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खड़गे साहब कह रहे है कि प्रधानमंत्री को बोलना है तो संसद में आके बोले , उसी को हम authenticate मानेंगे 😀 अरे खड़गे जी, आपको किसी ने ग़लत फ़र्रा पकड़ा दिया है- PM मोदी जी के लिए ये सबसे आसान चैलेंज है- पर दिक्कत ये है कि अपनी...

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मोहन भागवत जी के लिए एक शेर है कि- 'इकबाल बड़ा मनमोहक है, मन बातों से मोह लेता है। गुफ्तार का गाज़ी बन तो गया, किरदार का गाज़ी बन न सका।' ये सब गुफ्तार के गाज़ी हैं। ये लोग बातचीत में ही सिर्फ बतोले फोड़ा करते हैं। अगर बातचीत में ये लोग बतोले नहीं फोड़ते हैं, तो आज की डेट में अमित शाह जी से माफी क्यों नहीं मंगवा देते? क्यों भगोड़े हो रहे हैं अमित शाह जी संसद के? क्यों भगोड़े हो रहे हैं नरेंद्र मोदी जी संसद के? अरे अभिनंदन का काम किया है तो संसद में अभिनंदन करा दो। पेलेट गन चलवाना अभिनंदन का काम है? लाठी चलवाना अभिनंदन का काम है? पुलिस के साथ सादी वर्दी में पता नहीं कौन आतंकवादी थे, गुंडे थे, संघ के कार्यकर्ता थे, या बजरंग दल के कार्यकर्ता थे, जिन्होंने छात्रों को लाठी-लाठी मार करके गिरा दिया? जिन्होंने महिलाओं के, बच्चियों के कपड़े फाड़ दिए, जिन्होंने छोटी-छोटी बच्चियों के पीछे लाठी... क्या-क्या मतलब मैं कह नहीं पा रहा हूं क्या दुस्साहस किया उन लोगों ने। आंदोलन संवाद का माध्यम है, ये मोहन भागवत जी कह रहे हैं। लेकिन आंदोलन का अपमान कौन कर रहा है? आंदोलन का अपमान कर रही है भारतीय जनता पार्टी। बकायदा वीडियो कॉल पर बात की है। उनकी मांगों को समर्थन दिया है। और हेमंत सोरेन जी ने चार कैबिनेट मिनिस्टर की सदस्यीय समिति बना दी है। 11 सदस्यीय समिति छात्रों की बन गई है। हमने छात्रों से पूछा है कि बताइए, आपके धरना स्थल पर आकर के बात करनी है, कि आप कहां आएंगे, या आप न्यूट्रल जगह पर आएंगे? छात्रों ने कहा है कि हमें एक दिन का समय दीजिए। हम एक दिन के समय में आपको बताते हैं। बॉल छात्रों के कोर्ट में है। तो सारी की सारी बातें छात्रों के साथ संवाद चल रहा है। आप, आप बताइए कि जब यहां पर धरना, आमरण अनशन शुरू हुआ था, आमरण अनशन से पहले से लेकर के और 20 दिन तक, क्या एक भी बार भी छात्रों के साथ नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने संवाद किया क्या? जब आमरण अनशन के 20 दिन हो गए तब भी संवाद किया क्या? ये असंवेदनशील सरकार है। कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता Surendra Rajput ‏ जी

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नरेंद्र मोदी जी ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं, ये देख किसी भी भारतीय को अच्छा नहीं लगेगा। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था, किसानी और हमारे हितों को हमारी ही थाली में परोसकर ट्रंप को दे दिया है। जो भारत हमेशा अमेरिका के शीर्ष नेताओं से आंखों में आंखें डालकर एक व्यावहारिक रिश्ते निभाता था, वो भारत कहां है? नरेंद्र मोदी ने अडानी-अंबानी के हितों के लिए भारत के आम नागरिकों के हितों को कुर्बान कर दिया है। ये साफतौर पर भारत के आत्मसम्मान का समझौता है। जो लोग इस मातम की घड़ी को ढोल-नगाड़ा बजाकर जश्न जैसा दिखा रहे हैं- वे जानते हैं कि यहां 'सरेंडर' किया गया है। नेता विपक्ष राहुल गांधी जी को संसद में बोलने से रोका जाता है, क्योंकि नरेंद्र मोदी को मालूम है कि नेता विपक्ष और विपक्ष को पता है कि सरेंडर क्यों किया गया है। अब आप कयास लगा सकते हैं कि ये डील क्यों की गई? ● अडानी को बचाने के लिए ● अंबानी के हितों के लिए ● Epstein फाइल में अपना नाम दबाने के लिए : AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन Pawan Khera 🇮🇳 जी 📍 दिल्ली

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