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‘कर्तव्यपथ’ पर सदैव अडिग…
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रेलवे मिनिस्टर अगर हरी झंडी दिखा देते तो ट्रेन स्टार्ट ही नही होता.... है न गोबर पात्रा???

तो फिर कैमरा लेकर माँ के साथ फोटो खिंचवाना, माँ को नोटबन्दी की लाईन में लगाना नोटंकी थी? सनातन धर्म की दुहाई देने वालो हीरा बा कि पंचतत्व की राख भी ठंडी नही हुई। क्या देश मे रेल मंत्री नही है?

ये सरकार की लाचारी की पराकाष्ठा है! सरकार में रेलमंत्री इस योग्य भी नहीं कि नई ट्रेन को झंडी दिखा सके। उद्घाटन करने लायक़ भी नहीं। मातृशोक में डूबे प्रधानमंत्री को यदि ऐसे रूटीन काम ही करके कर्मयोगी कहलाना पड़े तो मंत्री की ज़रूरत क्या है? क्या रेलमंत्री ‘कर्तव्यपथ’ पर नहीं हैं?

पात्रा जी कहने को बहुत कुछ है मगर आपको यह ट्वीट नहीं करना चाहिए मां और पुत्र की मर्यादा होती है प्रधानमंत्री की भी गरिमा होती है उसका सम्मान होना चाहिए|

ये कर्तव्य नहीं है लालच है । आपकी माता का निधन हुआ है आप उनके लिये अगर एक दिन नहीं निकाल सकते वो भी तब जब आपके काम कोई और भी कर सकता है तो ऐसा काम किसी काम का नहीं है aur ना ऐसी सफलता ।

You should be ashamed of yourself, marketing the death of Mother. These emotions are personal and not to be shown off. But you won't understand. Deep condolences to the PM for the loss

इस असीम दुख की घड़ी में भी आत्मप्रचार की भूख मरी नही । ट्रेन का उदघाटन तो रेलमंत्री, राज्यपाल, रेलवे बोर्ड का चेयरमैन वँहा के डीआरएम कोई भी कर सकता था।

सनातन में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया क्या है?? बाप को बड़ा बेटा और माँ को छोटा बेटा मुखाग्नि देता है। मुखाग्नि से पहले और बाद में स्नान किया जाता है। मुखाग्नि देने वाले को हजामत जरूरी है। मुखाग्नि देने के समय रोजमर्रा के कपड़े नहीं पहनते हैं। क्या मोदी जी ये सब क्या था?

अपनी जननी माँ की मृत्यु के दिन भी इसने शोक मनाने के बजाय इवेंट करना ही उचित समझा। क्या ऐसे समय में रेल मंत्री झंडा दिखा कर ट्रेन रवाना नहीं कर सकते थे??ऐसा तो नहीं है ना की प्रधान मंत्री झंडा दिखाएगा तभी ट्रेन का इंजन स्टार्ट होगा ??🤦🏻♂️🤦🏻♂️

माता जी की मौत पर तो राजनीति न कर कुपात्रा, कितना गलीच इंसान है तू।
