Sensitive content

This media may contain sensitive content.

Video yükleniyor...

Video Yüklenemedi

Ana Sayfaya Dön

केटा ले अफ्नो gf लाइ उत्तानो पारेर चिकेको

66,170 görüntüleme • 3 ay önce •via X (Twitter)

0 Yorum

Yorum bulunmuyor

Orijinal gönderinin yorumları burada görünecek

Benzer Videolar

सामाजिक संजालमा रतन कार्किहरुलाई लखेट्ने गगन थापा र केपी शर्मा वलीद्वारा परिचालित भाडाका टट्टू दादा दिदीहरु एकपटक यो भिडियो सुन्ने र हेर्ने कष्ट गर्ने कि ? तपाईका भगवान गगन थापाले हिजो केपी ओलीलाई के भन्थे र आज तिनै केपी ओलीको टांङ्ग मुनी छिरेर रतन कार्कीहरुलाई कसरि रेडकर्नर नोटिस जारि गराउदै छन आफ्नै मुख ऐनामा नहेर्न ? लाज सरम नमान्ने ? ले ले जनता खुकुरी ले,ज्ञानेन्द्र लाइ छप्काइदे श्रीपेच हामी जलाउछौ,देश हामी चलाउछौ भन्ने नारा लगाएर हिड्ने गगन थापाको रतन कार्कीको लागी केहि आवाज निस्क्यो ? कि केपी ओली र आरजु राणा/देउबाको डरको कारणले मुख खोल्न सकेका छैनन ? अचम्मको कुरा त के छ भने गगन थापा कांग्रेसको महामंत्री अनि नेपालको गृहमंत्री पनी कांग्रेसकै I आज आफु र आफ्नो बिरुद्ध बोल्नेहरुलाई गगन थापाले आफ्नो गृहमंत्रीको इसारामा रेडकर्नर नोटिस जारि गराइरहेका छन I त्यति मात्र हैन आफु बिरुद्ध लेख्ने र आफ्नो आलोचना गर्नेहरुलाई गृह प्रसाशनको दुरुपयोग गराउदै X अर्थात् ट्विटर मै कम्प्लेन गराइरहेका छन I समग्रमा गगन कायर र फासिस्ट हुन I

डाँडाघरे~रबि को परिवार

14,448 görüntüleme • 1 yıl önce

'ओका बोका तीन तड़ोका लौवा लाठी, चंदन काठी बाग में बगडोला डोले, सावन में कौला इजवा, बीजा पुरेई पचक।' बिहार के ग्रामीण खेलों की अपनी विशेषता है। यहां के गांवों में प्रचलित अधिकांश खेल या तो बिना किसी वाह्य संसाधन के या फिर स्थानीय उपलब्ध संसाधनों के साथ खेले जाते हैं। आइस-पाइस, सूर, डेंगा-पानी, कबड्डी, ओका-बोका, चकवा-चकइया, जैसे खेल में तो सिर्फ मानसिक और शारीरिक कौशल की जरूरत पड़ती है, जबकि गिल्ली डंडा, पिट्ठू, लट्ट, रूमाल चोर, दोलहापाती, गानगोटी, कितकित जैसे खेल अपने आस-पास तत्काल उपलब्ध साधन लकड़ी के टुकड़े, पत्थर के टुकड़े, पेड़-पौधे इत्यादि के सहारे खेले जाते हैं। इन खेलों का वास्तविक महत्व इनसे जुड़े गीतों के साथ है। अधिकांश खेलों के लिए निश्चित गीत हैं, जो खेलों की रोचकता को और भी बढ़ा देते हैं। इन गीतों की विशेषता इसकी गेयता होती है, आमतौर पर इनमें निरर्थक शब्दों की प्रमुखता देखी जाती है, लेकिन यह ग्रामीण रचनात्मकता का प्रतीक ही है कि ये निरर्थक शब्द मिलकर एक सार्थक स्वरूप ग्रहण करते हैं। वास्तव में इन गीतों से एक वातावरण निर्मित होता है जो प्रकृति के साथ जुड़कर खेलने के लिए उत्साहित करता है। चकवा चकइया के गीत में इसकी झलक देखी जा सकती है। "आन्ही-बूनी आवेले, चिरइया ढोल बजावेले बूढ़ी मइया हाली-हाली गोंइठा उठावेले एक मुठी लाइ, दामाद फुसलाई बूनी ओनही बिलाई, बुनी ओनही बिलाई आन्ही आइल, बूनी आइल, फूट गइल लबनिया तड़वा धर के रोवे ले पसनिया।"

Bihar Foundation

12,003 görüntüleme • 1 yıl önce