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ऐसी तिरछी नजरों न देखो.... मेरे 🫀छाती में बाई तरफ दुखने लगा!!! ❤️

11,147 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)

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क्लासरूम में दो-दो इम्तिहान दे रही है ये बहन एक तरफ ब्लैकबोर्ड पर सवाल दूसरी तरफ गोद में 7 महीने का भाई। मां चली गई। पिता मजबूर हैं। घर में कोई नहीं जो भाई को संभाल ले। तो ये बेटी क्या करे। पढ़ाई छोड़ दे क्या नहीं भाई को ही स्कूल ले आई। सोचो जरा जिस उम्र में हम टिफिन भूल जाते थे, ये अपनी कॉपी के साथ भाई का दूध भी याद रखती है। जिस उम्र में हमारा ध्यान सिर्फ खेल में होता था, इसका ध्यान हर 2 मिनट में भाई पर जाता है कहीं रो तो नहीं रहा। ये स्कूल बैग नहीं उठा रही ये जिम्मेदारियों का पहाड़ उठा रही है। ये छात्र नहीं ये हालात की मारी एक "छोटी मां" है। हम छोटी-छोटी बातों पर किस्मत को कोसते हैं। इस बच्ची को देखो आंख में आंसू नहीं, हिम्मत है। शिकायत नहीं, फर्ज है। इस बेटी को सलाम 🙏 मां के जाने के बाद घर नहीं टूटने दिया। खुद टूट गई, पर भाई को बिखरने नहीं दिया। अगर ये वीडियो देखकर आपकी आंख नम हो गई तो शेयर जरूर करना। क्योंकि दुनिया को ऐसी "बड़ी बहनों की कहानी पता चलनी चाहिए। बचपन छूट गया, पर बहन ने भाई का हाथ नहीं छोड़ा।❤️

Majid Khan

15,815 次观看 • 2 个月前

क्या ही प्राणी है भई... क्या ही डरा लोगे इसे?? ईडी इंट्रोगेशन कर रही है, और मैं उधर लॉकअप देख रहा हूँ। सोच रहा हूँ, की मेरे परदादा 12 साल ऐसी ही सेल में बैठे थे... तो दस साल तो मेरा भी बनता है.. ●● अक्रॉस द पार्टीज, अक्रॉस द नेशन.. एक नेता बता दो, जो ऐसी बात बोल देने का भी गट्स रखता हो। एंड आई सीरियसली बिलीव, कि इस बंदे को पीएम शिएम बनने में कत्तई रुचि नही। ये तो सर से पाँव तक घोर एंटी एस्टेब्लिशमेंट है। तो मौका आएगा, तो टोपी किसी और के हाथ दे देगा। सत्ता की कुंजी हाथ मे रखेगा। वह सब कुछ, कान पकड़कर औरो से करवाएगा, जो सत्ता में रहने वाले को सत्ता की मजबूरियां करने नही देती। ●● राहुल,अपने जीवन मे राहुल होने का आनंद ले रहे है। गांधी होने का वजन हंसकर, हंसाकर उठा रहे हैं। जो मोहब्बत, जो लगाव, और जो पीस डालने वाली आशाओं का दबाव इस सरनेम के साथ जुड़ा होता है, ये उसके बोझ से चरमराता हुआ शख्स नही है। उसकी गुरुता से गर्वित है। न मौत का डर, न जेल का। न ठेके दिलाने हैं, न कमीशन में रुचि। लड़के में आज जवाहरलाल का वारिस, गांधी का अक्स दिखा है। ●● हां, उस म्यार पर पंहुचने में तो अभी वक्त है। उसके हिस्से का सँघर्ष बाकी है, लेकिन इंशाअल्लाह लम्बी उम्र भी बाकी है। राह यही पकड़ी रही, तो उनसे भी आगे जायेगा। वीडियो, पता नही कब, कहाँ का है। किसी ने आज लिंक भेजा, तो 20 बार देख चुका हूँ। आप भी देखिए।

Manish Singh

211,553 次观看 • 1 年前

आज कांग्रेस पार्टी ने आदरणीय सोनिया गांधी जी को राजस्थान से राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। मैं इस निर्णय का तहे दिल से स्वागत करता हूँ और राजस्थान कांग्रेस एवं समस्त कार्यकर्ताओं की तरफ से आभार व्यक्त करता हूँ। माननीय सोनिया गांधी जी का जीवन त्याग, बलिदान और स्वाभिमान का प्रतिबिंब है। उन्होंने हमेशा देश सेवा के धर्म को प्राथमिकता दी और लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सदैव उनके लिए सर्वोपरि रहा है। उनका उच्च आचरण और मार्गदर्शन हमारे लिए एक मिसाल के रूप में रहा है। उनका मार्गदर्शन मेरे लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहा है और अब राजस्थान से राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में सोनिया गांधी जी के नाम की घोषणा हम सभी के लिए गर्व की बात है। उनकी उम्मीदवारी न केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं बल्कि राजस्थान की जनता में भी एक नए भरोसे और उत्साह का संचार करेगी।

Sachin Pilot

171,836 次观看 • 2 年前

इस देश की संस्कृति से बड़े सारों को एलर्जी होने लगी है इन एजेंडाख़ोरों को चिढ़ है भगवा रंग से, तिलकधारियों से.. बात छोटी सी है.. लेकिन इसके मायने बहुत गहरे हैं। कल रोज़ा इफ़्तारी के लिए घर जाने की सोची.. बिल्डिंग के नीचे पहुँचकर पता लगा कि कुछ गफ़लत में गाड़ी मुझ तक पहुँच ही नहीं पाई है..और इफ़्तारी का वक्त क़रीब था.. इसी दौरान Main Road पर एक ऑटो दिखा.. सोचा इसी को पकड़ा जाए। आनन-फ़ानन में उसकी तरफ़ बढ़ने लगी। देख रही थी कि ऑटो चालक दो सवारियों को मना भी कर चुका था.. मैं ऑटो के पास पहुँची.. माथे पर बड़ा सा तिलक लगाए ऑटो वाला किसी से फ़ोन पर बात कर रहा था- मैंने कहा- भाई रोज़ा इफ़्तारी का वक़्त होने वाला है घर छोड़ दोगे.. ऑटो-चालक ने कान से फ़ोन हटाया और कुछ सेकंड सोचने के बाद कहा आओ बैठो। न किराए पर बात हुई न ही पते पर.. ऑटो वाले का नाम पुष्पाल सिंह था वो मुझे केवल इसलिए छोड़ने आए ताकि इफ़्तारी न छूट जाए। जबकि उनका भी अहम दिन था..नवरात्र पर पूजा सामग्री के लिए पत्नी से ही फ़ोन पर बात कर रहे थे। ये है मेरा भारत, यही है मेरे भारत की सनातनी परंपरा…

Rubika Liyaquat

512,654 次观看 • 2 年前

मैं कक्षा 8 में बैठा था... कम ही बच्चे थे तो ऐसे ही चर्चा शुरू हो गई। मैं और मेरे 2 छात्र... 🔰 एक दलित 🔰 दूसरा 'भूमिहीन OBC' दोनों एक बार गाँव के एक जमींदार के घर किसी कार्यक्रम में गए। एक ने अपने हाथ से पानी पी लिया... ज़ब दलित बच्चे का नंबर आया तो जमींदार ने बोला कि तू रुक... मैं पानी पिला देता हूँ तुझे। फिर वह दलित बच्चा बिना पानी पिए ही अपने घर लौट गया। वे बच्चे अभी वामपंथ का नाम भी नहीं सुने होंगे। यह कहा जा सकता है कि वामपंथ ने चीजें बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत की होंगी... लेकिन ये चीजें समाज में बहुत पहले से विद्यमान रही हैं। एक सवर्ण एक्टिविस्ट ने दलित उत्पीड़न को फर्जी बताया है। मुझे भी इस बयान का समर्थन करना चाहिए...? 🤔 अगर मैं भूमिहीन न होता तो शायद कर पाता। मेरी जाति का इकलौता घर है... हमारा। हम भी कुआँ से पानी लेकर आए... लेकिन कुआँ हमारा नहीं था। कुआँ खोदने के लिए मानव श्रम के साथ ही जमीनों पर नियंत्रण चाहिए। जो 100% ऐतिहासिक तौर पर गाँव में बाहुल्यता रखने वाली जमींदार जाति का ही होता है। दलित, ब्राह्मण, बनिया, कुम्हार, नाई, सुथार आदि भूमिहीन जातियाँ जमीन की नियंत्रणकर्ता नहीं हुआ करती थीं... 🙏 आज भी कई जमींदार बंधु स्वयं को गाँव का मालिक व अन्य को शरणार्थी समझते हैं। राजस्थान के गाँवों में सर्वे करवा लें तो स्पष्ट हो जाएगा कि सारी सरकारी जमीन पर उन्हीं का नियंत्रण है, जिसकी बाहुल्यता है। दूसरी बात... दलितों की केकट्स से तुलना आपत्तिजनक है। घर में तो सभी पानी पी भी ले रहे थे। लेकिन सार्वजनिक स्थान पर सभी जातियों के लोग एक ही जगह से पानी नहीं लेते थे। आज भी बहुत सी ऐसी घटनाएं देखने को मिल जाती हैं। मेरे पिता एक प्रसंग बताते हैं... एक महिला सफाईकर्मी ( सरकार द्वारा नियुक्त नहीं, अपितु जाति आधारित परम्परागत ) गाँव में आती थीं तो गाँव के ज्यादातर लोग उन्हें पानी पिलाने से मना कर देते थे... मेरे पिता पानी पिलाया करते थे। जातिगत आरक्षण की विसंगति पर सवाल उठना जायज है। मैं भी उठाता हूँ। बात होनी ही चाहिए कि कई सक्षम, समर्थ, सम्पन्न व ताकतवर जमींदार समूह स्वयं को 'पिछड़ा' बतलाकर असल पिछड़ों के हिस्से की सीट ले रहे हैं। लेकिन... अजीत भारती द्वारा प्रयुक्त अप्रोच सोल्यूशन ओरिएण्टेड नहीं है। ब्राह्मण सहित अन्य सवर्ण जातियों को इन तर्क से दूरी बनानी चाहिए... क्योंकि इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं। दलितों को आरक्षण 1950 में मिला। किसी सवर्ण ने कभी विरोध नहीं किया। जातिगत आरक्षण का विरोध 1990 में शुरू हुआ। ज़ब दलितों पर होने वाले अत्याचारों में लिप्त जमींदार समूहों को भी दलितों के समान जातिगत आरक्षण का लाभ दिया जाने लगा। हमें भी 1990 के षड्यंत्र पर ही फोकस रखना है। 🙏

Mohit Bharat

21,189 次观看 • 1 个月前

प्राइवेट पार्ट पर सैनिटाइजर से लगाई आग फिर पिलाई पेशाब, दरिंदगी पर उतरे बॉयफ्रेंड ने युवती को बेरहमी से पीटा। दिल्ली-एनसीआर के पॉश इलाकों में शुमार गुरुग्राम में एक युवती के साथ उसके बॉयफ्रेंड ने ऐसी दरिंदगी की, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। 19 साल की एक युवती गुरुग्राम के सेक्टर-69 में अपने बॉयफ्रेंड के साथ लिव-इन में रहती थी। एक दिन उसके बॉयफ्रेंड ने उसके चरित्र पर शक किया और दोनों के बीच मामूली कहासुनी भयंकर मारपीट में तब्दील हो गई। युवती का आरोप है कि युवक ने उसके प्राइवेट पार्ट्स पर सैनिटाइजर डालकर आग लगा दी। वहीं पीड़िता की मां ने आरोप लगाया है कि उसकी बेटी को आरोपी युवक ने जबरदस्ती अपनी पेशाब भी पिलाई। पुलिस ने दिल्ली के नरेला के रहने वाले आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115, 118(1), 118(2), 127(2), 69 और 351(2) के तहत FIR दर्ज की है। गुरुग्राम में त्रिपुरा की लड़की के साथ मारपीट पर पीड़िता की मां ने कहा, "16 फरवरी को रात 10 बजे मेरी बेटी ने मुझे फोन किया और कहा कि "मेरे पास टाइम नहीं है, मुझे मार दिया जाएगा...शिवम नाम का एक लड़का पिछले 3 दिनों से मेरे साथ मारपीट कर रहा है। उसने मुझे मारा और जला भी दिया, वो आज मुझे मार देगा"...उसने मुझे बताया कि शिवम ने उसे 3 दिनों तक एक कमरे में बंद रखा और उस पर पेशाब किया। उसने पिछले 3 दिनों से हर दिन 3 बार उसके प्राइवेट पार्ट्स को भी जलाया। उसने चाकू से उसके शरीर पर कई जगह काटा। मेरी बेटी गुरुग्राम में बायो-टेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने आई थी। ऑनलाइन ऐप्स के ज़रिए उसकी शिवम (आरोपी) से दोस्ती हुई। शिवम ने मेरी बेटी के साथ दुष्कर्म भी किया। शादी का झांसा देकर शिवम ने उसके साथ यह सब किया। मेरी बेटी की हालत बहुत खराब है..."
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प्राइवेट पार्ट पर सैनिटाइजर से लगाई आग फिर पिलाई पेशाब, दरिंदगी पर उतरे बॉयफ्रेंड ने युवती को बेरहमी से पीटा। दिल्ली-एनसीआर के पॉश इलाकों में शुमार गुरुग्राम में एक युवती के साथ उसके बॉयफ्रेंड ने ऐसी दरिंदगी की, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। 19 साल की एक युवती गुरुग्राम के सेक्टर-69 में अपने बॉयफ्रेंड के साथ लिव-इन में रहती थी। एक दिन उसके बॉयफ्रेंड ने उसके चरित्र पर शक किया और दोनों के बीच मामूली कहासुनी भयंकर मारपीट में तब्दील हो गई। युवती का आरोप है कि युवक ने उसके प्राइवेट पार्ट्स पर सैनिटाइजर डालकर आग लगा दी। वहीं पीड़िता की मां ने आरोप लगाया है कि उसकी बेटी को आरोपी युवक ने जबरदस्ती अपनी पेशाब भी पिलाई। पुलिस ने दिल्ली के नरेला के रहने वाले आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115, 118(1), 118(2), 127(2), 69 और 351(2) के तहत FIR दर्ज की है। गुरुग्राम में त्रिपुरा की लड़की के साथ मारपीट पर पीड़िता की मां ने कहा, "16 फरवरी को रात 10 बजे मेरी बेटी ने मुझे फोन किया और कहा कि "मेरे पास टाइम नहीं है, मुझे मार दिया जाएगा...शिवम नाम का एक लड़का पिछले 3 दिनों से मेरे साथ मारपीट कर रहा है। उसने मुझे मारा और जला भी दिया, वो आज मुझे मार देगा"...उसने मुझे बताया कि शिवम ने उसे 3 दिनों तक एक कमरे में बंद रखा और उस पर पेशाब किया। उसने पिछले 3 दिनों से हर दिन 3 बार उसके प्राइवेट पार्ट्स को भी जलाया। उसने चाकू से उसके शरीर पर कई जगह काटा। मेरी बेटी गुरुग्राम में बायो-टेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने आई थी। ऑनलाइन ऐप्स के ज़रिए उसकी शिवम (आरोपी) से दोस्ती हुई। शिवम ने मेरी बेटी के साथ दुष्कर्म भी किया। शादी का झांसा देकर शिवम ने उसके साथ यह सब किया। मेरी बेटी की हालत बहुत खराब है..."

𝐍𝐚𝐲𝐚𝐛 𝐀𝐡𝐦𝐚𝐝

59,566 次观看 • 4 个月前

भाई ये क्या लिख रहे हो? ये आपसी भ्रम है? ये चिरकुट खुल्लमखुल्ला लिख रहा है कि मैं टूलकिट का हिस्सा हूँ और मोदी को बदनाम करने के लिए पैसे लेता हूँ। जब मैंने इसे और अन्य व्यक्तियों को लीगल नोटिस भेजा है, तब ये डिलीट कर के बचना चाह रहा है। ये बहरा है क्या कि इसने सुना नहीं क्या कहा जा रहा है। इसको मैं इतना पेलूँगा कि ये जीवन भर याद रखेगा। आर्काइव कर लिया है मैंने और वीडियो रिकॉर्डिंग भी है मेरे पास। डिलीट करने से कुछ नहीं होगा। ट्विटर पर कौन सा कॉपीराइट लगता है? हर दिन जो ये लोग साले अजेंडा चलाते हैं न कि मोदी का पैसा लिया और हिमंता से पैसा लिया, अब ये कोर्ट में जवाब दें, मेरा लीगल खर्चा देंगे पूरा और माफी भी इसी प्लेटफॉर्म पर माँगेंगे कि उन्होंने झूठ बोला। यदि जानते हो कि पेड ट्वीट किया है तो प्रूफ दिखाओ, वरना माफी माँगो, लीगल खर्चा वापस करो। भाँड़ में गया इन जैसे नेशनलिस्टों का राष्ट्रवाद! पक गया हूँ इन सबसे मैं। बहुत दिन तक इग्नोर करता रहा। अब दस-पाँच लगा कर इनसे कोर्ट में ही निबटूँगा।

Ajeet Bharti

131,012 次观看 • 4 个月前

पंजाब की खूबसूरती ❤️ पंजाब के रोपड़ (रूपनगर) में एक ऐसी भी कुल्चों की दुकान है, जहाँ मालिक किसी भी ग्राहक से तय कीमत नहीं लेते। दुकान पर सिर्फ़ एक डिब्बा रखा है, जिस पर लिखा है: “जितना आपका मन करे, उतना इसमें डाल दीजिए।” जिसकी जितनी क्षमता हो, वह उतने पैसे उस डिब्बे में डाल देता है। और अगर कोई किसी मजबूरी के कारण पैसे न दे सके, तो उसे भी सम्मान के साथ भरपेट कुल्चे खिलाए जाते हैं। यही पंजाब की असली पहचान है—भरोसा, इंसानियत और दिलदारी। यहाँ सिर्फ़ कारोबार नहीं होता, बल्कि लोगों का सम्मान और सेवा भी की जाती है। ऐसे लोग ही पंजाब की मिट्टी की खूबसूरती को और भी ख़ास बना देते हैं। ऐसे उदाहरण याद दिलाते हैं कि पंजाब सिर्फ़ अपनी फसलों से नहीं, बल्कि अपने बड़े दिल वाले लोगों से भी जाना जाता है।

The StateLens

36,853 次观看 • 27 天前

महाकुंभ में मौनी अमावस्या की वो काली रात... 28 जनवरी, रात 1.58 बजे थे। मैं महाकुंभ के अंदर कैंप में सो रहा था। दैनिक भास्कर के वरिष्ठ साथी आशीष राय (Ashish rai) ने शोर मचाया कि महाकुंभ में भगदड़ मच गई है, सब उठो। अगले एक से डेढ़ मिनट के भीतर पूरा कैंप खाली था। मैं, साथी विकास श्रीवास्तव (@Vikashsri17 ) और लता मिश्रा (Lata Mishra) दौड़ते हुए अगले 10 मिनट में मेले के सबसे बड़े सेंट्रल हॉस्पिटल में पहुंचे। तब तक एंबुलेंस आने का सिलसिला शुरू हो चुका था। पुलिसकर्मियों के चेहरों की उड़ी हवाइयां, हर मिनट बजते एंबुलेंस के सायरन, भागते हुए अस्पताल कर्मचारी ये बयां कर रहे थे कि कुछ तो बड़ा हुआ है। मेरे हाथ में माइक था। अस्पताल कर्मचारियों ने मीडिया के घुसने पर पाबंदी लगा दी। मैंने माइक बैग के अंदर रखा। पहचान छिपाकर हॉस्पिटल में घुस गया। अंदर का नजारा खौफनाक था। पीछे हॉस्पिटल का तरफ एग्जिट गेट था। उस गेट के पास कमरे में लाशों का ढेर था। मेरी गिनती के अनुसार 18 लाशें थीं। मोबाइल से सिर्फ दो वीडियो बनाए, चार–पांच फोटो खींचे। (दैनिक भास्कर ऐसा पहला मीडिया संस्थान है, जिसने भगदड़ में मौत होने की खबर फोटो प्रूफ के साथ ब्रेक की) इतने में हॉस्पिटल के एक कर्मचारी ने मुझे देख लिया। अपराधियों की तरह मेरा हाथ पकड़ा। बोला– तुम्हें पुलिस को देता हूं। वो मुझे पकड़कर कुंभ मेला की OSD के पास ले गया, जो एक महिला IAS ऑफिसर हैं। OSD ने मुझसे फोटो–वीडियो डिलीट करने को कहा। मैंने कहा कि अब कोई फायदा नहीं है, क्योंकि मैं ये सब ऑफिस को भेज चुका हूं। ये सुनकर उन्होंने मुझे हॉस्पिटल से बाहर कर दिया। मैं रात 2 बजे से लेकर सुबह साढ़े 5 बजे तक इसी हॉस्पिटल के गेट पर खड़ा रहा। इन साढ़े 3 घंटे में करीब 100 एंबुलेंस के चक्कर लगे होंगे। कोई मृत था तो कोई घायल। मोबाइल बैटरी डाउन हो चुकी थी। थोड़ी देर के लिए हम तीनों साथी वापस अपने कैंप पर आए। सुबह 10 बजे दूसरी सूचना आई कि संगम पार झूंसी इलाके (अखाड़ों की तरफ) भी रात में भगदड़ मची है। कई किलोमीटर पैदल चलकर हम वहां पहुंचे तो नजारा भयावाह था। हजारों लोगों के कपड़े, जूते-चप्पल, बैग सड़क पर पड़े थे। ढेर इतना कि दो ट्रक सामान भर जाए। बल्लियां टूटी पड़ी थीं। पुलिस बूथ पलटा पड़ा था। कार के शीशे टूटे हुए थे। आसपास के दुकानदारों से बात की तो पता चला कि रात 2 से 3 बजे के बीच यहां भगदड़ मची और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। इस इलाके में सब सेंट्रल हॉस्पिटल है। तुरंत हम वहां पहुंचे तो नजारा देखकर दंग रह गए। हॉस्पिटल में 20 से ज्यादा एंबुलेंस खड़ी थीं। इनके आने-जाने का सिलसिला जारी था। यहां भी मीडिया के अंदर घुसने पर पाबंदी थी। एक एंबुलेंस ड्राइवर ने बताया- लाशें अंदर पड़ी हैं। करीब 50 से ज्यादा लोग हॉस्पिटल पर अपनों को ढूंढने पहुंचे थे। कई प्रत्यक्षदर्शी श्रद्धालु मिले, जिन्होंने रात की भगदड़ का वृतांत रोते-रोते सुनाया। उस रात हमारे दूसरे साथी राजेश साहू (Rajesh Sahu) संगम नोज की तरफ मोर्चा संभाले हुए थे और वहां से पल-पल का कवरेज दे रहे थे। पहली बार महाकुंभ कवर कर रहा हूं। मौनी अमावस्या की रात से लेकर अगली सुबह तक क्या-क्या देखा, वो सारी बात शब्दों में पिरोना संभव नहीं है। लेकिन यही कहूंगा अफसरों का ओवर कॉन्फिडेंस, VIP की लगातार विजिट, रास्तों और पैंटून पुलों को पुलिस द्वारा मनचाहे तरीके से बंद करना या खोलना, 144 साल की ब्रांडिंग...इन्हीं सब की वजह से उस रात अव्यवस्थाएं पैदा हुईं।

Sachin Gupta

111,659 次观看 • 1 年前

ग़ालिब छूटी शराब पर अब भी कभी कभी पीता हूँ, रोज ए अब्र ए शब ए माहताब में कभी कभी शायरी पढ़ता हूँ। जावेद अख्तर फेवरिट है, बशीर बद्र भी, और राहत इन्दोरी भी। ●● गालिब भी पढ़ता हूँ। पहली बार गालिब से परिचय जगजीत सिंह के एलबम के मार्फ़त हुआ। तब आधा समझे, और बाकी आधा गलत सलत ही रटते हुए गुनगुनाते थे। फिर एक किताब ली। दीवान ए गालिब... उसमे कठिन शब्दो के अर्थ दिए होते थे। अबकी ज्यादा समझा। और अनसुने कलाम को भी पढा। लेकिन शब्द समझने के बाद भी कई बार भाव, सिर के ऊपर से निकल जाता। ●● फिर गूगल युग आया। न सिर्फ शब्दार्थ, बल्कि भावार्थ भी मिल जाते। ग़ालिब की खासियत यह है, हर सिचुएशन को एक्सप्लेन कर जाते हैं, अनिवर्चनीय को कह जाते हैं। और जादू यह, कि उस बोल का अर्थ दूसरी बहुत सी सिचुएशन में लागू होता है। याने अपने हालात के मुताबिक हर पाठक के लिए अर्थ कुछ अलग है। हर एक के दिल की किसी जुदा तंत्रिका को वह शेर छूता है। और जुबान वाह कहना भी भूल जाती है। ●● अच्छा लेखन वही, कि आदमी खो जाये। उसके भीतर कुछ घुड़मुड़ाये। उसके लिए, शब्द समझ मे आने चाहिए, भाव हृदय में उतरना चाहिए। ग़ालिब के दौर में अधिसंख्य लोग उर्दू समझते होंगे। अब नही। वो ट्रेडिशन्स नही, जिसमे ग़ालिब के भाव फिट हों। जैसे कागजी है पैरहन हर पैकरे तस्वीर का। तब जिन्हें शिकायत होती थी, वे कागज के वस्त्र पहनकर जाते थे शिकवा करने। अब वो ट्रेडिशन नही रही। तो कैसे समझेंगे की ग़ालिब कह रहे है- यहां हर शख्स कुछ न शिकवा लिए घूम रहा है। ●● इसके मुकाबले आप बशीर बद्र को पढिये। सीधी, साफ, समझ मे आने वाली खूबसूरत रूमानी शायरी है। जावेद को पढिये। एक मोहरे का सफर, नया हुक्मनामा, जो कहते सब डरते है, तू वो बात लिख... सीधा, सिम्पल, सटाक से दिल को लगने वाला। मगर इन सबसे ऊपर हैं- राहत इंदौरी। द किंग ऑफ सिम्पलीसिटी। हिम्मत, गुरुर, जज्बे का शायर। बशीर और जावेद का कॉंटॅक्स पूरा पेज या नज्म पढ़ने पर जाहिर होता है। यहां राहत, दो लाइन में आग लगा जाते हैं। गुलाब,ख़्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता, इंतिज़ाम क्या क्या है ●● बड़े शायर, बड़े लेखक, शब्दो से नही खेलते। भाव से खेलते हैं। ये भाव, अनुभव से आपबीती से आते हैं। आपबीती न हो, तो सिंपथि से आते हैं, एम्पाथि से आते है, करुणा से उपजते हैं। यह करुणा, इंसान के हृदय को उर्वर बनाती है, ख्याल उपजते हैं। गैर की पीड़ा को, उसके दिल के हालात को, उसकी निगाह को अपने भीतर पैवस्त करना-फिर जहां को देखना जो दिखे, उसे गहरे, आसान लफ्जों में लिख देना। महान शायर और लेखक तो वही हुए, जिन्होंने आसान लफ्जों में गहरी बात कही- क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात नही कहोगे?? यहां साहस है, चुनौती है, एक मजबूर, मजलूम बेवा की इल्तजा है पंच परमेश्वर से सवाल है। ●● आपमे सिंपथि नही, एम्पाथि नही, तो भाव कालजयी कैसे हो?? जब आपकी बात भीतर प्रेम न जगाए, शीतल न करे। चुनौती न दे, सवाल न हो, जो विद्रोह का साहस न जगाए... घृणा जगाये। जातीय, धार्मिक, सामुदायिक नफरत से लबरेज हो। लेखक का, शायर का दिल बंजर है, ईर्ष्या से भरा है। इस ज्वालामुखी के क्रेटर से कौन से भाव उगलेंगे?? ●● जलाने वाला मैग्मा ही निकलेगा। सस्ता साहित्य, घटिया कविता, बकवासी तुकबन्दी। पाकिस्तान से पर चढ़ाई और हिंदुस्तान की वाहवाही.. छपवा लो दस किताबें, मगर कालजयी कृति कैसे बनेगी भईया? खोखले चिकने शब्दों से कितना खेलोगे। अगर खूब सारे भारी भरकम शब्दो का जमावड़ा ही कालजयी साहित्य होता.. तो भार्गव की डिक्शनरी शेक्सपियर के साहित्य से बड़ी मानी जाती। ●● आज शब्दजाल वाले किसी उभरते लेखक से बकझक हुई। सो लिख दिया। समझने वाले समझ गए। जो न समझे उनके लिए अर्ज करता हूँ- जमी पर घर बनाया, मगर जन्नत में रहते है हमारी खुश नसीबी है, कि हम भारत मे रहते है अब आप इसे घटिया शेर मानते है तो आपकी शायरी की समझ है। अगर बेहतरीन शेर मानते है, तो पॉलिटिक्स की समझ है। अगर आप इसे शेर नही, अनहद पॉपुलिस्ट बकैती मानते है, तो अब आपको मेरी भी समझ है। ❤️

Manish Singh

29,823 次观看 • 1 年前

अगर गाड़ी लेने का मन बना रहे हैं तो महिंद्रा की स्कॉर्पियो N लेने से बचना. ---- यूट्यूब पर "Scorpio N fire" सर्च करेंगे तो ऐसी अनेकों वीडियोज मिलेंगी जिनमें स्कॉर्पियो N सड़क पर धूँ-धूँ जल रही होगी। ऐसा ही एक तजुर्बा अपना बताता हूँ। मेरे एक दोस्त हैं ऋषि श्रीवास्तव, जो अकाउंटेंट का काम करता है। उन्होंने दो साल पहले स्कॉर्पियो N ख़रीदी। लेकिन जैसे ही इस गाड़ी को चलाने लगे, शुरू से ही इसकी AC, क्लच प्लेट, और बैटरी में दिक़्क़त आने लगीं. हालाँकि ये वारंटी में थे तो कंपनी ने सही कर दिये. इस बीच ऋषि भाई ने सर्विस सेंटर से शिकायत की कि स्पीकर के वायरिंग में हमेशा नॉइज़ (साउंड) आती है. कई बार इस समस्या को सर्विस सेंटर ने सही भी किया लेकिन वायरिंग से नॉइज़ आना परमानेंटली बंद नहीं हुआ. इसी बीच 15 अप्रैल 2026 की शाम ऋषि भाई अपनी ऑफिस से घर जा रहे थे. लेकिन सेक्टर 71, नोएडा के पास, उनके बोनट (जहां बैटरी होती है) से अचानक धुआँ निकलने लगा. ऋषि जब तक गाड़ी से बाहर आया, तब तक स्कॉर्पियो गाड़ी ने आग पकड़ ली. बीच शहर में सामान्य स्पीड पर चल रही गाड़ी में आग लग गई. इसके बाद फायर ब्रिगेड आई और जैसे तैसे आग बुझाई। हालाँकि इस घटना में ऋषि को किसी तरह का नुक़सान नहीं पहुँचा। ऋषि ने anand mahindra जी की Mahindra Group कंपनी को ईमेल किए। जिस पर महिंद्रा कंपनी (Mahindra For You) की तरफ़ से 23 अप्रैल को ईमेल आया कि हमें टाइम दीजिए हम इंस्पेक्शन करते हैं। लेकिन तब से अब तक कॉस्ट्यूमर को कोई कम्युनिकेशन नहीं है, ना मैसेज, ना कॉल, ना ईमेल, ना मीटिंग। एक आदमी ज़िंदगी भर की कमाई लगाकर गाड़ी ख़रीदता है, और उसकी सारी कमाई सड़क पर जल जाती है। गाड़ी में फँसकर या जलकर मौत भी हो सकती थी। इसके बाद भी कंपनी की तरफ़ से पीड़ित को कोई मदद नहीं है। जबकि ऐसे मामलों में कॉस्ट्यूमर से माफ़ी माँगनी चाहिए और मदद करनी चाहिए। मैं anand mahindra जी की बड़ी कद्र करता हूँ। और बचपन से उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी को भी पसंद करता हूँ। उनसे रिक्वेस्ट है कि अपनी गाड़ी की टेक्निकल कमी पर काम करने के लिए जाँच बिठाएँ, ताकि आए दिन स्कॉर्पियो सड़क पर जलती ना दिखें। और स्कॉर्पियो एन, नेक्स्ट ओला E- स्कूटर बन जाए। कृपया ध्यान दें। Mahindra Scorpio, Anish Shah Rajesh Jejurikar Mohit Kapoor , Lakhan Arjun Rawat , Mahindra Scorpio , Mahindra Group , Mahindra For You, Nitin Gadkari ji.

Shyam Meera Singh

83,242 次观看 • 3 个月前

सब इंस्पेक्टर भर्ती रद्द नहीं होगी, हालांकि फैसला 7 जुलाई को आएगा लेकिन कोर्ट की गाइडलाइन देखो तो स्पष्ट पता चलता है कि भर्ती को रद्द दो तथ्यों के आधार पर किया जा सकता है 1. जब चोर और ईमानदार को अलग नहीं किया जा सकता बल्कि सरकार ने जवाब दिया है कि हम अलग कर देंगे। 2. बड़े लेवल पर पेपर का आउट होना, सरकार ने कहा है कि बड़े लेवल पर आउट नहीं हुआ है 800 में से 50 के आसपास पकड़ लिए गए हैं और 20-25 जो बचे है उनको भी पकड़ लेंगे। तो इन दोनों तथ्यों के आधार पर स्पष्ट है कि 7 जुलाई को कोर्ट का फैसला भर्ती को सुरक्षित रखने का आएगा। क्योंकि इन दोनों तथ्यों के विरुद्ध होने पर ही कोर्ट भर्ती रद्द का फैसला ले सकता था। खैर दोनों पक्ष अपनी अपनी जगह सही है एक तरफ ईमानदारी से मेहनत करने वाले लोगों को लगा कि हमारे साथ धोखा हुआ है क्योंकि कुछ चोरों की वजह से नजदीक जाकर वह नौकरी से रहे गए, लेकिन SOG धीरे-धीरे चोरों को पकड़ रही है और उनको हमेशा के लिए सरकारी सेवा से दूर किया जा रहा है। दूसरा पक्ष वो जिसमें ईमानदारी से मेहनत करके गरीब परिवार के बच्चे लगे हैं उनके पांच साल बर्बाद हुए हैं तो वह नहीं चाहते थे कि भर्ती रद्द हो, कुल मिलाकर दोनों पक्षों के प्रति मेरी सहानुभूति है लोकतंत्र में सभी को अपनी अपनी मांगे उठाने का हक है 🙌🙏 दोनों पक्ष ने मजबूती के साथ लड़ाई लड़ी, कोई हारा नहीं कोई जीता नहीं 🫂👍

Bhera ram

58,038 次观看 • 1 年前

जरूर पढ़ना यूपी पुलिस और उत्तर प्रदेश को लेकर आँखें खुल जाएंगी , आज समझ में आ रहा है क्यों पीड़ित पुलिस स्टेशन के सामने आत्मदाह तो कभी हारकर सुसाइड करने को मजबूर हो जाता है। UP POLICE ALIGARH POLICE से न्याय की उम्मीद करना क्यों बड़ी गलती है। क्यों सरकार Yogi Adityanath को लोग कोसते हैं क्योंकि जब खुद पर बीती तब समझ गई। मैं भी यही कहूंगी गलत सरकार चुनी गई है। भ्रष्टाचार के लिए दिल्ली बदनाम है लेकिन बड़े खेल तो UP POLICE में हो रहे हैं। यहां हर कदम पर पैसा चलता है। इसकी गवाह तो कल मैं खुद हूं। मेरे परिवार और मुझ पर जानलेवा हमला करने वाले 4 आरोपियों को पकड़ा गया। हमला करने वालों पर पुलिस ने 151 लगा दी (यहां भी खेल) जो कि मामूली धारा थी। इसके बाद ACM 2 के आगे पेश किया गया। जहां आरोपियों के वारंट भी निकल गए जेल जाने के हस्ताक्षर भी हो गए लेकिन डेढ़ घंटे में ऐसा खेल हो गया कि आरोपी छूट गए। आरोपियों के पेपर्स चेक करने का समय बढ़ा दिया। उनके पेपर्स का इंतजार किया जा रहा था। इस बीच क्या खेल हुआ सब समझगए होंगे। आरोपियों को पेपर्स जमा करने का एक घंटे का समय दिया गया था लेकिन वहां बैठी मैडम डेढ़ घंटे के बाद भी पेपर्स का इंतजार कर रही थी। साफ है क्यों बैठकर इंतेज़ार कर रही थी। ये स्थिति है उत्तर प्रदेश की। इस सरकार को वोट देना सबसे बड़ी भूल होगी। और हां ALIGARH POLICE आप अपना वही रात रटाया जवाब यहां मत चिपकना । जवाब आप लोगों के पास होते नहीं है। मडराक पुलिस , अलीगढ़ पुलिस, यूपी पुलिस कोई किसी काम की नहीं है। ये लोग सिर्फ चैन स्नैचर्स को पकड़कर ही खुश हैं। मिशन शक्ति , एंटी रोमियो स्क्वाड सिर्फ कागजी बातें हैं। आप महिलाओं पर हो रहे अत्याचार में कुछ नहीं कर पा रहे। फ्लॉप हैं । क्योंकि जानलेवा हमला, महिलाओं पर अटैक इनके लिए बड़ी बात नहीं। उस पर ये 151 लगाते हैं। ताकि मज़रिम छूट जाए और आगे के इनके मौके बने रहे। मडराक पुलिस से जवाब मांगा जाए ध्रुव ठाकुर, दीपू, हनी और करण जिसने जानलेवा हमला किया उस पर किस दबाव में 151 लगाई। जो धारा बनती थी उसे क्यों नहीं लगाया। श्याम सुंदर को क्यों नहीं पकड़ पा रहे? सुधा चौधरी भी फरार है? मडराक पुलिस क्यों इतना संरक्षण दे रही है अपराधियों को? IO को जब जानकारी हुई आरोपियों को पकड़ा जा रहा है तो वे खुद पहुंच गए तहसील। आप सब लोग वीडियो देखो और सोचो कि पुलिस इस पर 151 लगाती है, जिससे उनका सोर्स बंद न हो पाए। सब समझ रही हूं... DGP UP Yogi Adityanath Office PMO India Akhilesh Yadav Dimple Yadav Congress Indian Youth Congress AAP Keshav Prasad Maurya

माधुरी सेंगर

55,135 次观看 • 1 年前