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कश्मीरी पंडितों का संघर्ष...जिसे लेफ्टिस्ट प्रोपेगंडा कहते है...👇

47,517 次观看 • 4 个月前 •via X (Twitter)

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जनवरी 1990 का वो दौर, जब कश्मीर की वादियों में नफरत का शोर गूंज उठा था। कश्मीरी पंडितों को तीन ही रास्ते दिए गए: 'रालिब' (धर्म बदलो), 'गालिब' (मर जाओ) या 'चालिब' (घाटी छोड़ दो)। इस वीडियो में एक कश्मीरी पंडित युवती ने अपनी और अपने परिवार की पीड़ा साझा की है। उन्होंने गिरजा टिक्कू के साथ हुई उस अमानवीय बर्बरता का जिक्र किया, जिसे सुनकर आज भी रूह कांप जाती है। युवती का कहना है कि 13वीं शताब्दी से अब तक 7 बार कश्मीरी पंडितों का पलायन और नरसंहार हो चुका है। आज जब लोग इसे 'प्रोपेगेंडा' या 'झूठ' बताते हैं, तो घाव फिर से हरे हो जाते हैं। क्या इतिहास की इन कड़वी सच्चाइयों को भुला देना ही 'शांति' है?

🚩योगीआदित्यनाथफैन(डिजिटल योद्धा)गोडसे का भक्त 🕉

14,497 次观看 • 3 个月前

मिलिए काजल पंडित और उनके परिवार से कुपवाड़ा जिले में एक मात्र कश्मीरी पंडित और बहादुर कश्मीरी पंडित लड़की बची हैं। काजल के पिता का उम्र 70 वर्ष है पारिवारिक हालत दैनिय है। काजल पढ़ कर डॉक्टर बनाना चाहती है आप की मदद से काजल का सपना पूरा हो सकता है और कुपवाड़ा जिले में एक मात्र कश्मीरी पंडित परिवार की हालत सुधर सकती है वीडियो में बारकोड दिया है अगर आप को वीडियो देखने के बाद लगता है कि इस बहन की मदद करनी चाहिए तो कर सकते है। 1990 में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार कर के भगा दिया गया वही काजल के पिता संघर्ष कर के अपने घर को नहीं छोड़ा आज उनकी हालत ठीक नहीं है ना सरकार कुछ कर रही और न ही वहां रह रहे लोग। बुजुर्ग पिता को न पेंशन मिल रहा है और ना ही PM आवास योजना का घर और ना ही आयुष्मान कार्ड बना है सोचिए कैसे जिंदगी जी रहे हैं कश्मीरी पंडित

Sumit Tiwari

68,965 次观看 • 1 年前