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कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहिं होइ तात तुम पाहीं 🙏🏻❤️

36,958 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

11 Kommentare

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Khushivor 1 Jahr

लाल देह लाली लसे ,अरू धरि लाल लंगूर। बज्र देह दानव दलन,जय जय जय कपिसुर।।🙌🏵️

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Voice of Hindusvor 1 Jahr

Jai Bajrangbali 🙏🏻 ❤️

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Tatjana Gmeinervor 2 Jahren

I LOVE SINGING ❤️ My lovely followers ❤️ Nice to entertain YOU 🙂

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Akanksha Parmarvor 1 Jahr

Jai Bajrangbali

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Voice of Hindusvor 1 Jahr

Jai Bajrangbali 🙏🏻 ❤️

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Chutki Chaiwali🇮🇳vor 1 Jahr

Jai Bajrangbali 🙏🚩

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Voice of Hindusvor 1 Jahr

Jai Bajrangbali 🙏🏻 ❤️

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Ayodhya Darshanvor 1 Jahr

Jai Shree Ram!

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Dogeshvor 1 Jahr

जय बजरंगबली 🙏❤️🚩

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Voice of Hindusvor 1 Jahr

Jai Bajrangbali 🙏🏻 ❤️

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क्षत्रिय अभिषेक सोलंकीvor 1 Jahr

Jay Shri Ram 🙏

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कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥ पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥ अर्थ : ऋक्षपति जाम्बवान ने कहा कि हनुमान् ! सुनो । हे बलवान् ! तुमने चुप्पी क्यों साध रक्खी है ? हे पवन के पुत्र ! तुम्हें पवन के समान बल है। तुम बल विवेक और विज्ञान के निधान हो । व्याख्या : हनुमानजी को आज्ञा देने में अङ्गदजी को भी सङ्कोच है। अतः वयोवृद्ध जाम्बवानजी ने कहा कि वस्तुतः जो बलवान है वह तो चुप्पी साधे हुए है । चुप्पी साधने का करण क्या है ? हनुमान् जो ! तुम पवन के पुत्र हो । अतः तुम में पवन सा ही बल है । पवनदेव तो दिन रात समुद्र के आर पार जाया करते हैं । अतः तुम्हारे लिए समुद्रोल्लङ्घन खेल है और बुद्धि तुम्हारी संसार पारदर्शी है उभय लोकावगाहिनी है । तुम बुद्धि, विवेक और विज्ञान के निधान हो । कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥ राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥ अर्थ : संसार में कौन ऐसा कार्य कठिन है जो तुमसे न हो सके । तुम्हारा तो अवतार रामकार्य के लिए है। यह सुनते ही हनुमानजी पर्वताकार हो गये । व्याख्या : जितने कार्य हैं उनकी सिद्धि तो बल और बुद्धि से ही होती है । सो परमेश्वर ने तुमको सबसे अधिक दिया है। तुम्हारे बल बुद्धि का पारावार नहीं है। अतः संसार में कोई ऐसा कार्य नहीं है जिसे तुम न कर सको। किं पुनः रामकार्य जिसके लिए तुम्हारा अवतार है । ऐसी कथा है कि भगवान् ने शङ्कर की आराधना करके उनसे वरदान मांगा था कि आप मेरे सेवक होकर मेरा कार्य साधन करें। तदनुसार साक्षात् रुद्र भगवान् हो हनुमान् रूप से अवतीर्णं हुए । अतः कहते हैं कि हम लोग तो कौतुक के लिए साथ हैं। रामकाज के लिए अवतार तो तुम्हारा ही है । सुनते हो हनुमानजी का आकार पर्वत सा हो गया । कनक बरन तन तेज बिराजा। मानहुँ अपर गिरिन्ह कर राजा॥ सिंहनाद करि बारहिं बारा। लीलहिं नाघउँ जलनिधि खारा॥ अर्थ : सोने के रंग के शरीर में तेज शोभायमान हुआ । मानो पर्वत के दूसरे राजा हैं। बार बार सिंहनाद करके कहा कि इस लवर्णासिंधु को तो खेल में ही डाक जाऊँगा । व्याख्या: हनुमान् जी का शरीर स्वभाव से ही सोने के रंग का है। सो जाम्बवानजी के कथन ने मानो मन्त्र का काम किया। उनके वचन से ऐसा उत्साह बढ़ा कि शरीर तेज से चमकने लगा । विशाल शरीर था ही। ऐसे मालूम होने लगे जैसे दूसरे सुमेरु हैं । जाम्बवानजी के इस कहने का कि चुप्पी क्यों साधे हो ? बार बार सिंहनाद करके उत्तर दिया। "कौन सो काज कठिन जगमाहीं । जो नहि होय तात तुम पाहीं" का उत्तर देते हैं कि इस खारे समुद्र को तो खेल में डाक जाऊँगा । खारे समुद्र से उत्तरोत्तर छः समुद्र एक से एक आयाम में दुगुने हैं। कहिये तो उन्हें डाक जाऊँ । इस खारे समुद्र में रक्खा ही क्या है ? सहित सहाय रावनहि मारी। आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी॥ जामवंत मैं पूँछउँ तोही। उचित सिखावनु दीजहु मोही॥ अर्थ : सहाय के सहित रावण को मारकर यहाँ त्रिकूट पर्वत उखाड़ लाऊँ । जाम्बवान ! मैं तुमसे पूछता हूँ। मुझे उचित शिक्षा दीजिये । व्याख्या : यहाँ संशय को स्थान नहीं है । समुद्र पार करके सेना सहित रावण को मारकर यहाँ त्रिकूटाचल को जिस पर लङ्कापुरी वसी है उखाड़ लाऊँ । राम का कार्य ही पूरा कर दूँ । इस भांति : "राम काज लगि तव अवतारा" का उत्तर दिया । त्रिकूट उखाड़ लाने का भाव यह कि तब आप लोग खोज लें कि सीता कहाँ हैं ? अब हनुमान् जी जाम्बवान से पूछते हैं कि आप सबसे वयोवृद्ध हैं । आप मुझे बतलाइये कि मैं क्या करूं ? रामजी का सब कार्य हो पूरा कर दूँ कि केवल आज्ञा मात्र का पालन करूँ । मेरे लिए क्या उचित होगा ? #रामचरितमानस #किष्किंधाकाण्ड #ramcharitmanas #hinduism #ramayana #sanatana #SanatanaDharma

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