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Ana Sayfaya Dön

खाते समय पानी नहीं पीना चाहिए... खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए... खाने से ठीक पहले भी नहीं... पानी पीने के इतने नियम! क्यों हैं ये नियम और क्या है इनके पीछे का साइंस? फ़िट ज़िंदगी में आज बात इसी पर. रिपोर्ट: सुमिरन प्रीत कौर वीडियो: देवाशीष कुमार

59,945 görüntüleme • 1 yıl önce •via X (Twitter)

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turgut alp hindi🇵🇸🇵🇸🇵🇸🇮🇳🇮🇳🇮🇳1 yıl önce

पैगंबर साहब ने 1400 सो साल पहले बता दिया खाना खाते टाईम पानी को तीन बार मे पीओ खाने के पहले थोड़ा खाने के बिच मे और खाने के बाद थोड़ा थोड़ा..

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pradeep kumar kunche1 yıl önce

Simple Life Style & Behavioural Changes For Better Health (Preventive - Cure)

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RedDeer.Games IR2 yıl önce

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Jitendra Kumar Yadav1 yıl önce

बेहद ज्ञानवर्धक जानकारी।

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MANJEET1 yıl önce

👍👍👍👍

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Virendra Kumar1 yıl önce

तुम्हारी बात में दम नहीं है। खाना जब खाते हैं तो जठर अग्नि जलती है पेट में उस खाने को पचाने के लिए। दो चार घूंट पानी पी सकते लेकिन उससे ज्यादा नहीं। एक या दो गिलास अगर पी लिया तो जठर अग्नि नहीं जलेगी और तुम्हारा खाया खाना बिल्कुल नहीं पचेगा। इससे तुम्हे बहुत दिक्कत होगी।

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भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से जो लोग प्रभावित हुए हैं, मैं उनसे मिला हूं। कई परिवार के सदस्यों की मौत हुई है और कई बीमार हुए हैं। वादा किया गया था- देश को 'स्मार्ट सिटी' दी जाएंगी। मगर ये स्मार्ट सिटी का नया मॉडल है, जहां पीने का पानी नहीं है और लोगों को डराया जा रहा है। इंदौर में साफ पानी नहीं मिल रहा है। दूषित पानी पीने से लोगों की मौत हुई है और यह सरकार का 'अर्बन मॉडल' है। यह सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा अन्य शहरों में भी हो रहा है। लोगों को साफ पानी और हवा मिले, ये जिम्मेदारी सरकार की होती है, मगर वह इस काम में असफल है। सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साथ ही, पीड़ितों को सही मुआवजा भी मिलना चाहिए, क्योंकि ऐसे हालात सरकार की लापरवाही से बने हैं। आज भी यहां साफ पानी नहीं मिल रहा है। इसलिए लोग चाहते हैं कि यहां साफ पानी की व्यवस्था की जाए। जनता को साफ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी है, जिसे पूरा किया जाना चाहिए। नेता विपक्ष होने के नाते मैं इनकी आवाज उठाने आया हूं, ये मेरी जिम्मेदारी है- मैं पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा हूं। : नेता विपक्ष श्री Rahul Gandhi 📍 इंदौर, मप्र

Congress

56,033 görüntüleme • 6 ay önce

BJP का 'जहरीला मॉडल' गुजरात की राजधानी गांधी नगर में गंदा पानी पीने से 150 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं। पिछले कई दिनों से गंदा पानी लोगों के घरों में सप्लाई हो रहा था। बहुत शिकायतों के बाद भी सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की और अब लोगों की जान पर बन आई है। याद रहे.. इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग बीमार हैं। वहां भी यही कहानी दोहराई गई थी। BJP लोगों के घरों में जहर बांट रही है और सवाल पूछने पर उसे 'फोकट' के सवाल बतला रही है। मध्य प्रदेश में पिछले 20 साल से और गुजरात में पिछले 30 साल से BJP की सरकार है- जहां ये पीने का साफ पानी तक मुहैया नहीं करवा पा रहे हैं। सवाल है- क्या ये 'जहरीला' पानी BJP के नेता, मंत्री और खुद नरेंद्र मोदी पी पाएंगे?

Congress

21,794 görüntüleme • 7 ay önce

राजस्थान किसी की दया का पात्र नहीं है... अपने हक़ और हिस्से का पानी मांग रहा है। "प्यासे को पानी उपलब्ध कराना" ऐसा बताया जा रहा है कि मानो हरियाणा अपनी मर्जी से पानी दे रहा हो। हरियाणा के साथ किए गए यमुना जल समझौते (MoA) में राजस्थान के हितों की हत्या हुई है। एक तो हितों का समर्पण और ऊपर से हरियाणा की कृपा बताना शर्मनाक है। मुख्यमंत्री भजनलाल जी के द्वारा हरियाणा के सामने किए गए समपर्ण से पूरा राजस्थान शर्मिंदा है। भजनलाल जी को ज्ञात होना चाहिए कि राजस्थान को मिलने वाला पानी किसी की मेहरबानी से नहीं, बल्कि 1994 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार में हुए समझौते के तहत उसका हक़ है। जिसको हरियाणा के सामने गिरवी रखकर भाजपा सरकार ने समझौता किया है। अगर 1994 के यमुना जल समझौते के आधार पर ही नया MoA किया गया है, तो फिर राजस्थान के हिस्से के पानी पर नई शर्तें क्यों लगाई गईं? - राजस्थान को सिर्फ जुलाई से अक्टूबर (बारिश के समय) की अवधि में केवल 4 महीने ही पानी मिलेगा। यानि नवंबर से जून की अवधि में राजस्थान को कोई जल आवंटित नहीं होगा। ये समर्पण क्यों? - MoA में राजस्थान सिर्फ 580 MCM पानी मिलने का जिक्र है, जबकि 1994 के मूल समझौते में 1.19 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलना था। यानी 1994 के समझौते के अनुरूप जल आवंटन नहीं होगा। ये समर्पण क्यों? - यमुना नहर की पूरी क्षमता के उपयोग के बाद बारिश के समय अतिरिक्त पानी होने पर ही राजस्थान को पानी मिलेगा, जबकि 1994 के मूल समझौते ये शर्त नहीं थी। ये समर्पण क्यों? - राजस्थान जाने वाली पाइप लाइन से हरियाणा भिवानी, फतेहाबाद और उन गांवों में पहले पानी लेगा जहां से पाइप लाइन गुजरेगी, जो 1994 के मूल समझौते की भावना के खिलाफ है। ये समर्पण क्यों? - हरियाणा द्वारा पहले 13,000 क्यूसेक पानी, फिर 18,000 क्यूसेक पानी, बाद में 24 000 क्यूसेक पानी, और अब पूरे जल समझौते पर अपनी मनमर्जी करना 1994 के मूल समझौते के खिलाफ है। ये समर्पण क्यों? - 1994 के मूल समझौते के अनुसार सभी राज्यों को Pro Rata Basis यानी पानी की उपलब्धता के अनुपात में पानी मिलना था। लेकिन अब पहले हरियाणा को पानी मिलेगा और फिर अधिशेष जल रहने पर ही राजस्थान को पानी मिलेगा। ये समर्पण क्यों? - जल पर नियंत्रण केंद्रीय जल आयोग का होता है, फिर समझौते में कैसे हरियाणा ने अपनी मर्जी से एकतरफा पानी तय किया? ये समर्पण क्यों? - राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने यमुना जल के लिए MoU का प्रपत्र भेजकर राजस्थान के हितों को आगे रखा लेकिन लेकिन केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार ने अटकाए रखा। बाद में हाईकोर्ट की फटकार पर हरियाणा पानी देने के लिए विवश हुआ। लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल जी ने इवेंटबाजी और वाहवाही के चक्कर में प्रदेश के हितों को गिरवी रख दिया। ये समर्पण क्यों? - मुख्यमंत्री जी ने ढाई साल MoU और MoA में निकाल दिए। इनसे पूर्व भी यमुना जल पर कई समझौते हुए हैं.. लेकिन हितों का समर्पण नहीं हुआ। क्यों? - MoA के हिसाब से अगर राजस्थान को सिर्फ पेयजल का ही पानी मिलेगा। फिर शेखावाटी की 1.05 लाख हेक्टेयर ज़मीन सिंचाई का झूठा भ्रम क्यों फैलाया गया? मुख्यमंत्री जी, राजस्थान की जनता जानना चाहती है कि जिस परियोजना के लिए वर्षों तक संघर्ष हुआ, डीपीआर बनी, अदालतों तक लड़ाई लड़ी गई.. उसका परिणाम "अधिकार है या समर्पण"? यमुना जल समझौते (MoA) की पूरी प्रति तत्काल सार्वजनिक करें.. जल आवंटन, वित्तीय ज़िम्मेदारी, लागत-बंटवारे, पानी छोड़ने के नियमों और सभी शर्तों को जनता के सामने रखें।

Govind Singh Dotasra

66,014 görüntüleme • 1 ay önce