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एमपी की पटवारी परीक्षा शुरू से ही विवादों में रही। जिन्हें 90% नंबर मिले उन्हें प्रदेश की राजधानी नहीं पता थी। जिले नहीं पता थे। कुछ टॉपर्स तो सवालों से बचने के लिए घर छोड़कर दर्शन करने भाग गए थे। चूंकि उस वक्त चुनाव था तो जांच के आदेश... show more
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भर्तियों की जांच के नाम पर अक्सर वही फैसले आते हैं जो सरकार के हित में होते हैं।

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उत्तर प्रदेश के युवाओं को बेरोजगार पद यात्रा निकलना चाहिए तथा उत्तर प्रदेश पुलिस और समीक्षा अधिकारी की परीक्षा दुबारा से करवाने तक आंदोलन करना चाहिए।

यही होता है | लोगो को धोखा ही मिलता है अंत में |

भर्तियों की जांच के नाम पर अक्सर वही फैसले आते हैं जो सरकार के हित में होते हैं। नहीं भरोसा होता तो यूपी-एमपी समेत तमाम राज्यों का बैक रिकॉर्ड देख लीजिए।

हर राज्य का यही हाल है,

@KakaSunilraj

दिक्कत क्या हैं, राम राज्य मे सरकार ( शासक ) दोषी नहीं होते.

सही कह रहे हैं आप

यह तो मेघावी छात्रों के जीवन से खिलवाड़ है उनका शोषण है ।

उस वक्त चुनाव था तो जांच के आदेश दिए गए। जिन विधायक पर घोटाले के आरोप लगे उनके टिकट काटे गए। अब चुनाव हो गया इसलिए भर्ती को क्लीन चिट मिल गई। जिन युवाओं का भविष्य दांव पर था उन्हें सिर्फ धोखा मिला।
