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काशी से क्यों नहीं लाना चाहिए गंगा जल l

26,343 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 2

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Pragalbh Vatsal Sharma1 год назад

इस बात का कोई प्रमाण हो तो बताइए कहां पर उल्लेखित है ऐसा कि आप स्वयं ही इस बात को बोल रहे हैं

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Subhash Sharma Vats1 год назад

Jai Baba Bholaynath 🌿 💛 🙏

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जिन्होंने माँ गंगा से झूठ बोला, उनके वादों पर न जाएं। ‘नमामि गंगे’ व ‘स्वच्छ गंगा’ के नाम पर भाजपा सरकार में पिछले 10 वर्षों में अरबों रुपयों के फ़ंड निकाले तो गये पर वो फ़ंड माँ गंगा के घाट तक नहीं पहुँचे। फ़ाइलों में गंगा जी के स्वच्छ, अविरल, निर्मल होने के दावों का सच ये है कि वाराणसी में माँ गंगा इतनी दूषित हो चुकी हैं कि पीने योग्य तो छोड़िए, ये जल नहान-स्नान के लायक भी नहीं है। इसी संदर्भ में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने देश के प्रधान संसदीय क्षेत्र ‘वाराणसी’ के ज़िलाधिकारी महोदय से ये पूछकर सारा सच स्पष्ट कर दिया है कि ‘क्या आप गंगाजल पी सकते हैं?’ साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल की ये सलाह भी डबल इंजन की सरकार के लिए चुल्लू भर पानी में डूबने के बराबर है कि उनके राज में तथाकथित क्योटो अर्थात काशी के डीएम साहब अपनी पॉवर का इस्तेमाल करते हुए गंगा किनारे एक चेतावनी भरा बोर्ड लगवा दें कि ‘ये गंगा जल पीने-नहाने योग्य नहीं है।’ निंदनीय भी, शर्मनाक भी! काशी कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

64,572 просмотров • 1 год назад

क्या आप जानते हैं — गंगा में अस्थियाँ क्यों विसर्जित की जाती हैं? 🌊 क्यों कहा गया है कि गंगा माँ मोक्षदायिनी हैं? देवी गंगा और राजा शांतनु की कथा में छुपा है इसका उत्तर — गंगा माँ ने वचन लेकर अपने सात पुत्रों को जन्म के तुरंत बाद गंगा में प्रवाहित कर दिया… जब राजा शांतनु ने आठवें पुत्र को गंगा में बहाने से रोका, तब माँ गंगा ने बताया कि वे वसु थे, जिन्हें वशिष्ठ ऋषि के श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए गंगा में बहाया गया। आठवें पुत्र थे गंगा पुत्र भीष्म पितामह। इसलिए गंगा में अस्थि विसर्जन करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। गंगा सिर्फ जल नहीं, वह पापों से मुक्त करने वाली जननी हैं। 🌺 जय गंगा मैया! 🌺

Annapurna

22,424 просмотров • 1 год назад