正在加载视频...

视频加载失败

ऐसी ख़बरें पिछले तीन दिनों से सुर्ख़ियों में है. उन्हीं ख़बरों में मिला कि मोहन भागवत की “योग गुरु” के रूप में पहचान बताई गई है. वैसे ख़ुद अमेरिका जाने के अवसर पर मोहन भागवत को “योग गुरु” का लेबल लगाने की ज़रूरत क्यों पड़ी, ये सवाल तो हम...

25,924 次观看 • 5 天前 •via X (Twitter)

0 条评论

暂无评论

原始帖子的评论将显示在这里

相关视频

हंसी हंसी में सीखिये योगी से स्वास्थ्य के साधन। वीडियो में नीचे जमीन पर श्री श्री रविशंकर भी बैठे हैं। स्वामी देवमूर्ति जी की उम्र इस वीडियो के समय 106 वर्ष थी।उन्होंने 2011 में 108 वर्ष की आयु में शरीर त्यागा। 🕉️ स्वामी देवमूर्ति जी — वह योगऋषि जिनकी साधना की गूंज भारत से यूरोप तक पहुँची आज जब योग को अक्सर केवल आसन, फिटनेस और शरीर को लचीला बनाने के माध्यम के रूप में देखा जाता है, तब स्वामी देवमूर्ति जी की योग-दृष्टि हमें योग के उस गहरे आध्यात्मिक स्वरूप की याद दिलाती है जिसमें शरीर केवल साधन है और लक्ष्य है — प्राण, मन और चेतना की साधना। स्वामी देवमूर्ति जी 20वीं शताब्दी के उन अग्रणी भारतीय योगाचार्यों में थे जिन्होंने यूरोप में भारतीय योग, ध्यान और प्राणायाम की परंपरा को पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे उसी दौर के थे जिसमें B.K.S. Iyengar जैसे महान योगाचार्य भी पश्चिम में योग को स्थापित कर रहे थे; लेकिन देवमूर्ति जी की विशेषता यह थी कि उनका जोर केवल आसनों पर नहीं, बल्कि योग के आंतरिक और अनुभवात्मक पक्ष पर था। उनकी साधना में प्राणायाम, ध्यान, श्वास की शक्ति और चेतना का विकास विशेष महत्व रखते थे। उनके द्वारा सिखाई गई परंपराओं का प्रभाव यूरोप के योग-जगत में आगे उनके शिष्यों के माध्यम से भी दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, European Yoga Union के योग-इतिहास में J. Čumpelík को स्वामी देवमूर्ति जी का शिष्य बताया गया है। यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि देवमूर्ति जी की शिक्षाएँ केवल “योगासन” तक सीमित नहीं थीं। उनकी दृष्टि में योग एक जीवंत आध्यात्मिक अनुशासन था—श्वास से प्राण तक, प्राण से मन तक और मन से चेतना की गहराइयों तक जाने की यात्रा। आज के समय में जब योग विश्वभर में लोकप्रिय है, ऐसे अग्रदूतों को याद करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि उन्होंने उस समय भारतीय योग की गहराई को दुनिया तक पहुँचाया जब पश्चिम में योग अभी अपनी पहचान बना ही रहा था। 🙏 स्वामी देवमूर्ति जी को नमन — उन साधकों में से एक, जिन्होंने योग को केवल व्यायाम नहीं, बल्कि आत्म-अन्वेषण की साधना के रूप में दुनिया के सामने रखा।

Wing Commander (Dr.) Pushkal Vijay Dwivedi

98,569 次观看 • 22 天前

नमस्कार, सभी दिल्लीवासियों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बहुत शुभकामनाएँ। मैं आप सभी से एक आग्रह करना चाहती हूँ, योग को केवल एक व्यायाम न मानें, इसे जीवन जीने की समग्र पद्धति मानें। योग केवल एक साधना नहीं, समग्र जीवन को स्वस्थ रखने का एक माध्यम है। आज “योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ”, यह एक बहुत ही प्रासंगिक विषय है, जिसके माध्यम से ना केवल व्यक्ति का स्वास्थ्य, बल्कि प्रकृति का स्वास्थ्य भी हम मेंटेन कर सकते हैं। मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी का दिल की गहराई से बहुत धन्यवाद देती हूँ, जिन्होंने भारत की इस ऐतिहासिक परंपरा को विश्व पटल पर पहचान दिलाई, और 2014 में संयुक्त राष्ट्र में योग दिवस के रूप में 21 जून सभी विश्व के देशों ने अपनाया। आज हम सभी मिल कर के दिल्ली को विश्व के मानचित्र पर योग नगरी के रूप में पहचान दिलाएं, और मिल कर इस उत्सव का आनन्द उठाएं। जय हिन्द। #YogaDay #InternationalYogaDay

Rekha Gupta

19,613 次观看 • 1 年前