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कथावाचन पर किसी जाति विशेष का एकाधिकार नहीं है!
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मूत्र की बात ट्विटर से आई उसमें कुछ सच्चाई नहीं परिवार कह रहा हमें कथा से कोई समस्या नहीं झूठ, बोला और अभद्रता की

इसीलिए ‘कथित तौर पर’ का प्रयोग किया है। संध्याकालीन लाइव में अभी इस पर विस्तार से चर्चा होगी जिसमें यह वीडियो भी हम दिखाएँगे। जब तक शूट-एडिट हुआ, दूसरे एंगल में ‘इसके हत्यारे’ होने की बात मिली, वो मैंने लगाया। अब देखते हैं कि आगे और क्या-क्या निकल कर आता है।

सुनो पजीत भारती इस ठरकी कथावाचक को अपने घर बुलवा लो इतनी दया आ रही है तो लड़कियों से छेड़खानी करेगा तो मार खाएगा ही वैसे तुम वही हो न जो भाजपा की सरकार बनने से पहले सेकुलर हुआ करते थे और लव जिहाद को झूठा प्रोपोगेंडा बताते थे अब इधर पैसे के लिए हिंदूवादी

जी हां लिखा है भागवत जी में स्पष्ट लिखा है कि विप्र ही होना चाहिए। माहात्म्य में छठे अध्याय का 20 शलोक विरक्तो वैष्णवो विप्रो वेदशास्त्रविशुद्धिकृत् । दृष्टान्तकुशलो धीरो वक्ता कार्योऽतिनिःस्पृहः

लेकिन मामला तो महिला को छेड़ने का निकला.

कल को रोहिंग्या और बांग्लादेशी भी आकर ऐसे फर्जी पहचान से कथावाचन करके दारू पिए और महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करे तब भी इसी प्रकार का विश्लेषण होना चाहिए।ज़ुबैर द्वारा चाणक्य की शिखा करना,आरफा द्वारा गौहत्या प्रमोट करना, कन्हैया लाल,उमेश कोल्हे आदि पर उनके तरफ से चूं शब्द आया क्या?

लेकिन आधार कार्ड से छेड़छाड़ भी तो क्राइम है , साथ ही साथ कथा गलत क्यों कही गयी और नाम छुपाने की जरुरत क्यों पड़ गयी

पर पहचान नही छिपाना चाहिए। कथावाचन धर्म का विषय है धंधे का नही। यादव सरनेम के साथ कथा कहने मे क्या दिक्कत है। यही पर हिन्दु धर्म पर धिक्कार है। आरक्षण लेने के लिए खुशी खुशी जाति बता सकते हैं तो कथावाचन के समय क्यों नही।फर्जी आधार कार्ड बनाकर कथा करना भी धोखाधडी है। वर्ण व्यवस्था सिर्फ कथा के लिए चाहिए। तब मनुवाद अच्छा है पर आरक्षण की मलाई खाने के लिए समाजवाद चाहिए। या तो सिर्फ वर्ण व्यवस्था follow करो या सिर्फ जातिव्यवस्था। Convenient के अनुसार धर्म का use करना बंद होना चाहिए।

बिल्कुल सत्य कहा लेकिन कथावाचक का चरित्र में संदेह हो तो फिर कथावाचक के साथ चरित्र भी साफ होना चाहिए
