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ऑस्ट्रेलिया: खालिस्तानियों के खिलाफ हरियाणवी लड़कों की रैली!

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आज की रैली ने पंजाब की सियासत में एक नई हलचल पैदा कर दी है। राज्य के लगभग सभी प्रमुख मीडिया चैनलों पर यह रैली दिनभर चर्चा का विषय बनी रही। इसकी कई वजहें रहीं, लेकिन सबसे अहम कारण जलालाबाद से पूर्व विधायक रमिंदर सिंह अवला की दमदार मौजूदगी और उनका आक्रामक राजनीतिक संदेश रहा। रमिंदर सिंह अवला ने न केवल जलालाबाद और गुरु हर सहाय—दोनों विधानसभा सीटों से अपना-अपना दावा ठोक दिया, बल्कि ज़मीन पर अपनी ताक़त भी पूरी तरह दिखा दी। जिस पैमाने पर भीड़ जुटी, उसने साफ कर दिया कि अवला का जनाधार आज भी मज़बूत है। अनुमान के मुताबिक इस रैली में कम से कम 50,000 से अधिक लोग शामिल हुए, जिसने इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी राजनीतिक रैलियों में शामिल कर दिया। रैली में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर पूरी पंजाब कांग्रेस की नेतृत्व टीम उत्साहित और गदगद नजर आई। मंच से लेकर बैकस्टेज तक यह चर्चा साफ थी कि यह रैली संगठन के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला संदेश है। रैली के समापन पर भूपेश बघेल जी ने खुले मंच से ऐलान किया कि मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत अब तक की सबसे बड़ी रैली आज हुई है। उन्होंने इसके लिए रमिंदर सिंह अवला का नाम लेकर धन्यवाद किया और कहा कि ऐसी जनभागीदारी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश है। गौरतलब है कि पिछले दिनों रमिंदर सिंह अवला से जुड़े ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी हुई थी, जिसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा गया। लेकिन इन कार्रवाइयों का आज की रैली में कोई असर नजर नहीं आया। उल्टा, अवला ने मनरेगा के खिलाफ बनाए गए नए कानून के विरोध में इतनी बड़ी भीड़ जुटाकर यह साबित कर दिया कि वे किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस रैली के ज़रिये रमिंदर सिंह अवला ने न सिर्फ केंद्र सरकार को सीधी चुनौती दी है, बल्कि पंजाब की राजनीति में अपनी भूमिका और प्रभाव को भी नए सिरे से स्थापित कर दिया है। आने वाले दिनों में इस रैली के असर दूरगामी होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

Chandigarh Politales

41,894 次观看 • 7 个月前