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क्या आपका सिनेमा आपको "बेवकूफ़" बना रहा है ?
10 Comments

This video incomplete Kundan Bhai, do mention some movies released in past 10 years only to sell a propaganda. 2 movies on Dr Manmohan Singh, 2-3 on Indira Gandhi ji, Shastri ji, Kashmir Exodus, 2 on present PM, on Ram Mandir, 370, Kerala Story, movies glorifying pseudonationalism, the list is endless..

Bas jo gandi si meme shuru mein thi usko chhod ke achhi video hai.

ही ही

सटीक विश्लेषण - बेफकूफ उसी दिन बन गए जब थाली बजाना सीखा क्यूंकि वायरस को डराना था - Scientific temperament is in serious danger too. Logic and common sense no longer used. Thank you for sharing this. Hope, lets keep hope alive that we will wake up one day.

Shaandaar reporting karte ho bhai aap, bolte bhi umda ho.

shukriya bhai. वैसे रिपोर्टिंग नहीं कर रहा था, बस दिल की कुछ बातें कर रहा था. रिपोर्टिंग छोड़े 11-12 साल हो गए

ये वीडियो देख के फिर से बेवक़ूफ़ ना बनें। पीके रंग दे बसंती और लगे रहो मुन्नाभाई टाइप मूवी देख के ऐसी क्रांति की ऐसी क्रांति की कि अच्छे ख़ासे चलते देश को पटरी से उतार कर तानाशाही के हवाले कर दिया। जब तानाशाह चला जाएगा तो फिर ऐसी मूवी नहीं बननी चाहिए। कबीर रैदास रहीम और सूफ़ी संतों के विचारों पर ही जागरण होना चाहिए। भारत की जनता की अभी औक़ात नहीं है असली क्रांति समझने की। ना इतना स्वाभिमान है और ना इतना विवेक कि क्रांति और ढोंग में फ़रक कर पाए। अगर ऐसा होता तो ना तो अन्ना दूसरा गांधी होता ना केजरीवाल नायक का अनिल कपूर और ना ही मोदी विष्णु का अवतार। भारत को इस भक्ति काल से निकल कर फिर से असली वाले भक्ति काल में जाकर अपनी आत्मा का जागरण करना चाहिए। उसके बाद कुछ और सोचने लायक़ बनेंगे। आईटी में नौकरी करते हो? सीए हो? एमबीए करके तड़ीपारों की मार्केटिंग से इमेज मेकओवर कर रहे हो? ऐसे ख़ास लोगो के लिए दफ़्तर से घर लौटने से पहले एक घंटे कबीर के दोहों पर ऐक्टिव डिस्कशन अनिवार्य होना चाहिए। बोनस और अप्रैज़ल सिर्फ़ आपके परफॉरमेंस पर ही नहीं बल्कि आपके स्पिरिचुअल ग्रोथ पर भी देखा जाना चाहिए। तब जाकर थोड़ा विवेक बनेगा, थोड़ी शुचिता आयेगी सोच में और थोड़ा विकास होगा करुणा का। तब जाकर बनेगा नया इंडिया। चार स्लोगन एलईड लाइट और बेतरतीबी प्रचार करने से तुरतफूरत नया इंडिया बनने लगता तो अब तक पचासों बार नया इंडिया बन गया होता।

पिछले 10 साल में दो ही फिल्म 'जन गण मन' (मलयालम) और जवान ऐसी देखी हैं जो जनता खासतौर पर युवाओं को सरकार से सवाल करने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने और वोट करते समय बिना किसी बहकावे के सही ग़लत में फर्क पहचानने के लिए प्रेरित करती हैं!

बहुत ही उम्दा वीडियो पर यार अभी जो अग्निहोत्री छाप हास्यापद प्रोपेगंडा फिल्में बन रही है उनका भी रिफ्रेंस देना चाहिए था😁

बहुत गहरी बात,,🙏 हमने पहले यह भी कभी नहीं देखा की किसी पीएम ने चुनाव से पहले किसी भी सामाजिक मूवी को अपनी रैली में उसका प्रोपगंडा किया हो, उनके एक्टर्स की नुमाइश की हो, अपने सरकारी विभागों को मूवी देखना अनिवार्य किया हो और साथ ही काल्पनिक तथ्यों के आधार पर वोट मांगा हो।
