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Ana Sayfaya Dön

खिचड़ी के चार यार दही, पापड़, घी और अचार... और साथ में चोखा हो तो स्वाद बेमिसाल!

21,557 görüntüleme • 3 ay önce •via X (Twitter)

6 Yorum

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Ravinder Kumar3 ay önce

Cum Kha Verna uper nikal jayega jaldi

Satubihari - मिट्टी से मन तक profil fotoğrafı
Satubihari - मिट्टी से मन तक3 ay önce

HMM "खिचड़ी के चार यार — दही, पापड़, घी अउर अचार। ऊपर से चोखा के संगत मिल जाए त फिर पाँच सितारा होटलो फेल हो जाला!" 😋

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Cinema Darshan3 ay önce

गरीबी

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Vikash K Singh3 ay önce

Why this fatshit uncle is eating all day on internet

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कायस्थ ( From शाहाबाद )3 ay önce

Are bhai bhukh lag gaya 😋

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Parinda3 ay önce

Pyar to ha Lekin healthy to nhi ha

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बड़ी ख़बर 🔥 नकली घी बनाकर बेचा और कमाए अरबों रुपए... वीरेंद्र नाम के व्यक्ति ने यूट्यूब से वीडियो देखकर नकली घी बना दिया, बंगला, गाड़ी और फैक्ट्री सब खड़ी कर ली। सभी बड़ी कंपनियों के ब्रांड में पैकिंग करके बेचता था। 120 रुपए की लागत का घी 450 रुपए में बेचता था। अमूल, महान, कृष्णा, सरस और लोटस जैसे ब्रांड का नकली घी इसने बेचा। यह सारा गोरखधंधा बिना प्रशासन और बाजार की मिलीभगत के नहीं चल सकता था। आज सभी के लिए जरूरी हो चला है कि घी खरीदें और उसे फ्रिज में रखें। ऊपर कोई परत बने तो समझ जाएं कि घी नकली है। हमारे व्यापारी अपनी कमाई के लिए आपको ज़हर भी खिला देंगे। #FoodSafety #Adulteration

𝙈𝙪𝙧𝙩𝙞 𝙉𝙖𝙞𝙣

22,911 görüntüleme • 2 ay önce

दीपावली पर घी के दिए जलाने को लेकर अखिलेश यादव जी का निंदनीय बयान न केवल भारतीय संस्कृति और हिन्दू परंपरा प्रति उनके मन में जो अवमानना है उसका पर दी है परंतु साथ ही साथ दीपक बनाने वाले प्रजापति समाज और स्वदेशी के भी विरुद्ध है बल्कि उनके अपने समाज के भी खिलाफ है। भारत के लिए गर्व का विषय था कि यहाँ इतनी समृद्धि और प्रकृति की इतनी अनुकंपा थी इतना घी होता था कि घी के दीपक क़तारों में जलाए जाते थे। यह वही घी है जो गाय को माता मानने वाले उनके समाज से आता था। गाय के दूध से दही दही से मक्खन और मक्खन से घी और वह अभी इतना प्रचुर मात्रा में कि घी के दीपकों की कतार लगाई जा सकती है। यह भारत की परंपरा और समृद्धि के लिए गर्व करने वाला विषय है ।पर उसमें भी नकारात्मकता डूबने वाले लोगों की मनोवृत्ति निश्चित रूप से निंदनीय साथ साथ ख़तरनाक है आज चंद कट्टरपंथियों के वोट पाने के लिये दुर्भाग्य है कि जिस हिंदू परंपरा में गाय की रक्षा सबसे महान कार्य माना जाता था और राजाओं के आने पर उद्घोष होता था। ’गौ ब्राह्मण पालक, धर्म ध्वज रक्षक’ आ रहे है । आज लगता है कि उसके स्थान पर इंडी गठबंधन वाले नेताओं के लिए उद्घोष किया जाना चाहिए । ‘मुल्ला मौलवी प्रतिपालक, घुसपैठिया संरक्षक और सनातन धर्म विध्वंसक’ बयान देने जा रहे हैं

Dr. Sudhanshu Trivedi

52,265 görüntüleme • 11 ay önce