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एमपी की पटवारी परीक्षा शुरू से ही विवादों में रही। जिन्हें 90% नंबर मिले उन्हें प्रदेश की राजधानी नहीं पता थी। जिले नहीं पता थे। कुछ टॉपर्स तो सवालों से बचने के लिए घर छोड़कर दर्शन करने भाग गए थे। चूंकि उस वक्त चुनाव था तो जांच के आदेश...

36,226 views • 2 years ago •via X (Twitter)

11 Comments

Son Of Farmer🇮🇳's profile picture
Son Of Farmer🇮🇳2 years ago

भर्तियों की जांच के नाम पर अक्सर वही फैसले आते हैं जो सरकार के हित में होते हैं।

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Travala.com 🏨 ✈️5 years ago

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Ashutosh Yadav's profile picture
Ashutosh Yadav2 years ago

उत्तर प्रदेश के युवाओं को बेरोजगार पद यात्रा निकलना चाहिए तथा उत्तर प्रदेश पुलिस और समीक्षा अधिकारी की परीक्षा दुबारा से करवाने तक आंदोलन करना चाहिए।

पंडित जगन्नाथ's profile picture
पंडित जगन्नाथ2 years ago

यही होता है | लोगो को धोखा ही मिलता है अंत में |

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Shailendra Pal2 years ago

भर्तियों की जांच के नाम पर अक्सर वही फैसले आते हैं जो सरकार के हित में होते हैं। नहीं भरोसा होता तो यूपी-एमपी समेत तमाम राज्यों का बैक रिकॉर्ड देख लीजिए।

Son Of Farmer🇮🇳's profile picture
Son Of Farmer🇮🇳2 years ago

हर राज्य का यही हाल है,

Nirbhay singh (किसान चिंतक) स्वतंत्र पत्रकार's profile picture
Nirbhay singh (किसान चिंतक) स्वतंत्र पत्रकार2 years ago

@KakaSunilraj

Er. Dev Patel🇮🇳's profile picture
Er. Dev Patel🇮🇳2 years ago

दिक्कत क्या हैं, राम राज्य मे सरकार ( शासक ) दोषी नहीं होते.

Durgesh Patel's profile picture
Durgesh Patel2 years ago

सही कह रहे हैं आप

ADV ANIL DEWARVA अधिवक्ता अनिल देवरवा's profile picture
ADV ANIL DEWARVA अधिवक्ता अनिल देवरवा2 years ago

यह तो मेघावी छात्रों के जीवन से खिलवाड़ है उनका शोषण है ।

Narendra Rajgopalak, PSM®, MCA's profile picture
Narendra Rajgopalak, PSM®, MCA2 years ago

उस वक्त चुनाव था तो जांच के आदेश दिए गए। जिन विधायक पर घोटाले के आरोप लगे उनके टिकट काटे गए। अब चुनाव हो गया इसलिए भर्ती को क्लीन चिट मिल गई। जिन युवाओं का भविष्य दांव पर था उन्हें सिर्फ धोखा मिला।

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यूपी में लेखपाल भर्ती में चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र नहीं मिल रहा। पुलिस भर्ती के अभ्यर्थी दोबारा परीक्षा करवाने के लिए इको गार्डेन में बैठे हैं। RO/ARO भर्ती परीक्षा के हजारों युवा सबूत लेकर प्रयागराज में लोकसेवा आयोग के सामने बैठे हैं। एमपी में पटवारी परीक्षा में धांधली हुई। टॉप 10 में 7 टॉपर एक ही कॉलेज से परीक्षा देकर निकले। जिन्हें सबसे ज्यादा नंबर मिला उन्हें एमपी की राजधानी नहीं पता। कितना जिला है ये नहीं पता। सरकार ने कहा कि धांधली की जांच करवाएंगे। चुनाव बीता तो कह दिया सबकुछ क्लीन है। अब युवा सड़कों पर बैठे हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल, हर जगह बेरोजगार युवा भर्ती और नौकरी को लेकर सड़क पर है। इन युवाओं की मांग बड़ी सीधी है। जिसमें घोटाला हुआ उसे रद्द किया जाए। पारदर्शी परीक्षा करवाई जाए। समय पर रिजल्ट दिया जाए। सरकार भी यही चाहती है लेकिन वह शायद पिछड़ जा रहे। वीडियो लखनऊ के ईको गार्डेन का है। #upp_papar_leak #RO_ARO_PAPER_LEAK

Rajesh Sahu

73,376 views • 2 years ago

नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कर्नाटक के आलंद में ‘वोट चोरी’ के सबूत देश के सामने रखे थे। अब BBC की पड़ताल में इस बात की पुष्टि हो गई है कि आलंद में बिल्कुल वही हुआ, जिसके बारे में राहुल गांधी जी ने बताया था। • आलंद विधानसभा क्षेत्र में कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए फ़ॉर्म 7 भरे गए • इनमें जिन लोगों के नाम से वोटर डिलीट करने के आवेदन किए गए, उन्हें ख़ुद भी इस बारे में जानकारी नहीं थी • यही नहीं, फ़ॉर्म 7 में दिए गए मोबाइल नंबर भी कर्नाटक के नहीं थे राहुल गांधी जी ने यह भी बताया था कि आलंद में सॉफ्टवेयर और कॉल सेंटर की मदद से लोगों के वोट काटे गए हैं। लेकिन चुनाव आयोग, इस मामले में कर्नाटक CID को - डेस्टिनेशन आईपी एड्रेस और OTP ट्रेल्स - जैसी कई अहम जानकारी नहीं सौंप रहा है, जिससे पता चल सके कि आख़िर ये फर्जीवाड़ा किसने और कहां से किया? सवाल है- चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार वोट चोरों की रक्षा क्यों कर रहे हैं? ये सीधे तौर पर देश के लोकतंत्र और संविधान पर हमला है।

Congress

47,457 views • 1 year ago

किरोड़ी लाल जी के द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह फर्जी एवं निराधार साबित हो चुके हैं। फिर भी अगर सरकार को लगता है कि किसी ने भी गलत प्रमाणपत्र से नौकरी प्राप्त की है, तो पुन: निष्पक्ष जांच कराए, मुझे किसी जांच से कोई आपत्ति नहीं है। 1999 से आज तक OBC के वही नियम लागू हैं, जो सरकार द्वारा निर्धारित किए गए हैं। जिस 2019 के परिपत्र का हवाला देकर भ्रम फैलाया गया, वो कोई परिपत्र नहीं था बल्कि एक गलत चिट्ठी थी, जिसका 2021 में सरकार द्वारा स्पष्टीकरण देकर RPSC को अवगत करा दिया गया। लेकिन सवाल ये है कि क्या किरोड़ी जी ने फर्जी आरोप इसलिए लगाए क्योंकि मैं कृषि मंत्री के नाम पर हुई करोड़ों की वसूली का मुद्दा उठा रहा हूं? क्या कृषि विभाग में हुए घोटाले के जवाब में ये फर्जी आरोप मढ़े गए हैं? कृषि विभाग में मंत्री जी के नाम पर चल रहे वसूली के खेल में ACB ने 2.43 करोड़ की बरामदगी की है। मंत्री जी के करीबी पकड़े गए हैं, 1200 छापों की पूरी जांच और इस्तीफा की बात नहीं करते। आरोप लगाने का अधिकार उसी को है, जो खुद जांच से भागे नहीं। राजनीति की शुचिता तभी बचेगी, जब हर आरोप का जवाब तथ्यों और निष्पक्ष जांच से दिया जाएगा, न कि ध्यान भटकाने के लिए पुराने कागजों की धूल झाड़कर फर्जी आरोप लगाए जाएंगे।

Govind Singh Dotasra

59,826 views • 3 months ago

राजा भैया नाम होने से सिर्फ कोई राजा नहीं होता। अंततः तो आदमी सरकार का गुलाम भैया ही होता है। राजा भैया बता रहे हैं कि जंतर-मंतर पर जो लोग प्रोटेस्ट कर रहे थे, वो देशद्रोही थे। पाकिस्तान से उनको फंडिंग मिल रही थी, चाइना से फंडिंग मिल रही थी, मिडिल ईस्ट से फंडिंग मिल रही थी, आतंकवादियों के समर्थन में नारे लग रहे थे। लेकिन इस आदमी के पास इनमें से किसी भी बात का सबूत नहीं है। तीस दिन तक पेपर लीक के मामले पर छात्र प्रोटेस्ट करते रहे। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा छात्र हैं, वहीं से ये आदमी विधायक है। मगर इसकी इतनी हिम्मत नहीं हुई कि अपनी सरकार से एक सवाल पूछे कि पेपर लीक क्यों हो रहे हैं। अब जब छात्र जीत गए, तो ऐसे लोग सरकार को बचाने के लिए उन्हें देशद्रोही बता रहे हैं। खुद जिन पर कभी POTA एक्ट में मामला दर्ज रहा, अरे भैया, अपना गिरेबान तो झांको। दस से ज्यादा IPC की धाराओं में आपके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं।

Raghav trivedi

22,723 views • 16 days ago

बत्ती नहीं आ रही तो हम क्या करें "विधायक सांसद के पास जाओ..हमारी जिम्मेदारी नहीं..! यूपी के उन्नाव में अघोषित बिजली कटौती के परेशान ग्रामीण बिजली घर पहुंचे थे..! अधिकारी से गर्मी गरमा हो गई...बिजली कटौती के कारण टेम्पो तो हाई था ही...! अधिकारियों पर वसूली के आरोप लगाए पैसा लेकर ट्रांसफार्मर लगाने के आरोप लगाए...! समझाने बुझाने की नाकाम कोशिश जब फलीभूत नहीं हुई तो साहब बोले - "बिजली कटौती की जिम्मेदारी CM योगी की है.."जाओ विधायक सांसद जिसके पास जाना हो जाओ" योगी राज में अधिकारी बेलगाम हो गए है - पैसा खा खा कर पेट बड़ा कर लिए हैं..किसी की सुनते नहीं आरोप सीधा सरकार पर मढ़ देते हैं !

Rahul Saini

22,637 views • 13 days ago

राजस्थान की भाजपा सरकार समझ क्यों नहीं रही है कि छात्रसंघ चुनाव भविष्य के राजनेता तैयार करने के लिए बेहद जरूरी है। NSUI समेत सभी छात्र संगठन चुनाव करवाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। जब सभी संगठन चाहते हैं तो छात्रसंघ चुनाव करवाने में क्या परेशानी है? पूर्ववर्ती भाजपा सरकार (2003-08) के दौरान छात्रसंघ चुनावों को रोकने के बाद 2010 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने छात्रसंघ चुनाव शुरू किए थे। 2020 में कोविड के दौरान चुनाव स्थगित किए गए थे जिन्हें 2022 में पुनः शुरू तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने किया। 2023 में विधानसभा चुनावों के पूर्व की तैयारी के लिए चुनाव आयोग द्वारा कॉलेजों के अधिग्रहण एवं नई शिक्षा नीति के विभिन्न घटकों को लागू करने का कार्य शुरू होने के कारण चुनावों को कुछ माह के लिए स्थगित किया गया था परन्तु दिसंबर 2023 में राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद छात्रसंघ चुनावों को पुनः बहाल नहीं किया गया। गत दिनों राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाल करवाने के संबंध में "ऑल राजस्थान छात्रसंघ चुनाव संघर्ष समिति" के छात्र नेताओं ने 49, सिविल लाइंस आवास पर मुलाकात कर चर्चा की।

Ashok Gehlot

52,230 views • 1 year ago

चैनलों के जिन एंकर्स , एडिटर्स और रिपोर्टर्स को पूरे प्रोटेस्ट के दौरान कुछ भी सकारात्मक नहीं दिखा , जिन्हें Gen Z का गुस्सा और आंदोलन नहीं दिखा , उन्हें सिर्फ गालियों वाले वीडियो दिख रहे हैं . हजारों की भीड़ में कुछ लफंगे भी थे , कुछ ग़लत लड़के भी थे , ग़लत शब्दों का इस्तेमाल भी किया गया लेकिन क्या सिर्फ इसे हाइलाइट करके इतने बड़े आंदोलन को ख़ारिज किया जा सकता है ? हजारों छात्रों ने अपनी एकजुटता के दम पर जिस सरकार के मंत्री से इस्तीफा ले लिया है , उस सरकार को कवर फायर देने के लिए चाटुकार मीडिया की मंडली नए सिरे से जुट गई है . जिन चैनलों ने हजारों छात्रों की भीड़ और उनके आक्रोश को अपने बुलेटिन में जगह देना जरुरी नहीं समझा , वो अब सरकार से मिले असाइनमेंट को पूरा करने में लगे हैं . ये साबित करने में लगे हैं कि इस आंदोलन में छात्र नहीं थे बल्कि गुंडे ,लफंगे और गालीबाज थे .वो तिहाड़ रिटर्न तो रोज़ इसी काम में लगा है . सब इतिहास में दर्ज हो रहा है .

Ajit Anjum

174,002 views • 2 months ago

आज जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की : हालात बड़े गंभीर हैं और सरकार की तरफ से पूरी तरह से जोधपुर जिले की और संभाग की उपेक्षा हो रही है। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह बहुत दुर्भाग्य है। सरकार बदलती है, पर हमने कभी भी सरकार आने के बाद में ये नहीं सोचा कि पूर्व मुख्यमंत्री का जिला हो या उनका क्षेत्र हो या संभाग हो, उसकी उपेक्षा की जाए। कभी नहीं सोचा। सोचा ही नहीं हम लोगों ने। और ये लोग पता नहीं इनके सोच में क्या ऐसा है, इसलिए हम बार बार कहते हैं कि इनका लोकतंत्र में यकीन नहीं है। यह बार बार दबाव देकर के सरकार चलाते हैं, तंग करते हैं, कांग्रेस की जो विचारधारा के लोग हैं उनको, ट्रांसफर पोस्टिंग करते हैं अनावश्यक, उनके क्षेत्र में काम नहीं करते हैं और तो और जो प्रोग्राम होते हैं तो लोकल MLA, MP को बुलाते नहीं हैं। यह इनका अलग ही सोच है। उससे कोई अच्छी परंपरा नहीं रहती। राजस्थान में परंपराएं कई मायने में अच्छी रही है। पूरे देश के तुलना में राजस्थान में कई परंपराएं अच्छी रही। हमारे जो पुराने नेता थे चाहे कांग्रेस के थे या बीजेपी के थे, उन्होंने उस वक्त में निभाया इस बात को, आना जाना भी था आपस के अंदर, सरकार बनने के बाद में भी, पर अब तो बिल्कुल ही शक की दृष्टि से देखते हैं। कोई पास बैठ जाए, वरिष्ठ नेता भी, उसके मन में चिंता रहती है कि पता नहीं कोई मुझे देख लेगा तो क्या होगा। ऐसी घटना हुई जयपुर के अंदर भी मैं देख रहा था, तो स्थिति बड़ी अजीब है कि वह कोशिश करता है चला जाऊं कि पता नहीं मेरा नंबर नहीं कट जाए। यह तो स्थिति राजस्थान के अंदर है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। पूरा त्राहि त्राहि कर रहे हैं राजस्थान वाले। पेमेंट हो नहीं रहे किसी डिपार्टमेंट के, पेंशन तक नहीं हो रही हैं। मरने वालों को 5 लाख मिलते हैं, वो ढाई हजार रुके पड़े हैं। मुझे विश्वास ही नहीं होता है। स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट करती है सरकार ? मुख्यमंत्री जी खुद क्यों नहीं स्पष्ट करते कि नहीं आपका जो फिगर आपके पास आए वो गलत आंकड़े हैं। यह क्यों नहीं कहते? एक हज़ार पांच सौ लोग हैं जिनके तो वापस भेज दिए कि आप उनको वापस जांच करके भेज दीजिए और डिले हो जाता है। तो इस स्थिति में सरकार चल रही है। कल मैं सिलिकोसिस के मरीजों से मिलने गया। मैंने सोशल मीडिया में डाला भी उसको। अब सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया में हम क्या डालते हैं विपक्ष वाले उनको देखें, डीआईपीआर में टीम बनाएं, वो उनको ब्रीफ करें कि भाई यह आजकल विपक्ष वाले बोल रहे हैं। उसमें हमें पब्लिक इंटरेस्ट में क्या फैसला करना है, कोई परवाह नहीं इनको। यह क्या इनके दिमाग में मानवता के बारे में। वो कोई बीजेपी, कांग्रेस के लोग नहीं है जो बीमार है। सिलिकोसिस होने के बाद तो पता नहीं वह कब तक जिंदा रहेगा। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे उन लोगों को, कहां जाएं, कैसे कोशिश करें, कब एक्स रे होगा। सारे ब्लॉक कर दिए पहले वाले, नए खोल नहीं रहे। कोई करप्शन हो गया। मैंने सुना कोई दौसा की दो तीन डॉक्टर पकड़े गए होंगे गलत सर्टिफिकेट देने में। तो यह तो होता रहता है। यह किस स्कीम में नहीं होता है? करप्शन किस डिपार्टमेंट में नहीं होता? सब जगह कोई एक घटना दो घटना हो जाए, इसका मतलब यह नहीं कि पूरे उसको रोक दो। वो बेचारे तड़प रहे हैं, वो लोग तड़प रहे हैं। जिसकी सांस नहीं आती है, घरों में भी दमा वालों को, उन पर क्या बीतती है ? उनके तो परमानेंट दमा हो गया। बिना ऑक्सीजन के जिंदा रह नहीं सकते, उन हालातों में वो लोग हैं। मैं सिकंदरा गया हूं, भरतपुर गया, मुख्यमंत्री का जिला है वो और यहां मैं कल जा के आया हूं सूरसागर। अब मैं करौली जाऊंगा एक बार, वहां भी बहुत भयंकर स्थिति है। अब जब मैं जाने लगा हूं तो और जिले से रिपोर्ट आने लगी है। बालेसर वाले आ गए रात को कि हमारे यहां बहुत स्थिति खराब है। उमेश सिंह जी और अन्य सब लोग आए थे। कहने का मतलब यह कि स्थिति नाजुक है और आज जो हेडलाइन बनी थी, आपके जमीनों के कब्जा करने की, पता नहीं जैसे कोई देखता है, कभी जिंदगी में कभी सरकार वापस आएगी नहीं हमारी। अभी जो विधायकों का जो है यहां पर, वह तो मुझे लगता है कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं बीजेपी विधायक भी, पहले पकड़े गए थे जब भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। यही महाशय जी पकड़े गए थे, खींवसर वाले ही पकड़े गए थे। कोई जवाब नहीं आज तक इनका और विधायक पकड़े गए। जमीनों पर कब्जा और कर लिया आज जो खबर आई थी और तो और जो आपके केंद्रीय मंत्री जी है अजमेर वाले 90 लाख उठा लिए सब्सिडी के। वहां पर जमा करने से कोई थोड़ी क्राइम खत्म होता है। जमा करवा दिए तो कराने ही थे, पार्लियामेंट में इश्यू बन गया तो कराने ही थे। तो कितनी जगह की घटनाएं सामने आ रही है।

Ashok Gehlot

32,660 views • 1 month ago

शिक्षक भर्ती वाला ट्वीट डिलीट क्यों हुआ? जिस प्रदेश में सात सालों से एक भी शिक्षक भर्ती नहीं आयी, उस प्रदेश के लाखों बेरोज़गार युवाओं के साथ 1,93,000 शिक्षक भर्ती वाला मज़ाक कैसे हुआ? एक बार शिक्षक भर्ती की हक़ीक़त पर नज़र डालिए— 69000 शिक्षक भर्ती के OBC छात्रों को उनके हिस्से का आरक्षण नहीं मिला! EWS वालों को उनका वो कोटा नहीं मिला जिस पर उनका हक़ था!! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इस बात को स्वीकार किया। प्रदेश के युवाओं के आरक्षण पर, उनके सपनों पर, उनके अवसरों पर कुठाराघात करने वाले एक भी ग़ैर ज़िम्मेदार और भ्रष्ट अधिकारी को सज़ा नहीं मिली!!! और अब जब नौकरी देने की बात आई तो शुरू हो गई ट्वीट ही डिलीट करने की कार्रवाई? आख़िर जो था ही नहीं, उसको ट्वीट करने की असली वजह क्या थी? क्या वही पुराना जयजयकार तंत्र कि जहाँ से जो भी मिले, उठाओ और माहौल बनाओ??? पूरी ख़बर यहाँ- TOP SECRET YouTube link—

abhishek upadhyay

16,167 views • 1 year ago

स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत की मूर्ति अनावरण कार्यक्रम को लेकर पूछे गए प्रश्न का जवाब : जोधपुर की बात छोड़ो, मेरे संबंध उनसे अच्छे हो गए थे। वो बत्तीस पर आ गए, मैं 156 पर आ गया। तब भी हमारा उस वक्त से ही संबंध अच्छे रहे। सीधा मैं शपथ लेकर उनके घर गया। वो लंबी कहानी छोड़ दो। मैं कह चुका हूं। मीडिया द्वारा पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को डिले करने को लेकर पूछे गए प्रश्न का जवाब: आज फिर खबर पढ़ी मैंने कि OBC का जो रिकमेंडेशन है उसके लिए तो अपने हिसाब से करेंगे। नीयत खराब है, हाईकोर्ट दो बार कह चुका, इस सरकार को भंग करने लायक सरकार है ये। मैंने पहले भी कहा, ऐसी सरकार जो संविधान की पालना नहीं कर रही है। हमने प्रयास किया, नहीं माना स्ट्राइक के वक्त में हमें चुनाव करवाने पड़े। हम भी कोई बहाना ढूंढ लेते। आज ये चुनाव नहीं कराने के बहाने ढूंढते हैं। इतनी घबराई हुई है कि साफ हो जाएंगे हम नगर निकायों में, पंचायतों में। को-ऑपरेटिव में चुनाव नहीं करवा रहे। कल आए को-ऑपरेटिव वाले मेरे पास में। राजस्थान के अंदर स्थिति बड़ी गंभीर है, हर वर्ग असंतुष्ट है। ऐसी सरकार आजादी के बाद में कभी आई नहीं होगी, यह मैं कह सकता हूं। ये मंत्री जी हैं न आपके जो इनको मैं कहना चाहूंगा अगर आप ये दस साल में मेरे साथ दो-तीन बार चाय पी लेते तो इनको कम से कम मैं सुझाव देता काम कैसे कराए जाते हैं। ब्रॉड गेज आ गई जोधपुर के अंदर, दो ट्रेन चलती थी, अब पचास चलती होंगी। हिंदुस्तान भर में जुड़ गए हम लोग, पानी लेकर हम आ गए। क्या-क्या काम उस वक्त नहीं हुआ बताइए आप। एयरपोर्ट भी उस वक्त बना था। सब कुछ हमारे वक्त में काम हुए और काम भी इस प्रकार से हो गए जो लोग कल्पना नहीं करते थे। लोग मांग नहीं करते थे, उसके पहले काम हो जाते थे। यह हमारी अप्रोच थी। अब यह पता नहीं अपने को तीस मार खां समझते होंगे कि सब अक्ल मेरे में ही है इसलिए किसी को सलाह करते नहीं हैं। अरे हम भी यहां के एमपी रहे हुए हैं। हमसे बातचीत करते, बैठ के बातचीत करते, चाय पर बुलाते, चाय पर आते, कुछ करते तो हम भी अपने जो अनुभव थे, शेयर करते हम लोग। हो सकता है राजस्थान का या जोधपुर का भला ज्यादा होता। ये अपनी भूमिका पूरे राजस्थान में निभा सकते थे। पर ये तो ये तो यही हैं। बड़ी-बड़ी मीठी बातें करते रहते हैं और काम पास कर रहे हैं। तो भाई इनको समझाओ कम से कम जोधपुर में आपकी बारह साल में क्या उपलब्धि है। बारह साल हो गए मोदी जी को, बारह साल इनको हो गए। इनको बताओ एक उपलब्धि, बताएं कि मेरे वक्त में उपलब्धि हो गई। ये ओवर ब्रिज बन रहा है, पता नहीं कब बनेगा, वो भी मैंने गडकरी जी को कह करके इसको सेंक्शन करवाया। ठीक है वो केंद्रीय मंत्री हैं तो मुझे एतराज नहीं है। पर मेरा सुझाव था क्योंकि मैंने कहा स्टेट गवर्नमेंट से एक हज़ार करोड़ के मैंने सेंक्शन कर दिए इसके लिए, तो मुझे पता था कि ये जो आपका एरिया है, क्या बिल्डिंग का नाम क्या है, हैदर बिल्डिंग, यहां हमें तकलीफ आएगी क्योंकि अंडर ब्रिज बन सकता है ओवर ब्रिज भी हो सकता है, तो मैंने कहा ये काम, ये एक्सपर्टाइज़ करते हैं गडकरी जी और इनका डिपार्टमेंट। वो बनाएं इस बात को लेकर, डीपीआर करवा दी और मेरे ख्याल से मोदी जी ने शिलान्यास भी कर दिया, मैंने सुना है। पता नहीं आगे काम कितना बढ़ रहा है।

Ashok Gehlot

21,582 views • 4 months ago