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कथावाचन पर किसी जाति विशेष का एकाधिकार नहीं है!

225,272 views • 1 year ago •via X (Twitter)

9 Comments

Lala's profile picture
Lala1 year ago

मूत्र की बात ट्विटर से आई उसमें कुछ सच्चाई नहीं परिवार कह रहा हमें कथा से कोई समस्या नहीं झूठ, बोला और अभद्रता की

Ajeet Bharti's profile picture
Ajeet Bharti1 year ago

इसीलिए ‘कथित तौर पर’ का प्रयोग किया है। संध्याकालीन लाइव में अभी इस पर विस्तार से चर्चा होगी जिसमें यह वीडियो भी हम दिखाएँगे। जब तक शूट-एडिट हुआ, दूसरे एंगल में ‘इसके हत्यारे’ होने की बात मिली, वो मैंने लगाया। अब देखते हैं कि आगे और क्या-क्या निकल कर आता है।

Tintin's profile picture
Tintin1 year ago

सुनो पजीत भारती इस ठरकी कथावाचक को अपने घर बुलवा लो इतनी दया आ रही है तो लड़कियों से छेड़खानी करेगा तो मार खाएगा ही वैसे तुम वही हो न जो भाजपा की सरकार बनने से पहले सेकुलर हुआ करते थे और लव जिहाद को झूठा प्रोपोगेंडा बताते थे अब इधर पैसे के लिए हिंदूवादी

लौकी फर्ग्यूसाईं's profile picture
लौकी फर्ग्यूसाईं1 year ago

जी हां लिखा है भागवत जी में स्पष्ट लिखा है कि विप्र ही होना चाहिए। माहात्म्य में छठे अध्याय का 20 शलोक विरक्तो वैष्णवो विप्रो वेदशास्त्रविशुद्धिकृत् ⁠। दृष्टान्तकुशलो धीरो वक्ता कार्योऽतिनिःस्पृहः

Mihir Tatran's profile picture
Mihir Tatran1 year ago

लेकिन मामला तो महिला को छेड़ने का निकला.

Prem Kumar Jha's profile picture
Prem Kumar Jha1 year ago

कल को रोहिंग्या और बांग्लादेशी भी आकर ऐसे फर्जी पहचान से कथावाचन करके दारू पिए और महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करे तब भी इसी प्रकार का विश्लेषण होना चाहिए।ज़ुबैर द्वारा चाणक्य की शिखा करना,आरफा द्वारा गौहत्या प्रमोट करना, कन्हैया लाल,उमेश कोल्हे आदि पर उनके तरफ से चूं शब्द आया क्या?

Nidhi kumari's profile picture
Nidhi kumari1 year ago

लेकिन आधार कार्ड से छेड़छाड़ भी तो क्राइम है , साथ ही साथ कथा गलत क्यों कही गयी और नाम छुपाने की जरुरत क्यों पड़ गयी

Manisha Rajput's profile picture
Manisha Rajput1 year ago

पर पहचान नही छिपाना चाहिए। कथावाचन धर्म का विषय है धंधे का नही। यादव सरनेम के साथ कथा कहने मे क्या दिक्कत है। यही पर हिन्दु धर्म पर धिक्कार है। आरक्षण लेने के लिए खुशी खुशी जाति बता सकते हैं तो कथावाचन के समय क्यों नही।फर्जी आधार कार्ड बनाकर कथा करना भी धोखाधडी है। वर्ण व्यवस्था सिर्फ कथा के लिए चाहिए। तब मनुवाद अच्छा है पर आरक्षण की मलाई खाने के लिए समाजवाद चाहिए। या तो सिर्फ वर्ण व्यवस्था follow करो या सिर्फ जातिव्यवस्था। Convenient के अनुसार धर्म का use करना बंद होना चाहिए।

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Rising Hindustan 🇮🇳1 year ago

बिल्कुल सत्य कहा लेकिन कथावाचक का चरित्र में संदेह हो तो फिर कथावाचक के साथ चरित्र भी साफ होना चाहिए

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नालंदा के जांगीपुर गांव के चिंटू यादव की कोनंद गांव के हुड़दंगी चंदा छाप गैंग ने चौहरमल बाबा मेला के लिए मनचाहा ₹1000 चंदा नहीं मिलने पर जाति पूछ कर पीटते-पीटते हत्या कर दी! चूंकि मृतक एक जाति विशेष का है, जिस जाति से सम्राट चौधरी को नफरत है और उसकी हत्या करने वाले उस जाति विशेष के नहीं बल्कि किसी अन्य जाति के हैं इसीलिए अभी तक Bihar Police जानबूझकर मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है! हद तो यह हो गई है की पुलिस हत्या को बाइक दुर्घटना का नाम देकर मामले में लीपापोती कर रही है! बिहार पुलिस को 7 हत्याओं के अभियुक्त मुख्यमंत्री का अलिखित निर्देश प्राप्त है कि एक जाति विशेष के लोगों को हर तरह से हर क्षेत्र में प्रताड़ित करना है! उन पर आरोप मात्र लगते ही वास्तविक दोषी की चिंता किए बिना उनका फर्जी एनकाउंटर कर दो! और अगर उस जाति विशेष के लोग ही पीड़ित हों तो सुनिश्चित कर दो कि उन्हें किसी भी सूरत में न्याय ना मिले! इसके लिए चाहे अपराधियों को भगाना पड़े, संरक्षण देना पड़े अथवा दोषी होने के बावजूद निर्दोष ही सिद्ध क्यों न कर देना पड़े! कोई कुकर्म करना पड़े, करो! पर उस जाति विशेष के लोगों की हत्या करने में कोई गुरेज मत करो! गिद्धों के कोसने से गाय नहीं मरती सम्राट चौधरी! Tejashwi Yadav #RJD #bihar

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