Video yükleniyor...

Video Yüklenemedi

Ana Sayfaya Dön

खबर वहाँ नहीं है जहाँ दिखाई जा रही है। असली खबर हमारे खेत-खलिहानों में है। सरकार ने MSP घोषित तो कर दिया, लेकिन उसकी अपनी रिपोर्ट बताती है कि किसान को लगभग किसी भी फसल पर MSP नहीं मिल रहा। मक्का में ₹500 से अधिक, अरहर में ₹700, उड़द...

14,654 görüntüleme • 3 ay önce •via X (Twitter)

0 Yorum

Yorum bulunmuyor

Orijinal gönderinin yorumları burada görünecek

Benzer Videolar

किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा कर सत्ता में आई भाजपा के राज में आज 30 किसान रोज़ आत्महत्या करने को मजबूर हैं। जब देश के किसानों पर कर्ज़ 2014 के मुक़ाबले 60% अधिक है तब मोदी सरकार ने 10 सालों में उद्योगपतियों का ₹7.5 लाख करोड़ कर्ज़ माफ कर दिया है। फसल बीमा योजना में किसानों के हिस्से के ₹2700 करोड़ रोकने वाली निजी इंश्योरेंस कम्पनियां खुद ₹40,000 करोड़ मुनाफा कमा कर बैठी हैं। महंगी खाद, महंगे बीज, महंगी सिंचाई, महंगी बिजली के कारण आसमान छूती कृषि लागत के बीच किसान MSP तक के लिए संघर्ष कर रहा है। बिना उचित MSP के किसान को प्रति क्विंटल गेंहू पर ₹200 और धान पर ₹680 का नुकसान हो रहा है। कांग्रेस का लक्ष्य कृषि लागत को घटा कर किसानों को फसल की सही कीमत दिलाना है, क्योंकि किसानों की समृद्धि का रास्ता उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता है और यही उनके साथ वास्तविक न्याय। हमारी सरकार ‘किसानों की सरकार’ होगी, कुछ ‘सरकारी उद्योगपतियों’ की नहीं। #KisaanNYAY #PaanchNyay

Rahul Gandhi

444,737 görüntüleme • 2 yıl önce

झालावाड़ जिले के अकलेरा में जय मिनेष कृषि सेवा केंद्र के दुकानदार ने किसान से 266 रुपये वाले यूरिया खाद का कट्टा 350 रुपये में बेचने की जबरदस्ती की, और जब किसान ने बिल मांगकर अपना अधिकार जताया तो उसे धमकाते हुए कहा – “जा जहां शिकायत करनी है कर दे, अब तुझे खाद भी नहीं मिलेगा।” ये सिर्फ एक दुकानदार की बदतमीज़ी नहीं, बल्कि भजनलाल शर्मा सरकार में चल रही खुली लूट और सत्ता संरक्षण में फली-फूली कालाबाज़ारी की सच्ची तस्वीर है। किसान को उसके ही अधिकार के लिए अपमानित करना इस सरकार की कृषि नीति और प्रशासनिक ढीलापन दोनों की पोल खोल देता है। हमारा District Collector & Magistrate, Jhalawar से स्पष्ट निवेदन है कि इस दुकान का तुरंत लाइसेंस रद्द हो, दुकानदार पर सख्त कार्रवाई हो और जिले में कृषि खाद की कालाबाज़ारी पर स्थायी रोक लगे। किसान का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Tribal Army

12,126 görüntüleme • 8 ay önce

जब से कांग्रेस ने MSP की कानूनी गारंटी देने का संकल्प लिया है, तब से मोदी के प्रचारतंत्र और मित्र मीडिया ने MSP पर झूठ की झड़ी लगा दी है। झूठ - MSP की कानूनी गारंटी दे पाना भारत सरकार के बजट में संभव नहीं है। सच - CRISIL के अनुसार 2022-23 में किसान को MSP देने में सरकार पर ₹21,000 करोड़ का अतिरिक्त भार आता, जो कुल बजट का मात्र 0.4% है। जिस देश में ₹14 लाख करोड़ के बैंक लोन माफ कर दिए गए हों, ₹1.8 लाख करोड़ कॉर्पोरेट टैक्स में छूट दी गई हो, वहां किसान पर थोड़ा सा खर्च भी इनकी आंखों को क्यों खटक रहा है? MSP की गारंटी से कृषि में निवेश बढ़ेगा, ग्रामीण भारत में डिमांड बढ़ेगी और किसान को अलग अलग किस्म की फसलें उगाने का भरोसा भी मिलेगा, जो देश की समृद्धि की गारंटी है। जो MSP पर भ्रम फैला रहे हैं, वो डॉ. स्वामीनाथन और उनके सपनों का अपमान कर रहे हैं। MSP की गारंटी से भारत का किसान, बजट पर बोझ नहीं, GDP ग्रोथ का सूत्रधार बनेगा। #KisaanNYAYGuarantee

Rahul Gandhi

520,673 görüntüleme • 2 yıl önce

लुधियाना का नूरपुर बेट गांव एक मिसाल है। यहां वर्षों से पराली नहीं जलाई जाती है। यहां के किसान भाइयों द्वारा स्मार्ट सीडर और एसएमएस सिस्टम युक्त कम्बाइन की मदद से पराली का प्रबंधन किया जाता है। जब यह चलता है तो पराली को जलाने की बजाय उसे खेत में ही समान रूप से फैला देता है। इससे खेत तुरंत बोनी के लिए तैयार हो जाता है। ना पराली जलाने की जरूरत, ना बखरनी करने की। फिर जब स्मार्ट सीडर से बोनी की जाती है तो वह मिट्टी और दाने को कॉम्पेक्ट कर देता है। पराली मिट्टी पर ढक जाती है, जिससे नमी बनी रहती है और जड़ों को मजबूती मिलती है। मैंने ये सब अपनी आंखों से देखा और किसान भाई-बहनों से चर्चा भी की। किसान भाइयों ने बताया कि जहां पहले खेत की तैयारी, पलेवा और बोनी में लगभग पांच हजार रुपये तक का खर्च आता था, वहीं अब केवल पंद्रह सौ रुपये में काम पूरा हो जाता है। पहले पराली जलाकर खेत तैयार किया जाता था, फिर बखरनी, फिर पलेवा। लेकिन अब इस तकनीक से पलेवा की आवश्यकता ही नहीं है। खेत की नमी बनी रहती है, और गेहूं की फसल की जड़ें गहरी और मजबूत होती हैं। ऐसे में न तो फसल आड़ी होती है, न ही दाना पतला पड़ता है। किसान भाइयों ने बताया कि उत्पादन में कोई कमी नहीं आई, बल्कि वृद्धि हुई है। अगर दो साल लगातार इस पद्धति से पराली का प्रबंधन किया जाए तो पराली खुद मिट्टी में मिलकर नाइट्रोजन बन जाती है। इससे यूरिया की आवश्यकता घटती है, मिट्टी की सेहत सुधरती है, और खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इसलिए किसान भाइयों और बहनों से मेरी अपील है कि पराली मत जलाइए। पराली का प्रबंधन कीजिए। मैं भी नूरपुर से प्रेरणा लेकर अपने खेत में डायरेक्ट सीडिंग का यह प्रयोग करूंगा।

Shivraj Singh Chouhan

22,027 görüntüleme • 10 ay önce

खाद की कमी से जूझ रहा किसान, खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लग रही लंबी-लंबी लाइने, सैकड़ो की संख्या में खाद वितरण केंद्रों पर पहुंच रहे किसान। पर्याप्त मात्रा में किसानों को नहीं मिल रही डीएपी खाद। आलू और गेहूं की बुवाई का आ गया समय जिसके लिए किसानों को चाहिए डीएपी की पर्याप्त खाद। लाइनों में धक्का मुक्की खाकर रहे गिर रहे किसान। अधिकारियों का कहना कि पर्याप्त मात्रा में जिले में उपलब्ध है डीएपी खाद। लेकिन वायरल हो रहे वीडियो जिले में खाद की कमी की खोल रहे पोल। किसानों ने शासन प्रशासन और सरकार से लगाई मैनपुरी में पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की गुहार। पूरा मामला सहन क्षेत्र के सहकारी समिति का है। कौन मंत्री जिम्मेदार है इस कमी का और कागद की कालाबाज़ारी का ?

Dimple Yadav

43,974 görüntüleme • 1 yıl önce