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कविता का शीर्षक है: वो चल रहा है प्रेरणा स्रोत हैं चाटुकार प्रतापगढ़ी
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Комментарии: 10

Seema pandey1 год назад
गन्दे तो है ये सुना है बस जुम्मे को नहाते हैं।

saket साकेत ಸಾಕೇತ್ 🇮🇳1 год назад
बहुत शानदार। अति सुंदर।

Rajveer Dhamu1 год назад
कविवर राष्ट्र आपका ऋण कैसे उतारेगा इतना सत्य भी कोई बोलता है भला 😂😂😂😂

Zayn khan1 год назад
लो दिन रात बीजेपी वालो का गोटे मुंह में लेने वाला दूसरे को चाटुकार बोल रहा हद है 😂

Mahakaal Bhakt1 год назад
Asli Kavi Hamare Dharmveer @ajeetbharti Bhaiyya.

Anurag Mishra1 год назад
पहले तू तो चाटुकारी छोड़ बे, लेकिन तेरे जैसे चोटियों की वजह से भाजपा चल भी रही है।

Md Mazhar1 год назад
Tu R@ndl KUTlYA ki tarah kyon dikhta hai mdrcd🥱

JAANU Pradyumn1 год назад
🔥🔥🔥🔥ajeet broooo

Marty Byrde.1 год назад
Ajeet bhai aap bina tel ke marte ho Ragu ki

Ajay Singh1 год назад
बहुत बढ़िया 👏🏼👏🏼
