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"खेल" ना ऐसा खेलिए कि अपनों से ही बैर हो युद्ध विपक्षी से पहले राजा अपनी प्रजा से ढ़ेर हो! दरभंगा, बिहार में मशालें जल चुकी हैं। अपना जीवन जैसे तैसे गुजर गया, लेकिन आपने बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं सहेगा अब स्वर्ण!

36,062 views • 6 months ago •via X (Twitter)

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प्रयागराज महाकुंभ में फँसे करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए तुरंत आपातकालीन व्यवस्था की जाए। हर तरफ़ से जाम में भूखे, प्यासे, बेहाल और थके तीर्थयात्रियों को मानवीय दृष्टि से देखा जाए। आम श्रद्धालु क्या इंसान नहीं है? प्रयागराज में प्रवेश के लिए लखनऊ की तरफ़ 30 किमी पहले से ही नवाबगंज में जाम, रीवा रोड की तरफ़ से गौहनिया में 16 किमी पहले से जाम और वाराणसी की तरफ़ से 12 से 15 किमी के जाम के व ट्रेन के इंजन तक में भीड़ के प्रवेश कर जाने के समाचार हर जगह प्रकाशित हो रहे हैं। आम जन जीवन दूभर हो गया है। उप्र सरकार असफल हो चुकी है। वो अहंकार से भरे झूठे विज्ञापन में ही दिख रही है लेकिन सच में ज़मीन पर नदारद है।

Akhilesh Yadav

363,850 views • 1 year ago

अगर यही शिक्षा है तो..अनपढ़ रहना बेहतर है...🙅 गलती होमवर्क में थी या,गुस्सा टीचर के संस्कार में..🚨 एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षानहीं...डर का माहौल बनाया जा रहा है,बच्चों की गलती बस इतनी थी कि होमवर्क में थोड़ी कमी रह गई...लेकिन सजा ऐसी दी गई जैसे उसने कोई अपराध कर दिया हो....🤯 थप्पड़ से बच्चा नहीं सुधरेगा बल्कि आत्मसम्मान टूटेगा..? क्या स्कूल पढ़ने के लिए है कि गुस्सा निकालने के लिए..? हर बच्चे से गलती होती है गलती की सजा हिंसा होती है..? डर से पढ़ाई नहीं होती डर से बच्चे चुप जरूर हो जाते हैं..? हिंसा से बच्चे पढ़ाई से नहीं स्कूल से नफरत हो जाती है..? माता-पिता बच्चों को भरोसे से भेजते हे हिंसा के लिए नहीं..? अब समय है शख्त नियम की और जागरूकता की ताकि शिक्षा में संवेदनशीलता आए...💪 बच्चों का भविष्य हाथों से नहीं समझदारी से बनाया जाता है!

KUNDAN PATEL

174,142 views • 6 months ago