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खुद भाजपा के नेता पेपर लीक करवाते हैं, खुद भाजपा के मुख्यमंत्री पेपर लीक अपराधियों के साथ मिली भगत रखते हैं ये सब एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं इंकलाब होगा, भाजपा साफ होगी
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जिनके जमाने में परीक्षा लोग चुटका से ही पास करते थे और जो लोग कहते थे कि चीटिंग तो सब लोग करते हैं चल जाहिल निकल

जो लोग खुद बोल रहे है नकल तो चलती है सब लोग करते है जो पेपर लीक और नकल को बढ़ावा दे रहे है असली छात्रों के अपराधी यही लोग है

जिनके समय में बोर्ड परीक्षाओं से लेकर भर्ती आयोगों तक नकल ठेके पर होती थी, वे आज पारदर्शिता पर उपदेश दे रहे हैं। भाजपा की डबल इंजन की सरकार सख्त कानून और निष्पक्ष जांच के साथ छात्रों के हित में खड़ी है।

सपा वाले खुद आईना देखो! अखिलेश राज में नकल माफिया और पेपर लीक खुलेआम फलते-फूलते थे। 1993 में सपा ने एंटी-चीटिंग कानून रद्द कर नकल को वैध बना दिया, यूपी बोर्ड पास रेट आसमान छू गया क्योंकि परीक्षा केंद्रों पर नकल ठेके पर होती थी। अब 2006 के पुराने रेलवे ग्रुप-डी केस को उठाकर योगी पर तमाशा? बेदीराम-विपुल सहयोगी विधायक हैं, आरोप तय हुए हैं सजा नहीं। योगी सरकार ने सख्त कानून, लाइफ इम्प्रिजनमेंट और GPS ट्रैकिंग लागू की। सपा तो खुद माफिया से मिलीभगत रखती रही। इंकलाब सपा पर होना चाहिए जो युवाओं का भविष्य बर्बाद करती आई है!

आपके राज में परीक्षा केंद्र नकल के अड्डे बने थे और पर्चे खुलेआम बिकते थे। आज जब अपराधियों की संपत्तियां कुर्क हो रही हैं, तो आपकी पेट में दर्द होना स्वाभाविक है। इंकलाब का ढोंग छोड़िए, जनता आपकी असलियत पहचान चुकी है!

जिनके शासनकाल पर परीक्षा व्यवस्था और नकल को लेकर सवाल उठते रहे, और जिनके समर्थकों की ओर से "चीटिंग तो सब करते हैं" जैसे बयान सामने आए, वे आज परीक्षा की निष्पक्षता पर बड़े-बड़े भाषण दे रहे हैं।

सपा अपने काले कारनामे को छुपाने के लिए कितनी भी झूठ बोल ले जनता जानती है सपा शासन काल में परीक्षा के पहले ही पेपर लीक एवं परीक्षा के पहले ही लिस्ट बन जाना और लिफाफे की व्यवस्था होने पर नौकरियों में भी सेटिंग कर देना यह सपा शासन काल में आम बात थी छात्र जब भी ऐसे मामलों पर प्रदर्शन करते थे सपा के द्वारा लाठी चार्ज मिलता था, एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मुख्यमंत्री का फोटो खींच जाना या कोई प्रमाण नहीं है कि मुख्यमंत्री जी ऐसे पर कार्रवाई न की हो पेपर लीक मामले में योगी आदित्यनाथ जी ने जिस प्रकार से कठोर से कठोर कार्रवाई की है वह एक नजीर बन चुकी है सपा के झूठ में नहीं जानता सुशासन में सुशासन के किए गए बेहतरीन कारों में विश्वास करते हैं।

पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए सख्त कदम और कानून जरूरी हैं। बिना तथ्यों के आरोप लगाने के बजाय छात्रों के हित में निष्पक्ष जांच और सुधारों पर ध्यान देना चाहिए।

अखिलेश यादव जी, बिना किसी विधिक सबूत और साक्ष्य के देश और प्रदेश के मुख्यमंत्रियों व नेताओं पर 'पेपर लीक अपराधियों से मिलीभगत' का इतना गंभीर और बेबुनियाद आरोप लगाना आपकी घटिया और हताश राजनीति का प्रमाण है।

OP राजभर खुले मंच से जुगाड़ से नौकरी दिलवाने की बात करता है, उस पर पोस्ट करिए

भाजपा सरकार पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर मजबूती से काम कर रही है। अपराधियों के खिलाफ बिना किसी पक्षपात के कड़ी कार्रवाई की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानून बनाकर पारदर्शी परीक्षाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। बिना किसी ठोस सबूत के सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाना केवल छात्रों को गुमराह करने और राजनीतिक स्वार्थ साधने का प्रयास है।

सपा आज चाहे जितने आरोप लगाए, लेकिन जनता पिछले शासनकाल के विवादों और आरोपों को भूली नहीं है। पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में चाचा और भतीजे की जोड़ी खेल कर रही थी। वर्तमान सरकार में पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई की गई और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई। किसी एक तस्वीर या वीडियो से किसी व्यक्ति की भूमिका सिद्ध नहीं होती; ऐसे मामलों में निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलते हैं। जनता अंततः दावों से अधिक कामकाज और कार्रवाई के आधार पर अपना निर्णय करती है।

पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है। छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर राजनीति नहीं, बल्कि तथ्य और ठोस सुधार प्राथमिकता होनी चाहिए।

Aadhe bjp it cell kw bot acc bhre ho

पहले अपने गिरेबान मे झांक कर देखो।

राजनीतिक विज्ञान का एक मूल सिद्धांत है- जब किसी व्यवस्था में विफलताएँ अपवाद न रहकर प्रवृत्ति बन जाएँ, तो जनता केवल स्पष्टीकरण नहीं, संरचनात्मक सुधार की अपेक्षा करती है @mediacellsp

आज वह भी पेपर लीक पे। और राम मंदिर के चंदे पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं। जिनकी सरकार में राम भक्तों पर गोलियां चलाईं मंदिर कभी न बनने का संकल्प लिया। और नौकरी भर्तियों में एक नारा प्रसिद्ध हुआ कौन बनेगा लेखपाल तय करेंगे शिवपाल जो बिल्कुल सच था।

जिनकी सरकार में राम भक्तों पर गोलियां चलाईं मंदिर कभी न बनने का संकल्प लिया। और नौकरी भर्तियों में एक नारा प्रसिद्ध हुआ कौन बनेगा लेखपाल तय करेंगे शिवपाल जो बिल्कुल सच था।
