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ऐसी भी एक दीपावली हुआ करती थी क्यों?
50,143 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)
Комментарии: 19

और अब ऐसी होने लगी है 😀😀

गांव में आज भी एक एक ही जलाते है 😀 अभी भी इतने अमीर नहीं हुए ?

भाई साहब, 90's की बात निराली थी बच्चे अपनी खुशियां खुद ढूंढते थे, अभिभावकों पर आज जितना दबाव भी नहीं होता था। खुश रहते थे, एक बॉल भी सभी कंट्रीब्यूट करके लाते थे, बैट तो पूरे मुहल्ले में 1ए2 ही होते थे, विकेट की जगह ईंटे होती थी। मस्त था हमारा बचपन

Same to same

Sahi kaha 🥹

हम भी इन दिनों से निकलकर आए है।

Purani yaad 😕aa rahi hai

बचपन वाली खुशी और आनंद आज के दौर मे करोङो ख़र्च करके भी प्राप्त नही कर सकते। 🤔

अब वो शौक नहीं रहे अब वो दिन नहीं रहे। 😔😔

सत्य

ये तो अब भी मिलते हैं 😜

जिन्होंने इस तरह से पटाखे फोड़े हैं उन्होंने अच्छी तरह से बचपन जीया हैं।

☺️

बिल्कुल सही कहा भाई ❤️ यही करते थे हम भी

Right

आज भी हैं

एक अलग तरह का जोश रहता था बचपन में दिवाली को लेकर घर में अनेकों प्रकार के पटाखे आते थे फिर सब में बराबर बाटे जाते थे 2 दिन तक उसका आनंद लेते थे आज वो दिन नहीं रहे

बिल्कुल! काश ये बचपन वाली दिवाली वापिस आती अशोक भाई।

Me bhi same 😂 abi bhi diwali ke liye paise nhi hai 🥲 aur pathako ka bhut shok hai....
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एक तलब ऐसी भी होनी चाहिए
❤️दादु❤️
321,281 просмотров • 1 год назад
