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एग्जाम हमारे भी खत्म होते थे लेकिन ऐसी खुशी कभी नहीं मनाई। यह सौभाग्यशाली पीढ़ी है। यह सुगंध है। बिटिया है हमारे मित्र Sarvesh Sharma की। आगे से इस नृत्य को "परीक्षा समाप्ति नृत्य" के नाम से जाना जाएगा।

604,299 Aufrufe • vor 2 Jahren •via X (Twitter)

9 Kommentare

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Rawat Nehravor 2 Jahren

@ssarveshsharma एग्जाम का कितना प्रेशर होता है,, मुझे मैथ्स के पैपर का प्रेशर नही रहता था 💁😂😂 क्योकि आता कुछ था नही math's मे, और मार्कशीट मे supp. या passed by grace in math... आना ही था

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Kranti Tiwari INC ( क्रांति कोटा )vor 2 Jahren

@ssarveshsharma प्यारी बिटिया,,

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BhanuPratap👍100% फॉलो बेकvor 2 Jahren

@ssarveshsharma सुंदर दृश्य, मूल प्रश्न ये हैं कि बच्चो पर एग्जाम का अत्यधिक तनाव को महसूस कीजिये! उससे मुक्ति पाकर उस बच्ची की ख़ुशी देखिये! सभी पक्षों की समीक्षा भी जरूरी हैं! समाज में सुगंध महकती रहे, कल्याण हो!

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mihirika aaryavor 2 Jahren

@ssarveshsharma Kuch bhi ho ye confidence tab aata hai jab sab paper badhiya hote hai. mai to jab paper' badhiya hota tha to bas muskuraya karti thi. Har bat par mere ghar wale mujhe datne lgte the akele akele kya Hansa karti ho.bat koi dusri ho tab bhi bas hansi aati thi. Sahi paper huaa hai.

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Himanshi Bishtvor 2 Jahren

@ssarveshsharma result ki tayyari karo beta

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JogRaj Rathorevor 2 Jahren

@ssarveshsharma बच्चे दिल के सच्चे

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Raghuveer Singh Rajpurohitvor 2 Jahren

@ssarveshsharma परीक्षा को बोझ नही समझा जा सकता है । बच्चों को इस तरह के गानों से दूर रहना चाहिए, आज सर पर बस्ता रखा हुआ, भविष्य मे बस्ते की जगह कुछ और भी हो सकता है! #exam

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Harshvor 2 Jahren

@ssarveshsharma 😂😂😂

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VIKAS SHARMAvor 2 Jahren

@ssarveshsharma अरविंद जी एक पोस्ट इनके लिए भी लिखें, हो सकता है आपके पोस्ट लिखने से इनको राहत मिले।

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दिल्ली में G20 का आयोजन हो रहा है, पूरी दिल्ली बंद है और दुल्हन सी सजी हुई है। विभिन्न देशों से आये नेताओं का स्वागत हो रहा है जिसमें भारत के अलग-अलग राज्यों के लोकनृत्य मेहमानों के सामने प्रस्तुत किए जा रहे हैं। ऐसा ही ओमान के प्रतिनिधि के आने पर भी हुआ इसमें राजस्थान के लोकनृत्य के नाम पर 'काळीयो कूद पड़ियो मेळा में' पर एक बॉलीवुड सा लगने वाला नृत्य यह कलाकार कर रहे हैं। यह सिर्फ़ G20 तक सीमित नहीं है बल्कि राजस्थानी लोकनृत्य के नाम पर होने वाले हर कार्यक्रम में यही चल रहा है, चाहे वो किसी कॉलेज का कोई प्रोग्राम हो या कल्चरल फंक्शन जबकि यह साफ़ तौर पर कुछ समय पहले आया एक डीजे का गाना है, इसके उपयोग पर कोई आपत्ति नहीं है पर राजस्थान के लोकनृत्य की तरह इसे प्रस्तुत करना गलत है। जिस प्रदेश में लोकनृत्य की ढोल नृत्य, अग्नि नृत्य, बम नृत्य, घूमर नृत्य, गैर नृत्य, गवरी नृत्य, वालर नृत्य, चरी नृत्य,भवाई नृत्य, तेरहताली आदि जैसे लोकनृत्यों की लम्बी ऐतिहासिक-धार्मिक-सांस्कृतिक परम्परा रही हो उसके लोकनृत्यों का प्रतिनिधित्व इस एक फूहड़ बॉलीवुडिया डांस को करते देखना दुःखद है।

Ankesh Bhati

148,126 Aufrufe • vor 3 Jahren

आज शायद TV पर विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन और उनकी गिरफ़्तारी के बाद आप सोच रहे होंगे - यह सब क्यों हो रहा है? यह सारे सांसद चुनाव आयोग क्यों जाना चाहते थे? इनके रास्ते में इतनी बैरिकेडिंग क्यों? इनके साथ पुलिस की इतनी ज़ोर ज़बरदस्ती क्यों? आख़िर विपक्ष क्या माँग रहा है? तो चेत जाइए, क्योंकि यह विपक्ष की बात नहीं है. यह राहुल गांधी बनाम नरेंद्र मोदी की लड़ाई नहीं है. यह कांग्रेस बनाम BJP नहीं है. यह सत्ता और विपक्ष के बीच का भी मसला नहीं है. यह आपके वजूद का सवाल है. और अब आपके पास कोई चारा नहीं है. आप चुप नहीं रह सकते हैं. क्योंकि आपका वह अधिकार, जो लोकतंत्र में आपको सबसे ज़्यादा ताक़त देता है - वोट का अधिकार - छीना जा रहा है. • "एक व्यक्ति, एक वोट" हमारे संविधान की नींव है • एक साफ़ सुथरी वोटर लिस्ट स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की नींव है • एक ऐसी मतदाता सूची जिसमें कोई डुप्लिकेट नाम, नकली पते या फर्जी डिटेल ना हों - हर भारतीय का हक है • चुनाव आयोग से हमारी मांग है: डिजिटल वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई जाए जिसका सार्वजनिक ऑडिट हो सके • यह अभियान BJP, मोदी या राहुल गांधी के बारे में नहीं है - यह इस देश की आत्मा, हमारे लोकतंत्र के लिए है आप मूकदर्शक नहीं बने रह सकते. अगर हमारे चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे तो हमारे लोकतंत्र का कुछ भी नहीं बचेगा

Supriya Shrinate

83,523 Aufrufe • vor 1 Jahr

राहुल गांधी ने कहा कि anti-incumbency इस देश का established truth है और यह भाजपा के आने के बाद हुआ है। मुझे लगता है कि राजनीतिक दृष्टि से राहुल गांधी विवेक-शून्य और ज्ञान-शून्य हैं। 1967 के बाद से तमिलनाडु में कांग्रेस कभी सत्ता में वापस नहीं लौटी। तब भारतीय जनता पार्टी का नाम तक नहीं था। बंगाल में 1977 के बाद से कांग्रेस सत्ता में वापस नहीं लौटी, और 1977 से 2011 तक 34 वर्षों तक कम्युनिस्टों की सरकार रही, लेकिन राहुल गांधी को यह समझ में ही नहीं आता, दिखाई ही नहीं पड़ता। बिहार में 1990 के बाद से कांग्रेस कभी सत्ता में नहीं रही। तीन बार लगातार लालू यादव की सरकार रही, लेकिन राहुल गांधी को इसका भी ज्ञान नहीं है। 1989 के बाद से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं रही, लेकिन उन्हें इसका भी पता नहीं है। 1999 के बाद से ओडिशा में कांग्रेस की सरकार नहीं रही, लेकिन यह भी उन्हें पता नहीं है। त्रिपुरा में लगातार कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार रही है, लेकिन उन्हें पता ही नहीं है। यही नहीं, एक जमाने में कांग्रेस की भी लंबे समय तक सरकार रही है, लेकिन उन्हें इसका भी पता नहीं है। - डॉ. Dr. Sudhanshu Trivedi पूरा वीडियो देखें:

BJP

72,471 Aufrufe • vor 8 Tagen

शादियों का सीजन शुरू हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक हर जगह बारातों की चहल-पहल और शोरगुल दिख रहा है। गांवों और पहाड़ों की बात करें तो वहां की शादियों का मज़ा ही अलग होता है, सादगी भी है और अपनी मिट्टी की खुशबू भी। लेकिन एक चीज़ आज तक नहीं बदली है। बारातियों का बस की छत पर बैठकर जाना। यह चलन कब शुरू हुआ, शायद किसी को ठीक से याद नहीं होगा। हो सकता है पहले बच्चों ने अपने बड़े या नौजवानों को ऐसा करते देखा हो और वही आदत आगे बढ़ गई हो। पर हैरानी की बात यह है कि आज के समय में भी यह ट्रेंड खत्म नहीं हो रहा, बल्कि कई जगहों पर और बढ़ रहा है। सुरक्षा की नजर से यह कितना खतरनाक है, यह सब जानते हैं। फिर भी बारात का जोश कई बार समझदारी पर भारी पड़ जाता है। शादी की खुशी ज़रूर मनाएं, लेकिन अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान भी रखें। खुशी वही अच्छी लगती है जो सुरक्षित घर वापस लेकर जाए।

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