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Ana Sayfaya Dön

खुशबू खान से खुशबू शाहू, सोनिया खान से सोनिया चौधरी - ये नाम बदलने वाला पिंकी चौधरी आज़ाद क्यों घूम रहा है? उत्तर प्रदेश में यही सरकार और यही पुलिस जब किसी मौलाना या दाढ़ी-टोपी वाले पर धर्मांतरण का आरोप लगाती है, तो तुरंत गिरफ्तार करती है। गोदी मीडिया...

51,486 görüntüleme • 1 yıl önce •via X (Twitter)

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यूसीसी (UCC) के नाम पर भाजपा सरकार लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने में लगी हुई है। RSS से जुड़े लोगों कमेटी बनाकर केवल हिंदू-मुस्लिम और माहौल खराब करने में लगे हैं। आखिर यूसीसी का ड्राफ्ट कहां है? कानून बनाने से पहले उसका मसौदा सार्वजनिक होना चाहिए, उस पर लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और समाज के विभिन्न वर्गों में चर्चा होनी चाहिए। लेकिन यहां तो हाल ये है कि न जनता को पता है, न जनप्रतिनिधियों को कि प्रस्तावित कानून में क्या प्रावधान हैं? जब लोग बिजली, पानी, चिकित्सा, बेरोज़गारी और बदहाल व्यवस्था पर सवाल पूछने लगते हैं, तो नया विवाद खड़ा कर दिया जाता है। लोगों के बीच हिंदू-मुस्लिम की बातें कर माहौल बनाया जाता है, ताकि असली मुद्दों पर चर्चा ही न हो। आज प्रदेश की भयावह स्थिति किसी से छिपी नहीं है।

Govind Singh Dotasra

14,482 görüntüleme • 1 ay önce

प्रेस वक्तव्य: धर्मांतरण रोकने हेतु बने कठोर केंद्रीय कानून: विहिप नई दिल्ली। जुलाई 23, 2025। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने आज कहा है कि छांगुर के बाद, आगरा के अब्दुल रहमान के पकड़े जाने पर इस बात के पुख्ता सबूत मिल गए हैं कि किस प्रकार धर्मांतरण का जाल पूरी मजबूती के साथ सम्पूर्ण देश में बिछाया जा चुका है!! उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि जिन राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून बना है, उन राज्यों के अंदर भी ये मजबूती से काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अब्दुल रहमान के पास जो लड़की मिली है वह हरियाणा के रोहतक की रहने वाली है, जहां धर्मांतरण विरोधी कानून तो पहले से है लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा तथा प्रशासन सतर्क नहीं है। जिस प्रकार से मिशनरी और मौलवी धर्मांतरण कर रहे हैं, सम्पूर्ण शासन व्यवस्था के लिए एक चुनौती है। डॉ जैन ने कहा कि अभी तक जिन 10- 12 राज्यों के बारे में जानकारी मिली है, आश्चर्य होता है कि उनमें से चार पांच राज्यों के अंदर तो धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से लागू है। उड़ीसा, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात इन सब में है लेकिन, उसके बावजूद धर्मांतरण हो रहा है और जिन राज्यों में कानून नहीं है, वहाँ तो इनको खुला मैदान मिला हुआ है। हमारी अपील है कि केंद्र सरकार तुरंत एक ऐसा कठोर कानून बनाए जो पूरे देश में लागू हो। धर्मांतरण का कुचक्र केवल हिंदू समाज पर ही प्रहार नहीं कर रहा अपितु, ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर खतरा है। इन धर्मांतरणकारी गैंगों का सीधा संबंध पीफ़आई व एसडीपीआइ जैसे आतंकी संगठनों के साथ है, यह किसी से छुपा नहीं है। कौन नहीं जानता कि संपूर्ण विश्व के जिहादी तत्वों से इनको फंडिंग हो रही है। किसी एक राज्य सरकार के वश का नहीं है इनको रोक पाना। जिन राज्यों में कानून नहीं है उनकी तो इच्छा शक्ति भी नहीं दिखती। इसलिए तुरंत एक कठोर देश व्यापी कानून ला कर इस पर रोक लगानी चाहिए! जारीकर्ता: विनोद बंसल राष्ट्रीय प्रवक्ता विश्व हिंदू परिषद

Vishva Hindu Parishad -VHP

12,359 görüntüleme • 1 yıl önce

पूरे फंस गए मंत्री जी.... आप सरकार के प्रतिनिधि हैं और बाड़मेर जिले के प्रभारी है तो सवाल जायज है बाड़मेर का जिला अस्पताल जो मेडिकल कॉलेज से संबंधित है इससे बड़ी दुर्गति क्या होगी कि इस अस्पताल में ना सोनोग्राफी की मशीन है और ना ही सीटी स्कैन की सुविधा पिछले 2 साल से पूरे जिले की जनता परेशान हो रही है प्रभावशाली नेता छोटे-छोटे काम के टेंडर लेकर के मोटी कमाई कर रहे हैं लेकिन गरीब जनता की सुनने वाला कोई नहीं है जब नेताओं से सवाल पूछा जाता है तो एक ही जवाब मिलता है फाइल प्रक्रिया में है जल्द ही काम हो जाएगा हाल ही में बाड़मेर में 100 करोड़ से ज्यादा डीएमएफटी का फंड रिलीज हुआ है लेकिन उसका एक भी पैसा जिला अस्पताल में नहीं लगा है इससे बड़ी विडंबना क्या होगी। मंत्री जी अब तक तो सिर्फ मीडिया सवाल कर रही है कहीं ऐसा नहीं हो कि आप किसी कार्यक्रम में जाएं और आम पब्लिक आपसे इस प्रकार कड़े सवाल दागे और आपकी बोलती बंद होकर आप वहां से रवाना हो जाए यही चलता रहा तो वह दिन भी दूर नहीं है जब आप पब्लिक के सामने जाने से कतराएंगे।

Ashok Shera

16,329 görüntüleme • 9 ay önce

जनपद एटा के कोतवाली नगर क्षेत्र अंतर्गत प्रेमी नगला (शिकोहाबाद रोड) में दिनदहाड़े डॉ. गंगा सिंह शाक्य, उनकी धर्मपत्नी, पुत्रवधू एवं पुत्री की नृशंस हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह कृत्य न केवल अमानवीय है, बल्कि कानून-व्यवस्था की पूरी तरह से विफलता को दर्शाता है। इस जघन्य अपराध की मैं घोर निंदा करता हूँ। 👉 तथाकथित “कानून का राज” देने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार में आज प्रदेश गुंडाराज की चपेट में है। अगर उत्तर प्रदेश संभल नहीं पा रहा, तो सिर्फ भाषण और प्रचार से क्या हासिल? किस कानून-व्यवस्था की बात की जाती है? किस पुलिस की तारीफ की जाती है— उस पुलिस की, जो आगरा में निर्दोषों पर अत्याचार करती है? या उस पुलिस की, जो आज तक बनारस में स्नेहा कुशवाहा हत्याकांड के आरोपियों को पकड़ नहीं पाई? जो सरकार गुंडाराज खत्म करने का दावा करती थी, उसी के कार्यकाल में आए दिन हत्याएँ हो रही हैं। सवाल यह है कि आखिर ये गुंडे पैदा कहाँ से हो रहे हैं, और इन्हें संरक्षण कौन दे रहा है? प्रदेश की जनता अब जुमले नहीं, जवाब चाहती है। न्याय चाहिए, सुरक्षा चाहिए—और वह भी तुरंत। #JusticeForGangaSinghShakya

YOUTH_ARMY

30,618 görüntüleme • 7 ay önce

"मुस्लिम लड़की से शादी में दिक्कत हो, कोई टोपी-दाढ़ी वाला परेशान करे तो कोर्ट से रहने तक की व्यवस्था मैं करूँगा।" ये बोल अभिषेक ठाकुर के हैं। सनातनी के नाम पर दूसरों की बेटियों को जागीर समझना और सरेआम धमकियां देना क्या नया संस्कार है? प्रशासन इस गुंडागर्दी पर चुप क्यों है? ​ज़रा सोचिए, यही बात किसी 'उर्दू नाम' वाले ने कही होती तो 24 घंटे में UAPA/NSA जैसी गंभीर धाराएं लग जातीं, वह जेल में सड़ रहा होता और शाम तक उसका घर बुलडोज़र से ज़मींदोज़ हो चुका होता। क्या देश का कानून अब चेहरा, कपड़े और 'नाम' देखकर कार्रवाई करता है? इस दोहरे रवैये पर शासन-प्रशासन आखिर कब तक आंखें मूंदे रहेगा?

Muslim Voice Cell

32,085 görüntüleme • 1 ay önce

पुलिस का काम कानून लागू करना है, चालान काटना है। जनता का काम सवाल पूछना है और यह उसका अधिकार भी है। लेकिन जब सड़क किनारे सफेद मार्क के बाहर खड़ी गाड़ी का चालान किए जाने पर एक युवक सवाल करता है, और अधिकारी का वीडियो बनाते समय उसे “बे***ोद” जैसी गाली दी जाती है तो यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। क्या कानून लागू करने का अधिकार किसी अधिकारी को अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने की छूट देता है? क्या नियमों पर सवाल उठाने वाले नागरिक को जवाब के बजाय गाली मिलनी चाहिए? अगर जनता से शालीनता की अपेक्षा है, तो क्या वही जिम्मेदारी वर्दी पहनने वालों पर लागू नहीं होती? कानून का डर जरूरी है लेकिन क्या सम्मान के बिना कानून टिक सकता है? #Ranchi #TrafficPolice #RanchiPolice

We Are Ranchi

22,122 görüntüleme • 4 ay önce

आदित्यनाथ जी खुद संत होते तो इस बात को समझते, वो तो भगवा कपड़े में हठी राजनैतिक व्यक्ति हैं, विशुद्ध सत्ता लोभी हैं, अपराधी और भ्रष्टाचारी संरक्षक हैं। आदित्यनाथ जी को संत समाज की बातें भला कहां से समझ में आएंगी? उन्हें तो कोडीन माफिया कैसे बचाना है, भ्रष्टाचार करके कैसे पैसा कमाना है, अपराधियों से अपराध करवाकर उन्हें कैसे बचाना है, बलात्कारियों को कैसे संरक्षण देना है, जो अपने खिलाफ सच्ची बात करे उसे पुलिस से उठवा लेना है, बुलडोजर से घर गिरा देना है, यही सब तो बस आता है, यही वे करते आए हैं, यही वे संत समाज के साथ भी कर रहे हैं " पुलिसिया व्यवहार" लेकिन ये पुलिसिया व्यवहार कब तक? सिर्फ सत्ता है जब तक? सत्ता तो अस्थाई है, लेकिन किए हुए कर्म तो इतिहास बन गए हैं, इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गए हैं, व्यक्ति के बाद उसके व्यवहार को ही याद रखा जाता है, ये भी याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी अपना दौर भूल गए हैं शायद? जब पुलिस के डर से रो पड़े थे, पुलिस किसी की सगी नहीं होती, आज तुम्हारी कल किसी और की। आज पूरा देश मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी के इस व्यवहार को देख रहा है, जनता की लाठी में आवाज नहीं होती, बस या तो जनता बहुमत से दूर कर देती है या सत्ता छीन लेती है, जनता बस चुपचाप ये कर देती है, किस बात का घमंड? किस बात का अहंकार? ऐसे चलाएंगे आप सरकार?

Samajwadi Party Media Cell

15,684 görüntüleme • 7 ay önce

गोड्डा की जनता तो Dr Nishikant Dubey को अच्छी तरह जानती है — सत्ता के नशे में चूर, अहंकार में डूबे हुए। लेकिन अब जो ज़हर उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत और माननीय जज के खिलाफ उगला है, उसने पूरी दुनिया के सामने बीजेपी की असली सोच और तानाशाही मानसिकता को उजागर कर दिया है। ‘गृहयुद्ध’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करके सुप्रीम कोर्ट को चुनौती देना न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि यह देश की न्यायपालिका को भी सरकारी एजेंसियों की तरह अपनी जेब में डालने की साज़िश है। जब फैसले इनके पक्ष में आते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट महान होता है, लेकिन जब अदालत आम जनता, ग़रीबों और संविधान की रक्षा में खड़ी होती है — तब यही लोग उसे धमकाने लगते हैं। भारत का लोकतंत्र सुप्रीम कोर्ट की आत्मा से चलता है। देश के करोड़ों नागरिकों की आखिरी उम्मीद है न्यायपालिका। लेकिन जब एक सांसद उस संस्था पर इस तरह का हमला करता है, तो ये सवाल उठता है — क्या ये बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शह पर दिया गया है? क्या बीजेपी की यही आधिकारिक सोच है? अगर नहीं, तो प्रधानमंत्री को तुरंत सामने आकर स्थिति साफ करनी चाहिए। और अगर हां — तो देश को जानने का हक है कि अब न्यायपालिका भी बीजेपी के लिए ‘दुश्मन’ बन चुकी है। हम मांग करते हैं कि निशिकांत दुबे पर संविधान और लोकतंत्र के अनुरूप कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। अब ये बर्दाश्त नहीं होगा। न्यायपालिका पर हमला, देश पर हमला है — और देश चुप नहीं बैठेगा।

Dipika Pandey Singh

13,528 görüntüleme • 1 yıl önce