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क्या सनातन शब्द बुद्ध ने दिया है? आइए जानते हैं।
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24 Kommentare

ऐसी बकवास अम्बेडकरवादी बौद्ध ही करते हैं हिन्दूविरोध में पागल होकर सोशल मीडिया पर गंध मचाये है असली बौद्धमठों में घुसने नहीं पाते हैं दलाईलामा भी कह चुके हैं कि बुद्ध से अम्बेडकरवादी बौद्धों का कोई लेना देना नहीं है. बौद्धधर्म को खत्म करने के लिए ही अम्बेडकरवादी बौद्ध बने हैं.

वाल्मीकि रामायण में ऋषि अगस्त्य द्वारा भगवान श्री राम को कहें गये आदित्य हृदय स्तोत्र का तृतीय श्लोक इस प्रकार हैं- राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम् येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसे ‘सबके हृदय में रमण करने वाले महाबाहो राम ! यह सनातन गोपनीय स्तोत्र सुनो।

This man, he is awesome. Hanste hanste logon ki pol khol dete hosir.

भगवद् गीता के अध्याय 2 श्लोक 24 में सनातन शब्द का उल्लेख है । अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च । नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ।। 24 ।। अच्छेद्योऽयम्’ - शस्त्र इस शरीरी का छेदन नहीं कर सकते। इसका मतलब यह नहीं है कि शस्त्रों का अभाव है या शस्त्र चलाने वाला अयोग्य है, प्रत्युत छेदन रूपी क्रिया शरीरी में प्रविष्ट ही नहीं हो सकती, यह छेदन होने के योग्य ही नहीं है। शस्त्र के सिवाय मन्त्र, शाप आदि से भी इस शरीरी का छेदन नहीं हो सकता। ‘अदाह्योऽयम्’ - यह शरीरी अदाह्य है; क्योंकि इसमें जलने की योग्यता ही नहीं है। अग्निके सिवाय मन्त्र, शाप आदि से भी यह देही जल नहीं सकता। ‘अक्लेद्यः’ - यह देही गीला होने योग्य नहीं है अर्थात् इसमें गीला होने की योग्यता ही नहीं है। जल से एवं मन्त्र, शाप, ओषधि आदिसे यह गीला नहीं हो सकता। ‘अशोष्यः’ - यह देही अशोष्य है। वायु से इसका शोषण हो जाय, यह ऐसी वस्तु नहीं है; क्योंकि इसमें शोषण-क्रिया का प्रवेश ही नहीं होता। वायु से तथा मन्त्र, शाप, ओषधि आदि से यह देही सूख नहीं सकता। ‘स्थाणुः’- यह स्थिर स्वभाव वाला है, कहीं आता-जाता नहीं - यह बात ठीक है, पर इसमें कम्पन तो होता होगा? जैसे वृक्ष एक जगह ही रहता है, कहीं भी आता-जाता नहीं, पर वह एक जगह रहता हुआ ही हिलता है, ऐसे ही इस देही में भी हिलने की क्रिया होती होगी? इसके उत्तर में कहते हैं कि यह देही स्थाणु है अर्थात् इसमें हिलने की क्रिया नहीं है। आत्मा अखंडित और अज्वलनशील है, इसे न तो गीला किया जा सकता है और न ही सुखाया जा सकता है। यह आत्मा शाश्वत, सर्वव्यापी, अपरिर्वतनीय, अचल और अनादि है।

जब सनातन शब्द था तब बुद्ध पैदा भी नहीं हुए थे 😠😠

पुराणों के अनुसार जब चारों वेद एक साथ नारायण की नासिका से निकले है तो तीन वेद का जिक्र क्यों होगा सिर्फ़ ?? वहाँ पर त्रि विद्या का जिक्र है अर्थात् तीन तरह की विद्या आप गुमराह कर रहे है भैया किसी बौद्ध ग्रंथ में ऋग्वेद , सामवेद , अथर्ववेद शब्द प्रयोग हुआ तो दिखाओ

Ye log jhut bolne failane mein PhD h ye log brahman ko yahudi batate h bante scientist h par h agent kisi foreign agency ke jo sanatan ko samapt karna chahti h

कुछ बौद्ध विद्वान पाली को संस्कृत से प्राचीन बताने लगे हैं. उनसे क्या कहें

Know the truth! Turn your back of Buddhist propaganda!

Neo buddhist Ambedkar ites Neeland - Buddhi suddhya Hai 💭 In Short Ea sab:- ' gyanlabdhya Durbidagdhya ' Hai_ nityanand Ji AAP Kya Bramhadev bhi aa jaaye toh ea na samjhega

संघ शब्द पर भी वीडियो बनाएं

@kavivikaspandey आप ब्राह्मण समाज और सनातन की धरोहर भईया।

आपने बहुत अच्छी जानकारी दी. हमारे ही ज्ञान लेकर आज ये लोग हमें ही सिखा रहे हैं क्यूँकि हिंदुओं ने अपना धर्म पढ़ना छोड़ दिया और हमारे धर्म गुरु राजनीति में उलझाकर रख दिए गए.

@ScienceJourney2 we need answer bro in live

विनाश काले विपरीत बुद्धि।

भगवान ने आपको बुद्धि दी है। इसका सदुपयोग सनातन धर्म के बड़े कल्याण में कीजिये। क्या इन छोटी मोटी व्यर्थ बातों में अपना बौद्धिक नष्ट कर रहे हैं आप!!

@BhimArmyChief कौन किसको समझाए

@NIKHILSBISHT 👌🏻

I love your research based responses cutting the rhetoric. Would love your videos on Panini vyakaran sutras (Maheshwar sutras). Also, is there any research (I'm sure there must be) on how Panini "solved" the grammar inconsistencies of pre-Panini sanskrit.

Most of your references after the 6-7 century, u'll not be able to hold your ground with these references sir

No. References include quotations by Buddha, Patanjali, Amarasimha, and Vimalasuri who were all much before seventh century CE.

Brahamanas, Aranyakas, Upanishads etc are like appendices, explanatory or interpretative texts which were written much later ! Even your Devnagri didn't exist during Buddha , which is been used to write Sanskrit texts. Texts are not considered evidence in reasonable Buddhism.

anyone here to accept this challenge

सर एक भाषा विज्ञानी है @563Rajendra जिनका कहना है कि संस्कृत भाषा पालि/प्राकृत तथा मध्य एशिया से आये संस्कृत शब्दों का मिश्रण है ! इस पर आपका क्या कहना है। और क्या भारत के मूल धर्मों के विकास से सम्बन्धित आपका कोई youtube video उपलब्ध है ?
