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कुछ पैसे के लिए अपने ज़मीर को बेचने वाले इस दुनिया में बहुत हैं,👇

19,959 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

11 Kommentare

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M K Syedvor 1 Jahr

आखरत में कौन बचेगा ? रोज़े महशर में इन को कौन बचाने आयेगा ? वहाँ तो हर किसी को अपने हर आमाल का हिसाब देना ही है चाहे नेकी का हो बदी का । अल्लाह हम सब को इन मुनाफिकों से महफ़ूज रखे और हमेशा नेकी की राह पर चलने की हिदायत दे । आमीन या रब्ब उल आलमीन ।

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SUNIL_SANATANI_MISHRA🚩🇮🇳vor 1 Jahr

बेग़म वक्फ़ हलाला का टाइम हो गया है अब बकफ़ की सारी प्रोपर्टी सनातनी ग़ैरतदार जमीर बेचने वालों ने बेगैरत मुल्लो का खमीर निकाल दिया है

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Saniulvor 1 Jahr

Lanat hai in be imaan murdo par jo haq ki ladayi mein aapno ka sath chod kar chand paiso ke liye bik gaye

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Solar Heavyvor 1 Jahr

whoa have you heard this song?

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Navaid Khanvor 1 Jahr

शायद इन्हें ही मुनाफिक की पदवी दी जाती है।

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Sunil nain Hinduvor 1 Jahr

Social media islam me Haram hai

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parvej shahvor 1 Jahr

गद्दारी कर गए

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AngrYManyu #KTF ( ब्रह्म राक्षस)🇮🇳vor 1 Jahr

पाकिस्तान के सब संपत्ति के ऊपर पहला हक़ किसका होना चाहिए ?

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kashif khanvor 1 Jahr

mashallah भारत के मुसलमान बहुत ख़ुश है इस बिल से

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Irsaan0008vor 1 Jahr

Ye muslim hi hai ya behroopiye ??

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Ganesh Chachevor 1 Jahr

एक जिलेबी के लिये लाचार 🙏

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ये सौरभ द्विवेदी हैं... उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं लेकिन पत्रकारिता में अपनी काबिलियत से बहुत कम समय में बहुत बड़ी पहचान बनाई है। सौरभ इस देश के इकलौते और पहले पत्रकार हैं जिन्होंने अपने गांव के बच्चों के लिए लाइब्रेरी खोलने का काम किया है। इस लाइब्रेरी के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने बड़ी संख्या में सिलेब्रिटीज को अपने गांव में बुलाकर अपनी बड़ी पहचान को भी दिखाया और गांव वालों को गर्व करने का अवसर भी दिया। इस मौके पर सौरभ ने अपने गांव के बच्चों को वह भरोसा और हौसला दिया है जो बड़े-बड़े पैसे वाले लोग भी नहीं दे पाते। मेरी नजर में बड़ा वही है जो दूसरों के लिए कुछ बड़ा और सार्थक कर सके। आमतौर पर पत्रकार खबरों के इतर कुछ भी बड़ा करने के लिए नहीं जाने जाते हैं। 99% तो आर्थिक संघर्षों में ही जीते हैं। पत्रकारिता में उंगलियों पर गिनने लायक लोग ही अपना परिवार आराम से चला पाते हैं। सौरभ ने यह नई पहल की है। जरूर उनकी यह पहल पत्रकारों के उस एक प्रतिशत श्रेष्ठि वर्ग को भी प्रेरित करेगी जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं और उन लोगों को भी प्रेरित करेगी जो गांव से निकलकर किसी बड़े मुकाम पर हैं। बहुत बहुत बधाई Saurabh Dwivedi

Arvind Chotia

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