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कुछ प्रेम उत्सव नहीं मना पाते पर वे उपवास रखते हैं और दो घूँट प्रेम उन्हें जीवित रखता है ....✍ #साहेब ❤

12,878 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)

10 条评论

positive Blessing Vibe... 的头像
positive Blessing Vibe...1 年前

मैं उसे अपनें आँसुओं से 'लिख' रही हूं ... ताकि मेरे बाद उसे कोई 'पढ़' न सके!!🍁

!!..ज्योति ..!! 的头像
!!..ज्योति ..!!1 年前

@itssahitya07 वाह

B.N Tiwari मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म । 的头像
B.N Tiwari मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म ।1 年前

बहुत सुंदर पोस्ट

!!..ज्योति ..!! 的头像
!!..ज्योति ..!!1 年前

शुक्रिया

Ashok Chaudhary 的头像
Ashok Chaudhary1 年前

Bahut khoob 👌

!!..ज्योति ..!! 的头像
!!..ज्योति ..!!1 年前

शुक्रिया

धर्मेन्द्र पालीवाल 的头像
धर्मेन्द्र पालीवाल1 年前

वाह बहुत खूब

!!..ज्योति ..!! 的头像
!!..ज्योति ..!!1 年前

शुक्रिया

कृष्णाधानी 的头像
कृष्णाधानी1 年前

❣️

!!..ज्योति ..!! 的头像
!!..ज्योति ..!!1 年前

😊💕

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स्त्री ने कभी यह घोषणा ही नहीं की कि मेरे पास भी आत्मा है । वह चुपचाप पुरूष के पीछे चल पड़ती है । युधिष्ठिर जैसा अद्भुत आदमी द्रौपदी को जुए में दाँव पर लगा देता है ! फिर भी कोई यह नहीं कहता कि हम कभी युधिष्ठिर को धर्मराज नहीं कहेंगे । नहीं, कोई यह नहीं कहता ! बल्कि कोई कहेगा तो हम कहेंगे कि अधार्मिक आदमी है । नास्तिक आदमी है, इसक़ी बात मत सुनो ! स्‍त्री को जुए पर, दाँव पर लगाया जा सकता है, क्योंकि भारत में स्‍त्री सम्पदा है, सम्पत्ति है । हम हमेशा से कहते रहें हैं, स्‍त्री सम्पत्ति है और इसीलिए तो पति को स्वामी कहते हैं । स्वामी का मतलब आप समझते हैं, क्या होता है ? अगर हिन्दुस्तान की स्‍त्री में थोड़ी भी अक्ल होती तो एक—एक शब्द से उसे ‘#स्वामी’ निकाल बाहर कर देना चाहिए । कोई पुरुष कोई स्‍त्री का स्वामी नहीं हो सकता । स्वामी का क्या मतलब होता है ? स्‍त्री दस्तखत कर देती है अपनी चिट्ठी में ‘ #आपकी_दासी ’ और पति देव बहुत प्रसन्न हो कर पढ़ते हैं । बड़े आनन्दित होते हैं कि बड़ी प्रेम की बात लिखी है । लेकिन इसका पता है कि स्वामी और दास में कभी प्रेम नहीं हो सकता । प्रेम की सम्भावना समान तल पर हो सकती है । स्वामी और दास में क्या प्रेम हो सकता है ? इसलिए हिन्दुस्तान में प्रेम की सम्भावना ही समाप्त हो गयी । हिन्दुस्तान में स्‍त्री—पुरुष साथ रह रहे हैं और साथ रहने को प्रेम समझ रहे हैं ! वह प्रेम नहीं है । हिन्दुस्तान में प्रेम का सरासर धोखा है । साथ रहना भर प्रेम नहीं है । किसी तरह कलह कर के 24 घण्टे गुजार देना, प्रेम नहीं है । ज़िन्दगी गुजार देनी प्रेम नहीं है । प्रेम की पुलक और है । प्रेम की प्रार्थना और है । प्रेम की सुगन्ध और है । प्रेम का सँगीत और है । लेकिन वह कहीं भी नहीं ! असल में गुलाम और दास में, मालिक में और स्वामी में, कोई प्रेम नहीं हो सकता । लेकिन हमारे खयाल में नहीं है यह बात कि पूरब की स्‍त्री नेहु विशेष कर भारत की स्‍त्री ने अपनी आत्मा का अधिकार ही स्वीकार नहीं किया है । आत्मा की आवाज भी नहीं दी है । उसने हिम्मत भी नहीं जुटायी कि वह कह सके कि ‘#मैं_भी_हूँ !

तृप्त ...🖤

210,828 次观看 • 2 年前

प्रेम करते लोग इतने पक्के होते हैं और इतने बहरे कि तमाम सामाजिक बेबुनियादी चिल्लाहठों के बाद भी वे प्रेम ही सुनते हैं। मेरे दौर की सबसे दमदार भाषा प्रेम में कंपकंपाती मोमबत्ती की गीली आशा है जो जल रही है लेकिन ठंडी है सतह सहसा साहस रखती है जिंदा निगलने का अंधेरी रात को, अंधेरी बात को। जिस दौर में फसलों की जगह औरों की भुजा काटी जा रही हो वे आदम बहुत धनी होंगे जो नफरतें काटते हैं। चौराहों पर खड़े होकर प्रेमी ही जान पाते हैं प्रतीक्षाएँ कितनी लंबी होती हैं सड़क से अंतहीन दिशाओं में फैले हुए आकाश सी। मेरे दोस्त प्रेम करते लोग इतने मजबूत होते हैं इतने मजबूत कि लाख कोशिशों के बावजूद वे टिके रहते हैं गुलाबों पर। - सत्यव्रत रजक @satyavratvoice

Sanjeev Paliwal/संजीव पालीवाल

18,566 次观看 • 3 年前