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क्या इस प्रदेश में चुनाव आचार संहिता भाजपा के मंत्रियों पर लागू नहीं होती?

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चुनाव चिन्ह के साथ मतदान केंद्र के अंदर कोई भी नहीं बैठ सकता है । यह क़ानून है । गुजरात के हर मतदान केंद्र में भाजपा के पोलिंग / बुथ प्रतिनिधि बुथ के अंदर कमल के निशान और भाजपा के नेता के फोटो वाली पेन रख कर बैठे थे । हमने Gujarat Congress के ट्विटर से चुनाव आयोग को Election Commission of India टेग कर सुबह 8 बजे शिकायत दर्ज की थी लेकिन कोई कदम नहीं उठाये गये । मैं सुबह 11.30 बजे मेरे बूथ के अंदर वोट करने गया तब देखा की भाजपा पोलिंग / बुथ प्रतिनिधि बुथ के अंदर कमल के निशान और भाजपा के नेता के फोटो वाली पेन रख बैठा था और मतदाताओं को कमल का निशान दिखा रहा था । मैंने प्रिसाइडिंग ऑफ़िसर को पूछा जब इस पैन पर बीजेपी का चुनाव चिन्ह और फोटो है तो क्या आपको ध्यान नहीं आया ? जब भाजपा के चुनाव चिन्ह के साथ बूथ पर बैठते हैं तो क्या पीठासीन अधिकारी के रूप में आपका कर्तव्य नहीं बनता ? इस भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह वाले पेन के साथ कोई बूथ पर कैसे बैठ सकता है ? अब तक ऐसा हुआ है तो आप क्या देखते हैं ? मैं भारत के चुनाव आयोग और गुजरात के चुनाव आयोग से कह रहा हूं कि गुजरात के सभी बूथों पर इस बात का ध्यान क्यों नहीं रखा गया ? भारतीय जनता पार्टी के पोलिंग एजेंट इस चुनाव चिन्ह के साथ हर जगह बैठते हैं, भारत का चुनाव आयोग और गुजरात का चुनाव आयोग क्या कर रहा है ? क्या आप ऐसे ही चुनाव लड़ना चाहते हैं ? कांग्रेस के लिए नियम और भारतीय जनता पार्टी के लिए कोई नियम नहीं ? यह किस प्रकार की प्रक्रिया है ? कितने भी हथकंडे भाजपा कर ले जनता इस बार गुजरात में भाजपा को सबक़ सिखायेगी । बूथ के अंदर का इस मामले का वीडियो 👇ज़रूर देखे ।

Shaktisinh Gohil MP

151,357 просмотров • 2 лет назад

आज मीडिया के चरणचुम्बकों को “देश की छवि” वाली लाइन दी गई है ▪️क्या देश की छवि नेता विपक्ष को गोली मारने की बात करने पर ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि मीडिया में इस बात पर डिबेट तो छोड़िए इस ख़बर को भी black out करने पर ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि चीनी रोबोट को लाकर अपना कहने पर ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि मोदी के चीन में यह कहने पर ख़राब नहीं होती कि 2014 से पहले जो पैदा होते थे वो अभागे थे ▪️क्या देश की छवि अमेरिका के सामने नतमस्तक होकर आत्मसमर्पण करके ट्रेड डील करने पर ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि किसानों के अधिकारों की बलि देने पर ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि हमारा पूरा डेटा अमेरिका को सौंप देने पर ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि अमेरिका के दबाव में आकर रूस से तेल खरीदना बंद करने पर ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि अमेरिका के निर्देश पर पाकिस्तान के साथ सीजफायर करने पर ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि ईरान के चाबहार पोर्ट से अमेरिका के दबाव में निकलने से ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि एक मुख्यमंत्री के उस वीडियो को देखकर ख़राब नहीं होती जिसमें वो मुसलमानों पर गोली चला रहा है? ▪️क्या देश की छवि दूषित पानी पीकर मर रहे हैं उससे ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि सड़क पर खुदे गड्ढे में दिन दहाड़े लोगों के गिर जाने पर ख़राब नहीं होती ▪️क्या देश की छवि सरकारी स्कूल में बाल्टी भर पानी में जरा सा दूध मिलाकर बच्चों को पिलाने से ख़राब नहीं होती देश की असल छवि हर हाल में मोदी जी का चरणवंदन करने को मजबूर, असल मुद्दों से कोसों दूर गोदी गिद्ध ख़राब करते हैं So please just shut up and sit down देश की असली छवि मीडिया के चरणचुंबक ख़राब कर रहे हैं

Supriya Shrinate

112,036 просмотров • 6 месяцев назад

बिहार में 6 अक्टूबर को आचार संहिता लगी। 20 साल से बिहार पर शासन कर रही NDA सरकार ने चुनावी लाभ के लिए आचार संहिता के 10 दिन पर 26 सितंबर को महिलाओं के खाते में एक नई योजना बनाकर 10 हजार रुपये प्रति लाभार्थी रुपये ट्रांसफर करना शुरू किया। आश्चर्य की बात यह है कि आचार संहिता लागू होने के बाद भी 17 अक्टूबर, 24 अक्टूबर एवं 31 अक्टूबर को इस योजना की किश्त लाभार्थियों के खाते में डाली गई। अब 7 नवंबर को अगली किश्त डाली जा रही है। यह आचार संहिता की धज्जियां उड़ाने जैसा है। ऐसा होगा तो सभी दलों को लेवल प्लेइंग फील्ड कैसे मिल पाएगी। राजस्थान में चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने कांग्रेस सरकार की अन्नपूर्णा राशन योजना, इन्दिरा गांधी स्मार्टफोन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं को रोक दिया था जबकि ये सब पहले से चल रही थीं। अब यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस जो आरोप लम्बे वक्त से लगा रही है वो सही हैं। चुनाव आयोग पूरी तरह मौन है और यह NDA के हित में अनैतिक एवं गैरकानूनी तौर पर काम कर रहा है।

Ashok Gehlot

54,338 просмотров • 9 месяцев назад

किसी भी जीवंत लोकतंत्र के लिए तीन बुनियादी शर्तें होती हैं। तीन कसौटियों पर खरा उतरना पड़ता है। ⦿ लेवल प्लेइंग फील्ड ⦿ ट्रांसपेरेंसी ⦿ क्रेडिबिलिटी ⦿ अगर लेवल प्लेइंग फील्ड की बाते करें तो साल 2004 के बाद BJP के बैंक खाते में 88 करोड़ रुपए थे और हमारे यानी कांग्रेस के बैंक खाते में 38 करोड़ रुपए थे • 2009 के बाद BJP के बैंक खाते में 150 करोड़ रुपए आए और कांग्रेस के बैंक अकाउंट के अंदर 221 करोड़ रुपए जमा रहे • 2014 में BJP के बैंक अकाउंट में 295 करोड़ रुपए थे, लेकिन 2019 यह पैसे बढ़कर 3562 करोड़ रुपए हो गए • फिर 2024 आया और BJP के बैंक अकाउंट में पैसा बढ़कर 10,107 करोड़ रुपए हो गया ये बात यहीं ख़त्म नहीं हुई, 2024 के लोकसभा चुनाव आने से पहले हमारे खाते सीज कर दिए गए। हमने चुनाव आयोग को पत्र लिखा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और आखिर में बैंक खातों से पैसे निकाल लिए गए। ⦿ ट्रांसपेरेंसी की बात करें तो हरियाणा में चुनाव हुए और वोटिंग प्रतिशत के आंकड़े बदलते रहे। इस मामले में CCTV फुटेज को लेकर सवाल उठे, कोर्ट ने चुनाव आयोग को फुटेज जारी करने के आदेश दिए • लेकिन 10 दिन के अंदर सेंट्रल गवर्नमेंट ने नियम बदल दिया और कहा अब फुटेज हम नहीं दे सकते। कर्नाटक के आलंद में भी हमने कुछ ऐसा देखा, जहां चुनाव आयोग ने कोई मदद नहीं की और वोट चोरी होती रही ⦿ क्रेडिबिलिटी के मामले में चुनाव आयोग को अपनी विश्वसनीयता बनानी पड़ेगी, क्योंकि अगर अंपायर ही एक टीम की जर्सी पहन लेगा तो दूसरी टीम क्या करेगी? अंपायर ही अगर मैच फिक्स कर लेगा तो खिलाड़ी क्या करेगा? • यही नहीं, कानून बदलकर चुनाव आयुक्त को किसी भी क्रिमिनल या सिविल एक्शन से टोटल इम्यूनिटी दे दी गई। चाहे वह कितना भी पक्षपात करें, कोई उनके ऊपर उंगली नहीं उठा सकता। कोई उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकता • तेलंगाना में कांग्रेस सरकार किसानों को मदद देना चाहती थी तो चुनाव आयोग ने आचार संहिता का हवाला दिया और मदद नहीं देनी दी। ऐसे ही हिमाचल में भी किया गया • लेकिन बिहार चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू होने के बावजूद NDA सरकार ने 10 हज़ार रुपए सीधे लाखों महिलाओं के खाते में ट्रांसफर किए यानी विपक्ष करे तो 'रेवड़ी' और आचार संहिता का उल्लंघन.. मगर पक्ष करे तो 'जनकल्याण'- ये दोहरा मापदंड नहीं चलेगा। : राज्यसभा में 'चुनाव सुधारों पर चर्चा' विषय पर Ajay Maken जी का पूरा वक्तव्य-

Congress

24,552 просмотров • 8 месяцев назад