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खाटूश्याम राक्षस थे.....धर्म के ठेकेदारों देखो....खैर राक्षस ही राक्षस की पूजा करेगा ना 🤣
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बिटिया रानी! ये कोई BRA साहब का संविधान नहीं है जहां बस एक बार किसी जाति में पैदा हो गए तो फ्री का खाने को सारी उम्र नी*च ही बने रहेंगे चाहे IAS, PM,CM कुछ भी हो जाओ। ये मनुवाद है, यहां अच्छे कर्म करने से राक्षस भी पूजनीय हो जाते हैं। प्रहलाद,बलि, विभीषण, इनका नाम सुना है?

जब दिमाग़ में वामपंथी कचरा भरा हुआ हो तो फिर काम कैसे करेगा, मेरी सभ्यता में वर्ण या कुल पूजनीय नहीं है चरित्र पूजनीय है ये व्यक्ति के कर्म या त्याग ही उसको भगवान का दर्जा दिलवाते है यही कारण है कि रावण ब्राह्मण होने पर भी वन्दनीय नहीं है जबकि बर्बरीक राक्षस कुल से होने के बाद भी

प्रह्लाद भी राक्षस था पर बनी भक्ति और सत्कर्म से स्वयं भगवान की गोद में बैठा । खाटू श्याम जी की शीरी कृष्ण के प्रति श्रद्धा और भक्ति ने उन्हें पूजनीय बनाया । भगवान राम ने भी स्वयं राक्षस कुल के विभीषण का राज तिलक किया था । कर्मयोगी बनो 🙂

ये तुमसे किसने कहा कि हमें ये पता नहीं कि खाटू श्याम जी राक्षस कुल से है हमे ओर जो भी श्याम बाबा के भक ह उन्हें सब पता है शीश दान के समय भगवान ने अपने एक नाम श्याम से जाना जायेगा! राक्षस कुल में जन्म लेने के कारण क्या उनका त्याग कम हो गया!

अंधभक्ति नही है, इतना बताया तो इससे आगे का भी बताओ फिर। बर्बरीक का 3 बाण लेकर महाभारत युद्ध के लिए जाना, भगवान श्रीकृष्ण का उनसे मिलना। उनकी परीक्षा लेना, शीश का दान मांगना। बर्बरीक को वरदान देना और भगवान का श्याम नाम बर्बरीक को देना। आधी अधूरी बाते बताकर लोगों को भ्रमित मत करो।

बर्बरीक भीम का पुत्र था। हाँ वह राक्षस जाति से आता था। अब पूरी कहानी भी बताया जाए, अधूरा ज्ञान न परोसा जाए। हम राक्षस की पूजा करते है। भगवान को मांस भी चढ़ाते है। बकड़े का बलि भी देते है।

Let me clarify Bhim sen married to hidimba(rakshas) son born Ghatotkach married ahilawati Son born Barbarik, he got Siddhis He could’ve finished Mahabharat yudh with three arrows, Shree Krishna did his Leela and named him khatushyam ji !

बर्बरीक महाभारत के एक अत्यंत शक्तिशाली और महान योद्धा थे। वे पांडव पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच तथा नागकन्या अहिलावती (मौरवी) के पुत्र थे। उन्हें भगवान श्री कृष्ण द्वारा कलियुग में खाटू श्याम के रूप में पूजे जाने का वरदान प्राप्त हुआ था।बर्बरीक से जुड़ी मुख्य बातेंदिव्य शक्ति:

इटालियन बार बाला के गुलामो को यह नही पता की राजा बलि भी राक्षस राजा थे,और विभीषण भी

भीम का बेटा था.... उसने कहा था जो भी हार रहा होगा उसकी मदद करेगा| ये कोई इतनी गहरी जानकारी नहीं है| इसीलिए इनको *हारे का सहारा बाबा श्याम* कहा जाता है

ये अलग ही नमूना है। भीम ने हिडिम्बा से शादी की थी वो राक्षसी थी ये सबको पता है, बर्बरीक भीम और हिडिंबा के बेटे का बेटा था तो आधा राक्षस और आधा मानव भी हुआ। अब कृष्ण जी ने उसकी भक्ति और त्याग को देखते हुए उसे आशीर्वाद दिया था। इसे ये नहीं पता। आजकल कोई भी चल देता है ज्ञान बांटने

Abe gade pura padlena dyan se. Jis samaye bhagwan shree krishan ko unhone apna shish kat kar diya tha tab shri krishan ne unko apna naam de kar pujan kar var diya tha.

Alka ji.barbarik gatochlak ke bete the gatochkach beem ke bete the ..means wo pote the ..bheem.ne rakshas putri hidimba se vivah kiya tha ..kishn bhagwan ne sacrifice manga tha as he is suppose to support weaker side.

बर्बरीक को स्वयं कृष्ण भगवान ने आशीर्वाद दिया था कि तू आज से मेरे नाम से जाना जाएगा और कलियुग में पूजा जाएगा l वो राक्षस कुल में होकर भी अच्छे कर्म किया था और आज मनुष्य बनकर भी लोग राक्षस से भी बुरा काम कर रहे है l

ये नीले भीमटे खुद सुपर्णखा और होलिका को अपना बुआ मानता है और रावण को अपना बाप अगले बार से दहन नहीं होने देगा मीम बालों का कहना, राक्षस कुल में जन्म लेकर भी धर्म के मार्ग पे चला और कुछ धर्म कुल में जन्म लेकर अधर्म किए जा रहा, धूर्त को समझना चाहिए कर्म के अनुसार पूजा जाता है,

Krishna has given his name to Barbarik. So his worship is also valid and bonafide as long as material benediction is concerned. He was 'Rakshas' by birth but every 'Rakshas' is not bad. He was grandchild of Bhima, so essentially there is no any problem in his worship.

देख ले हिंदू धर्म की खैसियत राक्षस भी अच्छा काम करे तो पूजा जाता है और ब्रहण (रावण)भी बुरा काम करे तो नही पूजा जाता हिंदू में जाति पाती से मतलब नहीं कर्म अच्छा होना चाहिए

श्याम बाबा सदा पूजनीय थे और पूजनीय रहेंगे कल पिता के गोत्र से चलता है ना की माता के गोत्र से रावण के पिता ब्राह्मण थे और श्याम बाबा के पिता क्षत्रिय थे अब तू जस्टिफाई करके बता दियो मुझे

हे! मूर्खों में श्रेष्ठ, जाकर पहले खुद पूरी बात को जानो, ऐसे तो विभीषण जी भी राक्षस थे, और भगवान के परम भक्त प्रहलाद भी राक्षस थे, महादानी राजा बलि भी राक्षस थे, जिनका जिक्र कलावा बांधते समय पंडित जी मंत्र में करते हैं, "दानवेन्द्रो बलि राजा" समझे बेअक्ल इंसान ।

गुजरात में भी खाटू श्याम बबर्रीक को बलिया देव कहते है, और कई मंदिर भी है गुजरात भर में बलिया देव के, और कही जगह शंकर भगवान का मंदिर है वहा भी बलिया देव के मंदिर है.जो कही सालों से है, और वो मंदिर भी सनातनी कहे जाने वाले लोगों ने ही बनाए है।

बरबरीक ने भगबान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को अपना सर काट कर दे दिया था श्री कृष्ण ने उसको बरदान दिया था की कलयुग मे मेरे नाम से तुम्हारी भी पूजा होगी वीडियो सिर्फ अधूरा ज्ञान पेलने को बनते है कभी सतसंग मे जाओ कशी ज्ञानी पे पूछ लो सायद सुधार आ जाए

Problem arise with half knowledge.. जब कोई भगवान का भक्त होता है तो उसकी कुल या जाती नहीं देखी जाती , जैसे प्रहलाद ( राक्षस कुल से थे ) विभीषण, राजा बलि, वैसे ही बर्बरीक को स्वयं भगवान ने वो जगह दी है

भगवान वाले खुद ही मुजरा करवाते हैं भगवान का खुद ही मुजरा देखते भगवान का दूसरों पर इल्जाम लगाते हैं ..

Chal re nalayak gyan baant rha rakshas kul se the lkin jab bhagwan ko apna sar diya tab bhagwan ne unhe vardaan swaroop baba khatu shyam ji ki upaadhi di ab jab bhagwaan ko koi problem nahi hai hume koi problem nahi hai to tu faltu ka aadha pauna gyan pel k kyu hero banrha.

अबे मंदबुद्धि सुन, बर्बरीक राक्षस कुल के थे, फिर भी वो हमारे लिए पूजनीय है क्युकी : श्लोक 67 "तथास्त्विति तदा प्रोक्तं केशवेन सुरासभाम् । पूजितं ते शिरः लोके देवीनां च भविष्यति ॥" अर्थ: "श्रीकेशव ने कहा ‘ऐसा ही हो।’ तुम्हारा मस्तक संसार में पूजित होगा और देवियों द्वारा भी तुम्हारी पूजा की जाएगी।” राजस्थान में खाटू श्याम से पूजे जाते है और गुजरात में बलियादेव के नाम से पूजे जाते है | भटके हुई प्रजाति हमें ज्ञान ना दे| जय श्री श्याम, जय बलियादेव |🕉️

महाभारत काल में वीर बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान दिया था। उनकी इस महान दानवीरता और भक्ति से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि कलियुग में उनकी पूजा उनके अपने नाम 'श्याम' (खाटू श्याम जी) के रूप में होगी और वे हारे हुओं का सहारा बनेंगे।

बस ये सब ही 2 कोड़ी के लोग आते है और आधी अधूरी जानकारी दे के सनातन धर्म को तोड़ने का काम करते है। पूरी जानकारी ये बतायेंगे नहीं वरना इनका धन्धा बंद हो जायेगा।

अबे राक्षसनी, उनको भगवान कृष्ण का वरदान मिला था की कलयुग मे आपकी पूजा होंगी l जन्म उनका हुआ था ही राक्षस कुल मे तुम्हारी ही तरह पर अपनी असीम शक्ति से वो पूजनीय हुए l ओर ज्ञान मत पेल सबको पता है कृष्ण जी के वरदान के बारे मे भी l

Yeh sun kar andhbhakto ke pichhwade me aag lag jayegi 😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂AI BHI NARAJ HO GAYA

वह संस्कृति, जहाँ जन्म से कोई धर्मपरायण नहीं बनता; बल्कि समाज के प्रति आपके आचरण और कर्म आपको देवत्व का दर्जा देते हैं। सनातन में अच्छे कर्म करने वाले राक्षसकुल की भी पूजा हो सकती है। बर्बरीक/खाटू श्याम जी इसका उदाहरण हैं—जो हारने वाले का साथ देने के वचन के कारण पूजनीय हैं।

Abe behan ke laure Rampal ka dahina aanad , madarchodo tum log to khud ke kitab me to mullo ki laar chatte ho Hindu ke kitab me mullah ki Tarif karte ho ,, Aur hamare kitab ko ulta kharab batate ho madarchodo.. dikh mat jana kahi Larpal ke tent me wahi maa chod dunga Bc

He was Asura, not Rakshasha. There is difference between the two. Prahlad was also Asura by birth. Being Asura doesn't mean being Rakshash.

अरे मूर्ख। बर्बरीक की परमभक्ति से प्रभावित होकर,भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि वे कृष्ण के नाम (श्याम) से जाने जाएँगे और कलियुग में उनकी व्यापक रूप से पूजा की जाएगी। बाद में उनका सिर राजस्थान के खाटू गाँव में धरती में प्रकट हुआ, जिससे प्रसिद्ध पूजा स्थल की स्थापना हुई।

Are bhai badhe likhe anpadh , ye hame pta hai ye Bhim ke puter Ghatotkach ka puter hai , or Ghatotkach ek Rakshas tha to ye bhi vhi hoga , lekin Bhagwan Sri Krishan ne jo aasirwad diya tha ? Use bhool kar logo ko bahka relhe ho. Nirlajjj
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इस वीडियो की में पुष्टि नहीं कर रहा मगर ये सच हे तो ये आदमी जानवर से भी बदतर हे, वैसे भी इस आदमी के वीडियो जानवरो को कटकर खाने वाले ही ज्यादा होते हे, अगर आपने राक्षस नही देखा हे तो इसको देख लो आपकी राक्षस देखने की इच्छा पूरी हो जाएगी 😡😡😡😡
DJ_Mech1007
177,044 views • 1 year ago
Sensitive content
एक मां अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ मिल कर 3 साल की अपनी ही बच्ची का करवा रही थी दुष्कर्म,, आज कलयुग उस चरम_सीमा पर है जहां मां ही राक्षस बन चुकी है,😡
Adv.Nazneen Akhtar
110,984 views • 1 year ago
