीं हो रही

mohd Asif Abbas

43,215 görüntüleme • 1 ay önce

बड़बोले शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की पोल इस बच्चे ने खोल दी! बिहार के स्कूल इंसानों के बैठने लायक नहीं हैं! जलजमाव, ध्वस्त इमारत, कई स्थानों पर भवनों का अभाव, अपर्याप्त कक्षाएं, अपर्याप्त शिक्षक, शौचालय नदारद, गंदगी का अंबार, शिक्षकों को पढ़ाने से मतलब नहीं, विभाग को केवल भ्रष्टाचार करने से मतलब और शिक्षा मंत्री जी को केवल बयानबाजी से मतलब!! यही है बिहार की शिक्षा व्यवस्था!!! बिहार के सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अपने-अपने स्कूलों की दुर्दशा दिखाने के लिए खूब सारे वीडियो बनाएं और जमकर वायरल करें! तब जाकर इस बेशर्म सम्राट सरकार की नींद खुलेगी अन्यथा ₹10000 बाँट कर सो रही सरकार बच्चों के भविष्य को निगल जाएगी! Tejashwi Yadav #RJD #bihar

Rashtriya Janata Dal

13,707 görüntüleme • 7 gün önce

मुख्यमंत्री जी, बेटियों की पढ़ाई ज़रूरी है, या स्कूल की जमीन पर होटल? - उज्जैन की Gen Alpha बेटियां अब अपने हक़ के लिए मैदान में उतर आई हैं! सराफा, नूतन, महाराजवाड़ा और माधवगंज स्कूल की बच्चियां स्कूल बचाने के लिए आवाज़ बुलंद कर रही हैं! - सामान्य परिवारों की इन छात्राओं को पढ़ाई के लिए करीब 7–8 किमी दूर दाउतखेड़ी भेजा जा रहा है, जबकि मौजूदा स्कूल भवन को होटल में बदलने की बात सामने आ रही है! - पढ़ाई के लिए मजबूरी देखिए, कई छात्राएं TC तक निकलवा चुकी हैं, लेकिन उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ! उनका एक ही कहना है “हमें अपना स्कूल नहीं छोड़ना!” - कांग्रेस इस निर्णय की आलोचना करती है! मप्र के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री से यह कहना भी चाहती है कि आपके "सरकारी कारोबार" किसी भी कीमत पर शिक्षा मंदिरों से बड़े नहीं हो सकते! Dr Mohan Yadav

Jitendra (Jitu) Patwari

18,815 görüntüleme • 13 gün önce

उत्तर प्रदेश के जिला मैनपुरी के भोगांव में भारी बारिश के कारण क्षेत्र में भारी जलभराव हो गया है। बच्चे जान हथेली पर रखकर स्कूल जाते दिख रहे हैं। कीचड़ से भरी सड़कों पर एक बच्ची गिरती है, मगर कोई विकल्प नहीं — शिक्षा के प्रति उसका संघर्ष झकझोर देने वाला है। यह सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि सवाल है उस सिस्टम पर जो बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों को नजरअंदाज़ कर रहा है। लेकिन शर्म की बात ये है कि सरकार हालत सुधारने के बजाय गाँव-गाँव के सरकारी स्कूलों को बंद कर, उन्हें जबरन "विलय" कर रही है। मेरा सवाल है मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी से — "क्या यही है वो 'विकास', जो स्कूलों को बंद करता है और बच्चों को कीचड़ में धकेलता है?" मैं कहना चाहता हूँ CM Office, GoUP जी से शिक्षा बच्चों का अधिकार है, सुविधा नहीं। उसे छीनने का हक किसी सरकार को नहीं। आखिरी में यही कहना चाहता हूँ — चले जाओ बच्चों स्कूल नहीं तो मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी की शिक्षा-विरोधी तानाशाही सरकार कह देगी कि "रास्ता बंद कर देते हैं, इससे बाकी बच्चों को पढ़ने की सुविधाएँ बढ़ जाएंगी!" हद तो तब होगी जब माननीय उच्च न्यायालय भी सरकार की हाँ में हाँ मिलाकर यह न कह दे कि "इन बच्चों को पढ़ाने के लिए अगर सड़क बनानी पड़ी, तो फिर तो गांव-गांव में सड़क बनानी पड़ेगी!" मेरा एक सवाल है माननीय उच्च न्यायालय के उन न्यायाधीशों से, जो शिक्षा के संवैधानिक अधिकार (RTE Act 2009) के तहत प्रत्येक एक किलोमीटर के दायरे में, 300 की जनसंख्या पर एक स्कूल के प्रावधान को अस्वीकार करते हुए कहते हैं — कि 'फिर तो एक लाख स्कूल खोलने पड़ेंगे!' आपके बच्चे बिना गाड़ी के, अकेले, रोज़ कितनी दूर पैदल जा सकते हैं? #SaveVillageSchools

Chandra Shekhar Aazad

54,145 görüntüleme • 1 yıl önce

इस वीडियो को देखकर बहुत दुःख हुआ। अगर बिहार में तेजस्वी की सरकार होती तो सरकार को ढेर सारी अच्छी अच्छी गालियां देते। लेकिन कीचड़ में उगने वाले कमल की सरकार है तो कुछ बोल भी नहीं सकते। अफसोस की बात यह है कि इन भाजपाई समर्थकों को नेहरू के रजाई के अंदर की एक एक बाते याद रहती है, दुनिया में खुद को सबसे बड़ा देशभक्त बताते फिरते हैं। लेकिन देश के लिए इतना बड़ा त्याग देने वाला राजघराना इनको याद नहीं रहता । हो सकता है कि इनको इस बात से गुस्सा हो कि कांग्रेस सरकार के समय में इन्होंने सोना क्यों दिया। भाजपा सरकार में दिए होते तब ही इनके त्याग को भाजपाई सर्टिफिकेट मिलता।

पंडित जगन्नाथ

10,673 görüntüleme • 7 ay önce

गरीब को गरीब बनाए रखने के आरएसएस के एजेंडे को राजस्थान के वर्तमान शिक्षा मंत्री पूरी निष्ठा से लागू करने में लगे हुए दिखाई देते हैं। सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लगातार कमजोर करने वाले फैसले इसी दिशा में उठाए जा रहे हैं। कभी छोटे-छोटे बच्चों को भ्रमण के नाम पर आरएसएस की शाखाओं में भेजने का मामला सामने आता है, तो कभी महात्मा गांधी अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालयों को बंद किया जाता है। जिन स्कूलों में गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को संवारने का सपना देख रहे थे, आज उन्हीं भवनों में आरएसएस की गतिविधियाँ संचालित होने की खबरें सामने आ रही हैं। अब स्थानांतरण प्रक्रिया के बाद मेरे विधानसभा क्षेत्र की स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। लगभग हर सरकारी विद्यालय में व्याख्याता, प्रधानाचार्य और विषय अध्यापकों के पद खाली हैं। पूरे विधानसभा क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत शिक्षकों के पद रिक्त हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। यह लड़ाई केवल मेरी या मेरी पार्टी की नहीं है। यह हर उस माता-पिता की लड़ाई है जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाता है। यह हर उस जिम्मेदार नागरिक की लड़ाई है जो अपने गांव के सरकारी विद्यालय को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत है। ऐसा प्रतीत होता है कि स्थानांतरण के माध्यम से अनेक विद्यालयों को जानबूझकर शिक्षकों से खाली कर दिया गया है। यदि स्कूलों में शिक्षक ही नहीं होंगे, तो स्वाभाविक रूप से बच्चों की संख्या घटेगी और फिर इन्हीं विद्यालयों को बंद करने का आधार बनाया जाएगा। यह सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की बेहद चिंताजनक दिशा है। सरकारी विद्यालय केवल इमारतें नहीं हैं, बल्कि लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव हैं। इन्हें बंद या कमजोर करने के बजाय पर्याप्त शिक्षक, संसाधन और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। शिक्षा पर हर बच्चे का समान अधिकार है, और इस अधिकार की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। #RSSAgenda

Govind Singh Dotasra

28,781 görüntüleme • 1 ay önce